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मिजोरम विधानसभा ने मिजो भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया

मिजोरम विधान सभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें मिजो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव राज्य के शिक्षा मंत्री वनलालथलाना द्वारा पेश किया गया था और विधानसभा के सभी सदस्यों ने इसका समर्थन किया। यह कदम मिजो भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक मान्यता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

आठवीं अनुसूची में मिजो भाषा शामिल करने का प्रस्ताव

विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मिज़ो भाषा विकास बोर्ड के प्रयासों की सराहना की, जिसने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की पहल की थी। इस बोर्ड ने प्रस्ताव को विधानसभा में पेश करने से पहले विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श भी किया था। प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया जाना यह दर्शाता है कि मिजोरम में राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच इस मुद्दे पर व्यापक सहमति है। यह राज्य की मिजो भाषा और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे को लेकर चिंताओं का समाधान

विधानसभा के कुछ सदस्यों ने यह चिंता जताई थी कि यदि मिजो भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया तो इससे मिजो समुदाय के अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे पर प्रभाव पड़ सकता है। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसी आशंकाएँ निराधार हैं। उन्होंने बताया कि मिजो समुदाय को अनुसूचित जनजाति आदेश, 1950 के तहत अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह कानूनी स्थिति यथावत बनी रहेगी। इसलिए मिजो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने से उनके जनजातीय दर्जे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

पूरे मिजोरम को छठी अनुसूची क्षेत्र बनाने का सुझाव

भाषा के मुद्दे पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि पूरे मिजोरम को संविधान की भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि Meghalaya में इसी तरह की व्यवस्था लागू है, जहां पूरे राज्य में छठी अनुसूची के प्रावधान लागू हैं। ऐसा कदम स्थानीय शासन को मजबूत करने के साथ-साथ आदिवासी समुदायों के सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक हितों की रक्षा करने में मदद कर सकता है।

आठवीं अनुसूची में शामिल होने का महत्व

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्तमान में 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है। इस सूची में शामिल भाषाओं को उनके विकास और संवर्धन के लिए सरकारी सहयोग मिलता है। यदि मिजो भाषा को भी इसमें शामिल किया जाता है, तो इससे शैक्षणिक शोध, अनुवाद कार्य, सरकारी परीक्षाओं और प्रशासनिक संचार में इसके उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह मिजो भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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