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जेपी नड्डा इंडिया एआई समिट में ‘साही’ और ‘बोध’ पहल का शुभारंभ करेंगे

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई समिट में दो प्रमुख राष्ट्रीय पहलों – साही (SAHI) और बोध (BODH) – का शुभारंभ करेंगे। इन पहलों का उद्देश्य भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को मजबूत और सुरक्षित तरीके से अपनाना है। यह पहल भारत की डिजिटल स्वास्थ्य दृष्टि के अनुरूप एक सुरक्षित, नैतिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हेल्थ एआई पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

साही (SAHI) क्या है?

  • साही (SAHI) का पूरा नाम है – भारत के लिए हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की स्ट्रेटेजी।
  • यह स्वास्थ्य क्षेत्र में जिम्मेदार एआई अपनाने के लिए एक राष्ट्रीय मार्गदर्शक ढांचा है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • एआई शासन (गवर्नेंस) और डेटा प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
  • नैतिक और प्रमाण-आधारित एआई उपयोग सुनिश्चित करता है।
  • राज्यों और स्वास्थ्य संस्थानों को सुरक्षित कार्यान्वयन में सहायता करता है।
  • निगरानी, सत्यापन और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य पर जोर देता है।

साही का उद्देश्य भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में एआई को सुरक्षित, समावेशी और पारदर्शी बनाना है, साथ ही रोगियों के अधिकारों और डेटा सुरक्षा की रक्षा करना है।

बोध (BODH) क्या है?

बोध (BODH) का पूरा नाम है – Benchmarking Open Data Platform for Health AI।
यह स्वास्थ्य एआई मॉडलों के मूल्यांकन के लिए एक गोपनीयता-सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित।
  • वास्तविक स्वास्थ्य डेटा के आधार पर एआई मॉडलों का परीक्षण करता है।
  • मूल डेटा साझा नहीं करता, जिससे गोपनीयता सुरक्षित रहती है।
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत एक डिजिटल सार्वजनिक संपत्ति के रूप में कार्य करता है।
  • हेल्थ एआई प्रणालियों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।

बोध यह सुनिश्चित करता है कि एआई उपकरणों को लागू करने से पहले उनका कठोर परीक्षण किया जाए, जिससे प्रणाली में भरोसा बढ़े।

साही और बोध भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

  • सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
  • मजबूत नियामक और नैतिक एआई ढांचा तैयार करते हैं।
  • एआई आधारित चिकित्सा उपकरणों पर जनता का विश्वास बढ़ाते हैं।
  • भारत को डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
  • गोपनीयता से समझौता किए बिना स्वास्थ्य सेवाओं में एआई का समावेश सुनिश्चित करते हैं।
  • ये दोनों पहलें मिलकर नवाचार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती हैं।

भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की भूमिका

  • विश्व स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का उपयोग रोग निदान, बीमारी की भविष्यवाणी, मेडिकल इमेजिंग और व्यक्तिगत उपचार में किया जा रहा है।
  • भारत में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत एक एकीकृत स्वास्थ्य डेटा तंत्र विकसित किया जा रहा है। हेल्थ एआई ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ा सकता है, निदान संबंधी त्रुटियों को कम कर सकता है और अस्पताल प्रबंधन को बेहतर बना सकता है।
  • हालांकि, इसके लिए नैतिक शासन, मानकीकृत सत्यापन और डेटा सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हैं। साही और बोध इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक संरचित और पारदर्शी ढांचा प्रदान करते हैं।
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