अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस (International Epilepsy Day) हर वर्ष फरवरी के दूसरे सोमवार को विश्व स्तर पर मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य मिर्गी के प्रति जागरूकता फैलाना और इस स्थिति से जुड़ी भ्रांतियों तथा सामाजिक कलंक को दूर करना है। यह दिन मिथकों और सामाजिक कलंक से आगे बढ़कर संवेदनशीलता, समावेशन और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जोर देता है। विश्वभर में 5 करोड़ से अधिक लोग मिर्गी से प्रभावित हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस 2026 जागरूकता, जनपक्षधरता और वास्तविक कार्रवाई पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करता है।
अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस क्या है
अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस एक वैश्विक जागरूकता पहल है, जिसका नेतृत्व इंटरनेशनल ब्यूरो फॉर एपिलेप्सी (IBE) और इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी (ILAE) द्वारा किया जाता है। यह दिन मिर्गी के बारे में जन-समझ को बेहतर बनाने के लिए समर्पित है। मिर्गी एक तंत्रिका संबंधी विकार है, जिसकी पहचान बार-बार आने वाले दौरों (seizures) से होती है। यह दिवस मिर्गी से प्रभावित लोगों के वास्तविक जीवन अनुभवों को सामने लाने, भेदभाव को चुनौती देने और स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार व सामाजिक भागीदारी में समान अवसरों को बढ़ावा देने का वैश्विक मंच प्रदान करता है।
जागरूकता और शिक्षा क्यों ज़रूरी हैं
अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस का एक मुख्य उद्देश्य जागरूकता और शिक्षा है। मिर्गी को लेकर फैली गलत धारणाएँ अक्सर डर, बहिष्कार और सामाजिक कलंक का कारण बनती हैं। यह दिवस स्पष्ट करता है कि मिर्गी क्या है और क्या नहीं, जिससे सहानुभूति और सही व्यवहार को बढ़ावा मिलता है। बेहतर जागरूकता से दौरे के समय सही मदद संभव होती है, समय पर पहचान (diagnosis) बढ़ती है और स्कूलों व कार्यस्थलों पर भेदभाव कम होता है। शिक्षा ही समावेशन और गरिमा की नींव है।
वैश्विक भागीदारी और सामूहिक आवाज़
अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर दुनिया भर में स्कूल कार्यक्रम, सामुदायिक आयोजन, नीति-चर्चाएँ, मीडिया कवरेज और डिजिटल अभियान आयोजित किए जाते हैं। ये गतिविधियाँ मिर्गी से पीड़ित लोगों और उनके परिवारों की आवाज़ को मज़बूत करती हैं। सामूहिक वैश्विक भागीदारी यह संदेश देती है कि मिर्गी कोई हाशिये का मुद्दा नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकार से जुड़ा विषय है, जिस पर निरंतर और सामूहिक ध्यान आवश्यक है।
नीति और समावेशन के लिए जनपक्षधरता
जागरूकता से आगे बढ़कर, अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस नीतिगत बदलावों की भी मांग करता है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की इंटरसेक्टरल ग्लोबल एक्शन प्लान ऑन एपिलेप्सी एंड अदर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स (IGAP) के अनुरूप है। इसका फोकस उपचार तक समान पहुंच, किफायती दवाएं, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी प्रणालियों पर है। यह सुनिश्चित करता है कि मिर्गी को केवल चिकित्सकीय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी संबोधित किया जाए।
जागरूकता से कार्रवाई तक: एपिलेप्सी प्लेज 2026
अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस 2026 का एक प्रमुख आकर्षण एपिलेप्सी प्लेज की शुरुआत है। इस पहल के तहत व्यक्ति, स्कूल, कार्यस्थल और संगठन 2026 के दौरान एक ठोस कदम उठाने का संकल्प लेते हैं, जिससे जागरूकता, सुरक्षा या समावेशन में सुधार हो। यह पहल केवल सुनने तक सीमित न रहकर वास्तविक बदलाव सुनिश्चित करने पर ज़ोर देती है।
अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस 2026 क्यों महत्वपूर्ण है
अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस 2026 प्रतीकात्मक जागरूकता से आगे बढ़कर समुदाय-आधारित कार्रवाई की ओर संकेत करता है। समझ, नीतिगत समर्थन और व्यक्तिगत जिम्मेदारी को बढ़ावा देकर यह दिवस मिर्गी से प्रभावित लोगों के लिए गरिमा, सुरक्षा और समान अधिकारों के वैश्विक आंदोलन को मज़बूती देता है।
मिर्गी क्या है
मिर्गी एक दीर्घकालिक तंत्रिका संबंधी विकार है, जिसमें मस्तिष्क की असामान्य गतिविधियों के कारण बार-बार दौरे पड़ते हैं। यह सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकती है और समय पर पहचान व दवाओं से कई मामलों में इसका प्रभावी इलाज संभव है।


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