अपर्णा गर्ग ने रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) का पदभार संभाला

भारतीय रेल लेखा सेवा (IRAS) की 1987 बैच की वरिष्ठ अधिकारी अर्पणा गर्ग ने 1 दिसंबर 2025 को औपचारिक रूप से रेलवे बोर्ड की सदस्य (वित्त) के रूप में पदभार ग्रहण किया। यह पद भारतीय रेल के शीर्ष प्रशासनिक पदों में से एक है। 36 से अधिक वर्षों की सेवा के साथ वे सार्वजनिक वित्त, रेल संचालन और परिवहन नीति की व्यापक समझ लेकर आती हैं। उनकी नियुक्ति उन्हें दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क की वित्तीय कमान पर स्थापित करती है, जहाँ वित्तीय अनुशासन, रणनीतिक बजटिंग और पूंजी निवेश—रेल अवसंरचना के विस्तार और परिचालन दक्षता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

पृष्ठभूमि और कैरियर उपलब्धियाँ

सुश्री गर्ग ने भारतीय रेल तंत्र में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM), मैसूर

  • प्रिंसिपल फाइनेंशियल एडवाइज़र, रेल व्हील फैक्टरी

  • डायरेक्टर जनरल, इंडियन रेलवेज़ इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (IRIFM)

ये सभी पद उनकी संचालन संबंधी और वित्तीय समझ को दर्शाते हैं, जिसमें क्षेत्रीय आवश्यकताओं, औद्योगिक ढांचे और संस्थागत प्रबंधन का संतुलन दिखाई देता है।

शैक्षणिक उत्कृष्टता और अंतरराष्ट्रीय अनुभव

अर्पणा गर्ग न केवल एक प्रखर प्रशासक हैं, बल्कि वे मजबूत शैक्षणिक योग्यता और अंतरराष्ट्रीय exposure रखती हैं—

  • चीवनिंग फ़ैलो — यूके सरकार की प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति

  • यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीड्स, यूके से ट्रांसपोर्ट इकोनॉमिक्स में एडवांस्ड मास्टर्स डिग्री

  • विश्व-स्तरीय संस्थानों से प्रबंधन और नेतृत्व प्रशिक्षण, जैसे—

    • बोकोनी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, मिलान

    • इंसिआड (INSEAD), सिंगापुर

    • इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस (ISB), हैदराबाद

उनकी शैक्षणिक विशेषज्ञता भारतीय रेल की बदलती जरूरतों—PPP मॉडल, आधुनिकीकरण और वित्तीय स्थिरता—से पूरी तरह मेल खाती है।

नियुक्ति का महत्व

रेलवे बोर्ड की सदस्य (वित्त) के रूप में अब वे निम्न प्रमुख जिम्मेदारियों का नेतृत्व करती हैं—

  • बजट निर्माण और व्यय नियंत्रण

  • निवेश नियोजन और मूल्यांकन

  • संसाधन जुटाना, जिनमें अतिरिक्त-बजटीय वित्त भी शामिल

  • मेक इन इंडिया, पीएम गतिशक्ति और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप वित्तीय नीतियाँ

उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय रेल बड़े पैमाने पर परिवर्तन कर रही है—अवसंरचना उन्नयन, ग्रीन एनर्जी पहल, हाई-स्पीड रेल और डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। ऐसे दौर में वैश्विक दृष्टिकोण और जमीनी अनुभव वाली नेतृत्व क्षमता प्रभावी वित्तीय रणनीति और जोखिम प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

₹9.13 लाख करोड़ का यूपी बजट 2026–27 पेश, विकास पर विशेष फोकस

उत्तर प्रदेश सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026–27 के लिए ₹9.13 ट्रिलियन का बजट पेश किया…

17 hours ago

स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती 2026: समाज सुधार के अग्रदूत को श्रद्धापूर्वक स्मरण

भारत में स्वामी दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती मनाई जा रही है। वे एक महान…

18 hours ago

अदानी पावर की नई पहल: परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश, बनी ‘Adani Atomic Energy Ltd’

अदानी पावर ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश करते हुए एक नई सहायक कंपनी Adani…

19 hours ago

किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा: सहकारी क्षेत्र में शुरू हुई विश्व की सबसे बड़ी ग्रेन स्टोरेज योजना

भारत सरकार ज़मीनी स्तर पर डीसेंट्रलाइज़्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए कोऑपरेटिव सेक्टर…

19 hours ago

श्वेत क्रांति 2.0: भारत के डेयरी क्षेत्र को बदलने के लिए सहकारी प्रयास

भारत सरकार ने श्वेत क्रांति 2.0 की शुरुआत की है, जो देश के डेयरी क्षेत्र…

1 day ago

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद 68वीं राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह 2026 का आयोजन करेगी

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) 12 फरवरी 2026 को अपना 68वाँ स्थापना दिवस मनाएगी। इसके साथ…

1 day ago