भारत ने बोत्सवाना से 9 चीतों का कुनो नेशनल पार्क में स्वागत किया

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बोत्सवाना से नौ चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क के क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ा। इस आगमन के साथ भारत में कुल चीता संख्या 48 हो गई है, जिसमें 28 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। यह उपलब्धि Project Cheetah के तहत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सभी चीतों को स्वास्थ्य निगरानी और अनुकूलन (acclimatization) के बाद चरणबद्ध तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।

भूपेंद्र यादव ने कूनो में बोत्सवाना के चीतों का स्वागत किया

  • 9 चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया।
  • यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत बोत्सवाना से लाए गए।
  • भारत में अब कुल 48 चीते (28 भारत में जन्मे शावक सहित)।
  • पहले क्वारंटीन, फिर खुले परिदृश्य में चरणबद्ध रिहाई।
  • 1952 में विलुप्ति के बाद चीतों की पुनर्वापसी हेतु यह पहल।
  • लक्ष्य: भारत में टिकाऊ, मुक्त विचरण करने वाली चीता आबादी का निर्माण।

बोत्सवाना से भारत तक: चीतों की यात्रा

  • दिसंबर 2024: बोत्सवाना से औपचारिक बातचीत शुरू।
  • सितंबर 2025: भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने परिचालन योजना के लिए दौरा किया।
  • चीतों को घांजी (Ghanzi) क्षेत्र से पकड़ा गया और गाबोरोन ले जाया गया।
  • मोकोलोडी नेचर रिजर्व में क्वारंटीन के बाद स्थानांतरण।
  • 27 फरवरी 2026: भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान से भारत लाया गया।
  • ग्वालियर से हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचाया गया।
  • पूरा स्थानांतरण अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव मानकों के अनुसार किया गया।

प्रोजेक्ट चीता: बढ़ती संरक्षण सफलता

Project Cheetah का उद्देश्य अफ्रीका के बाहर एक सुरक्षित चीता आबादी स्थापित करना है।

  • दीर्घकालिक प्रजाति संरक्षण के लिए अतिरिक्त आवास का निर्माण।
  • बोत्सवाना के साथ वैश्विक संरक्षण सहयोग।
  • वैज्ञानिक निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण और प्रजनन प्रबंधन।
  • 28 भारत में जन्मे शावक—सकारात्मक संकेत।
  • पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता की पुनर्स्थापना की दिशा में बड़ा कदम।

पृष्ठभूमि: प्रोजेक्ट चीता क्यों महत्वपूर्ण?

1952 में शिकार और आवास हानि के कारण भारत में चीते विलुप्त घोषित किए गए थे।
2022 में Project Cheetah के तहत अफ्रीकी चीतों को कूनो में पुनः बसाया गया।

इस परियोजना में शामिल हैं:

  • घासभूमि आवास की तैयारी
  • शिकार आधार (prey base) में वृद्धि
  • पशु चिकित्सा देखभाल
  • सैटेलाइट निगरानी

वैश्विक सहयोग और वैज्ञानिक निगरानी के साथ भारत अब पारंपरिक अफ्रीकी क्षेत्र से बाहर स्थिर चीता आबादी स्थापित कर वैश्विक संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

जल्द पूरा होगा खुर्दा रोड-बलांगीर रेल प्रोजेक्ट

ओडिशा की बहुप्रतीक्षित खुर्दा रोड–बलांगीर रेल लाइन (301 किमी) स्वतंत्रता से पहले परिकल्पित परियोजना थी,…

8 mins ago

PM मोदी ने साणंद में माइक्रोन की सेमीकंडक्टर एटीएमपी इकाई का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी 2026 को गुजरात के साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की…

2 hours ago

भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ बड़े रन चेज के साथ रिकॉर्ड तोड़ा

भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप में अपना सबसे बड़ा रनचेज करते हुए सेमीफाइनल में जगह…

3 hours ago

जम्मू-कश्मीर ने 67 साल में पहली बार जीता रणजी ट्रॉफी का खिताब

जम्मू-कश्मीर ने घरेलू क्रिकेट में नया इतिहास रच दिया है। रणजी ट्रॉफी के फाइनल में…

2 days ago

UN ने पेरिस समझौते के तहत पहले कार्बन क्रेडिट को मंज़ूरी दी

संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार पेरिस समझौते के कार्बन बाज़ार तंत्र के तहत आधिकारिक रूप…

2 days ago

वायु शक्ति अभ्यास 2026: भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान सीमा के पास दिखाई ताकत

भारतीय वायुसेना ने भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पोकरण में ‘वायुशक्ति’ अभ्यास में अपनी ताकत…

2 days ago