एकलव्य विद्यालयों के आदिवासी छात्रों की मदद करेगी कोल इंडिया

समावेशी शिक्षा और भारत के आदिवासी युवाओं के समग्र विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और नेशनल शेड्यूल्ड ट्राइब फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSTFDC) ने 9 सितम्बर 2025 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य और करियर मार्गदर्शन में लक्षित सहायता प्रदान करना है।

परियोजना का अवलोकन

इस पहल का शीर्षक है – “एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के आदिवासी विद्यार्थियों को डिजिटल पहुंच, करियर मार्गदर्शन, मासिक धर्म स्वच्छता और शिक्षक क्षमता निर्माण के माध्यम से सशक्त बनाना।” यह परियोजना पूरे देश के EMRS संस्थानों में लागू होगी, विशेषकर कोयला-उत्पादक और आदिवासी बहुल जिलों में।

परियोजना के मुख्य घटक

  1. डिजिटल पहुंच और अधिगम अवसंरचना

    • CIL छात्रों को डेस्कटॉप, यूपीएस सिस्टम और टैबलेट प्रदान करेगा, ताकि ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों और डिजिटल साक्षरता तक पहुंच बढ़ सके।

  2. करियर मार्गदर्शन

    • संरचित मेंटरशिप कार्यक्रम छात्रों को करियर पथ चुनने में सहायता करेंगे, जिनमें मार्गदर्शन सत्र, exposure visits और स्किल मैपिंग शामिल होंगे।

  3. मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन

    • छात्राओं के स्वास्थ्य और गरिमा को बढ़ावा देने हेतु विद्यालयों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और इनसिनरेटर लगाए जाएंगे।

  4. शिक्षक क्षमता निर्माण

    • EMRS के शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी ताकि उनकी शिक्षण और डिजिटल कौशल क्षमता को बढ़ाया जा सके।

रणनीतिक महत्व

यह समझौता संपूर्ण सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्रीय सहयोग का एक आदर्श मॉडल है, जो समानता, शिक्षा और समावेशी विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है। इसमें कोयला मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के उद्देश्यों का एकीकरण किया गया है, जिससे दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित होगा।

डिजिटल अवसंरचना, लैंगिक-संवेदनशील स्वास्थ्य सुविधाओं और करियर तत्परता पर ध्यान केंद्रित करके यह पहल उन शैक्षिक और सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दूर करती है, जिनका सामना आदिवासी युवा करते हैं, ताकि वे भारत की विकास यात्रा में पीछे न छूटें।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य

  • MoU हस्ताक्षरित संस्थाएं: कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और NSTFDC

  • लक्ष्य समूह: एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के आदिवासी छात्र

  • मुख्य फोकस क्षेत्र: डिजिटल पहुंच, करियर मार्गदर्शन, मासिक धर्म स्वच्छता, शिक्षक प्रशिक्षण

  • संबद्ध मंत्रालय: कोयला मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय

ऑस्ट्रेलिया के “घोस्ट शार्क” क्या हैं और वे नौसैनिक युद्ध को कैसे बदल देंगे?

ऑस्ट्रेलिया A$1.7 अरब (US$1.1 अरब) का निवेश कर रहा है, जिसके तहत अगले पाँच वर्षों में “घोस्ट शार्क” नामक स्वायत्त अंडरसी वाहन (XL-AUVs) का विकास और उत्पादन किया जाएगा। ये मानवरहित पनडुब्बियाँ नौसैनिक अभियानों को नए स्वरूप में ढालने वाली साबित होंगी। इन्हें एंड्यूरिल ऑस्ट्रेलिया द्वारा डिफेन्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप के सहयोग से देश में ही तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है कि इनकी पहली बेड़ा (fleet) 2026 की शुरुआत तक नौसेना की सेवा में शामिल हो जाएगा।

घोस्ट शार्क क्या है?

घोस्ट शार्क्स अत्यधिक बड़े स्वायत्त पनडुब्बी वाहन (XL-AUVs) हैं, जिनका आकार बस के बराबर होता है और जो बिना सतह पर आए लंबी दूरी की, गुप्त (stealth) मिशन संचालित करने में सक्षम हैं। ये खुफिया जानकारी एकत्र करने (ISR), निगरानी, टोही और हमले के अभियानों को अंजाम दे सकती हैं और इन्हें तट (shore) या सतही जहाजों से तैनात किया जा सकता है। इनके अभिनव डिज़ाइन में एक “फ्लडेड” इंटीरियर शामिल है, जिसमें पारंपरिक प्रेशर हुल नहीं होता, जिससे सहनशक्ति और गहराई क्षमता में वृद्धि होती है। इनमें मौजूद एंड्यूरिल का लैटिस (Lattice) एआई सिस्टम नेविगेशन, प्रणोदन और मिशन से संबंधित निर्णयों को नियंत्रित करता है।

वे नौसैनिक युद्ध के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

घोस्ट शार्क्स नौसैनिक युद्ध के लिए एक गेम-चेंजर मानी जा रही हैं, क्योंकि ये मानव-संचालित जहाज़ों की तुलना में बहुत कम लागत पर समुद्र के भीतर लगातार मौजूदगी सुनिश्चित करती हैं और ऑस्ट्रेलिया के AUKUS परमाणु-सबमरीन कार्यक्रम में हो रही देरी के बीच अहम परिचालन खाई को भरती हैं। अपनी स्टील्थ क्षमता, लंबी सहनशक्ति और बहु-उद्देश्यीय लचीलापन के साथ ये ऑस्ट्रेलिया की विशाल समुद्री सीमाओं पर निगरानी और हमले की क्षमताओं को मजबूत करती हैं। इनका विकास रोज़गार और औद्योगिक वृद्धि को भी बढ़ावा देता है—इस कार्यक्रम से एंड्यूरिल में 120 से अधिक मौजूदा नौकरियों को समर्थन मिलेगा और 150+ नई कुशल नौकरियां सृजित होंगी, साथ ही 40+ सप्लायर्स में 600 अतिरिक्त रोजगार अवसर पैदा होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ प्रभावित पंजाब के लिए 1,600 करोड़ रुपये की राहत की घोषणा की

पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं के मद्देनज़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और गुरदासपुर में उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। मूल्यांकन के बाद उन्होंने ₹1,600 करोड़ की केंद्रीय सहायता पैकेज की घोषणा की, जिससे राज्य के राहत और पुनर्वास प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।

वित्तीय और योजना आधारित सहयोग

यह सहायता पहले से पंजाब को आवंटित ₹12,000 करोड़ के अतिरिक्त है। प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) की दूसरी किस्त का अग्रिम भुगतान।

  • प्रभावित किसानों के लिए PM किसान सम्मान निधि योजना के लाभ जारी रहेंगे।

  • मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की अनुग्रह राशि तथा गंभीर रूप से घायलों को ₹50,000 की सहायता।

  • बाढ़ में अनाथ हुए बच्चों को PM CARES for Children योजना के अंतर्गत सहयोग।

पुनर्निर्माण और बहाली उपाय

  • PM आवास योजना – ग्रामीण के तहत क्षतिग्रस्त मकानों का पुनर्निर्माण।

  • भूस्खलन और बाढ़ से प्रभावित राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों की मरम्मत।

  • समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत क्षतिग्रस्त स्कूलों का पुनर्निर्माण।

  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत पशुपालन और कृषि को सहयोग (मिनी-किट वितरण, बोरवेल पुनर्जीवन)।

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अंतर्गत डीज़ल पंपों का सौर ऊर्जा में रूपांतरण।

  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Per Drop More Crop) के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई समर्थन।

  • जल संचय जन भागीदारी कार्यक्रम के अंतर्गत वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण संरचनाओं को बढ़ावा।

प्रशासनिक कार्यवाही और जमीनी प्रतिक्रिया

  • प्रभावित क्षेत्रों में अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल भेजे गए हैं, जो क्षति का विस्तृत आकलन कर रिपोर्ट देंगे।

  • इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर आगे की राहत और नीति संबंधी निर्णय होंगे।

  • प्रधानमंत्री ने NDRF, SDRF, सशस्त्र बलों और स्वयंसेवकों की त्वरित और समन्वित बचाव व राहत कार्यों की सराहना की।

परीक्षा हेतु प्रमुख बिंदु 

  • कुल केंद्रीय राहत: ₹1,600 करोड़

  • राज्य के पास अतिरिक्त धनराशि: ₹12,000 करोड़

  • सक्रिय योजनाएँ:

    • PM आवास योजना – ग्रामीण

    • PM किसान सम्मान निधि

    • PM CARES for Children

    • समग्र शिक्षा अभियान

    • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)

    • MNRE सोलर पंप सब्सिडी

    • जल संचय जन भागीदारी कार्यक्रम

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2025: जानें इतिहास और महत्व

हर वर्ष, वैश्विक स्तर पर 7,20,000 से अधिक लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं, जिससे भारी मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव उत्पन्न होते हैं। इस लगातार बढ़ती संकट स्थिति के जवाब में, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (WSPD) हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य यह है कि आत्महत्याएं रोकी जा सकती हैं। 2024–2026 की त्रिवार्षिक थीम, “आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना” (Changing the Narrative on Suicide), समाज में मौन और कलंक की बजाय खुलापन, सहानुभूति और सक्रिय समर्थन को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक रूप से सोच बदलने का संदेश देती है।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस को समझना

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (WSPD) की शुरुआत 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन (IASP) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से की थी। इस दिवस का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, कलंक कम करना और समुदाय, संस्थागत और सरकारी स्तर पर सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस वर्ष की थीम, “दृष्टिकोण बदलना” (Changing the Narrative), आत्महत्या से जुड़े हानिकारक मिथकों को चुनौती देती है, सहानुभूतिपूर्ण संवाद को बढ़ावा देती है और सार्वजनिक नीति में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर जोर देती है। यह साक्ष्य-आधारित रोकथाम, समय पर देखभाल, और ऐसे वातावरण के निर्माण का महत्व रेखांकित करती है, जहां लोग मदद मांगने में सुरक्षित महसूस करें।

वैश्विक स्तर पर, आत्महत्या 15–29 वर्ष की आयु के युवाओं में प्रमुख मृत्यु कारण बनी हुई है, और अनुमान है कि हर आत्महत्या मृत्यु पर लगभग 20 आत्महत्या प्रयास होते हैं। ये आंकड़े सशक्त रोकथाम रणनीतियों और सार्वजनिक सहभागिता की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

भारत में आत्महत्या का बोझ: दायरा और रुझान

भारत वैश्विक आत्महत्या बोझ में महत्वपूर्ण हिस्सा रखता है, जिसमें शामिल हैं:

  • लगभग एक-तिहाई महिला आत्महत्याएं

  • लगभग एक-चौथाई पुरुष आत्महत्याएं

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार:

  • आत्महत्या दर 2017 में 9.9 प्रति लाख से बढ़कर 2022 में 12.4 प्रति लाख हो गई।

  • भौगोलिक भिन्नता स्पष्ट है, जहां सिक्किम (43.1 प्रति लाख) सबसे अधिक दर दर्ज करता है, इसके बाद विजयवाड़ा (42.6) और कोल्लम (42.5)

  • इसके विपरीत, बिहार में सबसे कम दर 0.6 प्रति लाख है।

ये पैटर्न गहरे सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक तनावों को दर्शाते हैं, जो राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता को उजागर करते हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया: भारत की आत्महत्या रोकथाम रणनीति

भारत ने 2022 में अपनी पहली राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति (NSPS) शुरू की, जिसका उद्देश्य है:

  • 2030 तक आत्महत्या मृत्यु दर में 10% की कमी

  • बहु-क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना

  • प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सामाजिक कल्याण में आत्महत्या रोकथाम को एकीकृत करना

राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति (NSPS) के प्रमुख पहल

1. टेली-मैनस (Tele-MANAS)

  • एक राष्ट्रीय 24×7 टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवा

  • 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 53 सेल संचालित

  • अब तक 10 लाख से अधिक कॉल का निपटान किया गया

2. जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP)

  • अब 767 जिलों में संचालित

  • सामुदायिक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और संकट हस्तक्षेप उपलब्ध कराता है

3. आयुष्मान आरोग्य मंदिर (Ayushman Arogya Mandirs)

  • देशभर में 1.78 लाख से अधिक स्वास्थ्य केंद्र

  • अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी शामिल कर रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर पर देखभाल एकीकृत हो सके

4. संस्थागत सुदृढ़ीकरण (Institutional Strengthening)

  • AIIMS, उत्कृष्टता केंद्रों (Centers of Excellence) और मेडिकल कॉलेजों में क्षमता निर्माण

  • मानसिक स्वास्थ्य समर्थन के लिए प्रशिक्षित कार्यबल तैयार किया जा रहा है

युवाओं पर विशेष ध्यान: स्कूल और सामुदायिक स्तर पर सहयोग

किशोर और युवा एक संवेदनशील वर्ग हैं। इसे देखते हुए भारत ने कई युवा-केंद्रित पहलें शुरू की हैं:

  • राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) और स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम

    • स्कूल-आधारित काउंसलिंग सेवाएं प्रदान करते हैं।

  • मनोदर्पण पहल (Manodarpan Initiative) – COVID-19 महामारी के दौरान शुरू की गई

    • छात्रों, शिक्षकों और परिवारों को मनो-सामाजिक सहयोग प्रदान करती है।

    • सेवाओं में शामिल:

      • 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन: 8448440632

      • इंटरएक्टिव वेब पोर्टल मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों के साथ

      • देशव्यापी स्कूल काउंसलर निर्देशिका

तथ्य याद रखने योग्य 

  • दिनांक: 10 सितम्बर (2003 से प्रतिवर्ष)

  • थीम (2024–2026): Changing the Narrative on Suicide (आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना)

  • वैश्विक आँकड़े: 7.2 लाख+ मौतें प्रतिवर्ष; हर आत्महत्या पर लगभग 20 प्रयास

  • भारत की आत्महत्या दर (2022): 12.4 प्रति लाख

  • सबसे अधिक राज्य: सिक्किम (43.1 प्रति लाख)

  • सबसे कम राज्य: बिहार (0.6 प्रति लाख)

  • मुख्य कार्यक्रम: Tele-MANAS, DMHP, NSPS, Manodarpan, RKSK

स्वच्छोत्सव 2025: स्वच्छ और हरित त्योहारों का उत्सव

स्वच्छोत्सव 2025 अभियान पूरी ताकत के साथ लौटने वाला है। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने ‘स्वच्छोत्सव’ की शुरुआत की है—यह पंद्रह दिन का उत्सव है, जिसमें सफाई और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। यह अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलेगा और भारतीय त्योहारों के मौसम के साथ मेल खाता है, नागरिकों को स्वच्छ और हरित उत्सव अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

तैयारी बैठक और मंत्रीगत दृष्टिकोण

9 सितंबर 2025 को एक उच्च स्तरीय तैयारी बैठक आयोजित की गई, जिसकी सह-अध्यक्षता आवास और शहरी कार्य मंत्री और जल शक्ति मंत्री ने की। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और अधिकारी SHS 2025 के रोडमैप को अंतिम रूप देने के लिए शामिल हुए।

SHS 2025 का थीम: “स्वच्छोत्सव”

इस वर्ष का थीम स्वच्छोत्सव है, जो त्योहारों और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के मिश्रण का जश्न मनाता है। अभियान का उद्देश्य त्योहारों के दौरान सामुदायिक उत्साह का उपयोग करते हुए निम्नलिखित को बढ़ावा देना है:

  • स्वच्छ और हरित उत्सव

  • सामूहिक स्वच्छता अभियान में भागीदारी

  • सतत कचरा प्रबंधन प्रथाएँ

अभियान के मुख्य फोकस क्षेत्र

  1. क्लीनलिनेस टारगेट यूनिट्स (CTUs)
    शहर और गांव CTUs की पहचान, मानचित्रण और कार्य करेंगे, जिसमें मुख्य सार्वजनिक स्थल, बाजार, परिवहन केंद्र और कार्यक्रम स्थल शामिल हैं, ताकि साफ-सफाई के दृश्य परिणाम सुनिश्चित हों।

  2. लीगेसी डंपसाइट उन्मूलन
    अभियान में पुराने कचरा स्थलों के निस्तारण पर जोर दिया गया है। राज्यों से अपेक्षा है कि वे 100% डंपसाइट्स का उपचार करें, जो सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

  3. सफाईमित्र सुरक्षा शिविर
    अभियान के दौरान स्वच्छता कर्मचारियों के लिए समर्पित सुरक्षा और कल्याण पहल की जाएगी। इसका उद्देश्य उनकी सुरक्षा, सम्मान और कल्याण सुनिश्चित करना है, जिससे स्वच्छता आंदोलन में समावेशिता को मजबूती मिले।

यह अभियान स्वच्छता को केवल मौसमी अभियान न मानकर जीवनशैली के रूप में अपनाने के व्यापक लक्ष्य को दर्शाता है।

परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

  • अभियान का नाम: स्वच्छता ही सेवा (SHS) 2025

  • थीम: स्वच्छोत्सव – स्वच्छ और हरित त्योहारों का उत्सव

  • तिथियाँ: 17 सितंबर – 2 अक्टूबर 2025

  • शामिल मंत्रालय: MoHUA और DDWS, जल शक्ति मंत्रालय

  • फोकस क्षेत्र: CTUs, पुराने कचरा स्थलों का उन्मूलन, सफाईमित्र सुरक्षा शिविर

खेल नवाचार को बढ़ावा देने के लिए SAI और IIT दिल्ली ने समझौता किया

भारत में खेल विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में एक रणनीतिक कदम के रूप में, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) का राष्ट्रीय खेल विज्ञान अनुसंधान केंद्र (NCSSR) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल खेल प्रदर्शन में अत्याधुनिक विज्ञान और देशी नवाचार को एकीकृत करने के लिए है, जो सरकार के आत्मनिर्भर भारत और गर्व से स्वदेशी दृष्टिकोण के अनुरूप है।

खेल को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से सशक्त बनाना

9 सितंबर 2025 को हस्ताक्षरित इस MoU की निगरानी केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने की, जिन्होंने कहा कि यह सहयोग भारतीय खिलाड़ियों को वैज्ञानिक समर्थन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर सरकार के ध्यान का प्रतीक है। पहल का मुख्य फोकस देशी खेल उपकरणों के विकास पर है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी समाधान को बढ़ावा मिलेगा।

MoU के मुख्य उद्देश्य

  • खेल विज्ञान और इंजीनियरिंग में अनुसंधान को बढ़ावा देना

  • नवाचार के माध्यम से खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार करना

  • शैक्षणिक और खेल संस्थानों के बीच विशेषज्ञता साझा करना

  • चोट रोकथाम और पुनर्वास रणनीतियों में सहायता प्रदान करना

  • पैरालिंपिक खिलाड़ियों के लिए समावेशी समर्थन को बढ़ावा देना

बायोमेकैनिक्स प्रयोगशाला का उद्घाटन

MoU के साथ ही IIT दिल्ली में अत्याधुनिक बायोमेकैनिक्स प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया। इस सुविधा का उद्देश्य है:

  • खिलाड़ी की गति का उच्च-सटीक मूल्यांकन करना

  • प्रदर्शन अनुकूलन और चोट कम करने के लिए डेटा तैयार करना

  • शारीरिक रूप से सक्षम और पैरालिंपिक दोनों प्रकार के खिलाड़ियों का समर्थन करना

  • खेल विज्ञान अनुसंधान और प्रशिक्षण का केंद्र बनना

यह प्रयोगशाला भारत के खेल अवसंरचना और वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत करने में एक बड़ा कदम है और उम्मीद है कि यह कोच और खेल वैज्ञानिकों को वास्तविक समय में खिलाड़ी की बायोमेकैनिक्स की जानकारी प्रदान करेगी, ताकि प्रशिक्षण योजनाओं को प्रभावी ढंग से तैयार किया जा सके।

परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

  • इवेंट: SAI-NCSSR और IIT दिल्ली के बीच MoU

  • तिथि: 9 सितंबर 2025

  • उद्देश्य: खेल विज्ञान, नवाचार और देशी उपकरण को बढ़ावा देना

  • उद्घाटन: IIT दिल्ली में बायोमेकैनिक्स प्रयोगशाला

  • सरकारी अभियान: आत्मनिर्भर भारत, गर्व से स्वदेशी

इरफान अली को दोबारा गुयाना का राष्ट्रपति चुना गया

दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना के लिए एक निर्णायक क्षण में, राष्ट्रपति इरफान अली को 1 सितंबर 2025 को हुए सफल आम चुनाव के बाद दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से चुना गया है। उनकी पार्टी, पीपुल्स प्रोग्रेसिव पार्टी/सिविक (पीपीपी/सी) ने संसद में बहुमत हासिल किया, जिससे अली को विशाल तेल संपदा और जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों के युग में देश का मार्गदर्शन करने के लिए नया जनादेश मिला।

चुनाव परिणाम: मजबूत जनादेश

गुयाना इलेक्शन कमीशन (GECOM) ने पुष्टि की कि PPP/C ने राष्ट्रीय विधानसभा में 65 में से 36 सीटें जीतकर अपने पिछले प्रदर्शन को बेहतर बनाया। इस बहुमत के साथ अली नेतृत्व वाली सरकार अपनी महत्वाकांक्षी विकास योजना को जारी रख सकती है।

चुनाव ने राजनीतिक परिदृश्य को भी नया रूप दिया:

  • व्यवसायी अजरुद्दीन मोहम्मद के नेतृत्व में नवगठित वी इन्वेस्ट इन नेशनहुड (WIN) पार्टी ने 16 सीटें हासिल कीं और मुख्य विपक्षी दल बन गई।

  • ऑब्रे नॉर्टन के नेतृत्व वाले ए पार्टनरशिप फॉर नेशनल यूनिटी (एपीएनयू) गठबंधन की सीटें घटकर 12 रह गईं, जो एक महत्वपूर्ण गिरावट है।

तेल उत्पादन और आर्थिक वृद्धि

गुयाना का राजनीतिक भविष्य इसकी तेज़ आर्थिक परिवर्तन से गहराई से जुड़ा है, जो मुख्य रूप से समुद्र तट पर तेल उत्पादन से प्रेरित है। 2019 के बाद से देश ने तेल बिक्री और रॉयल्टी के माध्यम से $7.5 बिलियन से अधिक राजस्व अर्जित किया। इस आय प्रवाह ने गुयाना को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना दिया।

देश की GDP ने एक दशक से भी कम समय में पाँच गुना वृद्धि दर्ज की है, जिससे अवसंरचना और सामाजिक कार्यक्रमों में सतत निवेश की संभावनाएँ बढ़ीं।

मुख्य तथ्य

  • राष्ट्रपति: इरफान अली

  • चुनाव तिथि: 1 सितंबर 2025

  • शपथ ग्रहण: 7 सितंबर 2025

  • जीती सीटें: PPP/C – 36, WIN – 16, APNU – 12

  • तेल आय: 2019 से $7.5 बिलियन से अधिक

  • मुख्य चुनौतियाँ: वेनेज़ुएला विवाद, आर्थिक असमानता, मुद्रास्फीति

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का बड़ा फैसला, रक्षा मंत्री लेकोर्नु होंगे नए प्रधानमंत्री

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 9 सितंबर 2025 सेबास्टियन लेकोर्नू को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया। उन्होंने फ्रांस्वा बायरू की जगह ली, जिनकी सरकार बजट विफल होने के कारण गिर गई थी। यह निर्णय मैक्रों के व्यवसाय समर्थक एजेंडे को बनाए रखने की उनकी दृढ़ता को दर्शाता है, भले ही इससे फ्रांस का पहले से ही नाज़ुक राजनीतिक परिदृश्य और अधिक ध्रुवीकृत क्यों न हो जाए।

क्यों लेकोर्नू? एक वफ़ादार और रूढ़िवादी पृष्ठभूमि वाला नेता

39 वर्षीय सेबास्टियन लेकोर्नू लंबे समय से मैक्रों के राजनीतिक आंतरिक सर्कल का अहम हिस्सा रहे हैं। पूर्व रक्षा मंत्री रह चुके लेकोर्नू ने 2017 में मैक्रों के पहले कार्यकाल की शुरुआत से ही कई उच्च पदों पर कार्य किया है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी के साथ रूढ़िवादी राजनीति में की थी, लेकिन बाद में मैक्रों के केन्द्रपंथी आंदोलन से जुड़ गए।

उनकी लगातार वफ़ादारी और रणनीतिक अनुभव ने उन्हें मैक्रों की स्वाभाविक पसंद बना दिया, खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रपति एक अल्पमत सरकार को स्थिर करने और अपने आर्थिक सुधारों की विरासत को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।

राजनीतिक असर: फ्रांसीसी विधानसभा में दरारें

लेकोर्नू की नियुक्ति उस समय हुई है जब नो-कॉन्फिडेंस वोट में बायरू को आक्रामक घाटा-कटौती योजनाओं के कारण पद से हटना पड़ा। वर्तमान में फ्रांस का वित्तीय घाटा यूरोपीय संघ की 3% जीडीपी सीमा से लगभग दोगुना है, जिससे मैक्रों पर यह दबाव बढ़ गया है कि वे राजकोषीय ज़िम्मेदारी और जनता की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखें।

हालांकि, इस कैबिनेट फेरबदल से मध्य-वामपंथियों में असंतोष बढ़ने और राष्ट्रपति की सरकार की मैरीन ले पेन की दूर-दराज़ दक्षिणपंथी नेशनल रैली (RN) पर निर्भरता बढ़ने का खतरा है। लेकोर्नू ने RN नेताओं के साथ सावधान रिश्ते बनाए रखे हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि भविष्य में संसदीय गठबंधन किस रूप में होंगे।

तत्काल चुनौती: बजट और विरोध प्रदर्शन

लेकोर्नू की शीर्ष प्राथमिकता 2026 का बजट पारित कराना है, जिसे गहराई से विभाजित राष्ट्रीय सभा स्वीकार करे। बायरू की विफलता कड़ी कड़े आर्थिक कटौती उपायों को लागू करने के प्रयास के कारण हुई थी, जिसने सभी राजनीतिक दलों में विरोध उभारा।

साथ ही, जनता में असंतोष बढ़ रहा है। इस सप्ताह आयोजित होने वाले “ब्लॉक एवरीथिंग” प्रदर्शन मुद्रास्फीति, असमानता और इस धारणा के खिलाफ व्यापक नाराजगी को दर्शाते हैं कि मैक्रों का आर्थिक मॉडल अभिजात वर्ग के पक्ष में है। लेकोर्नू को न केवल बजट संभालना है बल्कि सरकार में जनता का विश्वास भी बहाल करना है।

लेकोर्नू का ट्रैक रिकॉर्ड: मेयर से मंत्री तक

सिर्फ 18 वर्ष की आयु में लेकोर्नू नॉर्मंडी के एक छोटे शहर के मेयर बने, और 22 साल की उम्र में सारकोजी प्रशासन में सबसे युवा राष्ट्रपति सलाहकार के रूप में शामिल हुए। समय के साथ, वे दक्षिणपंथ से मैक्रों के केन्द्रपंथी दल में आए, 2022 में राष्ट्रपति के पुनर्निर्वाचन अभियान का नेतृत्व किया और रक्षा तथा स्थानीय प्रशासन में विभिन्न भूमिकाएँ निभाईं।

रक्षा मंत्रालय में उनका कार्यकाल सैन्य खर्च में वृद्धि और यूरोपीय सुरक्षा योजना में सक्रिय योगदान से चिह्नित रहा, विशेष रूप से यूक्रेन संबंधी मामलों में।

मुख्य तथ्य

  • नियुक्ति: 9 सितंबर 2025

  • स्थानापन्न: फ्रांस्वा बायरू (नो-कॉन्फिडेंस वोट के माध्यम से हटाए गए)

  • आयु: 39; सबसे युवा रक्षा मंत्री, पूर्व मेयर

  • राजनीतिक रुख: व्यवसाय समर्थक, रूढ़िवादी पृष्ठभूमि

हिमाचल प्रदेश को 1500 करोड़ रुपये की मदद देगी केंद्र सरकार

हिमाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांगड़ा में हवाई सर्वेक्षण किया और समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने ₹1,500 करोड़ के केंद्रीय राहत पैकेज की घोषणा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल को “फिर से खड़ा करने” के लिए प्रतिबद्ध है।

तत्काल सहायता और मुआवज़ा

इस राहत पैकेज में शामिल हैं –

  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की दूसरी किस्त की अग्रिम रिहाई

  • मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि।

  • प्रभावित परिवारों से सीधा संवाद, जहाँ प्रधानमंत्री ने निरंतर केंद्रीय सहायता का भरोसा दिलाया।

बुनियादी ढाँचे और आजीविका का पुनर्वास

बहुआयामी पुनर्वास योजना में शामिल हैं –

  • प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण के तहत मकानों का पुनर्निर्माण, सहायता प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए जियो-टैगिंग

  • राष्ट्रीय राजमार्गों और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, ताकि आवागमन शीघ्र बहाल हो।

  • किसानों और पशुपालकों के लिए आजीविका सहायता, जिसमें मिनी-किट वितरण और लक्षित कृषि सहायता शामिल।

शिक्षा और जल संरक्षण उपाय

  • क्षतिग्रस्त सरकारी स्कूलों का जियो-टैग रिपोर्टिंग के माध्यम से आकलन किया जाएगा और उन्हें समग्र शिक्षा अभियान से धनराशि दी जाएगी।

  • दीर्घकालिक जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन के लिए वर्षा जल पुनर्भरण संरचनाएँ बनाई जाएंगी।

रणनीतिक महत्व

यह ₹1,500 करोड़ का राहत पैकेज दर्शाता है –

  • त्वरित वित्तीय हस्तक्षेप से मानवीय और बुनियादी ढाँचे की ज़रूरतों की पूर्ति।

  • आवास, कृषि और शिक्षा कार्यक्रमों के साथ योजनाओं का एकीकरण, ताकि लक्षित पुनर्वास हो सके।

  • जियो-टैगिंग जैसी तकनीकी समाधान से निधि वितरण तेज़ और पारदर्शी होगा।

  • मज़बूत केंद्र-राज्य सहयोग, जिससे जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन और दीर्घकालिक पुनर्वास संभव होगा।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य

  • कुल सहायता : ₹1,500 करोड़

  • प्रमुख योजनाएँ सक्रिय : SDRF, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम आवास योजना, समग्र शिक्षा अभियान

  • मुआवज़ा : मृत्यु पर ₹2 लाख, घायल पर ₹50,000

आईईपीएफए ​​ने राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन के साथ अपना 9वां स्थापना दिवस मनाया

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) ने 8 सितंबर, 2025 को नई दिल्ली में अपना 9वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर “अदावाकृत का दावा: भारत में निष्क्रिय वित्तीय संपत्तियों की क्षमता का दोहन” विषय पर एक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें दावा प्रक्रियाओं में सुधार, निवेशकों की सुरक्षा और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए सुधारों पर प्रकाश डाला गया।

मुख्य संबोधन और रणनीतिक दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य श्री संजीव सान्याल ने मुख्य भाषण में कहा कि निष्क्रिय वित्तीय संपत्तियों के उत्पादक उपयोग के लिए अभिनव ढांचे और बहु-एजेंसी समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने IEPFA की सुधार-उन्मुख दृष्टि की सराहना की और राष्ट्रीय विकास के लिए अनुप्रयुक्त निधियों के तेज उपयोग पर बल दिया।

IEPFA की CEO सुश्री अनीता शाह अकेला ने उद्घाटन भाषण में प्राधिकरण के मिशन को दोहराया—दावा निपटान को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और डिजिटल व जमीनी पहलों के माध्यम से निवेशकों को शिक्षित करना।

पैनल चर्चा और क्षेत्रीय संवाद

सम्मेलन में वित्तीय और नियामक तंत्र के कई प्रमुख संस्थानों की भागीदारी रही—

  • SEBI, RBI, ICSI : पूंजी बाजार और बैंकिंग सुधारों पर चर्चा

  • IRDAI और PFRDA : बीमा और पेंशन क्षेत्र में परिसंपत्ति वापसी पर जोर

  • उद्योग विशेषज्ञ : रिफंड की व्यावहारिक चुनौतियाँ और निष्क्रिय पूंजी घटाने के उपाय

सभी प्रतिभागियों ने दावा निपटान की समयसीमा घटाने, प्रणाली को अधिक कुशल बनाने और प्रौद्योगिकी के उपयोग से निवेशक अनुभव को सुगम बनाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

IEPFA का पंचतत्त्व विज़न

स्थापना दिवस पर IEPFA ने अपना “पंचतत्त्व विज़न” प्रस्तुत किया, जिसके अंतर्गत—

  • रिफंड प्रक्रिया को तेज़ करना

  • दावों की सत्यापन हेतु AI उपकरणों का प्रयोग

  • “निवेशक समाधान – Dial Your CEO” पहल की शुरुआत

  • निवेशक दीदी और निवेशक शिविरों जैसी वित्तीय साक्षरता मुहिम का विस्तार

  • IEPFA को भारत की वित्तीय प्रणाली का विश्वसनीय स्तंभ बनाना

IEPFA की संस्थागत भूमिका

7 सितंबर 2016 को गठित IEPFA का मुख्य दायित्व है—

  • अप्रमाणित शेयर, डिविडेंड, जमा और डिबेंचर का प्रबंधन

  • वास्तविक निवेशकों को रिफंड की सुविधा

  • देशभर में वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना

  • पारदर्शिता और जनसंपर्क के माध्यम से निवेशकों का विश्वास बनाए रखना

परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य

  • कार्यक्रम : IEPFA का 9वां स्थापना दिवस

  • तिथि : 8 सितंबर 2025

  • थीम : Claiming the Unclaimed

  • मुख्य अतिथि : संजीव सान्याल

  • IEPFA CEO : अनीता शाह अकेला

  • मुख्य पहलें : एकीकृत पोर्टल, निवेशक समाधान, पंचतत्त्व विज़न

  • स्थापना वर्ष : 7 सितंबर 2016

  • मंत्रालय : कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय

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