भारत–यूरोपीय संघ (EU) संबंधों ने 2026 में एक नया चरण शुरू किया, जब यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेर लेयेन ने भारत का उच्च-स्तरीय दौरा किया। इस यात्रा के दौरान व्यापार, सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और जन-जन संपर्क से जुड़े व्यापक समझौते हुए, जो तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में साझेदारी को मजबूत करने की साझा दृष्टि को दर्शाते हैं।
क्यों चर्चा में?
इस उच्च-स्तरीय दौरे के परिणामस्वरूप भारत–EU रणनीतिक साझेदारी को गहराई देने वाले कई रणनीतिक, आर्थिक और संस्थागत निर्णयों की घोषणा की गई।
उच्च-स्तरीय नेतृत्व संवाद
यह हाल के वर्षों में भारत–EU के सबसे व्यापक संवादों में से एक रहा। बातचीत में 2030 तक दीर्घकालिक सहयोग पर फोकस रहा, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक हितों और रणनीतिक प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है।
व्यापार, अर्थव्यवस्था और वित्तीय सहयोग
- भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं के निष्कर्ष की संयुक्त घोषणा—द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा।
- RBI और ESMA के बीच वित्तीय बाजार सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (MoU)।
- सुरक्षित सीमा-पार डिजिटल लेनदेन के लिए उन्नत इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और सील पर प्रशासनिक व्यवस्था।
रक्षा और सुरक्षा साझेदारी
- भारत और यूरोपीय संघ ने सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी के माध्यम से अपने सहयोग को नई ऊँचाई दी है, जो वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर बढ़ते सामंजस्य को दर्शाती है।
- इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने भारत–EU सुरक्षा सूचना समझौते पर वार्ता शुरू करने पर सहमति जताई है, जिससे गोपनीय सूचनाओं का सुरक्षित आदान-प्रदान संभव होगा और रक्षा व रणनीतिक सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
आवागमन, कौशल और जन-जन संपर्क
- कार्यबल की गतिशीलता को सुदृढ़ करने के लिए आवागमन सहयोग के लिए एक समग्र ढांचे पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ ने भारत में एक पायलट लीगल गेटवे कार्यालय स्थापित करने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से युवा पेशेवरों और कुशल श्रमिकों के लिए कौशल गतिशीलता, कानूनी सहयोग और पेशेवर आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
आपदा प्रबंधन और मानवीय सहयोग
- भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और यूरोपीय संघ के यूरोपीय नागरिक संरक्षण एवं मानवीय सहायता संचालन महानिदेशालय (DG-ECHO) के बीच एक प्रशासनिक व्यवस्था संपन्न हुई।
- इससे आपदा जोखिम प्रबंधन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा तथा प्राकृतिक और जलवायु-जनित आपदाओं के प्रति तैयारी और क्षमता में सुधार होगा।
स्वच्छ ऊर्जा और हरित संक्रमण
- भारत और यूरोपीय संघ ने ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स के गठन पर सहमति व्यक्त की, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को उनकी साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ बनाया गया।
- यह पहल दोनों पक्षों की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है और इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, प्रौद्योगिकी साझाकरण तथा सतत ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा देना है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार
- साझेदारों ने 2025-2030 के लिए भारत–EU वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग समझौते का नवीनीकरण किया, जिससे अनुसंधान और नवाचार में सहयोग को और मजबूत किया गया।
- इसके साथ ही, होराइजन यूरोप कार्यक्रम में भारत की संभावित भागीदारी को लेकर अन्वेषणात्मक वार्ताएँ भी शुरू की गईं, जिससे भारत को वैश्विक अनुसंधान नेटवर्क और फंडिंग तक महत्वपूर्ण पहुंच प्राप्त हो सकेगी।
वैश्विक और त्रिपक्षीय सहयोग परियोजनाएँ
भारत और यूरोपीय संघ ने भारत–EU त्रिपक्षीय सहयोग के तहत चार परियोजनाओं को संयुक्त रूप से लागू करने पर सहमति व्यक्त की है। इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस महिलाओं और युवाओं के लिए डिजिटल नवाचार और कौशल विकास, महिला किसानों के लिए सौर-आधारित समाधान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ, और अफ्रीका, इंडो-पैसिफिक और कैरिबियन क्षेत्र सहित छोटे द्वीपीय विकासशील देशों में सतत सौर ऊर्जा संक्रमण पर है। इन पहलों के माध्यम से तकनीकी नवाचार, सतत ऊर्जा और सामाजिक-सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का उद्देश्य है।


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