Categories: Schemes

छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 15 करोड़ रुपये जारी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 15.29 करोड़ रूपए की राशि जारी की। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल ने अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 73 वीं किश्त के रूप में 15 करोड़ 29 लाख रूपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की।

मुख्यमंत्री बघेल ने अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 73वीं किश्त के रूप में 15 करोड़ 29 लाख रूपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर इस वर्ष 14 से 31 जुलाई तक गौठानों में गोबर विक्रय करने वाले ग्रामीण पशुपालक किसानों को पांच करोड़ 60 लाख रूपए तथा गौठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को नौ करोड़ 69 लाख रूपए की राशि जारी की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत तीन वर्षों में गोधन न्याय योजना ने बड़ी सफलता हासिल की है। इस योजना को न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश भर में सराहा गया है।

 

541.66 करोड़ रूपए का भुगतान

राज्य में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को 541.66 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में अब 128.34 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी हो चुकी है, जिसमें से 125.54 लाख क्विंटल गोबर खरीदी के एवज में गोबर विक्रेताओं को 250.08 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। आज 5.60 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद गोबर खरीदी के एवज में अब तक राशि 255.68 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। गौठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को 257.29 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। आज 9.69 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 266.98 करोड़ रूपए हो गया है।

 

गोधन न्याय योजना: आर्थिक सशक्तिकरण एवं सतत उत्पादन

  • गौठानों के भीतर, महिला समूह कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त गाय के गोबर का उपयोग पर्याप्त मात्रा में वर्मी-कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट और विभिन्न अन्य उत्पादों का उत्पादन करने के लिए कर रहे हैं। बाद में इन सामानों को सहकारी समितियों के माध्यम से सरकारी विभागों और किसानों को कम कीमतों पर उपलब्ध कराया जाता है।
  • इन प्रयासों के अलावा, महिला समूह खाद के रूप में गाय के गोबर का उपयोग करने के साथ-साथ गाय-आधारित उत्पाद जैसे गाय का साँचा, दीया, अगरबत्ती और मूर्तियाँ बनाकर और बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।
  • ये समूह गौठानों के भीतर सब्जी और मशरूम की खेती, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मछली पालन और पशुपालन सहित विभिन्न आय-सृजन गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल हैं।

 

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुख्य बिंदु

  • पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री: गिरिराज सिंह

Find More News Related to Schemes & Committees

 

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहसिना किदवई का निधन

देश की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश की राजनीति का अहम…

6 hours ago

ब्लैंका व्लासिक वर्ल्ड 10K बेंगलुरु 2026 की ग्लोबल एम्बेसडर नियुक्त

मशहूर TCS वर्ल्ड 10k बेंगलुरु रेस (TCS World 10k Bengaluru race) 26 अप्रैल 2026 को…

6 hours ago

Bank of Baroda ने बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म ‘बॉब संवाद’ शुरू किया

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने अपने ग्राहकों के अनुभव को और बेहतर बनाने…

9 hours ago

INS सुनयना माले पहुंचा, भारत-मालदीव समुद्री सहयोग मजबूत

भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में एक…

10 hours ago

महाराष्ट्र में नई हेल्थ पहल: ‘मेरा गांव, स्वस्थ गांव’ योजना शुरू

विश्व स्वास्थ्य दिवस के विशेष अवसर पर 07 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण…

10 hours ago

मार्च 2026 में भारत के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गुरुग्राम शीर्ष पर

भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है, और एक नई रिपोर्ट ने…

11 hours ago