केंद्र सरकार ने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक बड़ा वित्तीय निर्णय लिया है। 21 जनवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्मॉल इंडस्ट्रीज़ डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) में ₹5,000 करोड़ के इक्विटी निवेश (Equity Infusion) को मंजूरी दी। इस कदम का उद्देश्य SIDBI की पूंजी आधार को सुदृढ़ करना, एमएसएमई को ऋण उपलब्धता बढ़ाना, सस्ती वित्तीय पहुँच सुनिश्चित करना और देशभर में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना है।
क्यों चर्चा में?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने SIDBI में ₹5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य एमएसएमई ऋण प्रवाह को बढ़ाना और बढ़ती ऋण मांग के बीच SIDBI की पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) बनाए रखना है।
SIDBI पर कैबिनेट का निर्णय
- SIDBI की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए इक्विटी समर्थन को मंजूरी।
- SIDBI भारत में एमएसएमई क्षेत्र की प्रमुख वित्तीय संस्था है, जो बैंकों, NBFCs और MFIs को पुनर्वित्त (Refinancing) उपलब्ध कराती है।
- इस निवेश से SIDBI एमएसएमई को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में प्रतिस्पर्धी दरों पर ऋण दे सकेगा।
- स्टार्टअप, डिजिटल लेंडिंग और समावेशी विकास पर बढ़ते फोकस के बीच यह कदम SIDBI को आने वाले वर्षों में मजबूत बनाए रखेगा।
₹5,000 करोड़ इक्विटी निवेश की संरचना
- यह निवेश वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
- FY26 में ₹3,000 करोड़ का निवेश ₹568.65 प्रति शेयर के बुक वैल्यू पर।
- शेष ₹2,000 करोड़ FY27 और FY28 में ₹1,000 करोड़ की दो समान किस्तों में।
- यह चरणबद्ध रणनीति वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए SIDBI की पूंजी को क्रमिक रूप से मजबूत करेगी।
एमएसएमई ऋण और पहुँच पर प्रभाव
- FY25 में 76.26 लाख एमएसएमई से बढ़कर FY28 तक लगभग 1.02 करोड़ एमएसएमई को वित्तीय सहायता मिलने की संभावना।
- इससे लगभग 25.74 लाख अतिरिक्त एमएसएमई को औपचारिक ऋण प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
- इससे छोटे व्यवसायों को विस्तार, तकनीक अपनाने और कार्यशील पूंजी में मदद मिलेगी तथा अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता घटेगी।
रोजगार सृजन से जुड़ा प्रभाव
- सितंबर 2025 तक लगभग 6.90 करोड़ एमएसएमई, 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहे थे।
- अनुमान है कि SIDBI के बढ़े हुए ऋण समर्थन से FY28 तक लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार सृजित हो सकते हैं।
- इस प्रकार यह निर्णय केवल वित्तीय नहीं, बल्कि रोजगार और समावेशी विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है।
SIDBI को अधिक पूंजी की आवश्यकता क्यों?
- अगले पाँच वर्षों में SIDBI की जोखिम-भारित परिसंपत्तियाँ (Risk-Weighted Assets) तेज़ी से बढ़ने की संभावना है।
- कारण: निर्देशित ऋण में वृद्धि, डिजिटल व बिना गारंटी ऋण उत्पादों का विस्तार, और स्टार्टअप्स को वेंचर डेट।
- पर्याप्त पूंजी SIDBI की वित्तीय स्थिरता और क्रेडिट रेटिंग बनाए रखने में मदद करेगी, जिससे वह बाज़ार से कम ब्याज दरों पर धन जुटा सकेगा।
स्मॉल इंडस्ट्रीज़ डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI)
| विषय | विवरण |
| SIDBI का परिचय | भारत में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र के संवर्धन, वित्तपोषण और विकास के लिए प्रमुख वित्तीय संस्था |
| मुख्य फोकस | Micro, Small और Medium Enterprises (MSMEs) |
| स्थापना | 2 अप्रैल 1990 |
| कानूनी स्थिति | भारतीय संसद के अधिनियम के तहत स्थापित |
| प्रारंभिक संरचना | प्रारंभ में IDBI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी |
| वर्तमान स्वामित्व | भारत सरकार तथा 22 अन्य केंद्र सरकार नियंत्रित संस्थान, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) और बीमा कंपनियाँ |
| प्रशासनिक नियंत्रण | वित्त मंत्रालय, भारत सरकार |
| मुख्यालय | लखनऊ, उत्तर प्रदेश |
| मुख्य उद्देश्य | एमएसएमई क्षेत्र का संवर्धन, वित्तपोषण और विकास |
| प्रमुख कार्य | एमएसएमई वित्तपोषण से जुड़े संस्थानों की गतिविधियों का समन्वय |
| एमएसएमई को समर्थन | • वृद्धि और विस्तार • विपणन (Marketing) • प्रौद्योगिकी विकास एवं व्यावसायीकरण • नवाचार और उद्यमिता |


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