मत्स्य-6000 एक अत्याधुनिक, चौथी पीढ़ी की गहरे समुद्र में जाने वाली मानवयुक्त पनडुब्बी है, जिसे भारत सरकार के डीप ओशन मिशन के तहत विकसित किया गया है। यह समुद्रायण परियोजना का हिस्सा है, जिसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और राष्ट्रीय समुद्री प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की गहरे समुद्र में खोजी क्षमताओं को बढ़ाना है। तीन व्यक्तियों को समायोजित करने में सक्षम यह पनडुब्बी उन्नत तकनीकों से सुसज्जित है और 500 मीटर की गहराई तक ड्राई और वेट परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है।
संरचना एवं डिजाइन – 2.1 मीटर व्यास की कॉम्पैक्ट गोलाकार संरचना, जो तीन लोगों को समायोजित कर सकती है।
उपप्रणालियाँ – मुख्य बैलास्ट सिस्टम, गति के लिए थ्रस्टर, बैटरी बैंक, उछाल बनाए रखने के लिए सिंटैक्टिक फोम, पावर वितरण प्रणाली, नियंत्रण हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर और नेविगेशन उपकरण।
संचार प्रणाली – ध्वनिक मोडेम, अंडरवॉटर टेलीफोन, VHF, GPS और सटीक ट्रैकिंग के लिए अंडरवॉटर ध्वनिक पोजिशनिंग।
जीवन समर्थन एवं सेंसर – लाइफ-सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन जॉयस्टिक, समुद्री अनुसंधान सेंसर, अंडरवॉटर लाइटिंग और कैमरे।
ड्राई परीक्षण – 500 मीटर की गहराई तक बिजली, नियंत्रण प्रणाली, उछाल, स्थिरता, संचालन और संचार का मूल्यांकन।
वेट परीक्षण – कट्टुपल्ली पोर्ट (L&T शिपबिल्डिंग) में आठ गोताखोरी परीक्षण (पांच बिना क्रू और तीन मानवयुक्त), जो सुरक्षा, प्रणाली की विश्वसनीयता और वैज्ञानिक उपकरणों की जांच पर केंद्रित थे।
आगे के परीक्षण – 500 मीटर से अधिक गहराई पर प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त परीक्षण आवश्यक, विशेष रूप से अंडरवॉटर संचार के लिए।
| प्रमुख पहलू | विवरण |
| क्यों चर्चा में? | मत्स्य-6000: भारत की गहरे समुद्र में जाने वाली पनडुब्बी ने वेट टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी की |
| परियोजना | समुद्रायण परियोजना |
| पनडुब्बी का नाम | मत्स्य-6000 |
| क्षमता | 3 व्यक्ति (2.1 मीटर गोलाकार संरचना के भीतर) |
| परीक्षण अवधि | 27 जनवरी – 12 फरवरी 2025 (L&T शिपबिल्डिंग में वेट परीक्षण) |
| परीक्षण स्थल | L&T शिपबिल्डिंग, कट्टुपल्ली पोर्ट, चेन्नई |
| मुख्य परीक्षण घटक | पावर नेटवर्क, नियंत्रण प्रणाली, उछाल, स्थिरता, संचालन, नेविगेशन, संचार |
| डाइविंग प्रकार | 5 बिना क्रू गोताखोरी, 5 मानवयुक्त गोताखोरी |
| परीक्षण गहराई | हार्बर (कम गहराई), 2025 के अंत तक 500 मीटर तक परीक्षण की योजना |
| संचार | उथली गहराइयों पर पानी के नीचे संचार में कुछ चुनौतियाँ |
| आगे की जरूरतें | अधिक गहराई पर प्रदर्शन और संचार प्रणाली में सुधार |
| महत्व | गहरे समुद्र की खोज, वैज्ञानिक अनुसंधान और समुद्री प्रौद्योगिकी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम |
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