वर्तमान 2025-26 विपणन वर्ष (अक्टूबर–सितंबर) में भारत का चीनी निर्यात फरवरी तक 2.01 लाख टन को पार कर गया है। यह जानकारी अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (AISTA) ने दी है। संयुक्त अरब अमीरात को सबसे अधिक 47,006 टन चीनी निर्यात की गई। इसके बाद अफगानिस्तान को 46,163 टन, जिबूती को 30,147 टन और भूटान को 20,017 टन चीनी निर्यात हुई। केंद्र सरकार ने चालू वर्ष में कुल 20 लाख टन चीनी निर्यात को मंजूरी दी है, जिसमें हाल ही में अतिरिक्त 5 लाख टन की अनुमति भी शामिल है। साथ ही, चीनी उत्पादन में 13 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जिससे भारत की निर्यात संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
भारत का चीनी निर्यात 2.01 लाख टन पार – AISTA के आंकड़े
AISTA के अनुसार, 2025-26 विपणन वर्ष (अक्टूबर 2025 – सितंबर 2026) में फरवरी तक कुल 2,01,547 टन चीनी का निर्यात किया गया।
मुख्य बिंदु:
- कुल निर्यात (फरवरी तक): 2,01,547 टन
- सफेद चीनी: 1,63,000 टन
- रिफाइंड चीनी: 37,638 टन
- निर्यात सरकारी कोटा प्रणाली के तहत
भारत में चीनी निर्यात कोटा प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है, जिसमें चीनी मिलों को आनुपातिक आधार पर कोटा आवंटित किया जाता है। इससे घरेलू आपूर्ति संतुलित रहती है और वैश्विक व्यापार में भागीदारी भी सुनिश्चित होती है।
भारत के चीनी निर्यात में UAE शीर्ष पर
इस विपणन वर्ष में संयुक्त अरब अमीरात भारत का सबसे बड़ा आयातक बना है।
प्रमुख निर्यात गंतव्य:
- संयुक्त अरब अमीरात – 47,006 टन
- अफगानिस्तान – 46,163 टन
- जिबूती – 30,147 टन
- भूटान – 20,017 टन
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि पश्चिम एशिया और पड़ोसी देशों में भारतीय चीनी की मजबूत मांग बनी हुई है। इससे विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि होती है और वैश्विक चीनी बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होती है।
सरकार ने 20 लाख टन निर्यात को दी मंजूरी
केंद्र सरकार ने 2025-26 विपणन वर्ष के लिए कुल 20 लाख टन चीनी निर्यात को मंजूरी दी है।
मंजूरी का विवरण:
- प्रारंभिक कोटा: 15 लाख टन
- अतिरिक्त अनुमति: 5 लाख टन
- अतिरिक्त कोटा मिलों के बीच अदला-बदली योग्य नहीं
- निर्यात आवंटन प्रोराटा आधार पर
AISTA के अध्यक्ष प्रफुल विथलानी के अनुसार, यह दो-स्तरीय कोटा प्रणाली प्रीमियम ट्रेडिंग को कम करेगी और वास्तविक निर्यातक मिलों को अतिरिक्त शुल्क दिए बिना लाभ पहुंचाएगी।
2026 में चीनी उत्पादन 13% बढ़ने का अनुमान
2025-26 विपणन वर्ष में एथेनॉल उत्पादन हेतु डायवर्जन को छोड़कर चीनी उत्पादन 13 प्रतिशत बढ़कर 29.6 मिलियन टन होने का अनुमान है।
उत्पादन वृद्धि के लाभ:
- निर्यात क्षमता में सुधार
- घरेलू आपूर्ति स्थिर
- मिलों को बेहतर मूल्य प्राप्ति
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती
उत्पादन में वृद्धि से भारत की निर्यात रणनीति को समर्थन मिलेगा, साथ ही घरेलू उपभोग की आवश्यकताओं का संतुलन भी बना रहेगा।
AISTA के बारे में
अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (AISTA) की स्थापना 17 जनवरी 2016 को भारत के बिखरे हुए चीनी उद्योग को एकजुट करने के उद्देश्य से की गई थी। यह संगठन व्यापारियों, मिल मालिकों, रिफाइनरों, थोक उपभोक्ताओं, सेवा प्रदाताओं, किसानों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को एक साझा मंच प्रदान करता है। यह भारत की चीनी अर्थव्यवस्था की सामूहिक आवाज़ के रूप में कार्य करता है।
भारत का चीनी उद्योग और निर्यात नीति
भारत विश्व के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। चीनी निर्यात को घरेलू आपूर्ति और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए नियंत्रित किया जाता है। चीनी का विपणन वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। हाल के वर्षों में एथेनॉल मिश्रण नीति ने उत्पादन पैटर्न को प्रभावित किया है।
सरकार निर्यात कोटा के माध्यम से किसानों के हित, मिलों की तरलता और वैश्विक मांग के बीच संतुलन बनाए रखती है। बढ़ता उत्पादन और नियंत्रित निर्यात नीति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने में सहायक है।


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