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महाराष्ट्र विधानसभा ने प्रमुख राजस्व सुधार विधेयक पारित किए

महाराष्ट्र विधान सभा ने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए हैं। इन विधेयकों में महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता संशोधन विधेयक और महाराष्ट्र स्टाम्प संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं। इन सुधारों के तहत शहरी क्षेत्रों में पड़ी अनुपयोगी चरागाह भूमि (गैरान भूमि) को सार्वजनिक विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग करने की अनुमति दी गई है, साथ ही स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) रिफंड प्रक्रिया को तेज करने का प्रावधान भी किया गया है।

महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता संशोधन विधेयक और चरागाह भूमि का उपयोग

महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता संशोधन विधेयक के तहत नगर निगम और नगर परिषदों को अनुपयोगी चरागाह भूमि का उपयोग सार्वजनिक कार्यों के लिए करने की अनुमति दी गई है। इन भूमि क्षेत्रों को सामान्यतः गैरान भूमि (Gairan Land) कहा जाता है, जो सरकार के स्वामित्व वाली चराई भूमि होती है और अक्सर शहरी सीमाओं के भीतर अनुपयोगी पड़ी रहती है।

संशोधन के बाद अब इन जमीनों का उपयोग सड़क निर्माण, बुनियादी ढांचा विकास और सामुदायिक सुविधाओं जैसे सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए किया जा सकेगा। हालांकि, इन जमीनों का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा और इन्हें स्थायी रूप से स्थानीय निकायों को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा।

विकास परियोजनाओं के लिए उपलब्ध चरागाह भूमि

सरकारी अनुमानों के अनुसार महाराष्ट्र में बड़ी मात्रा में चरागाह (गैरान) भूमि अब विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग में लाई जा सकती है। इन जमीनों का बड़ा हिस्सा नगर निगम और नगर परिषद क्षेत्रों के भीतर स्थित है, लेकिन पहले इनके उपयोग पर प्रतिबंध था।

राज्य अधिकारियों के अनुसार लगभग

  • 7,700 हेक्टेयर भूमि नगर निगम क्षेत्रों में,
  • 4,000 हेक्टेयर भूमि नगरपालिका क्षेत्रों में, और
  • लगभग 3,000 हेक्टेयर भूमि नगर परिषद क्षेत्रों में

सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए संभावित रूप से उपयोग की जा सकती है। इससे राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भूमि संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।

चरागाह भूमि के उपयोग के लिए नियम और शर्तें

सरकार ने स्पष्ट किया है कि चरागाह भूमि का उपयोग सख्त नियमों के तहत किया जाएगा। स्थानीय निकाय इस भूमि का उपयोग केवल जनहित से जुड़े कार्यों के लिए ही कर सकेंगे और इसे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

किसी भी विकास कार्य से पहले भूमि का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके अलावा संबंधित जिले के जिला कलेक्टर की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी और यह भूमि सरकारी रिकॉर्ड में कलेक्टर की भूमि के रूप में ही दर्ज रहेगी।

महाराष्ट्र स्टाम्प संशोधन विधेयक 2026: रिफंड प्रक्रिया तेज करने का उद्देश्य

  • भूमि सुधार विधेयक के साथ-साथ विधानसभा ने महाराष्ट्र स्टाम्प संशोधन विधेयक 2026 भी पारित किया है। इसका उद्देश्य स्टाम्प शुल्क रिफंड आवेदनों की प्रक्रिया को तेज करना है।
  • पहले महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम 1958 की धारा 52A के तहत अधिकारी केवल ₹20 लाख तक के रिफंड को मंजूरी दे सकते थे, जबकि इससे अधिक राशि के मामलों को मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकरण के पास भेजना पड़ता था।
  • नए संशोधन के तहत इस प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत (decentralize) किया गया है, जिससे अधिकतर मामलों का निपटारा जिला और क्षेत्रीय स्तर पर ही किया जा सकेगा।

स्टाम्प शुल्क रिफंड के लिए अधिकारियों की बढ़ी हुई वित्तीय शक्तियाँ

महाराष्ट्र स्टाम्प संशोधन विधेयक 2026 के तहत कई अधिकारियों की वित्तीय सीमाएँ बढ़ा दी गई हैं ताकि रिफंड मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।

  • जिला कलेक्टर अब ₹5 लाख की जगह ₹20 लाख तक के रिफंड को मंजूरी दे सकेंगे।
  • उप महानिरीक्षक (पंजीकरण) और उप नियंत्रक (स्टाम्प) अब ₹50 लाख तक के मामलों का निर्णय ले सकेंगे।
  • ₹20 लाख से ₹1 करोड़ तक के मामलों का निपटारा अतिरिक्त नियंत्रक (स्टाम्प) और संयुक्त महानिरीक्षक जैसे वरिष्ठ अधिकारी करेंगे।
  • ₹1 करोड़ से अधिक के मामलों का निर्णय अब भी शीर्ष प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा।
  • इन सुधारों से लंबित मामलों में कमी आएगी और नागरिकों को स्टाम्प शुल्क रिफंड जल्दी मिलने में मदद मिलेगी।
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