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कर्तव्य पथ: राजपथ से कर्तव्य-आधारित लोकतंत्र के प्रतीक तक

नई दिल्ली के बीचों-बीच स्थित कर्तव्य पथ, भारत के लोकतांत्रिक विकास का एक मज़बूत प्रतीक है। पहले इसे राजपथ कहा जाता था, यह शानदार सड़क राष्ट्रपति भवन को इंडिया गेट से जोड़ती है और यह भारत की औपनिवेशिक शासन से लेकर कर्तव्य, ज़िम्मेदारी और नागरिकों की भागीदारी पर आधारित लोकतंत्र तक की यात्रा को दिखाती है।

कर्तव्य पथ का ऐतिहासिक विकास

  • कर्तव्य पथ का इतिहास भारत की राजनीतिक यात्रा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
  • ब्रिटिश शासन के दौरान, इसे एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने किंग्स वे (King’s Way) के रूप में डिजाइन किया था, जो साम्राज्यवादी सत्ता का प्रतीक था।
  • यह मार्ग वायसराय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) को इंडिया गेट से जोड़ता था और ब्रिटिश साम्राज्य की भव्यता को प्रदर्शित करता था।
  • 1947 में स्वतंत्रता के बाद, किंग्स वे का नाम बदलकर राजपथ रखा गया और यह गणतंत्र दिवस परेड तथा राष्ट्रीय समारोहों का प्रमुख स्थल बन गया।
  • हालांकि स्वतंत्रता के बाद भी इसमें औपनिवेशिक प्रतीकवाद बना रहा।
  • वर्ष 2022 में इसका नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया, जो एक महत्वपूर्ण वैचारिक परिवर्तन का संकेत है।

भारतीय लोकतंत्र में ‘कर्तव्य’ का प्रतीकात्मक महत्व

  • कर्तव्य शब्द भारतीय दर्शन और शासन व्यवस्था में गहराई से निहित है।
  • भारतीय परंपराएँ, विशेष रूप से भगवद्गीता, निस्वार्थ भाव से कर्तव्य पालन पर बल देती हैं।
  • भारतीय संविधान में यह विचार अनुच्छेद 51A के माध्यम से व्यक्त होता है, जिसमें नागरिकों के मूल कर्तव्यों का उल्लेख है।
  • कर्तव्य पथ यह संदेश देता है कि अधिकार तभी सार्थक होते हैं जब उनके साथ जिम्मेदारियाँ भी निभाई जाएँ।
  • यह राष्ट्र निर्माण में राज्य और नागरिकों की साझा जवाबदेही को रेखांकित करता है।
  • राजपथ से कर्तव्य पथ में नाम परिवर्तन शासक-केंद्रित सोच से हटकर नागरिक-केंद्रित लोकतंत्र की ओर बदलाव का प्रतीक है।

कर्तव्य पथ और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना

  • कर्तव्य पथ, सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना की केंद्रीय धुरी है।
  • इस परियोजना का उद्देश्य नई दिल्ली के प्रशासनिक और औपचारिक क्षेत्र को आधुनिक बनाना है।
  • कर्तव्य पथ राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैला हुआ है और पूरे क्षेत्र की औपचारिक रीढ़ (ceremonial spine) का कार्य करता है।
  • पुनर्विकास के तहत पुरानी औपनिवेशिक संरचनाओं को हटाकर आधुनिक और सतत (sustainable) सुविधाएँ विकसित की गईं।
  • नागरिकों के लिए चौड़े पैदल मार्ग, हरित लॉन, बैठने की व्यवस्था और जल संरचनाएँ जोड़ी गईं।
  • भूमिगत उपयोगिताएँ (underground utilities) और पर्यावरण-अनुकूल प्रकाश व्यवस्था से सौंदर्य और कार्यक्षमता दोनों में वृद्धि हुई।
  • नया स्वरूप गणतंत्र दिवस परेड जैसे राष्ट्रीय आयोजनों के सुचारु आयोजन में सहायक है।
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