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2027 तक अंतर-क्षेत्रीय बिजली संचरण क्षमता 143 गीगावॉट तक पहुँचेगी

भारत सरकार ने घोषणा की है कि देश की अंतर-क्षेत्रीय विद्युत संचरण क्षमता वर्ष 2027 तक बढ़कर 143 गीगावॉट (GW) हो जाएगी, जिससे देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच बिजली का प्रवाह और अधिक मजबूत होगा। वर्तमान में दिसंबर 2025 तक भारत की अंतर-क्षेत्रीय संचरण क्षमता लगभग 120 गीगावॉट है। इस क्षमता विस्तार की योजना राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड को और मजबूत बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इससे देश में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी और विभिन्न राज्यों के बीच बिजली की बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

भारत की अंतर-क्षेत्रीय ट्रांसमिशन क्षमता विस्तार योजना

  • भारत सरकार ने देश में अंतर-क्षेत्रीय बिजली संचरण क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में बिजली वितरण की दक्षता और विश्वसनीयता को बेहतर बनाना है। श्रीपद नाइक ने संसद को बताया कि बिजली उत्पादन और खपत में हो रही वृद्धि के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
  • वर्तमान में भारत की अंतर-क्षेत्रीय संचरण क्षमता लगभग 120 गीगावॉट (GW) है, जो राष्ट्रीय ग्रिड के विभिन्न क्षेत्रों के बीच बिजली के प्रवाह को संभव बनाती है। सरकार की योजना के अनुसार इस क्षमता को 2027 तक 143 GW और 2032 तक 168 GW तक बढ़ाया जाएगा।
  • इस विस्तार से यह सुनिश्चित होगा कि किसी एक क्षेत्र में उत्पन्न बिजली को उन क्षेत्रों तक कुशलतापूर्वक पहुंचाया जा सके जहां बिजली की मांग अधिक है, जिससे पूरे देश में ऊर्जा आपूर्ति और भी मजबूत और संतुलित हो सकेगी।

2032 तक भारत में बढ़ती बिजली मांग

भारत में अंतर-क्षेत्रीय बिजली संचरण क्षमता को मजबूत करने का निर्णय देश में तेजी से बढ़ती बिजली मांग के कारण लिया गया है। सरकारी अनुमानों के अनुसार 2032 तक भारत की अधिकतम बिजली मांग लगभग 388 गीगावॉट (GW) तक पहुँच सकती है। मांग में यह बड़ी वृद्धि ऐसे मजबूत और विश्वसनीय बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क की आवश्यकता पैदा करती है जो राज्यों और क्षेत्रों के बीच बड़ी मात्रा में बिजली के प्रवाह को संभाल सके। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए सरकार दीर्घकालिक ऊर्जा योजना के तहत राष्ट्रीय बिजली ग्रिड का विस्तार और ट्रांसमिशन अवसंरचना को मजबूत कर रही है।

राष्ट्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार

राष्ट्रीय विद्युत योजना (NEP) – वॉल्यूम II ट्रांसमिशन के तहत भारत अपने बिजली संचरण नेटवर्क में बड़े सुधार करने की योजना बना रहा है। वर्ष 2032 तक देश के ट्रांसमिशन अवसंरचना में उल्लेखनीय विस्तार होने की उम्मीद है। इस योजना में ट्रांसमिशन लाइनों की कुल लंबाई बढ़ाने और बिजली परिवर्तन प्रणालियों (पावर ट्रांसफॉर्मेशन सिस्टम) की क्षमता में वृद्धि शामिल है।

मुख्य लक्ष्य इस प्रकार हैं:

  • ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार 6.48 लाख सर्किट किलोमीटर (ckm) तक
  • ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता को बढ़ाकर 2,345 गीगा वोल्ट एम्पियर (GVA) करना

इन सुधारों से राष्ट्रीय ग्रिड मजबूत होगा, बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी और सौर व पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बेहतर एकीकरण में मदद मिलेगी।

पृष्ठभूमि: भारत का राष्ट्रीय बिजली ग्रिड

भारत दुनिया के सबसे बड़े समकालिक बिजली नेटवर्कों में से एक का संचालन करता है, जिसे भारत का राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड कहा जाता है। यह ग्रिड देश के विभिन्न क्षेत्रीय ग्रिडों—उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी—को आपस में जोड़ता है। राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से मांग और आपूर्ति की स्थिति के अनुसार राज्यों और क्षेत्रों के बीच बिजली का आदान-प्रदान संभव होता है। इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ती है और किसी एक क्षेत्र में बिजली की कमी होने का जोखिम कम हो जाता है।

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