जानें 31 अक्टूबर को क्यों मनाते हैं राष्ट्रीय एकता दिवस, क्या है इस साल की थीम?

हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। इस दिन वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाई जाती है, जो देश के पहले गृह मंत्री भी थे। सरदार पटेल का स्वतंत्रता के बाद कई रियासतों को भारत संघ में शामिल होने के लिए राजी करने में योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सरकार ने साल 2014 में घोषणा की थी कि 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। भारत के एकीकरण के लिए पटेल के प्रयासों को पूरा देश लगातार याद करता है।

राष्ट्रीय एकता दिवस 2025 थीम

सरदार पटेल ने ब्रिटिश आधिपत्य से मुक्त हुई 565 स्वशासी रियासतों में से लगभग हर एक को भारत संघ में शामिल होने के लिए राजी करने की अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की थी। नए स्वतंत्र देश के राष्ट्रीय एकीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए, सरदार पटेल ने ‘भारत के लौह पुरुष’ की उपाधि भी अर्जित की। इस बार ‘एक भारत आत्मनिर्भर भारत (Ek Bharat, Aatmanirbhar Bharat)’ की थीम पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाएगा।

कैसे मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस

  • ‘Run for Unity’ का आयोजन किया जाता है। लोगों में एकता का संदेश फैलाने के लिए देशभर में रन आयोजित की जाती है।
  • स्कूल और कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। जिसमें निबंध लेखन, भाषण, पोस्टर मेकिंग, क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन होता है।
  • प्रतिज्ञा समारोह होता है, जिसमें देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने की शपथ ली जाती है।
  • ‘Statue of Unity’ पर जा सकते हैं। गुजरात में स्थित 182 मीटर ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी जाती है।

 राष्ट्रीय एकता दिवस का इतिहास

साल 2014 में घोषणा करते हुए कि भारत अब 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाएगा, केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह अवसर हमारे राष्ट्र की ताकत और लचीलेपन को वास्तविक और संभावित खतरों का सामना करने के लिए फिर से पुष्टि करने का अवसर हमारे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा में योगदान में सरदार पटेल को याद करने का है। वल्लभभाई पटेल को स्वतंत्रता और उससे आगे के संघर्ष के माध्यम से देश का नेतृत्व करने के कौशल के लिए ‘सरदार’ की उपाधि दी गई थी और विशेष रूप से रियासतों के एकीकरण और 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी अहम भूमिका रही थी।

राष्ट्रीय एकता दिवस का उद्देश्य

इसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और संगठनों में “Run for Unity”, निबंध प्रतियोगिताएं और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस का संदेश है, “एक भारत, श्रेष्ठ भारत।”

 

सरदार वल्लभभाई पटेल: भारत के लौह पुरुष पर सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

भारत के लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल, भारतीय इतिहास के महानतम नेताओं में से एक थे। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में 560 से अधिक रियासतों को एक राष्ट्र में एकीकृत किया। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, नेतृत्व क्षमता और देश प्रेम ने उन्हें एकता, शक्ति और राष्ट्रीय अखंडता का सच्चा प्रतीक बना दिया।

सरदार वल्लभभाई पटेल पर सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

इस सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी के साथ भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के बारे में अपने ज्ञान का परीक्षण करें। उनके प्रारंभिक जीवन, स्वतंत्रता संग्राम और भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान के बारे में जानें। यह प्रश्नोत्तरी उन छात्रों और परीक्षार्थियों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है जो इस राष्ट्रीय नेता के बारे में अधिक जानना चाहते हैं।

प्रश्न 1. सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म कब हुआ था?

A) 2 अक्टूबर 1869
B) 31 अक्टूबर 1875
C) 15 अगस्त 1877
D) 12 जनवरी 1880

S1. उत्तर: (b)

प्रश्न 2. सरदार पटेल का जन्म कहाँ हुआ था?

A) अहमदाबाद
B) नाडियाड
C) सूरत
D) वडोदरा

S2. उत्तर (b)

प्रश्न 3. “सरदार” उपाधि का क्या अर्थ है?

A) नेता
B) प्रमुख
C) सेनापति
D) उपरोक्त सभी

S3. उत्तर (d)

प्रश्न 4. 1928 के बारडोली सत्याग्रह के कारण पटेल को यह उपाधि दी गई:

A) लौह पुरुष
B) महात्मा
C) सरदार
D) देशबंधु

S4. उत्तर (d)

प्रश्न 5. पटेल स्वतंत्र भारत के पहले _______ थे।

A) राष्ट्रपति
B) गृह मंत्री
C) रक्षा मंत्री
D) वित्त मंत्री

S5. उत्तर (b)

प्रश्न 6. जब पटेल उप-प्रधानमंत्री थे, तब प्रधानमंत्री कौन थे?

A) जवाहरलाल नेहरू
B) राजेंद्र प्रसाद
C) सी. राजगोपालाचारी
D) लाल बहादुर शास्त्री

S6. उत्तर: (a)

प्रश्न 7. पटेल को अक्सर उनके निम्नलिखित कार्यों के लिए “भारत का लौह पुरुष” कहा जाता है:

A) सविनय अवज्ञा आंदोलन में भूमिका
B) संविधान सभा में नेतृत्व
C) भारत को एकजुट करने में दृढ़ता
D) सैन्य उपलब्धियाँ

S7. उत्तर: (c)

प्रश्न 8. प्रसिद्ध “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” सरदार पटेल को समर्पित है। यह कहाँ स्थित है?

A) अहमदाबाद
B) नर्मदा ज़िला
C) गांधीनगर
D) सूरत

S8. उत्तर (b)

प्रश्न 9. पटेल को मरणोपरांत भारत रत्न किस वर्ष प्रदान किया गया था?

A) 1951
B) 1976
C) 1985
D) 1991

S9. उत्तर (d)

प्रश्न 10. सरदार पटेल की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?

A) 1948
B) 1949
C) 1950
D) 1951

S10. उत्तर (c)

40 सबसे खराब AQI शहर: सभी भारतीय, दिल्ली शीर्ष 10 में नहीं

एक चिंताजनक विकास में, 30 अक्टूबर 2025 को सुबह 8:30 बजे दर्ज किए गए वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के अनुसार, दुनिया के 40 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में सभी स्थान भारतीय शहरों ने हासिल किए। हैरानी की बात यह है कि जहाँ आमतौर पर दिल्ली  को भारत के प्रदूषण संकट का चेहरा माना जाता है, इस बार वह 13वें स्थान पर रही। उत्तर भारत के कई छोटे शहरों का AQI इससे भी अधिक पाया गया, जो ‘गंभीर’ और ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है।

दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहर (सभी भारतीय)

रैंक शहर राज्य AQI
1 श्रीगंगानगर राजस्थान 830
2 सिवानी हरियाणा 644
3 अबोहर पंजाब 634
4 हिसार हरियाणा 477
5 चूरू राजस्थान 456
6 छारखी दादरी हरियाणा 448
7 रोहतक हरियाणा 444
8 नांगली बह्रमपुर उत्तर प्रदेश 438
9 भिवानी हरियाणा 437
10 ससरौली हरियाणा 433

दिल्ली शीर्ष 10 में क्यों नहीं — लेकिन खतरा अब भी गंभीर

  • दिल्ली का AQI 400 से अधिक रहा, जो अभी भी ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
  • हालांकि कुछ छोटे शहरों में इससे भी ज्यादा प्रदूषण दर्ज हुआ, जिससे स्पष्ट है कि प्रदूषण अब केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा।
  • इस बदलाव के पीछे प्रमुख कारण हैं — फसल अवशेष जलाना (stubble burning), भौगोलिक स्थितियाँ, और सर्दियों के आगमन के साथ हवा में ठहराव, जिससे प्रदूषक नीचे ही फँस जाते हैं।

AQI श्रेणियाँ और उनका स्वास्थ्य प्रभाव

AQI सीमा वायु गुणवत्ता श्रेणी स्वास्थ्य प्रभाव
0–50 अच्छी न्यूनतम प्रभाव
51–100 संतोषजनक हल्की असुविधा
101–200 मध्यम प्रदूषित संवेदनशील लोगों को असुविधा
201–300 खराब लंबे समय तक संपर्क में रहने पर सांस की परेशानी
301–400 बहुत खराब वृद्ध, बच्चे और बीमारों के लिए गंभीर जोखिम
401–500+ गंभीर श्वसन रोगों का गंभीर खतरा

प्रदूषण के प्रमुख कारण

1. मौसमी और क्षेत्रीय कारण

  • सर्दियों में तापमान घटने और हवा की गति कम होने से प्रदूषक सतह के पास फँस जाते हैं।

  • निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल, खुली सड़कें और कूड़ा जलाना प्रदूषण को और बढ़ाते हैं।

2. उत्सर्जन के स्रोत

  • पराली जलाना: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में पराली जलाने से धुआं आसपास के शहरों तक पहुँचता है।

  • वाहन उत्सर्जन: पुराने और डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं बड़ा योगदान देता है।

  • निर्माण और सड़क धूल: बढ़ते शहरीकरण के कारण।

  • औद्योगिक उत्सर्जन और पावर प्लांट्स: कुछ इलाकों में सूक्ष्म कण (PM₂.₅ और PM₁₀) के उच्च स्तर का कारण।

यह स्थिति दर्शाती है कि भारत का वायु प्रदूषण संकट अब व्यापक और विकेंद्रित रूप ले चुका है, और इसे केवल राजधानी-केन्द्रित नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर सामूहिक नीति सुधारों से निपटने की आवश्यकता है।

शेफ संजीव कपूर को वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन द्वारा “टॉप एग्री-फूड पायनियर्स 2025” सम्मान

प्रसिद्ध शेफ, लेखक और पद्मश्री सम्मानित संजीव कपूर को वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन (WFPF) ने अपने 2025 के “टॉप एग्री-फूड पायनियर्स (TAP)” में शामिल किया है। यह सम्मान उनके उस योगदान को रेखांकित करता है जो रसोई से आगे बढ़कर पोषण, कृषि और सतत खाद्य प्रणालियों के एकीकृत विकास से जुड़ा है। फाउंडेशन के अनुसार, कपूर ने अब तक 25 लाख से अधिक पौष्टिक भोजन स्कूली बच्चों तक पहुंचाए हैं और आयरन-युक्त बाजरा (Iron-rich Pearl Millet) तथा जिंक-युक्त गेहूं (Zinc-rich Wheat) जैसी बायो-फोर्टिफाइड फसलों को बढ़ावा दिया है।

उन्हें यह सम्मान क्यों मिला

संजीव कपूर को न सिर्फ उनकी पाक कला के लिए, बल्कि “भोजन को सामाजिक परिवर्तन के माध्यम” के रूप में उपयोग करने के लिए सम्मानित किया गया है।
उनकी पहल “न्यूट्री पाठशाला (Nutri Pathshala)”, जो स्कूलों, किसानों और पोषण कार्यक्रमों को जोड़ती है, इस उपलब्धि में प्रमुख भूमिका निभाती है।

उनके कार्य की मुख्य विशेषताएं हैं —

  • भारतीय परंपराओं पर आधारित नवोन्मेषी पाक कला (Culinary Innovation)

  • स्कूलों और समुदायों में पोषण-समृद्ध भोजन को बढ़ावा देना

  • भारतीय किसानों से सतत और स्थानीय स्रोतों से आपूर्ति (Sustainable Sourcing)

  • स्वास्थ्य, कृषि और सामाजिक प्रभाव को जोड़ने वाले जनजागरण अभियान

व्यापक महत्व

  • यह सम्मान आतिथ्य और पाक नवाचार को वैश्विक कृषि-खाद्य विमर्श (Global Agri-Food Dialogue) का हिस्सा बनाता है।

  • यह दर्शाता है कि स्थानीय, पोषण-युक्त और सतत खाद्य उत्पादों पर केंद्रित व्यवसायों को भी वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल सकती है।

  • यह एक प्रेरक उदाहरण (Case Study) है कि कैसे एक शेफ कृषि, सामुदायिक स्वास्थ्य और नीति निर्माण पर असर डाल सकता है।

वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन के बारे में

विवरण जानकारी
स्थापना डॉ. नॉर्मन बोरलॉग (नोबेल शांति पुरस्कार विजेता)
स्थापना वर्ष 1986
मुख्यालय डेस मोइन्स, आयोवा, अमेरिका
मुख्य उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, पोषण, सतत कृषि और नवाचार में योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना

प्रमुख कार्यक्रम

  1. वर्ल्ड फूड प्राइज – खाद्य और कृषि नवाचार के लिए “नोबेल-जैसा” वार्षिक पुरस्कार

  2. टॉप एग्री-फूड पायनियर्स (TAP) – खाद्य प्रणाली में नवाचार करने वाले अग्रदूतों की सूची

  3. बोरलॉग डायलॉग – वैश्विक कृषि-खाद्य सम्मेलन और नीति मंच

संजीव कपूर का यह सम्मान न केवल भारत की पाक विरासत का गौरव बढ़ाता है, बल्कि यह दिखाता है कि “अच्छा भोजन” भी समाज, स्वास्थ्य और कृषि—तीनों को जोड़ने वाली परिवर्तनकारी शक्ति बन सकता है।

भारत में म्यूचुअल फंड शुल्क: सेबी में क्या बदलाव हो रहा है?

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड शुल्क ढांचे (Mutual Fund Fee Framework) में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखते हुए एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी किया है। इन सुधारों का उद्देश्य म्यूचुअल फंड से जुड़े शुल्कों को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और निवेशक-हितैषी बनाना है। सेबी का यह कदम न केवल निवेशक संरक्षण (Investor Protection) को मजबूत करेगा, बल्कि भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप भी लाएगा।

प्रमुख प्रस्ताव

1. टैक्स और सरकारी शुल्क को TER से बाहर करना:
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) और स्टाम्प ड्यूटी जैसी सरकारी देनदारियों को अब टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) में शामिल नहीं किया जाएगा।
इन शुल्कों को अलग से दर्शाया जाएगा और निवेशकों से सीधे वसूला जाएगा

2. एएमसी के लिए अतिरिक्त 5 बेसिस पॉइंट्स खर्च का हटाना:
एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs) जो अब तक AUM पर 5 bps का अतिरिक्त शुल्क वसूल रही थीं, उसे समाप्त करने का प्रस्ताव है।

3. TER स्लैब में आंशिक वृद्धि से संतुलन:
खुली समाप्ति वाली सक्रिय योजनाओं (Open-ended active schemes) के लिए पहले दो TER स्लैब में 5 bps की वृद्धि प्रस्तावित है, ताकि ऊपर बताए गए हटाव का संतुलन बना रहे।

4. वैकल्पिक प्रदर्शन-आधारित TER ढांचा (Performance-Linked TER):
एएमसी चाहें तो अपने शुल्क को फंड के प्रदर्शन से जोड़ सकती हैं — यानी बेहतर प्रदर्शन पर थोड़ी अधिक फीस ली जा सकेगी। इससे लचीलापन और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगे।

5. ब्रोकरेज और लेनदेन लागत पर सख्त सीमा:

  • कैश मार्केट में ब्रोकरेज सीमा 12 bps से घटाकर 2 bps की जा सकती है।

  • डेरिवेटिव्स में 5 bps से घटाकर 1 bps की सीमा प्रस्तावित है।

6. पारदर्शिता और खुलासा (Transparency & Disclosure):
म्यूचुअल फंडों को अब लागत के सभी घटक स्पष्ट रूप से अलग-अलग दर्शाने होंगे, जिससे निवेशकों को समझ में आए कि वे किस सेवा के लिए भुगतान कर रहे हैं, और विभिन्न योजनाओं की तुलना आसान हो सके।

7. जन-सुझाव आमंत्रित:
सेबी ने इस मसौदे पर 17 नवंबर 2025 तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया आमंत्रित की है।

निवेशकों और उद्योग के लिए अगला कदम

निवेशकों के लिए:

  • अपने मौजूदा फंडों के TER और शुल्क-प्रकटीकरण (Fee Disclosures) पर नजर रखें।

  • यदि कोई फंड परफॉर्मेंस-लिंक्ड फीस मॉडल अपनाता है, तो देखें कि वह आपके जोखिम-लाभ प्रोफ़ाइल के अनुकूल है या नहीं।

एएमसी (Asset Management Companies) के लिए:

  • अपने संचालन खर्च और आय संरचना की समीक्षा करें।

  • पारदर्शिता, शासन (Governance) और ऑडिट सिस्टम को अपडेट करें।

  • TER और परफॉर्मेंस फीस से जुड़ी रणनीति को नया रूप दें।

वितरक और सलाहकार (Distributors & Advisors):

  • ग्राहकों को नए शुल्क ढांचे की स्पष्ट जानकारी दें।

  • सलाह और संचार प्रणालियों को अपडेट करें ताकि निवेशक बदलावों को सही से समझ सकें।

नियामक और उद्योग संस्थान:

  • नए ढांचे के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश (Guidelines) तैयार करें।

  • निवेशक शिक्षा (Investor Education) पर बल दें और संक्रमण प्रक्रिया को सुचारू बनाएं।

रूस का पोसाइडन ड्रोन: समुद्र-आधारित युद्ध का भविष्य?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 29 अक्टूबर 2025 को बताया कि रूस ने सफलतापूर्वक पोसाइडन (Poseidon) — एक परमाणु-संचालित और परमाणु-सशस्त्र मानवरहित जल-ड्रोन — का परीक्षण किया है। पुतिन के अनुसार, यह प्रणाली “अवरोधन (Intercept) के परे” है और शत्रु देशों के तटों के पास रेडियोधर्मी सुनामी उत्पन्न करने में सक्षम है, जो व्यापक विनाश ला सकती है। यह विकास रणनीतिक निरोध और समुद्री युद्ध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है “पोसाइडन”?

  • “पोसाइडन” (पूर्व नाम स्टेटस-6) एक स्वायत्त पाणबुडी वाहन (Autonomous Underwater Vehicle) है, जो एक लघु परमाणु रिएक्टर से संचालित है।

  • इस हथियार का परीक्षण पहली बार इसके परमाणु शक्ति स्रोत पर चलते हुए किया गया, जिसे पुतिन ने “विशाल सफलता” बताया।

  • पारंपरिक पनडुब्बी या मिसाइल की तुलना में, पोसाइडन में लंबी दूरी तक जलमग्न रहने की क्षमता और विनाशकारी शक्ति का अनूठा संयोजन है।

दावा किए गए क्षमताएं

राष्ट्रपति पुतिन के अनुसार पोसाइडन ड्रोन:

  • पारंपरिक पनडुब्बियों में प्रयुक्त रिएक्टर से 100 गुना छोटे परमाणु रिएक्टर से संचालित है।

  • इसमें सार्मत (Sarmat) अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल से भी अधिक शक्ति वाला परमाणु वारहेड है।

  • यह अत्यधिक गहराई और तेज़ गति से यात्रा कर सकता है, जिससे वर्तमान पनडुब्बी-रोधी रक्षा प्रणालियाँ इसे पकड़ नहीं सकतीं।

  • इसे तटीय क्षेत्रों के निकट विस्फोट के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे रेडियोधर्मी सुनामी उत्पन्न हो सकती है और बड़े शहर अवसंवहनीय (Uninhabitable) हो सकते हैं।

रणनीतिक महत्त्व

पोसाइडन परमाणु निरोध के दर्शन में एक नया मोड़ लाता है—

  • यह पारंपरिक मिसाइल रक्षा तंत्रों को दरकिनार कर पानी के अंदर से चरम गहराई और गति पर हमला कर सकता है।

  • इसके तटीय लक्ष्यों पर प्रयोग से बड़े शहरी केंद्र और आर्थिक हब नष्ट हो सकते हैं, जिससे नई रणनीतिक कमज़ोरियाँ उभर सकती हैं।

  • यह घोषणा यूक्रेन संघर्ष के बीच आयी है और हाल में किए गए बुरेवेस्टनिक (Burevestnik) परमाणु मिसाइल परीक्षण के बाद, जो रूस की रणनीतिक संदेश-नीति (Signaling) का हिस्सा मानी जा रही है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

भारत जैसे एशियाई देशों के लिए यह विकास महत्त्वपूर्ण संदेश देता है—

  • नौसैनिक पता-लगाने और पनडुब्बी निगरानी प्रणालियों को आधुनिक बनाने की ज़रूरत है।

  • तटीय सुरक्षा और नागरिक रक्षा (सिविल डिफेंस) को नए सिरे से मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।

  • परमाणु सिद्धांतों (Nuclear Doctrines) की पुनः समझ और स्वायत्त हथियारों के दौर में नई रणनीति अपनाने की ज़रूरत है।

सीमा-पार भुगतान में भू-राजनीतिक जोखिम और डिजिटल बदलाव

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 29 अक्टूबर 2025 को जारी एक ड्राफ्ट सर्कुलर में भारत की अंतरराष्ट्रीय धन प्रेषण प्रणाली (cross-border payments framework) को आधुनिक और तेज़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण बदलावों का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के अनुसार, बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार (forex market) के कामकाजी घंटों के दौरान प्राप्त धनराशि को उसी कार्यदिवस (same day) में लाभार्थी के खाते में जमा करना होगा। यदि धनराशि बाजार बंद होने के बाद प्राप्त होती है, तो अगले कार्यदिवस (next business day) में जमा की जाएगी।

मुख्य प्रस्ताव 

  1. सेम-डे क्रेडिट (Same-day Credit): विदेशी प्रेषण जो फॉरेक्स बाजार के कार्य घंटों में आते हैं, उन्हें उसी दिन जमा किया जाए।

  2. नेक्स्ट-डे क्रेडिट (Next-day Credit): बाजार बंद होने के बाद प्राप्त धनराशि अगले कार्यदिवस में जमा की जाए।

  3. STP (Straight-Through Processing): बैंकों को पूरी तरह स्वचालित प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है ताकि मानवीय त्रुटियाँ और विलंब कम हों।

  4. नोस्ट्रो अकाउंट (Nostro Account) मिलान: विदेशी मुद्रा खातों का रीयल-टाइम या अधिकतम 30 मिनट के अंतराल में मिलान किया जाए।

  5. डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म: ग्राहक दस्तावेज़ अपलोड और लेनदेन ट्रैकिंग के लिए उपयोगकर्ता-अनुकूल ऑनलाइन सुविधाएँ प्रदान की जाएँ।

तेज़ भुगतान का लाभ 

  • प्रस्तावित व्यवस्था से विदेशी धनराशि प्राप्त करने में देरी समाप्त होगी।

  • छात्र, प्रवासी भारतीयों के परिवार और निर्यातक वर्ग को समय पर धन प्राप्त होगा।

  • यह कदम व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों प्रकार के लेनदेन को सुचारु बनाएगा।

भारत की वैश्विक वित्तीय प्रतिस्पर्धा में बढ़त 

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुगतान प्रणाली “इंस्टेंट पेमेंट” की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • इन नए नियमों से भारत की बैंकिंग प्रणाली वैश्विक मानकों के अनुरूप होगी।

  • यह भारत को एक आधुनिक, पारदर्शी और वित्तीय केंद्र (financial hub) के रूप में मजबूत करेगा।

आर्थिक समावेशन को बढ़ावा 

  • प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजे गए धन पर निर्भर गरीब परिवारों को तत्काल सहायता मिलेगी।

  • यह कदम शिक्षा, चिकित्सा और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं में बड़ी राहत देगा।

  • यह वित्तीय समावेशन (financial inclusion) की दिशा में एक ठोस कदम है।

हितधारकों (Stakeholders) के लिए दिशा-निर्देश

  • बैंक: अपनी प्रणालियों का ऑडिट कर सुधार योजनाएँ तैयार करें।

  • व्यवसाय: तेज़ भुगतान चक्रों के लिए अपनी वित्तीय प्रणालियों को बैंक इंटरफेस से जोड़ें।

  • ग्राहक: ऐसे बैंकों का चयन करें जो डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शी प्रेषण सेवाएँ प्रदान करते हों।

मुख्य तथ्य 

विवरण जानकारी
प्रस्ताव जारी करने वाली संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
ड्राफ्ट सर्कुलर की तिथि 29 अक्टूबर 2025
मुख्य प्रावधान सेम-डे और नेक्स्ट-डे क्रेडिट नियम
लाभार्थी विदेशी प्रेषण प्राप्त करने वाले व्यक्ति और व्यवसाय
मुख्य उद्देश्य तेज़, पारदर्शी और विश्वस्तरीय भुगतान प्रणाली स्थापित करना

7th vs 8th वेतन आयोग: वेतन, भत्ते, पेंशन और प्रोत्साहन में प्रमुख बदलावों की व्याख्या

केंद्र सरकार ने 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) गठित करने को मंजूरी दे दी है, जिससे 49 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा। यह आयोग जनवरी 2025 में घोषित हुआ था और दिसंबर 2025 में समाप्त हो रहे 7वें वेतन आयोग के बाद कार्यभार संभालेगा। इससे वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे में व्यापक बदलाव की उम्मीद है।

7वां वेतन आयोग: प्रमुख बातें (2016 से लागू)

  • गठन वर्ष: 2014 | लागू: 1 जनवरी 2016 से

  • न्यूनतम वेतन: ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह किया गया

  • फ़िटमेंट फ़ैक्टर: 2.57 निर्धारित (यही गुणक नए वेतन निर्धारण में प्रयोग हुआ)

  • भत्ते: महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), और परिवहन भत्ता (TA) संशोधित

  • पेंशन: न्यूनतम पेंशन ₹3,500 से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति माह

  • वेतन संरचना: 19-स्तरीय Pay Matrix लागू कर पारदर्शिता बढ़ाई गई

8वां वेतन आयोग: क्या बदलाव होंगे (2026 से लागू होने की संभावना)

घोषणा: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा जनवरी 2025 में
लागू होने की संभावना: जनवरी 2026

मुख्य प्रस्ताव:

  1. वेतन वृद्धि: न्यूनतम मूल वेतन ₹34,500 से ₹41,000 प्रति माह तक बढ़ सकता है।

  2. फ़िटमेंट फ़ैक्टर: बढ़कर लगभग 2.86 होने की संभावना।

  3. भत्तों का पुनरीक्षण: DA, HRA, TA को मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि से जोड़ा जाएगा।

  4. पेंशन सुधार: लगभग 65 लाख पेंशनरों के लिए नई प्रणाली और स्वचालित समायोजन व्यवस्था।

  5. नया प्रावधान: Productivity Linked Incentive (PLI) योजना – उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन और अनुशासन के आधार पर प्रोत्साहन।

7वें और 8वें वेतन आयोग की तुलना

पैरामीटर 7वां वेतन आयोग (2016) 8वां वेतन आयोग (संभावित 2026)
लागू वर्ष 2016 2026 (संभावित)
न्यूनतम वेतन ₹18,000 ₹34,500 – ₹41,000
फ़िटमेंट फ़ैक्टर 2.57 2.86 (संभावित)
वेतन स्तर (Pay Matrix) 19 स्तर समीक्षा के अधीन
भत्ते संशोधित DA, HRA, TA मुद्रास्फीति आधारित संशोधन
पेंशन ₹9,000 न्यूनतम नई संरचना और स्वचालन
प्रोत्साहन (Incentives) शामिल नहीं प्रदर्शन आधारित (PLI)
कवरेज 49 लाख कर्मचारी 49 लाख कर्मचारी + 65 लाख पेंशनर

क्यों है यह महत्वपूर्ण 

8वां वेतन आयोग एक प्रदर्शन-आधारित और टिकाऊ वेतन प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। इससे सरकारी कर्मचारियों के लिए बेहतर वेतन संरचना, पेंशन सुरक्षा और कार्यकुशलता को बढ़ावा मिलेगा।
साथ ही, यह सरकारी नौकरियों को अधिक आकर्षक, स्थिर और विकासोन्मुख बनाता है — जिससे युवाओं में इनकी लोकप्रियता बनी रहेगी।

भारत और नेपाल ने ऊर्जा संबंधों पर बड़ा दांव लगाया

भारत और नेपाल ने ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए दो महत्वपूर्ण विद्युत समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते भारत की पॉवरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (POWERGRID) और नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) के बीच हुए, जिनका उद्देश्य दो नई 400 kV क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण और संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures) स्थापित करना है। इस पहल से दोनों देशों के बीच बिजली व्यापार में वृद्धि, ग्रिड की स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों में गहराई आने की उम्मीद है।

समझौते की प्रमुख बातें 

  • संस्थाएँ: भारत की POWERGRID और नेपाल की NEA

  • हस्ताक्षर स्थल: नई दिल्ली

  • उपस्थित नेता: भारत के विद्युत मंत्री मनोहर लाल और नेपाल के ऊर्जा मंत्री कुलमान घिसिंग

  • उद्देश्य:

    • दो नई 400 kV ट्रांसमिशन लाइनें बनाना

    • दोनों देशों में संयुक्त उपक्रम (JV) स्थापित करना

प्रस्तावित ट्रांसमिशन लाइनें 

  1. इनरुवा (नेपाल) – न्यू पूर्णिया (भारत)

  2. लमकी/डोडोधारा (नेपाल) – बरेली (भारत)

प्रत्येक देश में अलग-अलग संयुक्त उपक्रम (JV) स्थापित किए जाएंगे ताकि समान द्विपक्षीय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

मुख्य उद्देश्य 

  • भारत–नेपाल के बीच बिजली व्यापार में वृद्धि

  • ग्रिड की मजबूती और विश्वसनीयता में सुधार

  • नेपाल की जलविद्युत (Hydropower) को भारत तक निर्यात में सहायता

  • दक्षिण एशियाई ऊर्जा बाजार की नींव रखना

रणनीतिक लाभ 

  • क्षेत्रीय लोड शेयरिंग की क्षमता में वृद्धि

  • दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना

  • आर्थिक एकीकरण (Economic Integration) को बढ़ावा देना

  • संयुक्त बुनियादी ढांचा सहयोग मॉडल की स्थापना

क्षेत्रीय ऊर्जा संपर्क को बढ़ावा 

  • नेपाल के पास विशाल जलविद्युत क्षमता, जबकि भारत में बिजली की बढ़ती मांग है।

  • सीमा-पार ट्रांसमिशन लाइनें दोनों देशों के लिए मौसमी बिजली संतुलन (Seasonal Power Balancing) का साधन बनेंगी।

  • यह दक्षिण एशिया में स्वच्छ ऊर्जा कूटनीति (Clean Energy Diplomacy) का उत्कृष्ट उदाहरण है।

भारत की “पड़ोसी प्रथम नीति” को बल 

  • ऊर्जा अवसंरचना सहयोग भारत की पड़ोसी देशों के साथ गहरे संबंधों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • भारत की छवि को एक विकास भागीदार (Development Partner) के रूप में मजबूत करता है।

  • यह भविष्य में भूटान, बांग्लादेश आदि को शामिल करते हुए दक्षिण एशियाई ग्रिड एकीकरण की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

मुख्य तथ्य 

विषय विवरण
समझौते की तिथि अक्टूबर 2025
संस्थाएँ POWERGRID (भारत) और NEA (नेपाल)
स्थान नई दिल्ली
प्रमुख परियोजनाएँ इनरुवा–न्यू पूर्णिया और लमकी/डोडोधारा–बरेली 400 kV लाइनें
संयुक्त उपक्रम दोनों देशों में अलग-अलग JV इकाइयाँ
मुख्य उद्देश्य बिजली व्यापार बढ़ाना, ग्रिड की विश्वसनीयता में सुधार
नीति संरेखण भारत की Neighbourhood First और स्वच्छ ऊर्जा नीति से मेल

ट्रम्प को दक्षिण कोरिया का सर्वोच्च सम्मान और स्वर्ण मुकुट प्रदान किया गया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का 29 अक्टूबर, 2025 को दक्षिण कोरिया में स्वागत किया गया, उन्हें एक प्रतिकृति स्वर्ण मुकुट और दक्षिण कोरिया के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुनघ्वा से सम्मानित किया गया। “ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुनघ्वा (Grand Order of Mugunghwa)” दक्षिण कोरिया का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है। यह सम्मान उन्हें “शांतिदूत (Peacemaker)” की भूमिका निभाने के लिए दिया गया, विशेष रूप से उत्तर कोरिया के साथ उनके पूर्व संवाद प्रयासों के लिए।

शांति और कूटनीतिक मान्यता का प्रतीक 

  • ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुनघ्वा दक्षिण कोरिया का सर्वोच्च सम्मान है, जो आमतौर पर राष्ट्राध्यक्षों और राजपरिवारों को दिया जाता है।

  • दक्षिण कोरियाई सरकार ने ट्रम्प को यह सम्मान एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और संवाद के प्रयासों के लिए प्रदान किया।

  • यह सम्मान प्राप्त करने वाले वे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने।

  • समारोह में उन्हें सिल्ला साम्राज्य के स्वर्ण मुकुट की प्रतिकृति भी दी गई, जो एकता, स्थिरता और शांतिपूर्ण शासन का प्रतीक है।

  • ट्रम्प ने उत्साहपूर्वक कहा, “मैं इसे अभी पहनना चाहता हूँ।”

कूटनीतिक पृष्ठभूमि 

  • अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रम्प ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से अभूतपूर्व वार्ताएँ की थीं।

  • हालाँकि ये वार्ताएँ बाद में ठहर गईं, फिर भी दक्षिण कोरिया ने उस अवधि में क्षेत्रीय तनाव कम करने में उनकी भूमिका को मान्यता दी।

  • अपनी 2025 की यात्रा के दौरान ट्रम्प ने प्योंगयांग के साथ संवाद फिर शुरू करने की इच्छा जताई, हालांकि उत्तर कोरिया की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुनघ्वा क्या है? 

  • यह दक्षिण कोरिया गणराज्य (Republic of Korea) द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय अलंकरण है।

  • सामान्यतः यह दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति, उनके जीवनसाथी, या मित्र देशों के राष्ट्राध्यक्षों/पूर्व राष्ट्राध्यक्षों और उनके जीवनसाथियों को दिया जाता है।

  • यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने कोरिया के विकास और सुरक्षा में उत्कृष्ट योगदान (Outstanding Meritorious Services) दिया हो।

नाम और प्रतीकात्मकता 

  • यह सम्मान दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय फूल “मुगुनघ्वा” (Hibiscus syriacus) के नाम पर रखा गया है।

  • यह फूल कोरियाई प्रायद्वीप का मूल पौधा है और अनंतता, दृढ़ता और सुंदरता (Eternity, Resilience, Beauty) का प्रतीक माना जाता है।

रचना और स्वरूप 

  • इसमें शामिल होते हैं —

    • गले में पहनी जाने वाली इंसिग्निया (Insignia)

    • कंधे पर पहनी जाने वाली सैश (Sash)

    • स्टार (Star) और आवश्यकतानुसार रिबन व लैपल बैज (Ribbon and Lapel Badge)

  • इसे सोना, चाँदी, रूबी और एमिथिस्ट (amethyst) से बनाया जाता है।

  • वर्ष 2013 के अनुसार इसकी निर्माण लागत लगभग 20 मिलियन वॉन (≈ 19,000 अमेरिकी डॉलर) थी।

मुख्य स्थिर तथ्य 

विषय विवरण
घटना की तिथि 29 अक्टूबर 2025
सम्मान ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुनघ्वा (Grand Order of Mugunghwa)
सम्मान देने वाला देश दक्षिण कोरिया
प्राप्तकर्ता डोनाल्ड ट्रम्प (पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जिन्हें यह सम्मान मिला)
सम्मान प्रदान करने वाले दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग (Lee Jae Myung)
स्थान ग्योंगजू (Gyeongju) – सिल्ला साम्राज्य की प्राचीन राजधानी
प्रतीकात्मक उपहार सिल्ला कालीन स्वर्ण मुकुट की प्रतिकृति (Replica of Cheonmachong Golden Crown)
महत्व एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति प्रयासों की मान्यता; अमेरिका–दक्षिण कोरिया संबंधों को सुदृढ़ करना

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