भारत ने मालदीव को अपनी पहली हाई-स्पीड फेरी गिफ्ट की

भारत ने मालदीव को उसकी पहली हाई-स्पीड फेरी भेंट की है, जिससे प्रमुख एटोल्स के बीच नई परिवहन सेवाओं की शुरुआत होगी। यह फेरी भारत की सहायता से निर्मित की गई है और इसके साथ ही फाफू और धालू एटोल्स के बीच राज्जे ट्रांसपोर्ट लिंक (RTL) सेवाओं का शुभारंभ हुआ है। यह पहल हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (HICDP) फेज-III समझौते के तहत भारत के निरंतर सहयोग का हिस्सा है। यह कदम समुद्री कनेक्टिविटी को मजबूत करता है और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत-मालदीव फेरी परियोजना: पहली हाई-स्पीड फेरी सौंपना

जनवरी 2025 में हस्ताक्षरित HICDP फेज-III समझौते के तहत प्रस्तावित 12 फेरी में से पहली हाई-स्पीड फेरी भारत ने मालदीव को सौंप दी है। यह फेरी RTL प्रणाली के अंतर्गत फाफू और धालू एटोल्स को जोड़ेगी। मालदीव में भारत के उच्चायुक्त जी. बालासुब्रमण्यम ने आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के समर्थन के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। इस परियोजना का उद्देश्य दूरदराज द्वीपों के बीच संपर्क बढ़ाना, स्थानीय आवागमन को सशक्त बनाना और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।

HICDP फेज-III और अनुदान सहायता विवरण

यह हाई-स्पीड फेरी परियोजना HICDP फेज-III का हिस्सा है। मई 2025 में भारत ने मालदीव के साथ फेरी सेवा विस्तार और सामुदायिक विकास के लिए 13 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए।

मुख्य बिंदु:

  • कुल अनुदान: 100 मिलियन मालदीवियन रूफिया (लगभग ₹55 करोड़)
  • कुल 12 हाई-स्पीड फेरी की आपूर्ति
  • फोकस: समुद्री कनेक्टिविटी और आजीविका समर्थन

चार चरणों के तहत भारत ने मालदीव में परिवहन, खेल अवसंरचना, तटीय संरक्षण, स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाओं के लिए 29.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की है।

‘नेबरहुड फर्स्ट’ के तहत भारत-मालदीव संबंध मजबूत

यह परियोजना भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और Vision MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के अनुरूप है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2025 में मालदीव का दौरा किया था, जबकि मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने अक्टूबर 2024 में भारत का दौरा किया था। ये उच्चस्तरीय आदान-प्रदान बेहतर द्विपक्षीय संबंधों और समुद्री सहयोग को दर्शाते हैं। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में मालदीव एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी है, इसलिए कनेक्टिविटी परियोजनाएँ रणनीतिक दृष्टि से अहम हैं।

राज्जे ट्रांसपोर्ट लिंक (RTL) का महत्व

राज्जे ट्रांसपोर्ट लिंक एक राष्ट्रीय फेरी नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य द्वीपों के बीच परिवहन को बेहतर बनाना है। मालदीव अनेक बिखरे हुए एटोल्स से बना है, इसलिए समुद्री परिवहन दैनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

RTL फेरी सेवाओं के लाभ:

  • सस्ती और विश्वसनीय परिवहन सुविधा
  • पर्यटन और मत्स्य उद्योग को बढ़ावा
  • स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं तक बेहतर पहुंच
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती

भारत-मालदीव फेरी परियोजना जमीनी स्तर पर विकास और द्वीपीय कनेक्टिविटी को सीधे समर्थन प्रदान करती है।

लार्सन एंड टूब्रो और NVIDIA ने मिलकर भारत की पहली गीगावाट-स्केल AI फैक्ट्री बनाई

इंजीनियरिंग की बड़ी कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (L&T) ने भारत में सॉवरेन गीगावाट-स्केल AI फैक्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए NVIDIA के साथ एक स्ट्रेटेजिक वेंचर की घोषणा की है। AI इम्पैक्ट समिट में बताया गया कि यह सहयोग भारत में प्रोडक्शन-ग्रेड AI कैपेसिटी देने पर फोकस करता है। यह पहल उन एंटरप्राइज, पॉलिसीमेकर और ग्लोबल कस्टमर को सपोर्ट करती है जो स्केलेबल और सुरक्षित AI कंप्यूटिंग रिसोर्स चाहते हैं।

L&T–NVIDIA AI फैक्ट्री साझेदारी – मुख्य बिंदु

Larsen & Toubro (L&T) और NVIDIA के बीच एआई फैक्ट्री साझेदारी भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस सहयोग के प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं:

  • गीगावाट (GW) स्तर के एआई फैक्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
  • NVIDIA GPU क्लस्टर की तैनाती का विस्तार
  • संप्रभु (Sovereign) और स्केलेबल एआई कंप्यूटिंग पर विशेष ध्यान
  • एंटरप्राइज और राष्ट्रीय स्तर के एआई वर्कलोड के लिए डिज़ाइन

यह पहल भारत की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी एआई अवसंरचना परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।

चेन्नई और मुंबई डेटा सेंटर विस्तार योजना

L&T अपनी डेटा सेंटर क्षमताओं का विस्तार विशेष रूप से Chennai और Mumbai में कर रही है।

प्रमुख बिंदु:

  • हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) और एआई वर्कलोड को सपोर्ट करने के लिए उन्नत डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर
  • ग्रीन एनर्जी आधारित और ऊर्जा-कुशल सुविधाओं का विकास
  • क्लाउड, एआई और बड़े पैमाने के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स के लिए क्षमता निर्माण
  • राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता और सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम को बढ़ावा
  • यह विस्तार योजना भारत को वैश्विक एआई और डेटा प्रोसेसिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

चेन्नई और मुंबई डेटा सेंटर विस्तार योजनाएँ

इस उद्यम में महत्वपूर्ण क्षमता वृद्धि की रूपरेखा है,

स्थान प्रस्तावित क्षमता विवरण
चेन्नई डेटा सेंटर (DC) – 30 मेगावाट तक 300 एकड़ के गीगावाट-स्केलेबल कैंपस के भीतर स्थापित किया जाएगा
मुंबई डेटा सेंटर (DC) – 40 मेगावाट नई सुविधा का निर्माण कार्य प्रगति पर है

इन एक्सपेंशन का मकसद बड़े पैमाने पर AI मॉडल ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट को सपोर्ट करना है।

‘AI फैक्ट्री’ क्या है?

AI फैक्ट्री का मतलब है ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जो इनके लिए ऑप्टिमाइज़ किया गया हो,

  • एक्सेलरेटेड कंप्यूटिंग
  • हाई-डेंसिटी GPU क्लस्टर
  • AI मॉडल ट्रेनिंग और इंफरेंस
  • एंटरप्राइज़-ग्रेड AI सर्विस

पारंपरिक डेटा सेंटर के उलट, AI फैक्ट्रियां खास तौर पर बड़े पैमाने पर AI वर्कलोड के लिए बनाई जाती हैं।

टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन – L&T और NVIDIA का संगम

Larsen & Toubro और NVIDIA की साझेदारी उन्नत इंजीनियरिंग क्षमता और अत्याधुनिक एआई तकनीक का संयोजन है। इस सहयोग में शामिल हैं:

  • L&T की इंजीनियरिंग और परियोजना निष्पादन विशेषज्ञता
  • NVIDIA के उच्च-प्रदर्शन GPUs, CPUs और नेटवर्किंग समाधान
  • NVIDIA-त्वरित (Accelerated) स्टोरेज प्लेटफॉर्म
  • NVIDIA AI Enterprise सॉफ्टवेयर स्टैक

यह एकीकृत ढांचा विभिन्न उद्योगों में तेज, सुरक्षित और बड़े पैमाने पर एआई अपनाने को सक्षम बनाता है।

एआई फैक्ट्री साझेदारी का निवेश परिप्रेक्ष्य

हालांकि L&T ने निवेश की आधिकारिक राशि सार्वजनिक नहीं की है,

  • उद्योग अनुमान के अनुसार 250 मेगावाट डेटा सेंटर की लागत लगभग 9–10 अरब अमेरिकी डॉलर हो सकती है।
  • यह परियोजना अत्यधिक पूंजी-गहन (Capital Intensive) मानी जा रही है।
  • इससे एआई अवसंरचना नेतृत्व के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का संकेत मिलता है।
  • गीगावाट-स्तरीय सुविधाएं अगली पीढ़ी की डिजिटल परिसंपत्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

IndiaAI मिशन के साथ सामंजस्य

यह पहल भारत सरकार के IndiaAI Mission के उद्देश्यों के अनुरूप है। इसके तहत:

  • संप्रभु (Sovereign) एआई अवसंरचना को बढ़ावा
  • घरेलू एआई मॉडल विकास को समर्थन
  • भारत के भीतर सुरक्षित डेटा रेजिडेंसी सुनिश्चित करना
  • वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम के साथ इंटरऑपरेबिलिटी

यह पहल “मेकिंग एआई इन इंडिया” और “मेकिंग एआई वर्क फॉर इंडिया” के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

GalaxEye ने सैटेलाइट इमेजरी को दुनिया भर में बेचने के लिए NSIL के साथ पार्टनरशिप की

भारत के तेजी से बढ़ते न्यू स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण विकास में, स्पेस-टेक स्टार्टअप GalaxEye Space ने न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के साथ डेटा रीसेलर साझेदारी समझौता किया है, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की वाणिज्यिक इकाई है।

इस समझौते के तहत NSIL, GalaxEye के सैटेलाइट इमेजरी समाधान—जिसमें इसकी उन्नत SyncFused OptoSAR तकनीक शामिल है—को पुनः विक्रय (resell) करेगा। यह GalaxEye को NSIL के साथ इस प्रकार की औपचारिक डेटा रीसेलर साझेदारी करने वाला पहला निजी भारतीय सैटेलाइट ऑपरेटर बनाता है। यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के व्यावसायीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

GalaxEye–NSIL साझेदारी: समझौते में क्या शामिल है?

  • GalaxEye Space और NSIL के बीच हुए इस समझौते के तहत:
  • NSIL, GalaxEye के पूरे उत्पाद पोर्टफोलियो का पुनर्विक्रय करेगा।
  • मुख्य फोकस ‘सिंकफ्यूज्ड ऑप्टोएसएआर’ सैटेलाइट इमेजरी समाधान पर रहेगा।
  • उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर प्रमोट किया जाएगा।

यह समझौता भारत की पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) क्षमताओं को मजबूत करेगा और भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियों को वैश्विक बाजार तक पहुंच प्रदान करेगा।

सिंकफ्यूज्ड ऑप्टोएसएआर (SyncFused OptoSAR) तकनीक क्या है?

GalaxEye की प्रमुख तकनीक सिंकफ्यूज्ड ऑप्टोएसएआर (SyncFused OptoSAR), ऑप्टिकल इमेजरी और सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) डेटा को एक साथ जोड़ती है। इस संयोजन से:

  • उच्च-परिशुद्धता (High-Precision) सैटेलाइट विश्लेषण
  • हर मौसम में इमेजिंग की क्षमता
  • दिन और रात दोनों समय पृथ्वी का अवलोकन संभव

यह उन्नत तकनीक कृषि निगरानी, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन मानचित्रण, बुनियादी ढांचा योजना और पर्यावरणीय निगरानी जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह साझेदारी ऐतिहासिक क्यों है?

  • यह पहली बार है जब किसी निजी भारतीय सैटेलाइट ऑपरेटर ने NSIL के साथ डेटा रीसेलर मॉडल के तहत औपचारिक सहयोग किया है।
  • NSIL के नेतृत्व के अनुसार, यह साझेदारी ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को समर्थन देती है और भारतीय अंतरिक्ष उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देती है।
  • यह दर्शाता है कि भारत की न्यू स्पेस अर्थव्यवस्था अब प्रयोगात्मक चरण से आगे बढ़कर व्यावसायिक विस्तार की ओर अग्रसर है।
  • यह सहयोग सार्वजनिक क्षेत्र की अवसंरचना और निजी नवाचार के बीच सेतु का काम करता है।

भारत में अंतरिक्ष व्यावसायीकरण में NSIL की भूमिका

ISRO अपनी वाणिज्यिक गतिविधियों को NSIL के माध्यम से संचालित करता है। NSIL की प्रमुख भूमिकाएँ हैं:

  • सैटेलाइट लॉन्च सेवाओं का विपणन
  • भारतीय अंतरिक्ष उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुगम बनाना

इस समझौते के माध्यम से NSIL, GalaxEye के पृथ्वी अवलोकन डेटा का वैश्विक रीसेलर बनेगा, जिससे भारतीय सैटेलाइट तकनीक की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी।

विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग

GalaxEye के सैटेलाइट इमेजरी समाधान निम्नलिखित क्षेत्रों में उपयोगी होंगे:

  • कृषि उत्पादकता और फसल स्वास्थ्य निगरानी
  • आपदा प्रतिक्रिया और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली
  • प्राकृतिक संसाधन और इन्वेंट्री प्रबंधन
  • बुनियादी ढांचा विकास योजना
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन

उन्नत Opto-SAR क्षमताओं के माध्यम से सरकारी एजेंसियां और निजी उपयोगकर्ता रीयल-टाइम और सटीक भू-स्थानिक (Geospatial) जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

भारत और यूके ने विजन 2035 के तहत ऑफशोर विंड टास्कफोर्स लॉन्च किया

भारत और यूनाइटेड किंगडम ने Vision 2035 के तहत स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने के लिए इंडिया-यूके ऑफशोर विंड टास्कफोर्स की शुरुआत की है। इस पहल की घोषणा 18 फरवरी को आयोजित चौथे भारत-यूके ऊर्जा संवाद के दौरान की गई। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस मंच को “ट्रस्टफोर्स” बताते हुए कहा कि यह प्रतीकात्मक साझेदारी के बजाय ठोस और मापनीय उपलब्धियों पर केंद्रित रहेगा। इस टास्कफोर्स का उद्देश्य यूके की विशेषज्ञता और भारत की बड़े पैमाने की नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को जोड़ते हुए भारत के अपतटीय पवन ऊर्जा तंत्र को तेज़ी देना है।

Vision 2035 के तहत लॉन्च

यह टास्कफोर्स प्रल्हाद जोशी और डेविड लैमी द्वारा संयुक्त रूप से शुरू की गई। यह Vision 2035 और चौथे भारत-यूके ऊर्जा संवाद के अंतर्गत कार्य करेगी। इसका उद्देश्य भारत के विकसित हो रहे अपतटीय पवन ऊर्जा क्षेत्र को रणनीतिक नेतृत्व और समन्वय प्रदान करना है। यूके बड़े स्तर पर ऑफशोर पवन परियोजनाओं और आपूर्ति श्रृंखला निर्माण का अनुभव लाता है, जबकि भारत विशाल बाजार और बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा मांग प्रदान करता है।

टास्कफोर्स के तीन प्रमुख स्तंभ

यह पहल तीन प्राथमिक स्तंभों पर केंद्रित होगी:

  • इकोसिस्टम योजना और बाजार ढांचा – समुद्री तल (सीबेड) लीजिंग फ्रेमवर्क और राजस्व सुनिश्चितता तंत्र सहित।
  • अवसंरचना और आपूर्ति श्रृंखला – बंदरगाह आधुनिकीकरण, घरेलू विनिर्माण और विशेष समुद्री पोतों का विकास।
  • वित्तपोषण और जोखिम न्यूनीकरण – ब्लेंडेड फाइनेंस मॉडल और दीर्घकालिक संस्थागत निवेश को प्रोत्साहन।

इन स्तंभों का उद्देश्य भारत में ऑफशोर पवन निवेश के लिए स्थिर और विश्वसनीय वातावरण तैयार करना है।

गुजरात और तमिलनाडु में अपतटीय पवन ऊर्जा

गुजरात और तमिलनाडु के तटों के पास संभावित अपतटीय पवन क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं। राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान के अध्ययनों ने प्रारंभिक परियोजनाओं की नींव रखी है। शुरुआती परियोजनाओं को समर्थन देने के लिए सरकार ने 7,453 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना को मंजूरी दी है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़ाव

यह टास्कफोर्स भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है। अपतटीय पवन ऊर्जा तटीय हरित हाइड्रोजन क्लस्टरों को उच्च गुणवत्ता वाली नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान कर सकती है। हरित हाइड्रोजन की कीमत घटकर 279 रुपये प्रति किलोग्राम और हरित अमोनिया की कीमत 49.75 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

भारत की बढ़ती नवीकरणीय क्षमता

भारत की स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 272 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है, जिसमें 141 गीगावॉट से अधिक सौर और 55 गीगावॉट पवन ऊर्जा शामिल है। वर्तमान वित्त वर्ष में ही 35 गीगावॉट से अधिक सौर और 4.61 गीगावॉट पवन क्षमता जोड़ी गई है। Vision 2035 के तहत, अपतटीय पवन ऊर्जा को ऊर्जा संक्रमण के अगले चरण में विश्वसनीयता, ग्रिड स्थिरता और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के लिए एक रणनीतिक स्तंभ माना जा रहा है।

अपतटीय पवन ऊर्जा क्या है?

अपतटीय पवन ऊर्जा में समुद्र में पवन टर्बाइन स्थापित कर तेज और स्थिर हवाओं से बिजली उत्पादन किया जाता है। इसके लिए उन्नत समुद्री इंजीनियरिंग, मजबूत बंदरगाह अवसंरचना और उच्च निवेश की आवश्यकता होती है। यूके जैसे देशों ने बड़े पैमाने पर ऑफशोर पवन परियोजनाओं में सफलता हासिल की है। भारत के लिए यह नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और ऊर्जा सुरक्षा विविधीकरण की दिशा में एक नया अध्याय है।

भारत और फ्रांस ने दिल्ली के एम्स में गेम-चेंजिंग एआई सेंटर लॉन्च किया

भारत और फ्रांस ने एआई-संचालित स्वास्थ्य सहयोग में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ (IF-CAIH) का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। इस केंद्र का शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 18-19 फरवरी को आयोजित उच्चस्तरीय RUSH 2026 बैठकों के दौरान किया। इस पहल का उद्देश्य एआई-आधारित अनुसंधान को तेज़ करना, चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ बनाना और क्लीनिकल नवाचार को बढ़ावा देना है। यह कदम कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मस्तिष्क स्वास्थ्य और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के क्षेत्र में भारत-फ्रांस सहयोग को और मजबूत करता है।

हेल्थ में AI के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर (IF-CAIH): मुख्य उद्देश्य

हेल्थ में AI के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर (IF-CAIH) को इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के लिए एक खास हब के तौर पर डिज़ाइन किया गया है।

मुख्य फोकस एरिया में शामिल हैं,

  • हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
  • ब्रेन हेल्थ और न्यूरोसाइंस
  • क्लिनिकल डिसीजन-सपोर्ट सिस्टम
  • ग्लोबल हेल्थकेयर इनोवेशन
  • हेल्थ डेटा का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल

इस सेंटर का मकसद टेक्नोलॉजी, मेडिसिन और रिसर्च को जोड़ना है, जिससे डायग्नोसिस, इलाज और हेल्थकेयर डिलीवरी के लिए नए सॉल्यूशन मिल सकें।

IF-CAIH के पीछे इंस्टीट्यूशनल कोलैबोरेशन

यह सेंटर एक जॉइंट मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) से बना है जिसमें बड़े एकेडमिक इंस्टीट्यूशन शामिल हैं।

  • इंडियन इंस्टीट्यूशन फ्रेंच इंस्टीट्यूशन
  • AIIMS नई दिल्ली सोरबोन यूनिवर्सिटी
  • IIT दिल्ली पेरिस ब्रेन इंस्टिट्यूट

यह कोलैबोरेशन इन चीज़ों को बढ़ावा देता है,

  • जॉइंट रिसर्च प्रोग्राम
  • एकेडमिक एक्सचेंज और मोबिलिटी
  • AI और हेल्थ साइंसेज में नॉलेज शेयरिंग

RUSH 2026 मीटिंग्स: साइंस और इनोवेशन डायलॉग

  • यह उद्घाटन AIIMS में Rencontres Universitaires Et Scientifiques De Haut Niveau (RUSH) 2026 मीटिंग्स के दौरान हुआ।
  • “इंडो-फ्रेंच फोरम: ब्रेन हेल्थ और ग्लोबल हेल्थकेयर में AI” टाइटल वाला एक खास सेशन।

इसमें शामिल थे,

  • साइंटिस्ट
  • क्लिनिशियन
  • पॉलिसीमेकर
  • एकेडमिक लीडर।

फोरम में मेंटल हेल्थ, ब्रेन डिसऑर्डर और ग्लोबल हेल्थकेयर चुनौतियों में AI एप्लीकेशन पर फोकस किया गया।

मैक्रों का संदेश: सॉवरेन और भरोसेमंद AI सिस्टम

अपने भाषण के दौरान, इमैनुएल मैक्रों ने सॉवरेन AI कैपेसिटी के महत्व पर ज़ोर दिया।

उनके भाषण की खास बातें,

  • इंडिपेंडेंट AI इकोसिस्टम की ज़रूरत
  • घरेलू कंप्यूटिंग कैपेसिटी बनाना
  • AI टैलेंट को डेवलप करना
  • एल्गोरिदमिक ट्रांसपेरेंसी पक्का करना
  • भाषाई और कल्चरल डायवर्सिटी की रक्षा करना

उन्होंने दोहराया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंसानियत की सेवा करनी चाहिए, उन्होंने एथिक्स, सेफ्टी और फेयरनेस पर ज़ोर दिया।

AIIMS में यूथ इनोवेशन स्पॉटलाइट

RUSH 2026 के हिस्से के तौर पर: मैक्रों ने 30 मिनट की AI बातचीत की

पार्टिसिपेंट्स,

  • प्रियंका दास राजकाकती
  • मनन सूरी
  • क्लारा चप्पाज़ ने मॉडरेट किया

चर्चा किए गए थीम,

  • यूथ-लेड इनोवेशन
  • क्रॉस-बॉर्डर कोलेबोरेशन
  • AI की ट्रांसफॉर्मेटिव भूमिका

इंडो-फ्रेंच हेल्थकेयर कोऑपरेशन का विस्तार

IF-CAIH इन क्षेत्रों में चल रहे इंडिया-फ्रांस कोऑपरेशन पर आधारित है,

  • डिजिटल हेल्थ
  • एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR)
  • हेल्थ के लिए ह्यूमन रिसोर्स
  • ज़िम्मेदार हेल्थ डेटा गवर्नेंस

उम्मीद के मुताबिक नतीजे,

  • बढ़ी हुई रिसर्च कैपेसिटी
  • एविडेंस-बेस्ड पॉलिसीमेकिंग
  • स्किल डेवलपमेंट
  • ग्लोबल इनोवेशन पार्टनरशिप

जापान ने ऐतिहासिक जीत के बाद साने ताकाइची को फिर से PM बनाया

जापान की साने ताकाइची को 18 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से दोबारा प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। 8 फरवरी को हुए आकस्मिक निचले सदन (लोअर हाउस) चुनावों में उनकी भारी जीत के बाद यह फैसला हुआ। 64 वर्षीय ताकाइची अक्टूबर 2025 में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। उनकी पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया।

उनकी पुनर्नियुक्ति रक्षा, राजकोषीय प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा सुधारों जैसे बड़े नीतिगत बदलावों के लिए जनसमर्थन को दर्शाती है।

ऐतिहासिक चुनावी जीत और राजनीतिक जनादेश

  • 8 फरवरी को हुए चुनावों में ताकाइची ने दो-तिहाई बहुमत के साथ निर्णायक जीत दर्ज की। यह मजबूत जनादेश सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को संवैधानिक और सुरक्षा सुधारों को आगे बढ़ाने की शक्ति देता है।
  • प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम “जिम्मेदार और सक्रिय राजकोषीय नीति” तथा मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों की सार्वजनिक मांग को दर्शाते हैं।

मजबूत रक्षा नीति और ताइवान पर टिप्पणी

  • ताकाइची ने जापान की क्षेत्रीय सीमाओं और समुद्री हितों की रक्षा के लिए रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का वादा किया है।
  • उन्होंने पहले यह संकेत दिया था कि यदि चीन बलपूर्वक ताइवान पर कब्ज़ा करने की कोशिश करता है, तो जापान सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। इस बयान पर चीन ने आलोचना करते हुए जापानी सेना पर “सैन्यवाद को पुनर्जीवित करने” का आरोप लगाया।
  • जापान की बदली हुई सुरक्षा नीति पूर्वी एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की क्षेत्रीय गतिशीलता को प्रभावित कर सकती है।

फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP) रणनीति का अद्यतन

ताकाइची जापान की फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP) रणनीति में संशोधन कर सकती हैं। इस रणनीति का उद्देश्य है—

  • आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती
  • मुक्त व्यापार साझेदारियाँ
  • क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा

जापान ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप के लिए व्यापक और प्रगतिशील समझौता (CPTPP) का प्रमुख सदस्य है, जिसमें यूके, कनाडा और मेक्सिको जैसे देश शामिल हैं। रणनीति में बदलाव बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है।

राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी और जासूसी विरोधी कानून का प्रस्ताव

ताकाइची ने एक राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी स्थापित करने के लिए विधेयक लाने की योजना की घोषणा की, जिससे खुफिया समन्वय और सुरक्षा क्षमताएँ मजबूत होंगी।

उन्होंने जासूसी-रोधी कानून (Anti-Espionage Law) पर भी चर्चा का संकेत दिया। इन कदमों का उद्देश्य वैश्विक साइबर खतरों और क्षेत्रीय तनाव के बीच जापान की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।

आर्थिक चुनौतियाँ और राजकोषीय बहस

जापान कई वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें शामिल हैं—

  • बढ़ता सरकारी कर्ज
  • महंगाई का दबाव
  • वृद्ध होती जनसंख्या
  • श्रम की कमी

ताकाइची ने महंगाई से राहत देने के लिए खाद्य पदार्थों पर उपभोग कर (Consumption Tax) को दो वर्षों के लिए निलंबित करने का वादा किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजस्व आधार कमजोर हो सकता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, 2025 से 2031 के बीच जापान के कर्ज पर ब्याज भुगतान दोगुना होने का अनुमान है।

PM मोदी ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मानव इतिहास का एक परिवर्तनकारी अध्याय बताया। 100 से अधिक देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एआई को केवल एक अवसर नहीं, बल्कि भविष्य की रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) के रूप में देखता है। “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” थीम पर आधारित यह समिट मानव-केंद्रित, समावेशी और जिम्मेदार एआई के माध्यम से वैश्विक प्रगति को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।

वैश्विक एआई नेतृत्व का प्रदर्शन

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में—

  • 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि
  • 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष
  • लगभग 60 मंत्री और उपमंत्री
  • 500 से अधिक वैश्विक एआई लीडर और सीईओ शामिल हुए

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना भारत और वैश्विक दक्षिण (Global South) के लिए गर्व का क्षण है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: मानव सभ्यता का एक मोड़

  • प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के उदय की तुलना आग, लेखन और वायरलेस संचार जैसे ऐतिहासिक आविष्कारों से की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी उतनी ही बड़ी परिवर्तनकारी शक्ति है।
  • उन्होंने जोर दिया कि भले ही मशीनें बुद्धिमान बन रही हों, एआई की वास्तविक शक्ति मानव क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने में निहित है।
  • हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि आज मानवता जो दिशा चुनेगी, वही एआई के दीर्घकालिक प्रभाव को तय करेगी। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई को मानव-केंद्रित, संवेदनशील और जिम्मेदार बनाए रखना आवश्यक है।

AI के लिए M.A.N.A.V विज़न

समिट में, PM मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस के लिए भारत के M.A.N.A.V फ्रेमवर्क को पेश किया।

M – मोरल और एथिकल सिस्टम
A – अकाउंटेबल गवर्नेंस
N – नेशनल सॉवरेनिटी (डेटा ओनरशिप राइट्स)
A – एक्सेसिबल और इनक्लूसिव AI
V – वैलिड और लेजिटिमेट AI सिस्टम

M.A.N.A.V का यह विज़न भारत को दुनिया भर में एथिकल AI स्टैंडर्ड्स को सपोर्ट करने वाले लीडर के तौर पर खड़ा करता है।

ग्लोबल साउथ के लिए एआई का लोकतंत्रीकरण

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई का लोकतंत्रीकरण आवश्यक है, ताकि यह विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बन सके।
  • उन्होंने कहा कि एआई कुछ देशों या बड़ी कंपनियों का एकाधिकार नहीं बनना चाहिए। इसके बजाय ओपन कोड, साझा विकास और वैश्विक सहयोग एआई के भविष्य का मार्गदर्शन करें।
  • भारत का मानना है कि एआई को “वैश्विक सार्वजनिक संपदा” (Global Common Good) के रूप में विकसित होना चाहिए, ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

एआई और भविष्य का कार्यक्षेत्र

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एआई कार्यक्षेत्र के भविष्य को नई परिभाषा देगा। उन्होंने एक ऐसे युग का उल्लेख किया, जहां मानव और बुद्धिमान प्रणालियाँ—

  • साथ मिलकर सृजन करें (Co-create)
  • साथ मिलकर कार्य करें (Co-work)
  • साथ मिलकर विकसित हों (Co-evolve)

उन्होंने कहा कि एआई कार्य को अधिक स्मार्ट, प्रभावी और कुशल बनाएगा। हालांकि, युवाओं को नई भूमिकाओं के लिए तैयार करने हेतु कौशल विकास, पुनः कौशल (reskilling) और आजीवन सीखने को जन-आंदोलन बनाना होगा।

जोखिमों से निपटना: डीपफेक, विश्वास और वैश्विक मानक

प्रधानमंत्री ने डीपफेक और फर्जी डिजिटल सामग्री की बढ़ती चुनौती पर चिंता जताई। उन्होंने सुझाव दिया—

  • डिजिटल सामग्री के लिए प्रामाणिकता लेबल (Authenticity Labels)
  • एआई-जनित सामग्री पर वॉटरमार्किंग
  • सुरक्षित और विश्वसनीय एआई के लिए स्पष्ट वैश्विक मानक
  • उन्होंने पारदर्शिता को आवश्यक बताते हुए कहा, “सूरज की रोशनी सबसे अच्छा कीटाणुनाशक है।”

भारत का एआई इकोसिस्टम और वैश्विक आमंत्रण

भारत निम्न पहलों के माध्यम से मजबूत एआई इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है—

  • सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण पहल
  • सुरक्षित डेटा सेंटर
  • क्वांटम कंप्यूटिंग अनुसंधान
  • सशक्त स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुदाय को आमंत्रित करते हुए कहा—“डिज़ाइन एंड डेवलप इन इंडिया। डिलीवर टू द वर्ल्ड। डिलीवर टू ह्यूमैनिटी।”

उन्होंने उल्लेख किया कि जो भी एआई मॉडल भारत जैसे विविध वातावरण में सफल होता है, वह वैश्विक स्तर पर भी सफल हो सकता है।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के बारे में

यह समिट तीन प्रमुख स्तंभों— People (लोग), Planet (पृथ्वी) और Progress (प्रगति) — पर आधारित है।

इसके अंतर्गत सात कार्य समूह कार्यरत हैं, जो निम्न क्षेत्रों को कवर करते हैं—

  • आर्थिक विकास
  • एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण
  • सामाजिक समावेशन
  • सुरक्षित और विश्वसनीय एआई
  • मानव पूंजी
  • विज्ञान
  • लचीलापन (Resilience)

इस समिट का उद्देश्य जिम्मेदार एआई शासन में भारत को वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में स्थापित करना और सरकार, उद्योग तथा अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

Google भारत में करेगा 1.35 लाख करोड़ रुपये का बड़ा निवेश

Google ने भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। अमेरिकी टेक कंपनी भारत में अगले 5 साल के लिए 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये) निवेश करने वाली है। गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई भारत में आयोजित हो रहे AI Impact Summit में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने 18 फरवरी की सुबह पीएम मोदी से भी मुलाकात की है और भारत में एआई के लिए बड़े निवेश की बात की थी।

गूगल द्वारा आयोजित इवेंट में CEO सुंदर पिचाई और गूगल डीपमाइंड के CEO और को-फाउंडर Demis Hassabis ने बड़े निवेश का ऐलान किया है। कंपनी भारत से अमेरिका के बीच समुद्र के नीचे केबल बिछाया जाएगा, ताकि सुपरफास्ट कनेक्टिविटी मिल सके। यह गूगल का अमेरिका-इंडिया कनेक्ट इनिशिएटिव प्लान का हिस्सा है।

अमेरिका-इंडिया कनेक्ट सबसी केबल पहल क्या है?

“अमेरिका-इंडिया कनेक्ट” एक सहयोगात्मक अवसंरचना कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर क्षमता बढ़ाना है। इसके तहत—

  • विज़ाग (विशाखापत्तनम) में नया अंतरराष्ट्रीय सबसी गेटवे स्थापित किया जाएगा
  • भारत को सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से जोड़ने वाले तीन नए समुद्री केबल मार्ग बनाए जाएंगे
  • चार रणनीतिक फाइबर-ऑप्टिक स्थलीय मार्ग विकसित किए जाएंगे

यह अवसंरचना बैंडविड्थ बढ़ाएगी, नेटवर्क की विश्वसनीयता मजबूत करेगी और भारत को वैश्विक एआई हब्स से बेहतर रूप से जोड़ेगी।

सुंदर पिचाई का एआई कनेक्टिविटी विज़न

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि यह पहल भारत, अमेरिका और दक्षिणी गोलार्ध के अन्य क्षेत्रों के बीच एआई कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। उन्होंने भारत को एआई के क्षेत्र में “असाधारण प्रगति पथ” पर बताया। बेहतर कनेक्टिविटी एआई मॉडल प्रशिक्षण, क्लाउड कंप्यूटिंग और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल सेवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विज़ाग क्यों है रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण?

विशाखापत्तनम में नया सबसी लैंडिंग स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जो—

  • भारत के पूर्वी तट की डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करेगा
  • मौजूदा केबल स्टेशनों पर दबाव कम करेगा
  • क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा

यह गेटवे भारत को वैश्विक डेटा नेटवर्क से और गहराई से जोड़ेगा, जिससे एआई अनुसंधान, फिनटेक, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल स्टार्टअप को बल मिलेगा।

भारत के डिजिटल और एआई इकोसिस्टम को मजबूती

15 अरब डॉलर का यह निवेश भारत की वैश्विक एआई केंद्र के रूप में उभरती भूमिका के अनुरूप है। सबसी केबल निम्न क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं—

  • हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी
  • क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर
  • एआई मॉडल विकास और तैनाती
  • सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय डिजिटल व्यापार

इस पहल से भारत-अमेरिका डिजिटल सहयोग मजबूत होगा और नेटवर्क बाधाओं के खिलाफ लचीलापन बढ़ेगा।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के साथ गूगल की साझेदारी

समिट के दौरान सुंदर पिचाई ने एआई आधारित स्वास्थ्य सेवा के लिए एम्स के साथ गूगल की साझेदारी पर भी प्रकाश डाला।

इस पहल के तहत मरीज डिजिटल रूप से अपने लक्षण दर्ज कर सकेंगे और एआई प्रणाली डॉक्टरों की सहायता के लिए संरचित मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर सकेगी। यह सार्वजनिक सेवाओं में एआई के उपयोग के प्रति गूगल की व्यापक दृष्टि को दर्शाता है।

सबसी केबल क्या होते हैं?

  • सबसी केबल समुद्र के नीचे बिछाए गए फाइबर-ऑप्टिक केबल होते हैं, जिनके माध्यम से देशों के बीच इंटरनेट और दूरसंचार डेटा का आदान-प्रदान होता है।
  • विश्व के 95% से अधिक अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक इन्हीं के माध्यम से संचालित होता है। वैश्विक व्यापार, वित्तीय लेनदेन, क्लाउड सेवाएं और एआई संचालन के लिए ये अत्यंत आवश्यक हैं।
  • इसी कारण देश सुरक्षित और उच्च क्षमता वाली डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सबसी अवसंरचना में भारी निवेश करते हैं।

भारत ने 24 घंटे में AI जिम्मेदारी शपथ का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जिम्मेदार उपयोग को लेकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। इंडियाएआई मिशन के एआई रिस्पॉन्सिबिलिटी कैंपेन में सिर्फ 24 घंटे के अंदर ढाई लाख से ज्यादा लोगों ने शपथ ली। इसके साथ ही भारत ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपनी जगह बना ली। इस उपलब्धि की घोषणा भारत में हो रहे दुनिया के सबसे बड़े इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। उन्होंने बताया कि ये 24 घंटे में एआई जिम्मेदारी के लिए सबसे ज्यादा शपथ लेने का विश्व रिकॉर्ड है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि एआई रिस्पॉन्सिबिलिटी कैंपेन के तहत 16 से 17 फरवरी के बीच 24 घंटे में कुल 2,50,946 लोगों ने शपथ ली। इसके साथ ही भारत ने 24 घंटे में एआई जिम्मेदारी अभियान के लिए सबसे ज्यादा शपथ लेने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना लिया। इस उपलब्धि की पुष्टि नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के आधिकारिक निर्णायक ने की। इस मौके पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, इंडियाएआई मिशन और इंटेल इंडिया के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित

  • केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत ने “24 घंटे में एआई जिम्मेदारी अभियान के लिए सर्वाधिक प्रतिज्ञाएँ प्राप्त करने” का गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स खिताब हासिल किया है।
  • यह उपलब्धि नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान हासिल की गई।
  • कुल 2,50,946 वैध प्रतिज्ञाएँ दर्ज की गईं, जो प्रारंभिक लक्ष्य 5,000 से कहीं अधिक थीं। कार्यक्रम के दौरान गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक द्वारा इस रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि की गई।

IndiaAI Mission के तहत एआई जिम्मेदारी प्रतिज्ञा

एआई जिम्मेदारी प्रतिज्ञा अभियान 16 फरवरी को IndiaAI Mission के अंतर्गत Intel India के सहयोग से शुरू किया गया।

प्रतिभागियों ने एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक, समावेशी और जिम्मेदार उपयोग का संकल्प लिया। अभियान में परिदृश्य-आधारित प्रश्न शामिल थे, जिनका फोकस निम्न विषयों पर था—

  • डेटा गोपनीयता
  • पारदर्शिता
  • जवाबदेही
  • गलत सूचना से मुकाबला

प्रतिज्ञा पूरी करने वाले नागरिकों को एक डिजिटल बैज और एआई लर्निंग पाथवे तक पहुंच प्रदान की गई। इस पहल का उद्देश्य देशभर में जिम्मेदार एआई अपनाने को मजबूत करना था।

छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका

  • केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस राष्ट्रव्यापी अभियान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रेरणा का श्रेय दिया।
  • कॉलेजों, शिक्षकों और छात्रों ने अभियान में सक्रिय भागीदारी की। 2.5 लाख से अधिक छात्रों ने एआई जिम्मेदारी प्रतिज्ञा में हिस्सा लिया, जिससे यह एक छात्र-प्रेरित डिजिटल आंदोलन बन गया।
  • मंत्री ने इसे भारत के लिए गर्व का क्षण और एआई को सामाजिक भलाई के साधन के रूप में उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड क्यों महत्वपूर्ण है?

यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत नैतिक एआई शासन को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह निम्न पहलुओं को रेखांकित करती है—

  • जिम्मेदार एआई के प्रति बढ़ती जन-जागरूकता
  • नागरिक-आधारित डिजिटल जिम्मेदारी
  • एआई तकनीकों में सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करना
  • वैश्विक एआई नैतिक मानकों के साथ सामंजस्य

India AI Impact Summit 2026 भारत की समावेशी और विश्वसनीय एआई विकास के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने का मंच बना।

जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है?

  • जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Responsible AI) से आशय एआई प्रणालियों के नैतिक विकास और उपयोग से है।
  • यह निष्पक्षता, पारदर्शिता, गोपनीयता संरक्षण, जवाबदेही तथा पक्षपात या गलत सूचना की रोकथाम पर जोर देता है।
  • विश्व भर की सरकारें और संगठन एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि तकनीक समाज को लाभ पहुंचाए और किसी प्रकार की हानि न हो।
  • भारत का एआई जिम्मेदारी प्रतिज्ञा अभियान जैसे प्रयास नागरिकों को जागरूक बनाने और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

40 साल से कम उम्र के टॉप 10 अरबपति: यह शख्स भारत को वैश्विक मंच पर दिला रहा नई पहचान

फोर्ब्स की 2025 की सूची में 40 वर्ष से कम आयु के सबसे अमीर स्वनिर्मित अरबपतियों में 71 युवा उद्यमियों को शामिल किया गया है, जिनकी कुल संपत्ति 218 अरब डॉलर है। इस रैंकिंग में एडविन चेन 18 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ शीर्ष पर हैं, जिन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षेत्र में तेज़ उछाल का लाभ मिला है। भारतीयों में निखिल कामथ शीर्ष 20 में शामिल एकमात्र भारत-आधारित नाम हैं, जिनकी कुल संपत्ति 3.3 अरब डॉलर आंकी गई है। यह सूची वैश्विक स्तर पर संपत्ति निर्माण में तकनीक और एआई के बढ़ते प्रभुत्व को दर्शाती है।

Forbes रिचेस्ट अंडर 40 2025: एआई बूम का दबदबा

  • फोर्ब्स रिचेस्ट अंडर 40 वर्ष 2025 की रैंकिंग के अनुसार, एडविन चेन 18 अरब डॉलर की अनुमानित संपत्ति के साथ सूची में शीर्ष स्थान पर हैं।
  • उन्होंने वर्ष 2020 में सर्ज एआई (Surge AI) की स्थापना की, जो कंपनियों को एआई प्रशिक्षण के लिए डेटा लेबलिंग और व्यवस्थित करने में मदद करती है।
  • इस वर्ष एआई क्षेत्र से लगभग आधे नए नाम इस सूची में शामिल हुए हैं। मार्च 2025 से अब तक कुल 27 नए स्वनिर्मित अरबपति (40 वर्ष से कम आयु) इस सूची में जुड़े हैं।
  • इससे स्पष्ट है कि युवा उद्यमियों के बीच तकनीक और एआई संपत्ति निर्माण के सबसे बड़े स्रोत बनकर उभरे हैं।

निखिल कामथ नेट वर्थ: टॉप 20 में एकमात्र भारत-आधारित नाम

  • निखिल कामथ 3.3 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ वैश्विक स्तर पर 20वें स्थान पर हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में अपने भाई नितिन कामथ के साथ मिलकर ज़ेरोधा (Zerodha) की सह-स्थापना की थी।
  • ज़ेरोधा भारत की सबसे बड़ी स्टॉक ब्रोकरेज कंपनियों में से एक बन गई और इसने देश में रिटेल ट्रेडिंग के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किया।
  • निखिल कामथ की कुल संपत्ति उन्हें अंडर 40 रिचेस्ट सूची के टॉप 20 में शामिल एकमात्र भारत-आधारित नाम बनाती है। उनकी सफलता भारत के बढ़ते फिनटेक इकोसिस्टम और स्टार्टअप नवाचार को दर्शाती है।
रैंक नाम आयु कुल संपत्ति (USD) देश आय का स्रोत
1 एडविन चेन 38 $18 अरब संयुक्त राज्य अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
2 वांग निंग एवं परिवार 38 $15.7 अरब चीन खिलौना उद्योग
3 पैट्रिक कोलिसन 37 $10.1 अरब आयरलैंड पेमेंट सॉफ्टवेयर
4 जॉन कोलिसन 35 $10.1 अरब आयरलैंड पेमेंट सॉफ्टवेयर
5 जस्टिन सन 35 $8.5 अरब सेंट किट्स एंड नेविस क्रिप्टोकरेंसी
6 क्लिफ ओब्रेच्ट 39 $7.6 अरब ऑस्ट्रेलिया सॉफ्टवेयर
7 मेलानी पर्किन्स 38 $7.6 अरब ऑस्ट्रेलिया सॉफ्टवेयर
8 व्लाद टेनेव 38 $6.6 अरब संयुक्त राज्य अमेरिका स्टॉक ट्रेडिंग ऐप
9 कै हाओयु 38 $6 अरब चीन मोबाइल गेम्स
10 तैमूर तुर्लोव 38 $5.9 अरब कज़ाख़स्तान स्टॉक ब्रोकरेज

अन्य प्रमुख स्वनिर्मित अरबपति (अंडर 40)

फोर्ब्स रिचेस्ट अंडर 40 (2025) सूची में कई प्रमुख वैश्विक उद्यमी शामिल हैं—

  • वांग निंग – 15.7 अरब डॉलर (चीन, खिलौना उद्योग)
  • पैट्रिक कोलिसन – 10.1 अरब डॉलर (आयरलैंड, पेमेंट्स)
  • जॉन कोलिसन – 10.1 अरब डॉलर (आयरलैंड, पेमेंट्स)
  • जस्टिन सन – 8.5 अरब डॉलर (क्रिप्टोकरेंसी)
  • सूची में 32 नामों के साथ अमेरिका सबसे आगे है, इसके बाद चीन (8) और भारत (6) का स्थान है। 71 युवा अरबपतियों में 8 महिलाएं भी शामिल हैं।

युवा अरबपतियों के बीच संपत्ति रुझान 2025

फोर्ब्स के अनुसार, दिसंबर 2025 तक 39 वर्ष या उससे कम आयु के 71 स्वनिर्मित अरबपति हैं। इनकी कुल संयुक्त संपत्ति 218 अरब डॉलर है, जो 2021 के महामारी-प्रेरित बाजार उछाल के दौरान दर्ज 444 अरब डॉलर से कम है।

मुख्य रुझान:

  • 48 अरबपतियों ने तकनीक क्षेत्र में संपत्ति बनाई
  • 12 ने वित्त और निवेश क्षेत्र में
  • एआई आधारित स्टार्टअप बड़े योगदानकर्ता रहे
  • कुल संपत्ति 2021 के शिखर के लगभग आधे के बराबर
  • तकनीक क्षेत्र वैश्विक स्तर पर युवा अरबपतियों के निर्माण का सबसे मजबूत माध्यम बना हुआ है।

फोर्ब्स वर्ल्ड्स बिलियनेयर्स सूची क्या है?

  • फोर्ब्स वर्ल्ड्स बिलियनेयर्स सूची दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की वार्षिक रैंकिंग है, जो वास्तविक समय की अनुमानित संपत्ति के आधार पर तैयार की जाती है।
  • इसमें तकनीक, वित्त, खुदरा और विनिर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में स्वनिर्मित और विरासत में मिली संपत्ति दोनों शामिल होती हैं।
  • “स्वनिर्मित” श्रेणी उन उद्यमियों को दर्शाती है जिन्होंने अपनी संपत्ति स्वयं के प्रयासों से बनाई है।
  • अंडर-40 रैंकिंग विशेष रूप से युवा संपत्ति निर्माताओं को ट्रैक करती है और उभरते वैश्विक व्यावसायिक रुझानों की झलक प्रदान करती है।

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