भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) ब्लॉक के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 1 अक्टूबर 2025 से आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा। यह समझौता न केवल बड़े आर्थिक लाभों का वादा करता है, बल्कि भारत के व्यापार इतिहास में पहली बार कानूनी रूप से बाध्यकारी सतत विकास प्रावधान (पर्यावरण, श्रम और मानवाधिकार से जुड़े) भी शामिल करता है।
EFTA ब्लॉक के सदस्य: आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्ज़रलैंड।
हस्ताक्षर तिथि: 10 मार्च 2024 (व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता – TEPA)।
15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश।
पहले 10 वर्षों में 50 अरब डॉलर और अगले 5 वर्षों में 50 अरब डॉलर।
भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन अपेक्षित।
भारत ने स्विट्ज़रलैंड को 2018–2023 (सोने को छोड़कर) की अवधि के 94.7% निर्यात पर बेहतर पहुँच दी।
इसमें औषधियाँ, मशीनरी, ऑप्टिकल उपकरण, घड़ियाँ, चॉकलेट और प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद शामिल हैं।
भारत ने स्विस घड़ियों, चॉकलेट तथा तराशे एवं पॉलिश किए हीरे पर शुल्क घटाया/समाप्त किया।
इस FTA की सबसे अनोखी विशेषता है सतत विकास ढांचा:
पर्यावरण संरक्षण, श्रम अधिकार और सामाजिक कल्याण से समझौता न करने का आश्वासन।
दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार, पर्यावरण और मानवाधिकार समझौतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
व्यापार संबंधों में पारदर्शिता और कानूनी निश्चितता को बढ़ावा मिलेगा।
पहली बार किसी व्यापार समझौते में इतनी बड़ी निवेश प्रतिबद्धता।
दीर्घकालिक पूंजी आकर्षित कर भारत में उद्योग और रोजगार को बढ़ावा।
दवाइयाँ, मशीनरी और प्रिसीजन उपकरण जैसे उच्च स्तरीय उत्पादों के वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की भागीदारी को मज़बूत करेगा।
भारत की व्यापार नीति को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ संरेखित करेगा।
भारत ने यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) किया।
EFTA देशों में स्विट्ज़रलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन शामिल हैं।
EFTA की स्थापना 1960 में स्टॉकहोम कन्वेंशन के तहत सात संस्थापक देशों द्वारा की गई थी।
EFTA का उद्देश्य अपने सदस्यों के बीच मुक्त व्यापार और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है।
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