कैबिनेट ने भारत, चिली के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और चिली के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर को 15 फरवरी 2023 को मंजूरी प्रदान कर दी। सरकारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

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बयान के मुताबिक, इसमें सहयोग के मुख्य क्षेत्रों में आधुनिक कृषि के विकास के लिए कृषि नीतियां, जैविक उत्पादों के द्विपक्षीय व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए जैविक कृषि, दोनों देशों में जैविक उत्पादन को विकसित करने के उद्देश्य से नीतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

 

मुख्य बिंदु

 

  • इसके साथ ही समझौते के तहत विज्ञान और नवाचार के जरिए साझेदारियों के अवसर तलाशने पर जोर दिया गया है ताकि भारतीय संस्थानों और चिली के संस्थानों के बीच कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।
  • इस समझौता ज्ञापन के तहत, चिली-भारत कृषि कार्यसमूह का गठन किया जाएगा जो इस एमओयू के कार्यान्वयन के पर्यवेक्षण, समीक्षा और आकलन के साथ-साथ लगातार संचार व समन्वय स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होगा।
  • बयान के अनुसार, इस कृषि कार्यसमूह की बैठकें चिली और भारत में बारी-बारी से वर्ष में एक बार आयोजित की जाएंगी।
  • इसमें कहा गया है कि हस्ताक्षर के बाद यह समझौता ज्ञापन लागू होगा और अपने निष्पादन की तारीख से पांच साल की अवधि के लिए लागू रहेगा । इसके बाद इसे स्वतः पांच साल की अवधि के लिए नवीनीकृत किया जाएगा।

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कैबिनेट ने दिव्‍यांगता के क्षेत्र में सहयोग हेतु भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 फरवरी 2023 को दिव्‍यांगता के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक समझौता ज्ञापन को मंजूरी दे दी है। यह समझौता दिव्‍यांगता के क्षेत्र में भारत सरकार के दिव्‍यांगजन सशक्तिकरण विभाग और दक्षिण अफ्रीका सरकार के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करेगा। दोनों देशों के दिव्‍यांग और वृद्ध जन इस समझौते के माध्‍यम से कम लागत वाले आवश्‍यक उपकरण प्राप्‍त कर सकेंगे।

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मुख्य बिंदु

 

  • इसका उद्देश्य विकलांगता क्षेत्र में संयुक्त पहल के माध्यम से विकलांग व्यक्तियों के अधिकारिता विभाग और दक्षिण अफ्रीका के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
  • यह भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा।
  • इस समझौता ज्ञापन से दोनों देशों में बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) लाभान्वित होंगे जिन्हें विशेष रूप से आधुनिक, वैज्ञानिक, टिकाऊ, कम लागत वाली सहायक सामग्री और सहायक उपकरणों की आवश्यकता है।

 

भारत का लंबा तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक सहयोग:

 

विशेष रूप से, भारत और दक्षिण अफ्रीका स्वतंत्रता और न्याय के संघर्ष के संदर्भ में एक लंबी ऐतिहासिक कड़ी और संबंध साझा करते हैं, जब से महात्मा गांधी ने एक सदी पहले दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।

रंगभेद विरोधी आंदोलन के समर्थन में भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी सबसे आगे था। स्वतंत्रता के बाद, 1993 में दक्षिण अफ्रीका के साथ राजनयिक संबंध बहाल हुए और उसके बाद, भारत और दक्षिण अफ्रीका ने मार्च 1997 में एक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की।

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प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान में जल जन अभियान का उद्घाटन किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को राजस्थान के सिरोही जिले के आबू रोड में जल जन अभियान का वर्चुअली उद्घाटन किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वाटर हार्वेस्टिंग के साथ पेड़ लगाने और जल संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना है। ‌पीएम मोदी ने वर्चुअल तौर पर ब्रह्माकुमारी संस्था के शांतिवन में जल जन अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान ब्रह्माकुमारी संस्था और जल शक्ति मंत्रालय के के द्वारा शुरू किया गया है।

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मुख्य बिंदु

 

  • पीएम ने ब्रह्माकुमारी संस्था के शांतिवन में जल जन अभियान की शुरुआत की है।
  • इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वाटर हार्वेस्टिंग के साथ पेड़ लगाने और जल संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना है। ‌
  • यह अभियान ब्रह्माकुमारी संस्था और जल शक्ति मंत्रालय के द्वारा शुरू किया गया है।
  • इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर उपस्थित थे।
  • जल-जन अभियान ऐसे समय में शुरू किया जा रहा है जब पूरी दुनिया में पानी की कमी को भविष्य के संकट के रूप में देखा जा रहा है।
  • 21वीं सदी का विश्व पृथ्वी पर सीमित जल संसाधनों की गंभीरता को महसूस कर रहा है और भारत की विशाल जनसंख्या के कारण जल सुरक्षा एक बड़ा प्रश्न है।
  • “अमृत काल में, भारत भविष्य के रूप में पानी की ओर देख रहा है। पानी होगा तो कल होगा”।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल संबोधन में पूरे विश्व में घटते जल स्तर पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भूजल का कम होना देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है और इस चुनौती से निपटने के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना होगा।

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भारत और स्पेन डिजिटल इन्फ्रा, जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग करने हेतु सहमत हुए

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनके स्पेनिश समकक्ष पेड्रो सांचेज़ ने 15 फरवरी को डिजिटल बुनियादी ढांचे, जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने आपसी हित के कई द्विपक्षीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने द्विपक्षीय पहलों की समीक्षा की और रक्षा, आर्थिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। सांचेज़ ने वैश्विक ब्लॉक जी20 की अध्यक्षता में भारत की पहल के लिए पूर्ण समर्थन दिया।

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भारत-स्पेन संबंध: एक नजर में

 

  • 1956 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध काफी बेहतर रहे हैं।
  • व्यापार और निवेश संबंधों को गति देने के लिए, आर्थिक सहयोग पर भारत-स्पेन संयुक्त आयोग (JCEC) की स्थापना 1972 में की गई थी।
  • इस आयोग की स्थापना व्यापार और आर्थिक सहयोग समझौते के तहत की गई थी और तब से इसकी दस बार बैठक हो चुकी है।
  • स्पेन यूरोपीय संघ में भारत का 7वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
  • स्पेन को भारत द्वारा निर्यात किए जाने वाले वस्तुओं में कार्बनिक रसायन, वस्त्र, लोहा और इस्पात उत्पाद, मोटर वाहन घटक, समुद्री उत्पाद और चमड़े के सामान शामिल हैं।

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भारत और फिजी ने राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों हेतु वीजा छूट पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

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भारत और फिजी ने 16 फरवरी को विदेश मंत्री एस जयशंकर और फिजी के प्रधान मंत्री सित्विनी राबुका की उपस्थिति में राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा छूट पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट धारक 90 दिनों की अवधि के लिए बिना वीज़ा के एक दूसरे क्षेत्र में प्रवेश, पारगमन और रहने में सक्षम होंगे। इस अवसर पर डॉक्‍टर जयशंकर ने कहा कि वीजा छूट समझौता दोनों देशों के बीच अधिक से अधिक यात्रा को बढावा देगा। डॉक्‍टर जयशंकर ने कहा कि भारत और फिजी के बीच घनिष्ठ तथा दीर्घकालिक संबंध हैं और दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की है।

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मुख्य बिंदु

 

  • भारत और फिजी के बीच घनिष्ठ और दीर्घकालिक संबंध हैं और दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों की भी समीक्षा की।
  • भारत और फिजी ने सुवा में स्टेट हाउस के सोलराइजेशन का उद्घाटन किया है और यह उस श्रृंखला का पहला है जिसे भारत प्रशांत द्वीप समूह में समर्थन दे रहा है।
  • यह जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • वीजा छूट समझौता दोनों देशों के बीच अधिक से अधिक यात्रा को प्रोत्साहित करने में सहायक होगा।

 

फिजी गणराज्य के बारे में

 

  • यह दक्षिण प्रशांत महासागर में लगभग 300 द्वीपों वाला एक द्वीपसमूह है।
  • राजधानी: सुवा
  • मुद्रा: फिजियन डॉलर
  • राष्ट्रपति: विलियम काटोनिवेरे
  • प्रधान मंत्री: सित्विनी राबुका

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भारत-जापान संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ शुरू

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भारत और जापान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास “एक्सरसाइज धर्म गार्जियन” का चौथा संस्करण 17 फरवरी से 02 मार्च 2023 तक जापान में शिगा प्रांत के कैंप इमाज़ू में आयोजित किया जा रहा है। विशेष रूप से, भिन्न-भिन्न देशों के साथ भारत द्वारा किए जाने वाले सैन्य प्रशिक्षण अभ्यासों की श्रृंखला में “एक्सरसाइज धर्म गार्जियन” जापान के साथ एक वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है।

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“अभ्यास धर्म गार्जियन” वर्तमान वैश्विक स्थिति की पृष्ठभूमि में दोनों देशों द्वारा सामना की जाने वाली सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण और सार्थक है। इस अभ्यास के संस्करण में जंगल और अर्ध शहरी/शहरी इलाकों में सैन्य गतिविधियों के लिए प्लाटून स्तर का संयुक्त प्रशिक्षण भी शामिल है।

 

मुख्य बिंदु

 

  • भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट के सैनिक और जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स (जेजीएसडीएफ) में मिडिल आर्मी की एक इन्फैंट्री रेजिमेंट इस वर्ष अभ्यास में भाग ले रहे हैं।
  • इस दौरान, योजना बनाने तथा क्रियान्वयन में पारस्परिकता बढ़ाने के उद्देश्य से जंगी कार्रवाई के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा किया जाएगा।
  • संयुक्त अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता, मिलनसारिता, सौहार्द और मित्रता का भाव विकसित करने के अलावा संयुक्त राष्ट्र शासनादेश के तहत सामरिक संचालन करने की रणनीति, तकनीक एवं प्रक्रियाओं में सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने में दोनों सेनाओं को सक्षम करेगा।
  • यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से उच्च स्तर की शारीरिक फिटनेस और सामरिक स्तर पर अभ्यास की गतिविधियों को आदान-प्रदान करने पर केंद्रित है।
  • अभ्यास के दौरान, दोनों देशों के सैन्य कर्मी संयुक्त योजना बनाने, संयुक्त सामरिक अभ्यास, एकीकृत निगरानी ग्रिड स्थापित करने की मूल बातों को साझा करने तथा हवाई संपत्तियों की नियुक्ति सहित विभिन्न मिशनों में शामिल होंगे।
  • संयुक्त अभ्यास से दोनों सेनाओं को एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जानने, अपने व्यापक अनुभव साझा करने और स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • “एक्सरसाइज धर्म गार्जियन” भारतीय सेना तथा जापानी ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्सेज के बीच रक्षा सहयोग के स्तर को और बढ़ाएगा। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे और बढ़ावा मिलेगा।

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RBI ने NEFT और RTGS सिस्टम में किया बड़ा बदलाव, जानें सबकुछ

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े लेनदेन को लेकर एनईएफटी और आरटीजीएस प्रणालियों में जरूरी बदलाव किया है। निर्देश 15 मार्च, 2023 से प्रभाव में आएंगे। आरबीआई ने सर्कुलर में कहा कि गृह मंत्रालय की मौजूदा आवश्यकताओं के संबंध में ऐसे लेनदेन में दानकर्ता के नाम, पता, मूल देश, रकम, मुद्रा और पैसे भेजने के उद्देश्य समेत सभी विवरण दर्ज करना जरूरी है।

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केंद्रीय बैंक ने बैंकों से एनईएफटी और आरटीजीएस के जरिये एसबीआई को विदेशी दान भेजते समय संबंधित विवरण प्राप्त करने के लिए आवश्यक परिवर्तन करने को कहा है। हाल ही में गृह मंत्रालय ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को विदेश से पैसे भेजने वालों की दैनिक आधार पर रिपोर्ट देने के निर्देश दिया है। इसके बाद ही आरबीआई ने यह कदम उठाया है।

 

एफसीआरए के तहत विदेशी चंदा एसबीआई की नई दिल्ली मुख्य शाखा के एफसीआरए खाते में ही आना चाहिए। विदेशी बैंकों से एफसीआरए खाते में योगदान स्विफ्ट (सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशंस) एवं भारतीय बैंकों से एनईएफटी (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) और आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) के जरिये भेजा जाता है।

 

एफसीआरए पंजीकरण रद्द

नरेंद्र मोदी की अगुवाई सरकार के साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से एफसीआरए से जुड़े नियम सख्त किए गए हैं। इसके तहत, कानून के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन पर करीब 2,000 गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के एफसीआरए पंजीकरण भी रद्द किए गए हैं। दिसंबर, 2021 तक एफसीआरए पंजीकृत संस्थाओं की संख्या 22,762 थी।

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जानें कौन हैं भारतीय-अमेरिकी नील मोहन, जो बने यूट्यूब के नए सीईओ

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भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक नील मोहन वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब के नए सीईओ होंगे। मोहन सुसान वोजिकी की जगह लेंगे। सुसान वोजिकी नौ साल बाद अपने पद से हट रहीं हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है। नील मोहन अभी यूट्यूब के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर हैं। लंबे वक्त से वह सुसान वोजिकी के सहयोगी रहे हैं।

 

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नील मोहन भी अब भारतीय मूल के उन सीईओ की सूची में शामिल हो चुके हैं, जो दुनियाभर की दिग्गज कंपनियों को संभाल रहे हैं। मसलन माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला, एडोब के सीईओ शांतनु नारायण और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई जैसे चेहरे शामिल हैं।

 

नील मोहन के बारे में

भारतीय मूल के नील मोहन यूट्यूब के नए सीईओ और वाइस प्रेसिडेंट हैं। साल 2008 में नील यूट्यूब के साथ जुड़े थे। साल 2013 में कंपनी ने उन्हें 544 करोड़ रुपए का बोनस दिया था। यूट्यूब की मूल कंपनी अल्फाबेट की सीईओ सुंदर पिचाई (Sunder Pichai) भी भारतवंशी है। उन्होंने साल 2015 में चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर की जिम्मेदारी मिली। उनके काम को देखते हुए उन्हें शुरुआत से ही वोज्स्की का उत्तराधिकारी माना जा रहा था। उनके भीतर लीडरशिप क्वालिटी से वोज्स्की प्रभावित थी।

नील मोहन ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। नील मोहन ने अपने करियर की शुरुआत ग्लोरफाइड टेक्निकल सपोर्ट से की थी। उस वक्त उनकी सालाना आय 60,000 डॉलर थी। ग्लोरफाइड टेक्निकल सपोर्ट के बाद उन्होंने डबल क्लिक को ज्वाइन किया था, जिसे 2008 में गूगल ने खरीद लिया था। उन्होंने एसेंचर में सीनियर एनालिस्ट के पद पर काम किया है। इसके अलावा उन्होंने डबलक्लिक इंक में 3 सालों तक कीम किया। इसके बाद उन्होंने करीब ढाई साल वाइस प्रेसिडेंट बिजनेस ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभाली। उनके पास माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) में काम का भी अनुभव है। साल 2008 में गूगल ने डबलक्लिक का अधिग्रहण कर लिया, जिसके बाद नील गूगल में शामिल हो गए।

 

सुसान वोजिकी ने क्यों दिया इस्तीफा?

 

सुसान वोजिकी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने परिवार, हेल्थ और पर्सनल लाइफ पर फोकस करने के लिए यूट्यूब पर अपने सफर को विराम दे दिया। साल 2014 में उन्होंने यूट्यूब के सीईओ की जिम्मेदारी संभाली।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टेकअवे:

 

  • YouTube संस्थापक: जावेद करीम, चाड हर्ले, स्टीव चेन;
  • YouTube स्थापित: 14 फरवरी 2005, सैन मेटो, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका;
  • YouTube  मुख्यालय: सैन ब्रूनो, कैलिफ़ोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका;
  • YouTube  मूल संगठन: Google।

 

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वैश्विक पर्यटन लचीलापन दिवस: 17 फरवरी

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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पर्यटन की स्थिरता को भविष्य में प्रमाणित करने के प्रयास में 17 फरवरी 2023 को पहली बार वैश्विक पर्यटन लचीलापन दिवस घोषित करने के लिए जमैका से एक प्रस्ताव अपनाया है। सालाना दिन को चिह्नित करने के कदम को 90 से अधिक देशों ने समर्थन दिया था। यूएनजीए सभी को स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार और शिक्षा, गतिविधियों और कार्यक्रमों के माध्यम से स्थायी पर्यटन के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 17 फरवरी को एक दिन के रूप में मनाने के लिए आमंत्रित करता है। पहला वैश्विक पर्यटन लचीलापन सम्मेलन 15 फरवरी को जमैका में आयोजित किया जाएगा, जिसका समापन वैश्विक पर्यटन लचीलापन दिवस पर होगा।

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पर्यटन में लचीलापन क्या है?

 

एक पारिस्थितिक या पर्यावरणीय आपदा के बाद स्थिरता में सुधार करने का एक तरीका और पर्यटन प्रेरित तनाव से संभावित वसूली के रूप में सतत विकास का विकल्प प्रदान करता है।

कई विकासशील देशों के लिए, जिनमें सबसे कम विकसित देश, छोटे द्वीप विकासशील राज्य, अफ्रीका के देश और मध्यम आय वाले देश शामिल हैं, पर्यटन आय, विदेशी मुद्रा आय, कर राजस्व और रोजगार का एक प्रमुख स्रोत है। क्योंकि पर्यटन लोगों को प्रकृति से जोड़ता है, टिकाऊ पर्यटन में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और संरक्षण को बढ़ावा देने की अनूठी क्षमता है।

इकोटूरिज्म सहित सतत पर्यटन, एक क्रॉस-कटिंग गतिविधि है जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, गरीबी को कम करने, सभी के लिए पूर्ण और उत्पादक रोजगार और अच्छे काम का निर्माण करके सतत विकास के तीन आयामों और सतत विकास लक्ष्यों की उपलब्धि में योगदान कर सकती है।

यह अधिक टिकाऊ खपत और उत्पादन पैटर्न में परिवर्तन को तेज करने और महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने, जीवन की गुणवत्ता में सुधार और महिलाओं और युवाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में भी भूमिका निभा सकता है। लोगों और स्थानीय समुदायों और छोटे किसानों और परिवार के किसानों सहित ग्रामीण आबादी के लिए ग्रामीण विकास और बेहतर रहने की स्थिति को बढ़ावा देना।

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भारत-अमेरिका अभ्यास तरकश, जानें सबकुछ

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संयुक्त अभ्यास तारकश का छठा संस्करण हाल ही में चेन्नई में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और यूएस स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स (SOF) द्वारा संपन्न हुआ। यह अभ्यास का छठा संस्करण है जो 16 जनवरी से शुरू हुआ और 14 फरवरी को समाप्त हुआ। यह राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और यूएस स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स (SOF) द्वारा एक संयुक्त अभ्यास है।

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इस अभ्यास में पहली बार “रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) आतंक प्रतिक्रिया” को शामिल किया गया है। इस अभ्यास में आतंकवादियों द्वारा रासायनिक और जैविक हमलों से निपटने के लिए एक अभ्यास भी शामिल किया गया था। रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में रासायनिक और जैविक हमलों को अभ्यास का हिस्सा बनाया गया है।

 

पिछले साल, रूस ने यूक्रेन पर पश्चिमी देशों से सहायता प्राप्त करने और खार्किव में रासायनिक हमला करने का आरोप लगाया था। इस अभ्यास का उद्देश्य आतंकवादियों को बेअसर करना, बंधकों को सुरक्षित छुड़ाना और आतंकवादियों द्वारा ले जाए जा रहे रासायनिक हथियारों को निष्क्रिय करना है।

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