केंद्र सरकार ने 8 नई राष्ट्रीय हाई-स्पीड रोड कॉरिडोर परियोजना को दी मंजूरी

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भारत सरकार ने देश की वर्तमान और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए आठ नए राष्ट्रीय हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजनाओं के निर्माण को मंजूरी दे दी है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 2 अगस्त 2024 को नई दिल्ली में हुए एक बैठक में आठ नए राष्ट्रीय हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी।

बयान के मुताबिक, इन आठ परियोजनाओं के का र्यान्वयन से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से लगभग 4.42 करोड़ मानव दिवस रोजगार सृजित होंगे। मंत्रिमंडल की स्वीकृति पाने वाली परियोजनाओं में छह लेन का आगरा-ग्वालियर राष्ट्रीय हाई-स्पीड गलियारा, चार लेन का खड़गपुर-मोरग्राम राष्ट्रीय हाई-स्पीड गलियारा और छह लेन का थराद-डीसा-मेहसाणा-अहमदाबाद राष्ट्रीय हाई-स्पीड गलियारा शामिल है।

50,655 करोड़ रुपये की परियोजना

नव स्वीकृत आठ राष्ट्रीय हाई-स्पीड रोड कॉरिडोर परियोजनाओं की कुल लागत 50,655 करोड़ रुपये है और देश भर में कुल 936 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इन आठ परियोजनाओं से 4.42 करोड़ मानव दिवस रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है।

स्वीकृत राष्ट्रीय हाई-स्पीड रोड कॉरिडोर

केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत कुल आठ सड़क परियोजनाओं में से एक परियोजना 8 लेन, तीन 6 लेन और 4 चार लेन सड़क परियोजनाएं हैं। इन परियोजनाओं से देश में कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने और देश की आर्थिक वृद्धि में सहायता मिलने की उम्मीद है।

8 लेन सड़क परियोजनाएँ

नासिक फाटा – खेड़ एलिवेटेड रोड कॉरिडोर- 7,827 करोड़ रुपये की लागत से 30 किमी लंबी सड़क का निर्माण महाराष्ट्र के पुणे शहर के पास।

6 लेन सड़क परियोजनाएँ

आगरा-ग्वालियर परियोजना –4.613 करोड़ रुपये की लागत से 88 किमी लंबी परियोजना। इस गलियारे से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी में सुधार होने की उम्मीद है।

थराद – दीसा – मेहसाणा – अहमदाबाद- 214 किलोमीटर लंबी और लागत 10,534 करोड़ रुपये । यह गलियारा गुजरात-अमृतसर-जामनगर गलियारे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। यह मालवाहक वाहनों को महाराष्ट्र के प्रमुख बंदरगाहों (जेएनपीटी, मुंबई और नव-स्वीकृत वधावन बंदरगाह) तक पहुंचने के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

कानपुर रिंग रोड – 3,298 करोड़ रुपये की लागत से 47 किमी लंबी सड़क।

4 लेन सड़क परियोजनाएँ

उत्तर प्रदेश में अयोध्या रिंग रोड 3,935 करोड़ रुपये की लागत से 68 किमी लंबी सड़क। इससे शहर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़ कम हो जाएगी।

पश्चिम बंगाल में खड़गपुर-मोरेग्राम रोड-10,247 करोड़ रुपये की लागत 231 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण । इससे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और उत्तर-पूर्व के बीच कनेक्टिविटी में सुधार होने की उम्मीद है।

रायपुर-रांची कॉरिडोर का पत्थलगांव और गुमला खंड -4,473 करोड़ रुपये की लागत से 137 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण। यह सड़क परियोजना धनबाद, गुमला, लोहरदगा, रायगढ़ और कोरबा में खनन क्षेत्रों और बोकारो में स्थित औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी में सुधार करेगी। ,धनबाद, रायपुर, दुर्ग, कोरबा और बिलासपुर।

असम में उत्तरी गुवाहाटी बाईपास -5,729 करोड़ रुपये की लागत से 121 किलोमीटर लंबी सड़क । इस परियोजना में असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर एक पुल का निर्माण भी शामिल है।

भारत में सड़क नेटवर्क

भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। राज्य राजमार्गों, जिला सड़कों, ग्रामीण सड़कों आदि के विकास के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।
निम्नलिखित सभी आंकड़े केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 2022-23 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद, भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। 31 दिसंबर 2022 तक भारत में कुल सड़क नेटवर्क 63.32 लाख किमी था।
कुल सड़क नेटवर्क में से राष्ट्रीय राजमार्ग 1,44,955 किमी था और बाकी राज्य सड़कें, जिला सड़कें और गांव की सड़कें हैं।

31 मार्च, 2019 तक, देश में कुल सड़क नेटवर्क में राष्ट्रीय राजमार्गों का हिस्सा 2.09 प्रतिशत , राज्य राजमार्गों का हिस्सा 2.84 प्रतिशत था, ग्रामीण सड़कें सबसे अधिक 71.42 प्रतिशत जबकि जिला सड़कें (9.68 प्रतिशत) और शहरी सड़कें (8.55 प्रतिशत) थीं।

रिपोर्ट के अनुसार देश में सड़कों की कुल लंबाई में सतही सड़कों का प्रतिशत 64.70 था।

राज्य में सर्वाधिक राष्ट्रीय राजमार्ग

महाराष्ट्र -18,459.25 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग और कुल 102 राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य से होकर गुजरते हैं।

उत्तर प्रदेश – 12,270.23 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग और कुल 88 राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य से होकर गुजरते हैं।

राजस्थान – 10,706.34 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग और कुल 52 राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य से होकर गुजरते हैं।

मध्य प्रदेश– 9,104.64 46 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग और कुल 46 राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य से होकर गुजरते हैं।

14वें भारतीय अंगदान दिवस की स्मृति में

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3 अगस्त 2024 को पूरे देश में 14वां भारतीय अंग दान दिवस मनाया जा रहा है। भारतीय अंग दान दिवस लोगों के बीच अंग दान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह मृत दाताओं और उनके परिवारों द्वारा समाज में किए गए योगदान को भी याद करता है।

भारतीय अंग दान दिवस का उद्देश्य अंग दान के बारे में मिथकों और गलतफहमियों को दूर करना और लोगों को मृत्यु के बाद अंगों और ऊतकों को दान करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करना भी है।

विश्व अंगदान दिवस

कई देशों का अपना अलग अंगदान दिवस होता है। सामान्य तौर पर अंग दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए दुनिया के कई हिस्सों में 13 अगस्त को विश्व अंग दान दिवस मनाया जाता है।

भारतीय अंगदान दिवस: इतिहास

देश में भारतीय अंग दान दिवस 2010 से मनाया जा रहा है। पहले भारतीय अंगदान दिवस हर साल 27 नवंबर को मनाया जाता था। 2022 में राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन ने हर साल 3 अगस्त को भारतीय अंग दान दिवस मनाने का निर्णय लिया। इस प्रकार 2023 से भारतीय अंगदान दिवस 3 अगस्त को मनाया जाता है।

3 अगस्त को इसलिए चुना गया क्योंकि 3 अगस्त 1994 को भारत में पहला मृत दाता हृदय प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया था। एक ब्रेन स्टेम मृत व्यक्ति का हृदय उसके परिवार के सदस्य द्वारा दान किया गया था जिसे एक अन्य मरीज में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया था। इस प्रकार यह दिन लोगों को मृत्यु के बाद अपने अंग दान करने का संकल्प लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।

भारत में अंग दान माह

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत संस्था राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन ने जुलाई महीने को देश में अंग दान का महीना घोषित किया है।जुलाई महीने को इसलिए चुना गया है क्योंकि 8 जुलाई 1994 को भारत में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम लागू 1994 किया गया था। यह अधिनियम चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए और मानव अंगों और ऊतकों में वाणिज्यिक लेनदेन की रोकथाम के साथ- साथ मानव अंगों को हटाने, भंडारण और प्रत्यारोपण को नियंत्रित करता है।

 

झारखंड सरकार ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना शुरू की

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झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य में पात्र महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना शुरू की है। यह योजना आधिकारिक तौर पर 16 अगस्त 2024 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा शुरू की जाएगी।

81 सदस्यीय वर्तमान झारखंड विधानसभा का का कार्यकाल 5 जनवरी 2025 को समाप्त हो जाएगा और आनमन है की नई विधान सभा के लिए झारखंड में नवंबर/दिसंबर 2024 में चुनाव होंगे। आगामी विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सोरेन सरकार ने महिला वर्ग के लिए यह योजना शुरू की है ।

मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के बारे में

  • मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को पहले झारखंड बहन बेटी स्वावलंबन प्रोत्साहन योजना कहा जाता था।
  • मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें सशक्त बनाना है।
  • इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करके उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के स्तर में सुधार करना भी है।
  • राज्य सरकार पात्र महिलाओं का नामांकन सुनिश्चित करने के लिए 3-10 अगस्त 2024 तक सभी जिलों की पंचायतों और वार्डों में विशेष शिविर लगा रही है।

लाभार्थी महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह मिलेंगे

  • मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना एक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना है जहां पात्र महिला लाभार्थियों को राज्य सरकार से सीधे बैंक खाते में 1000 रुपये प्रति माह मिलेंगे।
  • पहली किस्त 16 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी देवी द्वारा लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
  • 21-50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएं योजना के लिए पात्र हैं।
  • लाभार्थी की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
  • अनुमान है कि राज्य की करीब 48 लाख महिलाएं इस योजना के लिए पात्र हैं।
  • इस योजना से राज्य सरकार को प्रति माह लगभग 4000 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है।

योजना के उद्देश्य

मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को कई प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है:

  • महिला सशक्तिकरण: इसका प्राथमिक उद्देश्य झारखंड में महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को मजबूत करना है।
  • शैक्षणिक संवर्धन: वित्तीय सहायता प्रदान करके, योजना महिलाओं के लिए शिक्षा तक पहुँच में सुधार करना चाहती है।
  • स्वास्थ्य और पोषण: वित्तीय सहायता से महिला लाभार्थियों के बीच बेहतर स्वास्थ्य परिणामों और पोषण मानकों में योगदान मिलने की उम्मीद है।
  • आर्थिक आत्मनिर्भरता: महिलाओं के हाथों में सीधे पैसा देकर, योजना का उद्देश्य आर्थिक आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा देना है।

नोवाक जोकोविच ने जीता पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल

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पेरिस ओलंपिक 2024 में नोवाक जोकोविच ने मेंस टेनिस एकल में कार्लोस अल्काराज को फाइनल में हराकर गोल्ड मेडल जीता। जोकोविच ने अल्कराज को सीधे सेटों में 7-6 (7-3), 7-6 (7-2) से हराया। वह टेनिस में सबसे उम्रदराज ओलंपिक चैंपियन भी बने। अल्काराज के पास टेनिस में सबसे कम उम्र के ओलंपिक विजेता बनने का मौका था, लेकिन वह चूक गए।

अल्काराज के लिए शुरुआती सेट की शुरुआत अच्छी नहीं रही। उन्होंने अपनी सर्विस को बनाए रखने के लिए एक ब्रेक पॉइंट बचाया। जोकोविच ने तीन ब्रेक पॉइंट हासिल किए, लेकिन अल्काराज ने स्कोर 2-2 कर दिया। अगले गेम में, अल्काराज के पास जोकोविच की सर्विस तोड़ने का मौका था, लेकिन जोकोविच ने अपनी सर्विस बनाए रखी।

नौवां गेम पूरी तरह से रोमांचक

नौवां गेम पूरी तरह से रोमांचक रहा। जोकोविच ने पांच ब्रेक पॉइंट बचाए और आखिरकार अपनी सर्विस बचाई और स्कोर 5-4 कर दिया। अनुभवी खिलाड़ी ने कई बार खुद को बैकफुट धकेला, लेकिन खुद को बचाने का हर बार रास्ता निकाल लिया।

यह गेम आखिरी समय तक चला, जब जोकोविच ने एक सेट पॉइंट हासिल किया, लेकिन अल्काराज ने इसे बचाकर टाई-ब्रेकर के लिए मजबूर कर दिया। टाई-ब्रेकर में भी मुकाबला 3-3 से बराबरी पर था, लेकिन जोकोविच ने लगातार चार अंक जीते।

जोकोविच ने रचा इतिहास

पहले सेट की तरह दूसरा सेट भी टाई-ब्रेकर तक गया। हालांकि, अंत में सर्बिया के स्टार खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने अल्काराज को हराकर अपना पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता। वह टेनिस में सबसे उम्रदराज ओलंपिक चैंपियन भी बने। जोकोविच की उम्र 37 साल है। जोकोविच ने पांचवीं बार ओलंपिक में हिस्सा लिया।

पहली बार ओलंपिक स्वर्ण पदक

इस तरह जोकोविच ने अपने करियर में पहली बार ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता। वहीं, अल्कारेज अपना पहला ओलंपिक पदक जीतने से चूक गए। जोकोविच ने इससे पहले 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। जोकोविच 1988 के बाद से टेनिस में एकल स्वर्ण जीतने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति हैं और उन्होंने स्पेन के 21 वर्षीय अल्काराज को सबसे कम उम्र का स्वर्ण पदक विजेता बनने से रोका।

 

डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज आईसीएआर-सीएमएफआरआई का निदेशक नियुक्त

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डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) में निदेशक का पदभार ग्रहण किया है। इससे पहले, उन्होंने सीएमएफआरआई में समुद्री जैव विविधता और पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग का नेतृत्व किया और ढाका में सार्क में वरिष्ठ कार्यक्रम विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया।

व्यावसायिक पृष्ठभूमि

डॉ. जॉर्ज एक अनुभवी मत्स्य शोधकर्ता के रूप में दो दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं। उनकी विशेषज्ञता मत्स्य संसाधन प्रबंधन, समुद्री जैव विविधता, पर्यावरण प्रबंधन, मत्स्य पालन समुद्र विज्ञान, रिमोट सेंसिंग और जलवायु परिवर्तन तक फैली हुई है।

उल्लेखनीय योगदान

शोध नेतृत्व

डॉ. जॉर्ज ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्च प्रभाव वाली शोध परियोजनाओं का नेतृत्व किया है, जिन्हें पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, इसरो और आईसीएआर की एनआईसीआरए परियोजना जैसी एजेंसियों द्वारा वित्त पोषित किया गया है।

शैक्षणिक भूमिकाएँ

उन्होंने कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CUSAT) और केरल मत्स्य एवं महासागर अध्ययन विश्वविद्यालय (KUFOS) में अध्ययन बोर्ड में कार्य किया है, और CUSAT, KUFOS, आंध्र विश्वविद्यालय और मैंगलोर विश्वविद्यालय सहित कई विश्वविद्यालयों में पीएचडी विद्वानों का मार्गदर्शन किया है।

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IRDAI ने एचडीएफसी लाइफ पर 2 करोड़ का जुर्माना लगाया

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भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने एचडीएफसी लाइफ पर विभिन्न आईआरडीएआई नियमों का उल्लंघन करने के लिए कुल 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी है।

कंपनी के अनुसार, सितंबर 2020 में आईआरडीएआई की ओर से किए गए ऑनसाइट निरीक्षण के बाद जुर्माना लगाया गया था। उस दौरान वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 से जुड़े मामलों की जांच की गई थी।

बीमा कंपनी एचडीएफसी लाइफ पर पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों के लिए 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके अतिरिक्त, कंपनी की ओर से सेवाओं की आउटसोर्सिंग से जुड़ी अनियमितताओं के लिए एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

कंपनी ने क्या कहा?

कंपनी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया, “आईआरडीएआई ने 01 अगस्त, 2024 को एक आदेश जारी किया, जिसमें लागू नियमों के उल्लंघन के लिए कुल 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा से संबंधित कुछ पहलुओं के संबंध में एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं, कंपनी की ओर से की गई सेवाओं की आउटसोर्सिंग से जुड़े मामलों में 1 करोड़ रुपये (एक करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया। यह कार्रवाई कमीशन, पारिश्रमिक या इनाम का भुगतान से जुडी थी।

निर्धारित समय सीमा

बीमा क्षेत्र की नियामक आईआरडीएआई ने वित्तीय दंड के अलावा, बीमा प्रदाता कंपनी एचडीएफसी लाइफ को निर्देश और सलाह भी जारी की है। कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर इन दिशा-निर्देशों का अनुपालन करने को कहा गया है ताकि पहचान की गई कमियों को दूर किया जा सके और विनियामक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

IRDAI के बारे में

भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) भारत के बीमा क्षेत्र की निगरानी और विकास के लिए बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (आईआरडीए अधिनियम, 1999) के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। आईआरडीएआई का लक्ष्य पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग के व्यवस्थित विकास को बढ़ावा देना है।

 

INS तबर ने रूसी नौसेना के जहाज सूब्राज़िटेलनी के साथ समुद्री साझेदारी अभ्यास का संचालन किया

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भारतीय नौसेना के अग्रणी जहाज, आईएनएस तबर 328वें रूसी नौसेना दिवस परेड समारोह में भाग लेने के लिए चार दिवसीय यात्रा पर 25 जुलाई 24 को सेंट पीटर्सबर्ग, रूस पहुंचा। भारत और रूस के बीच प्रगाढ़ द्विपक्षीय संबंध और समुद्री सहयोग है, जो विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है। आईएनएस तबर की यात्रा का उद्देश्य इस दीर्घकालिक मित्रता को मजबूत करना और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के नए अवसरों की तलाश करना था।

समुद्री भागीदारी अभ्यास

रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से रवाना होने पर आईएनएस तबर ने 30 जुलाई 2024 को रूसी नौसेना के जहाज सूब्राज़िटेलनी के साथ समुद्री साझेदारी अभ्यास (एमपीएक्स) सफलतापूर्वक संचालित किया। 328वें रूसी नौसेना दिवस परेड में भारतीय नौसेना के जहाज तबर की भागीदारी और एमपीएक्स का संचालन, भारत और रूस के बीच समुद्री सहयोग में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

यात्रा का महत्व

एमपीएक्स में संचार अभ्यास, खोज और बचाव रणनीति और समुद्र में पुनःपूर्ति सहित कई जटिल नौसैनिक युद्धाभ्यास शामिल थे। दोनों नौसेनाओं के जहाजों ने उच्च स्तरीय पेशेवर दृष्टिकोण और अंतर-संचालन योग्य क्षमता का प्रदर्शन किया।

वैश्विक भागीदारी के लिए प्रतिबद्धता

भारतीय नौसेना दुनिया भर की नौसेनाओं के साथ साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। रूसी नौसेना के साथ एमपीएक्स मजबूत द्विपक्षीय समुद्री संबंधों को सुदृढ़ करता है तथा समुद्री क्षेत्र में बेहतर सहयोग सुनिश्चित करने के प्रति हमारे संकल्प और प्रतिबद्धता को और मजबूती देता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपालों के 52वें सम्मेलन की अध्यक्षता की

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 02 अगस्त 2024 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में राज्यपालों के 52वें सम्मेलन की अध्यक्षता की। राज्यपालों का 51वां सम्मेलन 2021 में राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया था, और इसकी अध्यक्षता तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने की थी। यह पहली बार था कि राष्ट्रपति मुर्मू राज्यपालों के सम्मेलन की अध्यक्षता कर रही हैं।

राज्यपालों का पहला सम्मेलन साल 1949 में राष्ट्रपति भवन जिसे उस समय गवर्नमेंट हाउस कहा जाता था, में आयोजित किया गया था। इसकी अध्यक्षता भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने की थी। भारत में, राष्ट्रपति के पास राज्य के राज्यपालों, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को नियुक्त करने और बर्खास्त करने की शक्ति है।

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में उपराज्यपाल हैं। केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, चंडीगढ़ और लक्षद्वीप में प्रशासक हैं।

राज्यपालों के सम्मेलन में भाग लेने वाले गणमान्य व्यक्ति

बता दें, 2 और 3 अगस्त को आयोजित होने वाले राज्यपालों के दो दिवसीय 52वें सम्मेलन में भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मोदी सरकार के कई अन्य कैबिनेट मंत्री भाग लेंगे। सम्मेलन में राज्यों के राज्यपाल, उपराज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक भी भाग लेते हैं।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी और नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर सुब्रमण्यम के साथ-साथ पीएमओ और गृह मंत्रालय में कैबिनेट सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन का मुख्य एजेंडा

राज्यपालों के इस सम्मेलन के एजेंडे में कई विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों जैसे उच्च शिक्षा में सुधार और विश्वविद्यालयों की मान्यता; तीन आपराधिक कानूनों का कार्यान्वयन; जनजातीय क्षेत्रों, आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों और सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे फोकस क्षेत्रों का विकास; एक वृक्ष मां के नाम’, ‘माईभारत’ और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ जैसे अभियानों में राज्यपालों की भूमिका पर चर्चा होगी। इस सम्मेलन में राज्य में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देने एवं प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने और सार्वजनिक संपर्क बढ़ाने में राज्यपालों की भूमिका पर भी चर्चा होगी।

UPI से लगातार तीसरे महीने हुआ 20 लाख करोड़ से ज्यादा का लेनदेन

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नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से भुगतान में 45 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। लेनदेन के मूल्य में भी 35 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई और यह कुल 20 लाख 64 हजार करोड़ रुपये रही।

लगातार तीसरे महीने में यूपीआई से कुल लेनदेन 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। जून 2024 में कुल यूपीआई लेनदेन मूल्य 20.07 लाख करोड़ रुपये था, जबकि मई में यह 20.44 लाख करोड़ रुपये था। एनपीसीआई के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि जुलाई 2024 में यूपीआई के जरिए हर दिन औसतन 44.6 करोड़ लेनदेन (लगभग 66,590 करोड़ रुपये) किए गए।

जुलाई में यूपीआई लेनदेन

जून की तुलना में जुलाई में यूपीआई लेनदेन में 3.95 प्रतिशत का इजाफा हुआ। जबकि लेनदेन के मूल्य में 2.84 प्रतिशत की वृद्धि हुई। चालू वित्त वर्ष (2024-25) के पहले चार महीनों में, यूपीआई के जरिए लगभग 55.66 अरब लेनदेन में 80.79 ट्रिलियन रुपये का दिए या लिए गए।

2023-24 में, यूपीआई लेनदेन

2023-24 में, कुल यूपीआई लेनदेन 131 अरब रहा था। जबकि 2022-23 में यह आंकड़ा 84 अरब था। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मासिक बुलेटिन के अनुसार पिछले चार वर्षों में, यूपीआई लेनदेन की मात्रा में दस गुना वृद्धि देखी गई है, जो 2019-20 में 12.5 अरब लेनदेन से 2023-24 में 131 अरब लेनदेन तक पहुंचा है। यह कुल डिजिटल भुगतान का 80 प्रतिशत है।

फोनपे और गूगल का वर्चस्व

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)ट्रांज़ैक्शन में पर्याप्त वृद्धि हुई, जो वित्तीय वर्ष 2024 में सालाना आधार पर 57 प्रतिशत बढ़ी है। 2023-24 के लिए बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) बैंकिंग सेक्टर राउंडअप के अनुसार, इस सेगमेंट के भीतर, फोनपे और गूगल का वर्चस्व रहा, इनकी संयुक्त बाजार हिस्सेदारी 86 प्रतिशत रही।

डिजिटल भुगतान में बदलाव

डिजिटल भुगतान में बदलाव देखा गया, पिछले तीन वर्षों में क्रेडिट कार्ड लेनदेन दोगुना हो गया। इसके विपरीत डेबिट कार्ड लेनदेन में सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म प्रौद्योगिकी और डिवाइस को अज्ञेयवादी बनाकर, यूपीआई ने जमीनी स्तर पर वित्तीय समावेशन में योगदान दिया है। भारत में डिजिटल भुगतान नई ऊंचाई पर पहुंच रहा है, क्योंकि नागरिक तेजी से ऑनलाइन लेनदेन के उभरते तरीकों को अपना रहे हैं।

भारत में डिजिटल भुगतान

भारत में डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी 2023 में 80 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत का दुनिया के डिजिटल लेनदेन में लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा है।

UPI क्या है?

भारत में यूपीआई को NPCI रेगुलेट करता है। यूपीआई एक वर्चुअल पेमेंट सर्विस है, जिसके जरिए आप बिना बैंक खाते और नंबर के केवल क्यूआर कोड के जरिए एक खाते से दूसरे खाते में पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। आजकल के समय में लोग बिल पेमेंट के अतिरिक्त ऑनलाइन शॉपिंग आदि में क्रेडिट और डेबिट कार्ड के बजाय यूपीआई के जरिए पेमेंट करना पसंद कर रहे हैं।

कश्मीर शहर को विश्व शिल्प परिषद से विश्व शिल्प शहर का प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ

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केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में 31 जुलाई 2024 को आयोजित एक समारोह में कश्मीर शहर को विश्व शिल्प परिषद अंतरराष्ट्रीय से विश्व शिल्प शहर (वर्ल्ड क्राफ्ट सिटी) का प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। इस समारोह में जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, विश्व शिल्प परिषद अंतरराष्ट्रीय के अध्यक्ष हानी अल-क़द्दूमी साद और परिषद की अन्य प्रमुख हस्तियां ने भाग लिया। इससे पहले जून 2024 में, विश्व शिल्प परिषद अंतरराष्ट्रीय ने कश्मीर को अपनी विश्व शिल्प शहर सूची में शामिल करने के अपने फैसले की घोषणा की थी।

ये प्रमाणपत्र पाने वाला चौथा भारतीय शहर

विश्व शिल्प परिषद की विश्व शिल्प शहर सूची में शामिल होने वाला कश्मीर चौथा भारतीय शहर है। राजस्थान के जयपुर और तमिलनाडु के मामल्लापुरम को 2015 में और कर्नाटक के मैसूर को 2018 में इस सूची में शामिल किया गया था। जहां जयपुर, मामल्लापुरम और कश्मीर को विश्व शिल्प शहर का टैग मिला है, वहीं मामल्लापुरम को उसके पत्थर शिल्प (पत्थर पर नक्काशी के लिए विश्व शिल्प शहर) के लिए मान्यता मिली है।

कश्मीर को फायदा: जानें एक नजर में

कश्मीर, जिसका 4000 वर्षों से अधिक का लिखित इतिहास है, अपने कालीन बुनाई, कानी-शॉल, पेपर माची, खतमबंद, लकड़ी की नक्काशी, कंडीकारी तांबे के बर्तन और टिलावर्क के लिए प्रसिद्ध है। कश्मीरी हस्तशिल्प ईरानी और मध्य एशियाई कला और संस्कृति से काफी प्रभावित हैं। साल 2021 में, कश्मीर को शिल्प और लोक कला के तहत यूनेस्को के रचनात्मक शहर के रूप में मान्यता दी गई थी। इस ताज़ा मान्यता से क्षेत्र के हस्तशिल्प क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्र से हस्तशिल्प का निर्यात पिछले पांच वर्षों में 1,000 से बढ़कर 2,000 करोड़ रुपये हो गए हैं। विश्व शिल्प शहर की टैग मिलने के बाद कश्मीरी हस्तशिल्प की वैश्विक मान्यता और मांग बढ़ने की उम्मीद है। यह क्षेत्र से निर्यात को बढ़ावा देगा, कारीगरों की आय में वृद्धि होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के कुशल संरक्षण में मदद मिलेगी।

विश्व शिल्प परिषद अंतरराष्ट्रीय के बारे में

विश्व शिल्प परिषद अंतरराष्ट्रीय (वर्ल्ड क्राफ्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल) की स्थापना साल 1964 में एलीन ओसबोर्न वेंडरबिल्ट वेब, मार्गरेट मेरविन पैच और कमलादेवी चट्टोपाध्याय द्वारा न्यूयॉर्क, अमेरिका में की गई थी। विश्व शिल्प परिषद अंतरराष्ट्रीय एक गैर-लाभकारी संगठन है जो वैश्विक शिल्प कौशल और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण, प्रचार और उन्नति के लिए काम करता है।

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