अज़रबैजान और आर्मेनिया ने व्हाइट हाउस शिखर सम्मेलन में ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए

काकेशस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक सफलता में, अज़रबैजान और आर्मेनिया के नेताओं ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे विवादित नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र को लेकर दशकों से चली आ रही दुश्मनी का औपचारिक अंत हो गया। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मेज़बानी में हुई। इस समझौते का उद्देश्य लड़ाई को “हमेशा के लिए” समाप्त करना और दोनों देशों के बीच स्वतंत्र यात्रा, व्यापार तथा कूटनीतिक संबंधों का मार्ग प्रशस्त करना है।

अज़रबैजानी राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पशिनियन ने हस्ताक्षर के बाद हाथ मिलाया। ट्रम्प ने इस अवसर को “काफी समय से प्रतीक्षित” और “ऐतिहासिक” करार दिया।

पृष्ठभूमि: दशकों का संघर्ष
अज़रबैजान–आर्मेनिया संघर्ष की जड़ें 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में हैं, जब दोनों देशों ने नागोर्नो-काराबाख को लेकर एक खूनी युद्ध लड़ा था—यह अज़रबैजान के क्षेत्र में स्थित एक जातीय रूप से आर्मेनियाई बहुल एन्क्लेव है। 1994 में युद्धविराम होने के बावजूद, आने वाले वर्षों में हिंसा बार-बार भड़कती रही, और 2020 के दशक की शुरुआत तक भी कई घातक झड़पें हुईं।

हालिया वार्ताओं में सबसे बड़ी अड़चन नख़चिवान कॉरिडोर रही है—एक ऐसा मार्ग जो मुख्यभूमि अज़रबैजान को उसके स्वायत्त नख़चिवान एन्क्लेव से जोड़ेगा, जो आर्मेनियाई क्षेत्र द्वारा अलग-थलग है। अज़रबैजान लंबे समय से इस परिवहन संपर्क की मांग करता रहा है, जबकि आर्मेनिया इस पर नियंत्रण बनाए रखने पर अड़ा रहा।

शांति समझौते की प्रमुख शर्तें
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते में शामिल हैं—

  • दोनों देशों के बीच सभी लड़ाइयों का स्थायी अंत।

  • प्रमुख परिवहन मार्गों का पुनः उद्घाटन, जिसमें अज़रबैजान और नख़चिवान के बीच एक नया ट्रांज़िट कॉरिडोर भी शामिल है।

  • व्यापार, यात्रा और कूटनीतिक संबंधों के विस्तार के लिए संयुक्त प्रयास।

  • कॉरिडोर के निर्माण में अमेरिकी सहायता, जिसे आधिकारिक तौर पर “ट्रम्प रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पेरिटी” नाम दिया गया है।

यह कॉरिडोर पहले भी वार्ताओं में विवाद का केंद्र रहा है। राष्ट्रपति अलीयेव ने एक समय इसे बलपूर्वक कब्ज़े में लेने की धमकी दी थी, लेकिन नए समझौते के तहत इसका निर्माण संयुक्त निगरानी और अमेरिकी सहभागिता के साथ होगा, जिससे दोनों देशों के हित सुरक्षित रहेंगे।

अमेरिकी कूटनीति और भू-राजनीतिक बदलाव
यह शांति समझौता एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है। एक सदी से भी अधिक समय से रूस—और हाल के वर्षों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन—अज़रबैजान–आर्मेनिया संघर्ष में मुख्य मध्यस्थ रहे हैं। दोनों देशों के बीच पिछला बड़ा समझौता भी मास्को की मध्यस्थता में हुआ था।

हालाँकि, इस नए अमेरिकी-नेतृत्व वाले समझौते में रूस को काफी हद तक नज़रअंदाज़ कर दिया गया है। अज़रबैजान और आर्मेनिया दोनों ने रूसी प्रस्तावों को ठुकराकर अमेरिकी-प्रायोजित समाधान को चुना, जिससे काकेशस क्षेत्र में वॉशिंगटन का प्रभाव मज़बूत हुआ है।

यह घोषणा ऐसे समय आई है जब ट्रम्प अगले हफ़्ते अलास्का में पुतिन से मिलने वाले हैं, जिससे इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में और भी दिलचस्पी बढ़ गई है।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

आकासा एयर IATA का हिस्सा बनने वाली भारत की 5वीं एयरलाइन बनी

भारत की सबसे नई एयरलाइन आकासा एयर, जिसकी स्थापना वर्ष 2020 में हुई थी, अब…

1 day ago

स्काईडो को RBI से मिला PA‑CB लाइसेंस

भारत के फिनटेक इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण नियामकीय उपलब्धि के रूप में स्काईडो (Skydo)…

1 day ago

विश्व हिंदी दिवस 2026: तारीख, इतिहास, महत्व, थीम

विश्व हिंदी दिवस हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हिंदी भाषा…

1 day ago

ऑस्कर 2026: 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स में बेस्ट पिक्चर के लिए पांच भारतीय फिल्में क्वालीफाई

98वें अकादमी पुरस्कार, जिन्हें ऑस्कर 2026 के नाम से भी जाना जाता है, में पाँच…

1 day ago

मिशन सुदर्शन चक्र: भारत के ड्रोन डिफेंस को मज़बूत बनाना

भारत ने उभरते हवाई खतरों, विशेषकर शत्रुतापूर्ण ड्रोन से निपटने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र…

2 days ago

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिए ‘आशा वैन’ मोबाइल यूनिट लॉन्च की

गुजरात ने निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते…

2 days ago