विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप कल से लिवरपूल, यूनाइटेड किंगडम में शुरू होने जा रही है। यह पहली बार है जब इसे हाल ही में गठित नई शासी संस्था वर्ल्ड बॉक्सिंग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इस संस्करण की विशेषता यह है कि इतिहास में पहली बार पुरुष और महिला दोनों वर्गों की प्रतियोगिताएँ एक साथ आयोजित होंगी, जो इसे एक ऐतिहासिक आयोजन बनाती हैं। भारत इस चैंपियनशिप में अनुभवी चैंपियनों और नए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के मिश्रण के साथ उतर रहा है, जिसका उद्देश्य 2023 में मिले शानदार प्रदर्शन को दोहराना है।
साल 2023 भारत के लिए विश्व मुक्केबाज़ी में यादगार रहा।
महिला टीम ने नई दिल्ली में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में 4 स्वर्ण पदक जीते।
पुरुष टीम ने ताशकंद में 3 कांस्य पदक हासिल किए।
इन शानदार प्रदर्शनों ने नए सत्र की शुरुआत से पहले उम्मीदों को और ऊँचा कर दिया है।
भारतीय महिला टीम की कमान देश की सबसे सजी-धजी मुक्केबाज़ों के हाथों में है:
निकहत ज़रीन: दो बार की विश्व चैंपियन, जो 51 किग्रा वर्ग में वापसी कर रही हैं। इससे पहले वह 52 किग्रा और 50 किग्रा वर्ग में खिताब जीत चुकी हैं।
लवलीना बोरगोहेन: टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता और तीन बार की विश्व पदक विजेता, जो 75 किग्रा वर्ग में अपने खिताब की रक्षा करेंगी।
पूजा रानी: अनुभवी मुक्केबाज़, दो बार की एशियाई चैंपियन और हाल ही में जुलाई में वर्ल्ड कप की रजत पदक विजेता।
ये खिलाड़ी भारत की महिला टीम की रीढ़ हैं और पदक जीतने की सबसे मजबूत उम्मीदें इन्हीं से हैं।
भारत की पुरुष टीम इस बार अधिकतर युवा और अनुभवहीन खिलाड़ियों के साथ उतर रही है, हालांकि कुछ वरिष्ठ मुक्केबाज़ मार्गदर्शन करेंगे:
सुमित कुंडू: चोट के बाद वापसी कर रहे हैं और अपने अनुभव से टीम को मजबूती देंगे।
सचिन सिवाच: 2021 विश्व युवा चैंपियन, जिनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।
हर्ष चौधरी: पिछली विश्व चैंपियनशिप का अनुभव रखने वाले खिलाड़ी।
नवोदित मुक्केबाज़: जादुमणि सिंह मंडेंगबम, हितेश गुलिया और अभिनाश जमवाल अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को साबित करने की कोशिश करेंगे।
हालांकि चुनौतियाँ कठिन हैं, लेकिन यह प्रतियोगिता भारतीय पुरुष मुक्केबाज़ों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और खुद को स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगी।
आयोजन: विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप
स्थान: लिवरपूल, यूनाइटेड किंगडम
आयोजक: पहली बार नई शासी संस्था वर्ल्ड बॉक्सिंग के अंतर्गत
प्रारूप: इतिहास में पहली बार पुरुष और महिला प्रतियोगिताएँ एक साथ आयोजित होंगी।
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