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क्या कर्नाटक का नया बोर्ड भारत में गिग श्रमिकों की सुरक्षा को नई दिशा दे सकता है?

कर्नाटक सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक समर्पित कल्याण बोर्ड को अधिसूचित किया है। यह निर्णय लंबे समय से चर्चा में रहे कानून को जमीन पर लागू करता है और गिग अर्थव्यवस्था में सामाजिक सुरक्षा के लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार करता है। ऐप-आधारित काम के तेजी से विस्तार के बीच, इस पहल को श्रम सुधारों के क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह बोर्ड पंजीकरण, कल्याण कोष और लाभों के वितरण की निगरानी करेगा, ताकि गिग श्रमिकों को पहचान, सुरक्षा और संस्थागत समर्थन मिल सके।

समाचार में क्यों?

कर्नाटक ने वैधानिक गिग वर्कर्स वेलफेयर डेवलपमेंट बोर्ड को अधिसूचित किया है। इससे वर्ष 2025 में पारित गिग श्रमिक सामाजिक सुरक्षा कानून का क्रियान्वयन शुरू हो गया है।

गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड क्या है?

  • कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण विकास) अधिनियम, 2025 के तहत इस बोर्ड का गठन किया है।
  • यह नीति-स्तरीय मंशा से आगे बढ़कर वास्तविक कार्यान्वयन की ओर कदम है।
  • यह बोर्ड ऐप-आधारित और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए कल्याण योजनाओं को संस्थागत रूप देगा तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की रूपरेखा, प्रबंधन और निगरानी करेगा।
  • कर्नाटक इस तरह का वैधानिक निकाय बनाने वाले शुरुआती राज्यों में शामिल है, जो अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है।

बोर्ड की संरचना और गठन

  • बोर्ड एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक ढांचे पर आधारित है।
  • कर्नाटक के श्रम मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होंगे।
  • श्रम विभाग, आईटी विभाग और वाणिज्यिक कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
  • एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सदस्य-सचिव के रूप में दैनिक कार्यों का संचालन करेगा।
  • यह संरचना नीति-निर्धारण और प्रशासनिक निरंतरता दोनों सुनिश्चित करती है।

श्रमिकों और प्लेटफॉर्म का प्रतिनिधित्व

  • बोर्ड में त्रिपक्षीय प्रतिनिधित्व मॉडल अपनाया गया है।
  • चार सदस्य गिग श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिन्हें फूड डिलीवरी और ऐप-आधारित परिवहन श्रमिक संघों से नामित किया जाएगा।
  • चार सदस्य एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म जैसे Zomato, Uber, Porter और Amazon का प्रतिनिधित्व करेंगे।
  • AITUC और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर यूनियनों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
  • इस संतुलित ढांचे का उद्देश्य सरकार, श्रमिकों और प्लेटफॉर्म्स के बीच संवाद और सामूहिक निर्णय को बढ़ावा देना है।

पंजीकरण और कल्याण कोष व्यवस्था

  • बोर्ड के गठन के साथ ही एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म और गिग श्रमिकों दोनों का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
  • प्लेटफॉर्म कंपनियों को अपने साथ जुड़े श्रमिकों का विवरण 45 दिनों के भीतर जमा करना होगा।
  • प्रत्येक पंजीकृत श्रमिक को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी, जिसके माध्यम से सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान किए जाएंगे।
  • कल्याण कोष का निर्माण प्लेटफॉर्म से लिए जाने वाले शुल्क, श्रमिक योगदान और राज्य व केंद्र सरकार की अनुदान राशि से किया जाएगा। इससे पारदर्शिता और लाभ वितरण की ट्रैकिंग सुनिश्चित होगी।

कल्याण शुल्क और भविष्य की समीक्षा

  • कर्नाटक ने एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर 1% से 1.5% तक का कल्याण शुल्क लगाने का निर्णय लिया है, जिसमें क्षेत्र-वार सीमा तय की गई है।
  • श्रम मंत्री संतोष लाड के अनुसार यह दर जानबूझकर कम रखी गई है ताकि प्लेटफॉर्म पर अचानक वित्तीय दबाव न पड़े।
  • हालांकि, कानून में इसे 5% तक बढ़ाने का प्रावधान है यदि कोष अपर्याप्त पाया जाता है।
  • अधिकारियों ने संकेत दिया है कि कोष की पर्याप्तता और लाभों के दायरे के आधार पर शुल्क दर की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
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