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IAS, IPS, IFOS पेंशनभोगियों के सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित संशोधित नियम

केंद्र सरकार ने IAS, IPS (भारतीय पुलिस सेवा) और IFO (भारतीय वन सेवा) पेंशनभोगियों के सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम 1958 में संशोधन किया है। नियम 1958 को कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT) द्वारा नियम 2023 में संशोधित किया गया था। यह मुख्य रूप से सेवानिवृत्त खुफिया या सुरक्षा से संबंधित संगठनों पर केंद्रित है।

 

नियम 2023 द्वारा परिवर्तन:

  • केंद्र सरकार स्वयं IAS, IPS और IFos के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा राज्य सरकार के संदर्भ के बिना भी उनकी पेंशन रोकने या वापस लेने का अधिकार रखती है यदि वे गंभीर कदाचार या अपराध के लिये दोषी पाए जाते हैं।
  • संशोधित नियम दर्शाते हैं कि पेंशन रोकने या वापस लेने पर केंद्र सरकार का निर्णय “अंतिम होगा”।
  • इन जोड़े गए नियमों में ‘गंभीर कदाचार’ में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम में उल्लिखित किसी दस्तावेज़ या जानकारी का संचार या प्रकटीकरण शामिल है तथा ‘गंभीर अपराध’ में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत अपराध से संबंधित कोई भी अपराध शामिल है।
  • अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 में पहले नियम 3(3) में कहा गया था कि केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकार के संदर्भ पर पेंशन या उसके किसी भी हिस्से को रोक या वापस ले सकती है।
  • खुफिया या सुरक्षा-संबंधी संगठनों के सदस्य, जिन्होंने ऐसी क्षमताओं में सेवा की है, अपने संबंधित संगठन के प्रमुख से पूर्व मंज़ूरी प्राप्त किये बिना कोई लेख नहीं लिखेंगे या प्रकाशित करेंगे।

 

नियमों में बदलाव का असर:

  • गंभीर कदाचार के दोषी या अदालत द्वारा गंभीर अपराध के दोषी पाए गए पेंशनभोगी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिये केंद्र को राज्य सरकार के संदर्भ का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।
  • ऐसे मामलों में संबंधित राज्य सरकार के संदर्भ के बिना भी केंद्र सरकार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
  • सुरक्षा और खुफिया संगठनों के अधिकारियों द्वारा मीडिया में संवेदनशील जानकारी प्रदान करने तथा किताबों में उनके बारे में लिखने पर संबंधित सुरक्षा एवं खुफिया संगठनों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
  • प्रस्तावित संशोधन नौकरशाही पर राज्य के राजनीतिक नियंत्रण को कमज़ोर कर देगा।
  • यह प्रभावी शासन को बाधित करेगा और परिहार्य कानूनी तथा प्रशासनिक विवाद पैदा करेगा। क्योंकि संशोधित नियम केंद्र सरकार को सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अप्रतिबंधित शक्ति प्रदान करेंगे।

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vikash

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