फरवरी 2026 में भारत का सकल जीएसटी संग्रह ₹1.83 लाख करोड़ रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष (YoY) 8.1% की वृद्धि दर्शाता है। 1 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था में स्थिर गतिविधि और अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में बेहतर अनुपालन को दर्शाती है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 28 फरवरी तक कुल सकल जीएसटी राजस्व ₹20.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो 8.3% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।
फरवरी 2026 जीएसटी संग्रह: प्रमुख आंकड़े
- सकल जीएसटी राजस्व – ₹1.83 लाख करोड़
- वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि – 8.1%
- कुल रिफंड – ₹22,595 करोड़ (10.2% YoY वृद्धि)
- शुद्ध जीएसटी राजस्व – ₹1.61 लाख करोड़
रिफंड समायोजन के बाद सरकार को ₹1.61 लाख करोड़ का शुद्ध राजस्व प्राप्त हुआ।
FY26 में ₹20 लाख करोड़ का आंकड़ा पार
वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी के अंत तक कुल सकल जीएसटी संग्रह ₹20.27 लाख करोड़ रहा, जो 8.3% की वृद्धि दर्शाता है।
यह उपलब्धि संकेत देती है:
- मजबूत कर अनुपालन
- स्थिर उपभोक्ता मांग
- औपचारिक क्षेत्र की निरंतर वृद्धि
- डिजिटल कर रिपोर्टिंग में सुधार
वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले ₹20 लाख करोड़ का आंकड़ा पार करना भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।
घरेलू बनाम आयात जीएसटी रुझान
फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार:
- सकल घरेलू राजस्व – ₹1.36 लाख करोड़ (5.3% YoY वृद्धि)
- सकल आयात राजस्व – ₹47,837 करोड़ (17.2% YoY वृद्धि)
आयात राजस्व में 17.2% की तेज वृद्धि बढ़ते व्यापार और कर योग्य आयात में इजाफे का संकेत देती है, जबकि घरेलू जीएसटी वृद्धि 5.3% रही, जो संतुलित आंतरिक खपत को दर्शाती है। फरवरी के कुल जीएसटी संग्रह में आयात घटक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
रिफंड वृद्धि और शुद्ध राजस्व
फरवरी में कुल जीएसटी रिफंड ₹22,595 करोड़ रहा, जो 10.2% की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।
उच्च रिफंड सामान्यतः संकेत देते हैं:
- मजबूत निर्यात गतिविधि
- बेहतर रिफंड प्रसंस्करण
- व्यवसायों में बेहतर अनुपालन
रिफंड के बाद भी ₹1.61 लाख करोड़ का शुद्ध संग्रह मजबूत राजस्व स्थिति को दर्शाता है।
भारत की जीएसटी प्रणाली: एक संक्षिप्त परिचय
- वस्तु एवं सेवा कर परिषद (Goods and Services Tax Council) के मार्गदर्शन में संचालित जीएसटी प्रणाली जुलाई 2017 में लागू की गई थी।
- इसने कई अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर एकल कर व्यवस्था स्थापित की।
- जीएसटी राजस्व केंद्र और राज्यों के बीच साझा किया जाता है और यह सरकारी वित्त का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।


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