भारतीय पैरा एथलीट शैलेश कुमार ने विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। यह प्रतियोगिता नई दिल्ली में आयोजित हुई थी। शैलेश ने पुरुषों की हाई जंप T63 श्रेणी में 1.84 मीटर की छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया। हालांकि यह उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 1.91 मीटर से कम था, फिर भी उन्होंने इस प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त किया क्योंकि इससे उनके नए प्रतिस्पर्धी सत्र की अच्छी शुरुआत हुई है।
शैलेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप जीतने के बाद से उनके बाएं घुटने में दर्द बना हुआ था। इसी कारण उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम को सावधानीपूर्वक तैयार किया गया ताकि वे सुरक्षित तरीके से फिर से प्रतियोगिताओं में वापसी कर सकें। उनका लक्ष्य शुरुआत में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करना नहीं बल्कि धीरे-धीरे अपनी फिटनेस और फॉर्म हासिल करना था।
इस सत्र में शैलेश कुमार का मुख्य लक्ष्य एशियाई पैरा खेल है, जिसे भारतीय पैरा खिलाड़ियों के लिए खेल कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है। उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम को इसी प्रतियोगिता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रदर्शन में सुधार के लिए वे अपने टेक-ऑफ तकनीक पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उनका मानना है कि तकनीकी सुधार से वे अपने 1.91 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड को पार कर सकते हैं।
स्वर्ण पदक जीतने के बाद शैलेश ने कहा कि प्रतियोगिता में उतनी कड़ी चुनौती नहीं थी क्योंकि मरियप्पन थंगावेलु इसमें भाग नहीं ले सके। तीन बार के पैरालंपिक पदक विजेता मरियप्पन थंगावेलु फिटनेस समस्याओं के कारण प्रतियोगिता से हट गए थे। दोनों खिलाड़ी बेंगलुरु में साथ प्रशिक्षण लेते हैं। शैलेश के अनुसार मजबूत प्रतिद्वंद्वी के साथ प्रतिस्पर्धा करने से खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है और प्रतियोगिता का स्तर भी ऊँचा होता है।
नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में इस वर्ष 200 से अधिक भारतीय खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिससे यह देश में आयोजित सबसे बड़े पैरा एथलेटिक्स आयोजनों में से एक बन गया। यह प्रतियोगिता उन खिलाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो पैरा खेलों की आधिकारिक श्रेणियों में क्लासिफिकेशन प्राप्त करना चाहते हैं। इसके अलावा इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी रही, जिसमें रूस के 26 एथलीट शामिल हुए।
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