भारत और नामीबिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जनवरी 2026 में आयोजित उच्च-स्तरीय राजनयिक परामर्श के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य, कृषि और डिजिटल अवसंरचना जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यह चर्चा संसाधन सुरक्षा, सतत विकास और उभरती वैश्विक चुनौतियों के साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है।
क्यों चर्चा में?
भारत और नामीबिया के बीच पाँचवें दौर की विदेश कार्यालय परामर्श (Foreign Office Consultations – FOC) बैठक 19–20 जनवरी 2026 को आयोजित हुई। इसमें रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर सहमति बनी।
विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) के प्रमुख निष्कर्ष
- भारत–नामीबिया संबंधों के समग्र पहलुओं की समीक्षा की गई।
- व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा, क्षमता निर्माण, कृषि, अवसंरचना विकास, कांसुलर मुद्दे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा हुई।
- पिछली उच्च-स्तरीय बैठकों के बाद हुई प्रगति पर दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया।
- बैठक सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक माहौल में हुई, जिससे नए सहयोग क्षेत्रों की पहचान संभव हुई।
- अगला परामर्श दौर नामीबिया की राजधानी विंडहोक में आयोजित करने पर सहमति बनी।
रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर विशेष जोर
- रक्षा और Critical Minerals में सहयोग बढ़ाने का निर्णय इस बैठक का प्रमुख आकर्षण रहा।
- यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला दबाव में है, विशेषकर चीन द्वारा निर्यात नियंत्रण कड़े किए जाने के कारण।
- नामीबिया स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रौद्योगिकी के लिए आवश्यक खनिज संसाधनों से समृद्ध है।
- भारत के लिए यह सहयोग रणनीतिक निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक आर्थिक व सुरक्षा मजबूती सुनिश्चित करने की दिशा में अहम है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में सहयोग
- दोनों देशों ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
- शासन, डिजिटल भुगतान और सेवा वितरण में भारत के अनुभव को साझा करने से नामीबिया के विकास लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा।
- साथ ही स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और क्षमता निर्माण में सहयोग को पुनः पुष्टि की गई।
- यह भारत की विकास साझेदारी नीति को दर्शाता है, जो स्थानीय जरूरतों और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।


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