आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 भारत की अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण वार्षिक दस्तावेज़ है। इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। यह सर्वेक्षण वर्ष 2025–26 के दौरान आर्थिक प्रदर्शन की समीक्षा करता है और भविष्य की विकास रणनीति (रोडमैप) प्रस्तुत करता है। सर्वेक्षण में जीडीपी वृद्धि, मुद्रास्फीति, रोजगार, राजकोषीय स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन जैसे प्रमुख रुझानों पर प्रकाश डाला गया है, साथ ही आने वाले वर्षों में भारत के विकास से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों की भी व्याख्या की गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने इसे तैयार किया है। आर्थिक सर्वेक्षण में देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और भविष्य के दृष्टिकोण की व्यापक समीक्षा होती है। इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की अगली कार्यवाही अब पहली फरवरी रविवार को होगी। इस दिन केन्द्रीय बजट 2026-27 पेश किया जाएगा। बजट सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा। दूसरा चरण नौ मार्च से दो अप्रैल तक आयोजित होगा। बजट सत्र के दौरान 30 बैठकें होंगी।
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आर्थिक समीक्षा 2025-26 की खास बातें
- वित्त वर्ष 2025-26 में रियल जीडीपी ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि ग्रॉस वैल्यू ऐडेड(GVA) ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रह सकती है।
- केंद्र सरकार की आमदनी बढ़ी है और वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर यह जीडीपी के 9.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
- सेवा निर्यात में मजबूत बढ़त देखने को मिली है. वित्त वर्ष 2024-25 में यह 13.6 प्रतिशत बढ़कर 387.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
- प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत मार्च 2025 तक 55.02 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें से 36.63 करोड़ खाते गांव और छोटे शहरों में हैं।
- भारत की संभावित ग्रोथ क्षमता करीब 7 प्रतिशत आंकी गई है। वहीं वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
- साल 2024-25 में अनाज का उत्पादन बढ़कर 35.77 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से करीब 254 लाख टन ज्यादा है।
- नवीकरणीय ऊर्जा और सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
- सितंबर 2025 तक बैंकों का ग्रॉस NPA (Non-performing assets) घटकर 2.2 प्रतिशत रह गया है, जो कई सालों का सबसे निचला स्तर है।
- जनवरी 2026 तक ई श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से ज्यादा असंगठित मजदूरों का पंजीकरण हो चुका है, जिनमें 54 प्रतिशत महिलाएं हैं।
- वित्त वर्ष 2025-26 की पहली और दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का जीवीए क्रमशः 7.72 प्रतिशत और 9.13 प्रतिशत बढ़ा, जो उद्योग में सुधार का संकेत है।
- 16 जनवरी 2026 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 701.4 अरब डॉलर हो गया है, जो 11 महीने के आयात और 94 प्रतिशत बाहरी कर्ज के लिए काफी है।
- दिसंबर 2025 तक वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ नए डीमैट खाते जुड़े। अब कुल डीमैट खातों की संख्या 21.6 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। सितंबर 2025 तक निवेशकों की संख्या 12 करोड़ के पार पहुंच गई, जिनमें करीब 25 प्रतिशत महिलाएं हैं।
- साल 2005 से 2024 के बीच दुनिया के कुल सामान निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 1.8 प्रतिशत हो गई है, जो पहले एक प्रतिशत से भी कम थी।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 10 बड़ी परियोजनाओं से देश की घरेलू क्षमता मजबूत हुई है।
- भारत दुनिया में सबसे ज्यादा पैसा पाने वाला देश बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में विदेश से आने वाला पैसा बढ़कर 135.4 अरब डॉलर हो गया।
- अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान देश में औसत महंगाई 1.7 प्रतिशत रही, जो काफी काबू में मानी जा रही है।
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद दी जा चुकी है।
- बिजली वितरण कंपनियों के लिए बड़ा बदलाव आया है। वित्त वर्ष 2024-25 में डिस्कॉम ने पहली बार 2,701 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया।
- मनरेगा से जुड़ा विकसित भारत जी राम जी कार्यक्रम गांवों में रोजगार को 2047 के लक्ष्य के मुताबिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा सुधार माना गया है।
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं (PLI) के तहत 14 सेक्टरों में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है। इससे 18.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का उत्पादन हुआ और 12.6 लाख से ज्यादा नौकरियां बनी हैं।
- हाईवे और रेलवे नेटवर्क में बड़ी बढ़त हुई है. 2013-14 में जहां हाई स्पीड कॉरिडोर 550 किलोमीटर थे, वहीं दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर 5,364 किलोमीटर हो गए। वित्त वर्ष 2025-26 में 3,500 किलोमीटर नई रेलवे लाइन जोड़ी गई।
- भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट बन गया है। 2014 में जहां 74 एयरपोर्ट थे, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 164 हो गई है।


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