पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ का 94 साल की उम्र में निधन

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ का 07 जनवरी 2026 को उम्र संबंधी दिक्कतों के चलते 94 साल की उम्र में निधन हो गया।सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि पुरकायस्थ को कुछ दिन पहले उम्र संबंधी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां वो वेंटिलेटर पर थे। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो गया था। उनके बेटे कनाद पुरकायस्थ असम से राज्यसभा सांसद हैं।

पहली सरकार में संचार राज्य मंत्री

कबींद्र पुरकायस्थ 1998-99 के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की पहली सरकार में संचार राज्य मंत्री थे। वह पहली बार 1991 में सिलचर सीट से लोकसभा के लिए चुने गए थे। वह 1998 और 2009 में फिर से सांसद बने। 1931 में सिलहट के कमारखाल में जन्मे पुरकायस्थ असम की बराक घाटी में बीजेपी के एक कद्दावर नेता थे।

राजनीतिक यात्रा

प्रारंभिक जीवन एवं आरएसएस से जुड़ाव:

कबींद्र पुरकायस्थ 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े। राजनीति में आने से पहले वे शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे। बाद में उन्होंने उत्तर-पूर्व भारत में आरएसएस के प्रचारक (पूर्णकालिक कार्यकर्ता) के रूप में सेवाएँ दीं। उन्हें एक प्रखर बौद्धिक व्यक्तित्व, अनुशासित संगठनकर्ता और अनेक कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शक के रूप में जाना जाता था।

संसदीय करियर:

वे सिलचर लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सांसद निर्वाचित हुए—1991, 1998 और 2009 में। दशकों तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से संसद में उठाया और सिलचर की जनता से गहरा जुड़ाव बनाए रखा।

केंद्रीय मंत्री के रूप में भूमिका:

1998–1999 के दौरान, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने संचार मंत्रालय में राज्य मंत्री (MoS) के रूप में कार्य किया। इस अवधि में उन्होंने संचार अवसंरचना के विकास और विस्तार से जुड़े कार्यों में योगदान दिया।

मुख्य योगदान

राजनीतिक विरासत:

कबींद्र पुरकायस्थ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उन्होंने असम और समूचे उत्तर-पूर्व भारत में भाजपा के संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पार्टी के भीतर उन्हें एक बौद्धिक मार्गदर्शक और वैचारिक स्तंभ के रूप में सम्मान प्राप्त था। क्षेत्र में भाजपा की रणनीति, विस्तार और जनाधार निर्माण में उनके विचारों और प्रयासों का गहरा प्रभाव रहा।

सामाजिक कार्य:

राजनीति के साथ-साथ वे सामाजिक सरोकारों के प्रति भी गहराई से प्रतिबद्ध रहे। उन्होंने शरणार्थियों के पुनर्वास कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान दिया और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी विभिन्न पहलों पर कार्य किया। सामुदायिक कल्याण को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने समाज में सामाजिक एवं राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए।

 

 

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vikash

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