भारत के अंतरिक्ष अवसंरचना नेटवर्क का और विस्तार होने जा रहा है, क्योंकि आंध्र प्रदेश सरकार ने एक नए स्पेसपोर्ट की घोषणा की है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पुष्टि की है कि होप आइलैंड (Hope Island) पर एक लॉन्च सुविधा स्थापित की जाएगी, जो मुख्य रूप से निजी (प्राइवेट) अंतरिक्ष मिशनों के लिए होगी। यह कदम वाणिज्यिक अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्यों चर्चा में?
आंध्र प्रदेश सरकार ने होप आइलैंड में नया स्पेसपोर्ट स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। यह घोषणा मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा 17 जनवरी 2026 को की गई, जिसका उद्देश्य मुख्य रूप से निजी लॉन्च सेवा प्रदाताओं को समर्थन देना है।
होप आइलैंड स्पेसपोर्ट : प्रमुख बिंदु
- होप आइलैंड में प्रस्तावित स्पेसपोर्ट, आंध्र प्रदेश की व्यापक स्पेस सिटी पहल का हिस्सा है।
- यह स्पेसपोर्ट मुख्य रूप से वाणिज्यिक और निजी लॉन्च मिशनों के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।
- इसका उद्देश्य मौजूदा राष्ट्रीय लॉन्च सुविधाओं को पूरक (complement) बनाना है।
- यह छोटे और मध्यम क्षमता (Small & Medium Lift) वाले प्रक्षेपण यानों पर केंद्रित होगा।
हालांकि अभी तक समय-सीमा और तकनीकी विवरण साझा नहीं किए गए हैं, लेकिन यह घोषणा भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को राज्य स्तर पर मजबूत समर्थन का संकेत देती है।
भारत में स्पेसपोर्ट्स का बढ़ता नेटवर्क
- होप आइलैंड स्पेसपोर्ट के साथ भारत के पास जल्द ही तीन स्पेसपोर्ट होंगे।
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा) – भारत का प्रमुख राष्ट्रीय लॉन्च केंद्र।
- कुलसेकरपट्टिनम SSLV लॉन्च कॉम्प्लेक्स – छोटे उपग्रहों को ध्रुवीय कक्षा में प्रक्षेपित करने के लिए विकसित किया जा रहा है।
- होप आइलैंड स्पेसपोर्ट – निजी और वाणिज्यिक लॉन्च मिशनों पर केंद्रित।
- यह विविधीकरण विभिन्न प्रकार के मिशनों को अधिक कुशलता से संचालित करने में मदद करेगा।
निजी लॉन्च मिशनों को बढ़ावा
- नया स्पेसपोर्ट भारत के बदलते अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है।
- लॉन्च व्हीकल विकास में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी।
- छोटे उपग्रह प्रक्षेपण की बढ़ती मांग।
- एक ही लॉन्च साइट पर निर्भरता में कमी।
- यह सुविधा स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों को समर्थन देगी और भारत की उस नीति के अनुरूप है, जिसमें अंतरिक्ष क्षेत्र को गैर-सरकारी खिलाड़ियों के लिए खोला गया है।
लॉन्च स्थलों के लिए स्थान का महत्व
- रॉकेट प्रक्षेपण में भौगोलिक स्थिति की अहम भूमिका होती है।
- पृथ्वी का पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन पूर्व दिशा में प्रक्षेपण को अतिरिक्त गति प्रदान करता है।
- भूमध्य रेखा के निकट स्थित स्थानों से प्रक्षेपण में ईंधन की खपत कम होती है।
- भारत का पूर्वी तट इस दृष्टि से रणनीतिक लाभ प्रदान करता है।
- होप आइलैंड का स्थान विशेष कक्षीय आवश्यकताओं के लिए प्रक्षेपण दक्षता को अनुकूलित करने में सहायक माना जा रहा है।
होप आइलैंड (Hope Island) : संक्षिप्त जानकारी
| शीर्षक | विवरण |
| स्थान | • छोटा, टैडपोल (tadpole) आकार का द्वीप • काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) के तट के समीप स्थित • बंगाल की खाड़ी में स्थित |
| निर्माण (उत्पत्ति) | • अपेक्षाकृत नया द्वीप • 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में बना • गोदावरी नदी की वितरिका कोरिंगा नदी द्वारा लाए गए अवसादों (sediments) से निर्मित |
| भौगोलिक महत्व | • उत्तरी सिरा “गोदावरी प्वाइंट” के नाम से जाना जाता है • निम्न क्षेत्रों को देखता है – – काकीनाडा खाड़ी का प्रवेश द्वार – काकीनाडा बंदरगाह |
| पारिस्थितिक महत्व | • रेतीले तट ऑलिव रिडले कछुओं (संवेदनशील प्रजाति) के अंडे देने का प्रमुख स्थल • कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य के निकट स्थित • तटीय एवं समुद्री जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका |


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