नागासाकी दिवस 2024: इतिहास और महत्व

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विश्व भर में 9 अगस्त को नागासाकी दिवस (Nagasaki Day 2024) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुए एक भयानक परमाणु हमले की याद दिलाता है, जिसने मानवता को सदैव के लिए बदल दिया। यह पवित्र दिन परमाणु युद्ध की भयावहता और विश्व स्तर पर शांति और निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने के महत्व की याद दिलाता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के नागासाकी शहर पर हुए विनाशकारी परमाणु बमबारी की याद में हर साल 9 अगस्त को विश्व नागासाकी दिवस मनाया जाता है। विश्व नागासाकी दिवस परमाणु युद्ध के विनाशकारी परिणामों की मार्मिक याद दिलाने के रूप में इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह परमाणु खतरों को खत्म करने और वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

विश्व नागासाकी दिवस का महत्व

विश्व नागासाकी दिवस अत्यधिक महत्व रखता है क्योंकि यह परमाणु हथियारों की विनाशकारी मानवीय लागत की याद दिलाता है। यह राष्ट्रों को पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने और भविष्य में ऐसे विनाशकारी हथियारों के उपयोग को रोकने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह दिन जीवित बचे लोगों (जिन्हें हिबाकुशा के नाम से जाना जाता है) के लचीलेपन और ताकत का भी सम्मान करता है, जिन्होंने भारी पीड़ा सहन की है और परमाणु खतरों से मुक्त दुनिया की वकालत करना जारी रखा है।

विश्व नागासाकी दिवस का इतिहास

विश्व नागासाकी दिवस का इतिहास 9 अगस्त 1945 से जुड़ा है, जब हिरोशिमा पर पहली परमाणु बमबारी के ठीक तीन दिन बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने नागासाकी शहर पर “फैट मैन” नामक परमाणु बम गिराया था। बम विस्फोटों के कारण अद्वितीय विनाश हुआ, जीवन की हानि हुई और जीवित बचे लोगों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक परिणाम हुए। इस भयानक हमले में लाखों निर्दोष लोगों की जानें गईं और शहर पूरी तरह से तबाह हो गया। यह घटना मानव इतिहास में एक काला अध्याय है।

 

विश्व आदिवासी दिवस 2024: इतिहास और महत्व

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विश्व आदिवासी दिवस या विश्व के स्वदेशी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस हर साल 9 अगस्त के दिन मनाया जाता है। यह दिन आदिवासी (Tribal) लोगों की संस्कृति, संभ्यता, उनकी उपलब्धियों और समाज और पर्यावरण में उनके योगदान की सराहना करने का दिन है। आदिवासी लोगों की पर्यावरण के संरक्षण में विशेष भूमिका देखी गई है। जितनी पर्यावरण को इन लोगों की जरूरत है उनती ही इन लोगों को पर्यावरण की जरूरत है, इसीलिए इनके अधिकारों को बनाए रखने के लिए भी इस दिन को मनाया जाता है।

2024 विश्व आदिवासी दिवस का विषय

हर साल, संयुक्त राष्ट्र दुनिया के आदिवासी लोगों से संबंधित एक विशेष मुद्दे को उजागर करने के लिए एक विषय का चयन करता है। 2024 अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस का विषय ‘स्वैच्छिक अलगाव और प्रारंभिक संपर्क में आदिवासी लोगों के अधिकारों की रक्षा’ है।

स्वदेशी और आदिवासी लोग: एक नजर में

स्वदेशी और आदिवासी लोग विश्व के तकरीबन 70 देशों में रहते हैं। इन लोगों की अपनी अलग संस्कृति, अपनी परंपरा, अपने रिवाज और अपनी अलग दुनिया है जिसमें वे अपने संसाधन पर्यावरण से लेते हैं। सिर्फ भारत की ही बात करें तो भारत में लगभग 10 करोड़, 40 लाख लोग रहते हैं। ये संख्या देश की आबाधी का लगभग 8 प्रतिशत है। भारत के आदिवासी अत्यधिक मध्य प्रदेश, झारखंड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में निवास करते हैं।

इस दिवस का महत्व

संयुक्त राष्ट्र द्वारा आदिवासी लोगों के अधिकारों के महत्व को उजागर करने के लिए ही इस दिन को मनाने की शुरूआत इसीलिए की गई क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की यह कोशिश है कि आदिवासी लोगों के जंगलों को, उनके घर को उनसे ना छीना जाए, उनके पर्यावरण के साथ खिलवाड़ ना किया जाए। इस साल विश्व स्वदेशी दिवस पर स्वदेशी लोगों के ‘स्वैच्छिक अलगाव और प्रारंभिक संपर्क में स्वदेशी लोगों के अधिकारों की रक्षा करने’ के महत्व पर जोर दिया जा रहा है।

इस दिवस का इतिहास

इस दिन को मनाने की शुरूआत साल 1994 में हुई थी। दिसंबर, 1994 में संयुक्त राष्ट्र ने यह निर्णय लिया था कि विश्व के स्वदेशी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस हर साल 9 अगस्त के दिन से मनाया जाएगा। इस दिन की आवश्यक्ता को देखते हुए इसे मनाने का प्रस्ताव रखा गया था और प्रस्ताव पारित हुआ था। दुनिया भर में पहला अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस 9 अगस्त 1995 को मनाया गया था।

Paris Olympics 2024: नीरज चोपड़ा ने जीता रजत पदक

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पेरिस ओलंपिक 2024 में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने ओलंपिक स्वर्ण पदक को जीतने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की, लेकिन वह इसे हासिल करने में असफल रहे और 89.45 मीटर की सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ उनके हाथ रजत पदक आया। नीरज का इस सत्र का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसी के साथ नीरज आजादी के बाद एथलेटिक्स में दो ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।

नीरज ने टोक्यो ओलंपिक में 87.58 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन वह पेरिस में टोक्यो का प्रदर्शन नहीं दोहरा सके। पाकिस्तान के नदीम ने अपने दूसरे प्रयास में 92.97 मीटर का रिकॉर्ड थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पाकिस्तान का 1992 बार्सीलोना ओलंपिक के बाद यह पहला ओलंपिक पदक है। ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स 88.54 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

नदीम ने तोड़ा ओलंपिक रिकॉर्ड

पाकिस्तान के अरशद नदीम ने ओलंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए अपने दूसरे प्रयास में 92.97 मीटर का थ्रो फेंका और शीर्ष पह पहुंच गए। नदीम का यह थ्रो ओलंपिक में फेंका गया अब तक का सर्वश्रेष्ठ थ्रो है। इससे पहले ओलंपिक में सर्वश्रेष्ठ थ्रो 90.57 मीटर का था। यह रिकॉर्ड नॉर्वे के एंड्रियास थोरकिल्दसन के नाम था। एंड्रियास ने 2008 में बीजिंग खेलों में यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था, लेकिन नदीम ने इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

ओलंपिक में दो पदक जीतने वाले चौथे भारतीय बने नीरज

नीरज चोपड़ा भले ही स्वर्ण पदक का सफलतापूर्वक बचाव नहीं कर सके, लेकिन वह ओलंपिक में दो पदक जीतने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। नीरज से पहले पहलवान सुशील कुमार, बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधू और निशानेबाज मनु भाकर ही यह उपलब्धि अपने नाम कर सके हैं। सुशील कुमार ने 2008 में कांस्य और 2012 लंदन ओलंपिक में 66 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीता, जबकि सिंधू ने महिला एकल मुकाबले में 2016 रियो ओलंपिक में रजत और टोक्यो 2020 में कांस्य पदक अपने नाम किया था। महिला निशानेबाज मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में ही व्यक्तिगत और मिश्रित स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।

 

 

 

RBI ने कर भुगतान के लिए यूपीआई सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति लेनदेन की

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यूपीआई उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। रिजर्व बैंक ने यूपीआई के जरिए कर भुगतान करने की सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इस बार भी रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला लिया गया है।

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय द्विमासिक बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि यूपीआई अपनी सहज सुविधाओं से भुगतान का सबसे पसंदीदा तरीका बन गया है। उन्होंने कहा कि एमपीसी ने यूपीआई के जरिए भुगतान की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। फिलहाल यूपीआई के लिए कर भुगतान की सीमा एक लाख रुपये है।

RBI के गवर्नर ने क्या कहा?

एमपीसी बैठक के बाद यहां आयोजित प्रेस को संबोधित करते हुए शक्तिकांत दास ने कहा कि विभिन्न उपयोग-मामलों के आधार पर रिजर्व बैंक ने पूंजी बाजार, आईपीओ अभिदान, ऋण संग्रह, बीमा, चिकित्सकीय और शैक्षिक सेवाओं आदि जैसी कुछ श्रेणियों के लिए सीमाओं की समीक्षा की है और उन्हें बढ़ाया है। दास ने मौद्रिक नीति समिति के फैसलों को बताते हुए कहा कि चेक क्लीयरेंस सिर्फ कुछ घंटों में करने के लिए कदम उठाने का प्रस्ताव है।

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर भुगतान

आरबीआई गवर्नर ने दास कहा कि चूंकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर भुगतान सामान्य, नियमित तथा उच्च मूल्य के हैं। इसलिए यूपीआई के जरिए कर भुगतान की सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख प्रति लेनदेन करने का निर्णय एमपीसी की बैठक में लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आवश्यक निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे। रिजर्व बैंक गवर्नर ने बताया कि अनधिकृत कंपनियों की जांच के लिए डिजिटल ऋण देने वाले एप के सार्वजनिक तौर पर आंकड़े तैयार करने का भी प्रस्ताव है।

UPI का उपयोगकर्ता आधार 42.4 करोड़

उल्लेखनीय है कि आरबीआई के अनुसार यूपीआई का उपयोगकर्ता आधार 42.4 करोड़ पर पहुंच गया है। यूपीआई में ‘डेलिगेटेड पेमेंट्स’ शुरू करने के प्रस्ताव से देशभर में डिजिटल भुगतान की पहुंच और उपयोग में वृद्धि होने की उम्मीद है।

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का निधन

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पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ सीपीआईएम नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य का 8 अगस्त को कोलकाता के पाम एवेन्यू स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। बुद्धदेव पिछले कुछ सालों से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज से पीड़ित थे और उनकी उम्र 80 साल थी। उनके परिवार में पत्नी मीरा और बेटी सुचेतना हैं।

कौन थे बुद्धदेव भट्टाचार्य

कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज के पूर्व छात्र श्री भट्टाचार्य राजनीति में पूर्णकालिक रूप से शामिल होने से पहले एक स्कूल शिक्षक थे। विधायक और राज्य मंत्री के रूप में सेवा करने के बाद, उन्हें 2000 में श्री बसु के पद छोड़ने से पहले उपमुख्यमंत्री के पद पर पदोन्नत किया गया था। मुख्यमंत्री के रूप में, उन्होंने 2001 और 2006 में सीपीएम को विधानसभा चुनावों में जीत दिलाई।

अपनी सरल जीवन शैली के लिए जाने जाते हैं

बुद्धदेव भट्टाचार्य अपनी सादगी भरी जीवनशैली के लिए जाने जाते थे, श्री भट्टाचार्य ने पाम एवेन्यू के दो बेडरूम वाले फ्लैट में अंतिम सांस ली, जहां से वे कभी राज्य का शासन चलाते थे। उनकी इच्छा के अनुसार उनके अंगों को चिकित्सा अनुसंधान के लिए दान कर दिया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को उनके अनुयायियों के सम्मान के लिए सीपीएम मुख्यालय में रखा जाएगा और कल उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।

सीएम का उनका कार्यकाल

वर्ष 2000 में उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया, जब देश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ दिया। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने 2001 और 2006 में विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चे को लगातार जीत दिलाई।

व्यापार के प्रति खुली नीति

श्री भट्टाचार्य के कार्यकाल में वाम मोर्चा सरकार ने ज्योति बसु शासन की तुलना में व्यापार के प्रति अपेक्षाकृत खुली नीति अपनाई। विडंबना यह है कि औद्योगीकरण से संबंधित इसी नीति और भूमि अधिग्रहण ने 2011 के चुनाव में वामपंथियों की करारी हार का मार्ग प्रशस्त किया।

वामपंथियों के बीच सुधारवादी

वामपंथियों के बीच उन्हें सुधारवादी के रूप में जाना जाता था, खास तौर पर राज्य में औद्योगीकरण लाने की कोशिश के लिए। सिंगूर में टाटा नैनो प्लांट की स्थापना और नंदीग्राम में विशेष आर्थिक क्षेत्र की योजना बनाने के पीछे उनका ही हाथ था और उनके शासन के दौरान ही बंगाल में आईटी और आईटी सक्षम सेवाओं के क्षेत्रों में निवेश हुआ।

 

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केंद्र ने वरिष्ठ नौकरशाहों का किया फेरबदल, अमित नेगी को अतिरिक्त सचिव बनाया गया

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केंद्र सरकार ने शीर्ष स्तर पर महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमित सिंह नेगी को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया है। उत्तराखंड कैडर के 1999 बैच के आईएएस अधिकारी श्री नेगी वर्तमान में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत व्यय विभाग में संयुक्त सचिव हैं।

प्रमुख नियुक्तियां

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ): अमित सिंह नेगी को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया।

गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ): समीर अश्विन वकील को निदेशक नियुक्त किया गया।

भारतीय चुनाव आयोग: मनीष गर्ग, संजय कुमार और अजीत कुमार को उप चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी): मनीषा सक्सेना को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया; मुग्धा सिन्हा महानिदेशक (पर्यटन) का पदभार संभालेंगी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय: आशुतोष अग्निहोत्री और नीरज कुमार बंसोड़ को क्रमशः अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय: अजय भादू को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय: अमनदीप गर्ग को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम: अशोक कुमार सिंह को महानिदेशक नियुक्त किया गया।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग: वात्सल्य सक्सेना को सीईओ नियुक्त किया गया।

नीति आयोग: निधि छिब्बर को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय: टीके अनिल कुमार को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया; कैरलिन खोंगवार देशमुख को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया।

केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय: रवींद्र कुमार अग्रवाल को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय: पुनीत अग्रवाल को अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार नियुक्त किया गया।

दूरसंचार विभाग: एन गुलजार को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया।

भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ: आशीष चटर्जी को प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया।

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग: पुनीत यादव को अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया।

कैबिनेट सचिवालय: नीला मोहनन को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

रक्षा विभाग: पवन कुमार शर्मा को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

आर्थिक मामलों का विभाग: आलोक तिवारी को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

सैन्य मामलों का विभाग: कुमार रविकांत सिंह को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD): नंद कुमारम को सीईओ नियुक्त किया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग: लता गणपति और निखिल गजराज को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया; वी किरण गोपाल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

क्षमता निर्माण आयोग: वी ललितलक्ष्मी को कर्मयोगी भारत के सीईओ के अतिरिक्त प्रभार के साथ सचिव नियुक्त किया गया।

भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त: सुनील कुमार को अतिरिक्त महापंजीयक नियुक्त किया गया।

जनगणना कार्य: पी बाला किरण, पूजा पांडे और शीतल वर्मा को क्रमशः आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय तथा उत्तर प्रदेश में निदेशक नियुक्त किया गया।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विभाग: विनोद शेषन को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

राजस्व विभाग: नवल किशोर राम को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया।

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 श्री बाबा बुद्ध अमरनाथ की तीर्थयात्रा जम्मू-कश्मीर में शुरू

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जम्मू-कश्मीर में पुंछ जिले की लोरन घाटी में श्री बाबा बुड्ढा अमरनाथ की 10 दिवसीय तीर्थयात्रा 08 अगस्त से शुरू हुई और इस महीने की 19 तारीख को सावन पूर्णिमा और रक्षा बंधन के साथ समाप्त होगी। तीर्थयात्रियों की आमद को देखते हुए इस यात्रा में कड़ी सुरक्षा और महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है।

श्री बाबा बुद्ध अमरनाथ की तीर्थयात्रा का मुख्य विवरण

दिनांक और अवधि

तीर्थयात्रा 08 अगस्त से शुरू हुई है और 19 अगस्त को समाप्त होगी।

महत्व: यह यात्रा बाबा बुड्ढा अमरनाथ के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है, जो कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा का पूरक है।

प्रस्थान बिंदु

पहला जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से रवाना हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था

तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय किए गए हैं।

तीर्थयात्री: कर्नाटक, गुजरात और मध्य प्रदेश से लगभग 700 श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।

मंदिर का स्थान

श्री बुड्ढा अमरनाथ मंदिर जम्मू से 290 किलोमीटर दूर पुंछ जिले के मंडी क्षेत्र में पुलस्ती नदी के किनारे समुद्र तल से 4600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
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भारतीय सेना ने लद्दाख में ‘पर्वत प्रहार’ अभ्यास आयोजित किया

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भारतीय सेना ने लद्दाख में एक रणनीतिक सैन्य अभ्यास ‘पर्वत प्रहार’ किया है, जो उच्च ऊंचाई वाले युद्ध और अभियानों पर केंद्रित है। यह अभ्यास भारत-चीन सीमा के नज़दीक इस क्षेत्र में सेना की तत्परता और प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

‘पर्वत प्रहार’ (पहाड़ी हमला) अभ्यास में पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ इलाकों पर जोर दिया जाता है, जैसे कि पूर्वी लद्दाख जैसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं। एक पखवाड़े से अधिक समय तक चलने वाले इस अभ्यास में सैनिकों को ऐसे इलाकों की अनूठी चुनौतियों में प्रशिक्षित करने के लिए वास्तविक दुनिया के युद्ध परिदृश्यों का अनुकरण करना शामिल है।

भागीदारी और उपकरण

इस अभ्यास में सेना की विभिन्न शाखाएँ भाग ले रही हैं, जिनमें पैदल सेना, बख्तरबंद, तोपखाना और सहायक इकाइयाँ शामिल हैं। विभिन्न प्रकार के टैंक, के-9 वज्र सहित तोपें, वायु-रक्षा प्रणालियाँ, यूएवी और सेना की अन्य विमानन संपत्तियाँ अपनी संचालन क्षमता और युद्ध की तैयारियों का प्रदर्शन कर रही हैं।

सामरिक महत्व

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ इस संवेदनशील क्षेत्र में संचालन के लिए जिम्मेदार उत्तरी कमान की माउंटेन स्ट्राइक कोर इस अभ्यास में शामिल है। इस क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति और चीन से इसकी निकटता ‘पर्वत प्रहार’ को एक महत्वपूर्ण अभ्यास बनाती है।

चीन के साथ जारी गतिरोध

गलवान झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच चार साल से ज़्यादा समय से सैन्य गतिरोध जारी है, जिसमें सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तरों पर कई दौर की बातचीत महत्वपूर्ण प्रगति हासिल करने में विफल रही है। 2020 से, भारतीय सेना ने इस क्षेत्र में 500 से ज़्यादा टैंक और बख्तरबंद लड़ाकू वाहन तैनात किए हैं और तेज़ी से बुनियादी ढाँचा विकसित किया है। इसके अलावा, भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी तैनाती का मुकाबला करने के लिए 50,000 से ज़्यादा सैनिकों को तैनात किया है, जिसका उद्देश्य चीन द्वारा यथास्थिति को बदलने के किसी भी और प्रयास को रोकना है।

भारत और चीन ने हाल ही में भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की बैठक संपन्न की है।

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गांधीवादी शोभना रानाडे का 99 वर्ष की आयु में निधन

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शोभना रानाडे का 99 वर्ष की आयु में पुणे में निधन भारत के सामाजिक सुधार आंदोलन के एक युग का अंत है। प्रसिद्ध गांधीवादी और पद्म भूषण से सम्मानित रानाडे ने अपना जीवन वंचितों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया, और भारत के सामाजिक परिदृश्य पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।

प्रारंभिक जीवन और गांधीवादी प्रभाव

18 साल की उम्र में शोभना रानाडे को महात्मा गांधी से मिलने का अनुभव हुआ, जो उनके जीवन को बदल देने वाला था। इस मुलाकात ने गांधीवादी सिद्धांतों और समाज सेवा के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता की दिशा तय की।

गांधीवादी मूल्यों का अवतार

रानाडे का जीवन सादगी, करुणा और सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पण के मूल गांधीवादी मूल्यों का उदाहरण था। सामाजिक कार्य के प्रति उनका दृष्टिकोण हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के गांधी के दर्शन में गहराई से निहित था।

समाज कल्याण में योगदान

रानाडे का काम मुख्य रूप से भारत के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाने पर केंद्रित था। उनकी पहल का उद्देश्य उन लोगों को शिक्षा, कौशल और अवसर प्रदान करना था जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के समाज द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है।

व्यक्तिगत उपाख्यान और चरित्र

इतिहासकार पांडुरंग बालकावडे द्वारा साझा किया गया एक किस्सा रानाडे के चरित्र को दर्शाता है:

13 साल की उम्र में, बलकावड़े साइकिल से आगा खान पैलेस गांधी स्मारक तक गए, लेकिन 25 पैसे का प्रवेश शुल्क वहन नहीं कर सके। रानाडे, जो संयोग से वहां से गुजरी थीं, ने उनके टिकट का भुगतान किया, क्योंकि वे ऐतिहासिक स्थल पर जाने के उनके प्रयास से प्रभावित थीं। बाद में उन्होंने उनसे इस बारे में चर्चा की कि उन्होंने क्या सीखा था, और महान गांधीवादियों का सम्मान करने के महत्व पर जोर दिया।

विरासत और प्रभाव

रानाडे को आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में याद किया जाता है, खासकर सामाजिक कार्य के संस्थानों के निर्माण में उनकी भूमिका के लिए। सामाजिक सुधार के प्रति उनका दृष्टिकोण समग्र था, जिसमें सामुदायिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया जाता था।

2011 में, रानाडे को सामाजिक कार्यों के प्रति उनके आजीवन समर्पण को मान्यता देते हुए भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

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चीन ने स्टारलिंक को टक्कर देने वाले तारामंडल के पहले सैटेलाइट को लॉन्च किया

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चीन अपने उपग्रहों के पहले बैच को लॉन्च करने के करीब है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स के स्टारलिंक इंटरनेट नेटवर्क को टक्कर देना है। सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी शंघाई स्पेसकॉम सैटेलाइट टेक्नोलॉजी (SSST) ने नेटवर्क पर पहले घटकों को लॉन्च किया है। SSST के समूह को “थाउज़ेंड सेल्स” नाम दिया गया है।

परियोजना अवलोकन

यह परियोजना, जिसे G60 नक्षत्र के रूप में भी जाना जाता है, पिछले साल चीनी-आधारित वैश्विक निम्न-पृथ्वी कक्षा (LEO) उपग्रह इंटरनेट नेटवर्क स्थापित करने के लिए स्थापित की गई थी, जो स्टारलिंक के लिए एक प्रतियोगी है। स्पेसएक्स की सहायक कंपनी स्टारलिंक के पास लगभग 5,500 उपग्रहों का एक ब्रॉडबैंड नक्षत्र है, जिसका उपयोग उपभोक्ता, कंपनियाँ और सरकारी एजेंसियाँ करती हैं।

आरंभिक प्रक्षेपण

शिन्हुआ ने बताया कि लॉन्ग मार्च 6ए वाहक रॉकेट में शांक्सी प्रांत के ताइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से उड़ान भरने के बाद 18 संचार उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षाओं में आसानी से प्रवेश कर गए। SSST की योजना इस साल 108 उपग्रह और अगले साल के अंत तक 648 उपग्रह लॉन्च करने की है, ताकि 2027 तक “वैश्विक नेटवर्क कवरेज” प्रदान किया जा सके। दशक के अंत तक, SSST का लक्ष्य 15,000 उपग्रहों को तैनात करना है। LEO उपग्रह आमतौर पर पृथ्वी की सतह से 300 किमी से 2,000 किमी की ऊँचाई पर संचालित होते हैं।

रणनीतिक निहितार्थ

रॉयटर्स ने अलग से बताया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में चीनी शोधकर्ताओं ने यूक्रेन में युद्ध में स्टारलिंक की तैनाती का अध्ययन किया है और बार-बार चेतावनी दी है कि अगर देश अमेरिका के साथ सैन्य संघर्ष में शामिल हो जाता है तो इससे चीन को क्या जोखिम हो सकता है। SSST का थाउज़ेंड सेल्स तारामंडल तीन “दस-हज़ार सितारा तारामंडल” में से एक है जिसे चीन स्पेसएक्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैनात करने का इरादा रखता है। चीन ने पहले अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ को बताया था कि वह 51,300 उपग्रहों को तैनात करने की योजना बना रहा है, जबकि स्पेसएक्स ने 2027 तक 42,000 उपग्रहों का लक्ष्य रखा है।

 

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