भारत का डेयरी क्षेत्र करण फ्राइज़ नामक एक कम चर्चित लेकिन अत्यंत प्रभावशाली गाय नस्ल के उभरने से बड़े परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर सकता है। दशकों के वैज्ञानिक प्रजनन अनुसंधान से विकसित यह संकर नस्ल उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता को भारतीय जलवायु परिस्थितियों के प्रति बेहतर अनुकूलन के साथ जोड़ती है। किसानों, पशुपालकों और नीति निर्माताओं के लिए करण फ्राइज़ देश में टिकाऊ तरीके से दूध उत्पादन बढ़ाने का एक आशाजनक समाधान प्रस्तुत करती है।
हाल ही में करण फ्राइज़ गाय नस्ल को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा आधिकारिक पंजीकरण प्रदान किया गया है। यह मान्यता भारत के लिए एक उच्च दुग्ध उत्पादक और जलवायु-अनुकूल डेयरी नस्ल के रूप में इसके महत्व को रेखांकित करती है।
करण फ्राइज़ एक संश्लेषित (सिंथेटिक) डेयरी गाय नस्ल है, जिसे राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) ने विकसित किया है। यह नस्ल होल्स्टीन फ्राइज़ियन (उच्च दुग्ध उत्पादन वाली विदेशी नस्ल) और थारपारकर (गर्मी सहनशील एवं रोग-प्रतिरोधी स्वदेशी ज़ेबू नस्ल) के संकरण से बनाई गई है। इसका उद्देश्य विदेशी नस्लों की उत्पादकता और भारतीय नस्लों की सहनशीलता को एक साथ जोड़ना था, ताकि भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल पशु तैयार किया जा सके।
करण फ्राइज़ गाय औसतन एक दुग्धकाल (लगभग 10 महीने) में 3,550 किलोग्राम दूध देती है, यानी प्रतिदिन लगभग 11.6 किलोग्राम। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली गायों ने 305 दिनों में 5,851 किलोग्राम तक दूध दिया है, जबकि अधिकतम दैनिक उत्पादन 46.5 किलोग्राम तक दर्ज किया गया है। यह उत्पादन अधिकांश स्वदेशी नस्लों और कई विदेशी नस्लों से भी अधिक है।
भारत की स्वदेशी गायें सामान्यतः 1,000–2,000 किलोग्राम प्रति दुग्धकाल दूध देती हैं, जबकि विदेशी नस्लें औसतन 8–9 किलोग्राम प्रतिदिन देती हैं, परंतु गर्मी और रोगों के प्रति संवेदनशील रहती हैं। करण फ्राइज़ इन दोनों के बीच संतुलन बनाती है—उच्च उत्पादन के साथ भारतीय जलवायु में बेहतर अनुकूलन। यह विशेषता इसे छोटे और मध्यम डेयरी किसानों के लिए उपयुक्त बनाती है।
करण फ्राइज़ के साथ-साथ वृंदावनी नामक एक अन्य सिंथेटिक नस्ल और 16 नई पशु व पोल्ट्री नस्लों को भी पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। यह प्रमाणपत्र केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ICAR–नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज के कार्यक्रम में दिए गए। इसके साथ भारत में पंजीकृत पशुधन व पोल्ट्री नस्लों की संख्या 246 हो गई है।
NDRI वैज्ञानिकों के अनुसार, कई पीढ़ियों के इंटर-से प्रजनन के बाद करण फ्राइज़ ने आनुवंशिक स्थिरता प्राप्त कर ली है। इसमें उत्पादन गुणों की एकरूपता, जलवायु अनुकूलन और निरंतर प्रदर्शन देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नस्ल भविष्य में भारत में क्रॉसब्रीड सुधार कार्यक्रमों के लिए आधारभूत स्टॉक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे देश की दीर्घकालिक डेयरी उत्पादकता को मजबूती मिलेगी।
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