भारत में खुदरा मुद्रास्फीति, जिसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से मापा जाता है, अक्टूबर के 0.25% से बढ़कर नवंबर में 0.71% हो गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं में अपस्फीति (Food Deflation) की गति धीमी होने के कारण हुई। मौसमी कारणों से कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि खाद्य कीमतें अभी भी साल-दर-साल गिरावट (डिफ्लेशन) में हैं, लेकिन अनुकूल बेस इफेक्ट के कमजोर पड़ने से कुल महंगाई में हल्की बढ़त आई।
खाद्य अपस्फीति घटकर -3.91% रह गई (अक्टूबर में -5.02%)
सब्ज़ी, अंडे, दालें, फल, मांस व मछली की कीमतों में क्रमिक बढ़ोतरी
ग्रामीण महंगाई नकारात्मक से निकलकर 0.10% हुई (अक्टूबर में -0.25%)
शहरी महंगाई बढ़कर 1.4% (अक्टूबर में 0.88%)
खाद्य अपस्फीति ग्रामीण (-4.05%) और शहरी (-3.6%)—दोनों क्षेत्रों में बनी रही
इसके अतिरिक्त, अनाज (Cereals) की महंगाई तेज़ी से घटकर 50 महीनों के निचले स्तर 0.1% पर आ गई, जो आपूर्ति दबाव कम होने का संकेत है।
खाद्य तेलों की महंगाई घटकर 7.87% हुई, हालांकि यह स्तर अभी भी ऊँचा है।
ग्रामीण भारत में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया, जहाँ महंगाई फिर से सकारात्मक क्षेत्र में आई।
ग्रामीण CPI: 0.10% (अक्टूबर में -0.25%)
शहरी CPI: 1.4% (अक्टूबर में 0.88%)
दिलचस्प रूप से, खाद्य कीमतें दोनों क्षेत्रों में अपस्फीति में रहीं—
ग्रामीण खाद्य महंगाई: -4.05%
शहरी खाद्य महंगाई: -3.6%
यह दर्शाता है कि खाद्य कीमतों में समान नरमी के बावजूद, गैर-खाद्य घटक—विशेषकर शहरी क्षेत्रों में—कुल महंगाई बढ़ाने में अधिक प्रभावी रहे।
CPI जारी करता है: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)
CPI की श्रेणियाँ: खाद्य एवं पेय, आवास, ईंधन, वस्त्र, विविध सेवाएँ
आधार तत्व: वर्तमान कीमतों की तुलना पिछले वर्ष के उसी महीने से
मुख्य योगदानकर्ता: खाद्य (सबसे अधिक भार), ईंधन, कोर आइटम्स
अपस्फीति (Deflation): जब महंगाई नकारात्मक हो (साल-दर-साल कीमतें घटें)
नवंबर में CPI खुदरा महंगाई 0.71% (अक्टूबर: 0.25%)
खाद्य अपस्फीति घटकर -3.91%, जिससे कुल महंगाई बढ़ी
ग्रामीण महंगाई 0.10% पर सकारात्मक; शहरी महंगाई 1.4%
अनाज महंगाई 50 महीनों के निचले स्तर 0.1% पर
खाद्य तेल महंगाई घटकर 7.87%, पर अब भी ऊँची
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