Tirupati प्रसादम की क्वालिटी चेक के लिए E-Tongue और E-Nose मशीनें

आंध्र प्रदेश सरकार तिरुमाला में भक्तों को परोसे जाने वाले प्रसादम और अन्य भोजन की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक अत्याधुनिक फूड टेस्टिंग लैब स्थापित करने जा रही है। तिरुमाला मंदिर परिसर में ₹25 करोड़ की लागत से एक नई अत्याधुनिक फूड टेस्टिंग लैब स्थापित की जा रही है। इसमें E-Nose (इलेक्ट्रॉनिक नाक) और E-Tongue (इलेक्ट्रॉनिक जीभ) तकनीक का उपयोग किया जाएगा, ताकि प्रसादम और घी, सूखे मेवे, मसालों जैसी सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी की जा सके। यह कदम 2024 में तिरुमला लड्डुओं में कथित मिलावटी घी विवाद के बाद उठाया गया है। इस पहल को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का समर्थन प्राप्त है। सेंसर-आधारित ये सिस्टम AI संचालित विश्लेषण के जरिए खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेंगे।

E-Nose (इलेक्ट्रॉनिक नाक) क्या है?

E-Nose एक सेंसर-आधारित उपकरण है जो खाद्य पदार्थों से निकलने वाली गंध और वाष्पशील यौगिकों (VOCs) का पता लगाता है।

यह कैसे काम करता है?

  • गैस सेंसरों की एक श्रृंखला (Array) का उपयोग
  • वाष्पशील ऑर्गेनिक कंपाउंड (VOCs) की पहचान
  • विद्युत संकेत (Electrical Signals) उत्पन्न करना
  • AI आधारित पैटर्न पहचान से गंध “फिंगरप्रिंट” का मिलान

यह किसी एक रसायन की पहचान करने के बजाय गैस पैटर्न का विश्लेषण कर सड़न, किण्वन परिवर्तन या मिलावट का पता लगाता है। इसका उपयोग डेयरी, खाद्य तेल और प्रोसेस्ड फूड उद्योग में व्यापक रूप से होता है।

E-Tongue (इलेक्ट्रॉनिक जीभ) क्या है?

E-Tongue तरल पदार्थों में स्वाद से जुड़े रासायनिक तत्वों का विश्लेषण करती है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • कई इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर का उपयोग
  • मीठा, नमकीन, खट्टा, कड़वा स्वाद देने वाले घुले पदार्थों की पहचान
  • विद्युत प्रतिक्रिया पैटर्न तैयार करना
  • सांख्यिकीय और मशीन लर्निंग मॉडल से वर्गीकरण

यह तकनीक तेल, पेय पदार्थ और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता व मिलावट जांचने में उपयोगी है।

दोनों उपकरण साथ में क्यों उपयोग किए जा रहे हैं?

मल्टी-सेंसर फूड एनालिसिस शोध के अनुसार, E-Nose और E-Tongue को साथ उपयोग करने से अधिक सटीक परिणाम मिलते हैं।

उपकरण क्या पहचानता है

  • E-Nose वाष्पशील यौगिक (सुगंध, सड़न, प्रदूषण)
  • E-Tongue घुले रसायन (स्वाद, संरचना में बदलाव)

संयुक्त रूप से ये सक्षम होंगे:

  • मिलावट का तेज़ पता लगाना
  • ताजगी में बदलाव की पहचान
  • स्वाद की एकरूपता सुनिश्चित करना
  • बिना नुकसान (Non-destructive) परीक्षण करना

यह तरीका पारंपरिक लैब जांच की तुलना में तेज़ और प्रभावी है।

तिरुमला में यह तकनीक क्यों लागू की जा रही है?

2024 के घी मिलावट घोटाले के बाद यह कदम उठाया गया है, जब CM चंद्रबाबू नायडू ने CBI-SIT जाँच कराई। रिपोर्ट में 2019-24 के बीच ₹250 करोड़ के मिलावटी घी के इस्तेमाल का खुलासा हुआ। अब यह लैब प्रसादम की 60 सामग्रियों जैसे घी, काजू, किशमिश, बादाम, चना, चीनी, इलायची, हल्दी, मिर्च पाउडर आदि की जाँच करेगी।

विशेष जांच दल (SIT) ने पुष्टि की कि आपूर्ति किए गए घी में निम्न मिलावट पाई गई:

  • पाम ऑयल
  • पाम कर्नेल ऑयल
  • बीटा-कैरोटीन
  • एसिटिक एसिड एस्टर
  • कृत्रिम घी फ्लेवर

इसके बाद सरकार ने कच्चे माल और तैयार प्रसादम की निगरानी कड़ी करने के लिए आधुनिक लैब को मंजूरी दी।

डेटा का विश्लेषण कैसे होता है?

दोनों उपकरण कम्प्यूटेशनल विश्लेषण पर आधारित हैं।

प्रक्रिया:

  • सेंसर डेटा को विद्युत संकेतों में बदला जाता है
  • सांख्यिकीय उपकरणों से प्रोसेस किया जाता है
  • मशीन लर्निंग मॉडल द्वारा वर्गीकृत किया जाता है
  • गुणवत्ता के रेफरेंस डेटाबेस से तुलना की जाती है

AI की प्रगति के कारण ये सिस्टम समय के साथ नए नमूनों के विश्लेषण से और अधिक सटीक होते जाते हैं।

खाद्य सुरक्षा में लाभ

पारंपरिक लैब परीक्षण समय लेने वाला और मैनुअल हस्तक्षेप पर निर्भर होता है। मंदिर परिसर में यह धार्मिक प्रक्रियाओं से भी टकरा सकता है।

नई प्रणाली के लाभ:

  • तेज़ और स्वचालित जांच
  • बिना नुकसान परीक्षण
  • मानवीय हस्तक्षेप में कमी
  • असामान्यता की शुरुआती पहचान
  • धार्मिक प्रक्रियाओं को प्रभावित किए बिना नियमित जांच

हालांकि, अधिकारी स्पष्ट करते हैं कि ये उपकरण प्रारंभिक स्क्रीनिंग टूल हैं और पूर्ण प्रयोगशाला परीक्षण का विकल्प नहीं हैं।

टैक्स समझौते में भारत ने फ्रांस में मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छोड़ा

भारत ने फ्रांस के साथ अपनी कर संधि से सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN) क्लॉज हटा दिया है। संशोधित भारत–फ्रांस कर संधि पर हाल ही में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए। इस बदलाव से डिविडेंड टैक्स, कैपिटल गेन टैक्सेशन और वैश्विक एंटी-टैक्स अवॉइडेंस (BEPS) नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। MFN क्लॉज हटने के बाद फ्रांस अब भारत की अन्य कर संधियों के आधार पर स्वतः कर लाभ नहीं मांग सकेगा। इस कदम का उद्देश्य है—कर विवाद कम करना और भारत व फ्रांस के बीच सीमा-पार कराधान (Cross-Border Taxation) में स्पष्टता लाना।

भारत–फ्रांस कर संधि क्या है?

भारत–फ्रांस कर संधि, जिसे आधिकारिक रूप से Double Taxation Avoidance Convention (DTAC) कहा जाता है, वर्ष 1992 में हस्ताक्षरित हुई थी।

इसका मुख्य उद्देश्य है—

एक ही आय पर दो देशों में दोहरी कराधान (Double Taxation) से बचाव करना।

MFN क्लॉज क्या करता था?

MFN (Most Favoured Nation) क्लॉज के तहत:

  • यदि भारत भविष्य में किसी अन्य देश को कम कर दर देता
  • तो फ्रांस स्वतः वही लाभ मांग सकता था
  • इसके लिए नई बातचीत (Negotiation) की आवश्यकता नहीं होती थी

अब MFN क्लॉज हटने के बाद, फ्रांस केवल वही कर लाभ ले सकेगा जो स्पष्ट रूप से भारत–फ्रांस संधि में लिखे गए हैं।

भारत ने MFN क्लॉज क्यों हटाया?

MFN क्लॉज हटाने के पीछे प्रमुख कारण:

  • लंबे समय से चल रहे कर विवादों को कम करना
  • भविष्य की संधियों के लाभों का स्वतः लागू होना रोकना
  • कर मामलों में कानूनी स्पष्टता लाना
  • भारत के कराधिकार (Taxation Rights) की सुरक्षा करना

अब संधि लाभ केवल स्पष्ट बातचीत और लिखित प्रावधानों के बाद ही लागू होंगे।

कैपिटल गेन नियमों में क्या बदलाव हुआ?

संशोधित संधि में कैपिटल गेन टैक्सेशन को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

नया नियम:

शेयर बिक्री से होने वाला कैपिटल गेन उसी देश में टैक्स होगा, जहाँ संबंधित कंपनी स्थित है।

उदाहरण:

यदि कोई फ्रांसीसी निवेशक किसी भारतीय कंपनी के शेयर बेचता है, तो उस लाभ पर टैक्स लगाने का पूरा अधिकार भारत को होगा।

इससे पहले MFN ढांचे के कारण कई व्याख्यात्मक भ्रम उत्पन्न होते थे, जो अब समाप्त हो जाएंगे।

BEPS नियमों का समावेश

संशोधित भारत–फ्रांस कर संधि में अब वैश्विक BEPS (Base Erosion and Profit Shifting) प्रावधान जोड़े गए हैं।

प्रमुख प्रावधान:

  • मुनाफे के कृत्रिम स्थानांतरण (Profit Shifting) की रोकथाम
  • स्थायी प्रतिष्ठान (Permanent Establishment) के नियमों को सख्त करना
  • तकनीकी सेवाओं की फीस की स्पष्ट परिभाषा
  • कर जानकारी के बेहतर आदान-प्रदान की व्यवस्था

MFN क्लॉज हटाने और BEPS प्रावधानों के जुड़ने से पारदर्शिता बढ़ेगी और संधि के दुरुपयोग की संभावना घटेगी।

नई संधि कब लागू होगी?

संशोधित भारत–फ्रांस कर संधि तभी प्रभावी होगी जब:

  • भारत और फ्रांस दोनों अपने-अपने आंतरिक कानूनी अनुमोदन (Ratification) की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

अनुमोदन के बाद ही MFN क्लॉज हटाने और नए कर नियम लागू होंगे।

फरहान अख्तर की फिल्म ‘बूंग’ ने बाफ्टा अवार्ड जीता

हॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स में एक बाफ्टा पुरस्कार में भारतीय मणिपुरी भाषा की कॉमेडी ड्रामा फीचर फिल्म ‘बूंग’ को बेस्ट चिल्ड्रंस एंड फैमिली फिल्मी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। खास बात ये है कि फिल्म ‘बूंग’ फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी है और फिल्म को डायरेक्ट लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है। ‘बूंग’ इस साल की पहली भारतीय फिल्म है, जिसे ‘बाफ्टा’ में नॉमिनेट किया गया था और अब बेस्ट चिल्ड्रंस एंड फैमिली फिल्मी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

लक्ष्मीप्रिय देवी का प्रभावशाली निर्देशन

  • फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है। यह उनकी पहली फीचर फिल्म है, जिसने अपनी भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक प्रस्तुति से वैश्विक जूरी को प्रभावित किया।
  • फिल्म बचपन की मासूमियत, पहचान, आशा और परिवार की संवेदनाओं को खूबसूरती से दर्शाती है।
  • BAFTA 2026 की यह उपलब्धि उन्हें भारतीय सिनेमा की एक सशक्त नई आवाज़ के रूप में स्थापित करती है।

‘बूंग’ के लिए बेहद खुश हैं लक्ष्मीप्रिया देवी

लक्ष्मीप्रिया देवी ने कहा कि ‘बूंग’ मणिपुरी भाषा में एक छोटे लड़के का नाम है। कहानी एक ऐसे लड़के की है जो अपनी मां के लिए सबसे खास तोहफा लाना चाहता है। वह सोचता है कि अपने लापता पिता को ढूंढकर घर लाना ही मां के लिए सबसे अच्छा गिफ्ट होगा। लड़का इस उम्मीद में सफर पर निकलता है, और इस दौरान उसकी जिंदगी में कई बदलाव आते हैं। यह एक भावुक और दिल छू लेने वाली कहानी है।

फिल्म की टीम और कलाकार

‘बूंग’ का निर्माण फरहान अख्तर के साथ विकेश भूटानी, एलन मैकएलेक्स, रितेश सिधवानी और शुजात सौदागर ने किया। फिल्म में गुगुन किपगेन और बाला हिजाम ने मार्मिक अभिनय किया है। फरहान अख्तर ने लंदन में आयोजित समारोह में टीम की ओर से पुरस्कार ग्रहण किया।

फिल्म ‘बूंग’

‘बूंग’ फिल्म BAFTA में अकेली भारतीय नामांकित फिल्म थी। इसने ‘जूटोपिया 2’, ‘लिलो एंड स्टिच’ और ‘आर्को’ जैसी बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को हराकर यह अवॉर्ड जीता है। अवॉर्ड सेरेमनी लंदन के रॉयल फेस्टिवल हॉल में हुई, जहां फरहान अख्तर, लक्ष्मीप्रिया देवी, रितेश सिधवानी और बाकी टीम के सदस्य मौजूद थे। फिल्म का पहला प्रीमियर 2024 में टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में हुआ था। बाद में इसे कई बड़े फेस्टिवल में दिखाया गया, जैसे वारसॉ, MAMI मुंबई, IFFI और मेलबर्न इंडियन फिल्म फेस्टिवल।

BAFTA अवॉर्ड्स क्या हैं? 

  • BAFTA अवार्ड्स, ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं और विश्व के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म सम्मानों में से एक माने जाते हैं।
  • इन्हें अक्सर ब्रिटेन का ‘ऑस्कर’ कहा जाता है। ये पुरस्कार फिल्म, अभिनय, निर्देशन और तकनीकी श्रेणियों में उत्कृष्टता को सम्मानित करते हैं।
  • BAFTA जीतना किसी भी फिल्म की वैश्विक पहचान और विश्वसनीयता को काफी बढ़ा देता है।
  • भारतीय सिनेमा के लिए ‘बूंग’ की Best Children’s and Family Film श्रेणी में जीत अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस 2026, जानिए इसके बारे में सब कुछ

हर साल 24 फरवरी के दिन देश में केंद्रीय सीमा उत्पाद दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे का उद्देश्य केंद्रीय उत्पाद और कस्टम बोर्ड ऑफ इंडिया का अर्थव्यवस्था में योगदान का सम्मान करना है। इसके अलावा संस्थान के अधिकारियों द्वारा की गई कड़ी मेहनत को सम्मानित करने के लिए भी इस दिन को मनाया जाता है।

इस दिन को मनाना का उद्देश्य यह भी है कि देश के लोगों को केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क बोर्ड के महत्व को बताया जाए। इस दिन बोर्ड की ओर से कई सारे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, इसमें सेमिनार, कार्यशालाएं, शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम, जागरुकता कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और पुरस्कार समारोह शामिल हैं।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस: इतिहास

हर साल 24 फरवरी को ही केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस मनाया जाता है क्योंकि 24 फरवरी 1944 को केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक कानून को बनाया गया था। बता दें कि केंद्रीय सीमा शुल्क और उत्पाद बोर्ड केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है और यह एक तरह का अप्रत्यक्ष कर है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और कस्टम बोर्ड के पास देश में कस्टम, जीएसटी, केंद्रीय एक्साइज, सर्विस टैक्स और नारकोटिक्स के प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। यह एक तरह का अप्रत्यक्ष कर है, जो कारखानों में निर्मित सभी तरह के उत्पादों पर लगता है। ब्रिटिश शासन में 1855 में उत्पाद शुल्क विभाग की स्थापना की गई थी।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस का उद्देश्य

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य CBIC और उसके अधिकारियों की सेवाओं को मान्यता देना है।

प्रमुख उद्देश्य:

  • कर अनुपालन बनाए रखने के लिए अधिकारियों की सराहना
  • कर प्रशासन में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ावा
  • उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क के प्रति जागरूकता फैलाना
  • डिजिटल कर प्रणाली और तकनीकी सुधारों को उजागर करना
  • यह दिन अधिकारियों को कर्तव्यनिष्ठा और जवाबदेही के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

CBIC की भूमिका

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।

CBIC की प्रमुख जिम्मेदारियाँ:

  • सीमा शुल्क (Customs Duty) का संग्रह
  • केंद्रीय उत्पाद शुल्क का प्रशासन
  • CGST और IGST का कार्यान्वयन
  • तस्करी और अवैध व्यापार की रोकथाम
  • अप्रत्यक्ष कर नीतियों का निर्माण

यह संस्था पारंपरिक उत्पाद शुल्क प्रणाली को आधुनिक जीएसटी सुधारों के साथ समन्वित करती है।

जीएसटी युग में केंद्रीय उत्पाद शुल्क

2017 में जीएसटी लागू होने के बाद कई अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर दिया गया।

फिर भी निम्न वस्तुओं पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क लागू है:

  • पेट्रोलियम उत्पाद
  • तंबाकू उत्पाद
  • कुछ विशिष्ट औद्योगिक वस्तुएँ

इस प्रकार, केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस भारत की कर प्रणाली के ऐतिहासिक आधार और आधुनिक सुधारों दोनों को स्वीकार करता है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस कैसे मनाया जाता है?

देशभर में CBIC कार्यालयों द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं:

  • कर सुधारों पर सेमिनार एवं कार्यशालाएँ
  • सीमा शुल्क और जीएसटी पर जागरूकता अभियान
  • सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम
  • उत्कृष्ट अधिकारियों को सम्मानित करने हेतु पुरस्कार समारोह

यह दिवस कर प्रशासन और नागरिकों/उद्योगों के बीच संवाद का मंच भी प्रदान करता है।

भारत में केंद्रीय उत्पाद शुल्क प्रणाली

  • यह एक अप्रत्यक्ष कर है जो भारत में निर्मित वस्तुओं पर लगाया जाता है।
  • जीएसटी से पहले यह केंद्र सरकार के लिए प्रमुख राजस्व स्रोतों में से एक था।
  • इसका कानूनी आधार केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 है।
  • वर्तमान में चयनित वस्तुओं पर ही यह लागू है।
  • इसका प्रशासन CBIC द्वारा किया जाता है, जो सीमा शुल्क और जीएसटी संचालन भी संभालता है।

स्टैटिक जीके

  • दिवस: केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस
  • तिथि: 24 फरवरी
  • संबंधित अधिनियम: केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944
  • प्रमुख संस्था: CBIC
  • महत्व: भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली का ऐतिहासिक और वर्तमान आधार

475 वर्ष पुराना वसई कैथेड्रल को यूनेस्को पुरस्कार: सामुदायिक संरक्षण को मिला वैश्विक सम्मान

महाराष्ट्र के वसई (पापडी गांव) में स्थित 475 वर्ष पुराना अवर लेडी ऑफ़ ग्रेस कैथेड्रल को 2025 के सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए यूनेस्को एशिया-प्रशांत पुरस्कार (UNESCO Asia-Pacific Awards for Cultural Heritage Conservation) में प्रतिष्ठित Award of Merit प्रदान किया गया है। यह घोषणा बैंकॉक में की गई, जिससे इस ऐतिहासिक चर्च के सामुदायिक वित्तपोषित संरक्षण कार्य को वैश्विक पहचान मिली। 16वीं शताब्दी में बिना सीमेंट और ईंटों के निर्मित इस पत्थर के कैथेड्रल का संरक्षण पुर्तगाली युग की स्थापत्य विरासत और आध्यात्मिक महत्व को सुरक्षित रखते हुए किया गया।

पुर्तगाली स्थापत्य की जीवंत विरासत

अवर लेडी ऑफ़ ग्रेस कैथेड्रल महाराष्ट्र में कैथोलिक धर्म की स्थापना का ऐतिहासिक प्रतीक माना जाता है। 16वीं शताब्दी में निर्मित यह संरचना भारत में पुर्तगाली औपनिवेशिक वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

प्रमुख स्थापत्य विशेषताएँ:

  • पत्थर और मिट्टी से निर्मित संरचना (बिना सीमेंट/ईंट)
  • हाथ से नक्काशीदार धार्मिक सज्जा तत्व
  • पारंपरिक मैंगलोर टाइलों की छत
  • ऐतिहासिक घंटाघर (बेल टॉवर) और स्तंभयुक्त गलियारे

समय के साथ प्राकृतिक क्षरण और पूर्व में किए गए गलत मरम्मत कार्यों से संरचना कमजोर हो गई थी। हालिया संरक्षण परियोजना ने इसकी प्रामाणिकता बनाए रखते हुए इसे पुनर्जीवित किया।

यूनेस्को एशिया-प्रशांत पुरस्कार 2025: क्यों मिला सम्मान?

2025 के सिल्वर जुबली (25वें वर्ष) संस्करण में 16 देशों से 90 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच वसई कैथेड्रल को Award of Merit मिला।

यूनेस्को के अनुसार परियोजना की विशेषताएँ थीं—

  • 16वीं सदी की पुर्तगाली संरचना का पुनरुद्धार
  • पारंपरिक शिल्प तकनीकों का उपयोग
  • इसे पुनः जीवंत पूजा स्थल के रूप में स्थापित करना
  • सतत सामुदायिक भागीदारी
  • सीमित बजट में टिकाऊ संरक्षण

₹4.5 करोड़ की सामुदायिक निधि से हुआ संरक्षण

यह संरक्षण परियोजना लगभग ₹4.5 करोड़ की लागत से पूरी हुई, जिसका अधिकांश वित्तपोषण स्थानीय पैरिश समुदाय ने किया।

संरक्षण कार्य वास्तु संरक्षण विशेषज्ञ ऐन्सले लुईस के नेतृत्व में 2023–2024 के बीच सम्पन्न हुआ। उस समय के पैरिश पुजारी फादर जॉन फर्गोस और आर्चबिशप फेलिक्स मचाडो का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

प्रमुख संरक्षण कार्य:

  • मैंगलोर टाइलों की रिसावयुक्त छत की मरम्मत
  • घंटाघर को सुदृढ़ करना
  • अग्रभाग (फैसाड) और गलियारों का पुनर्स्थापन
  • हाथ से नक्काशीदार आंतरिक सज्जा का पुनर्जीवन
  • पूर्व में किए गए गलत मरम्मत कार्यों को हटाना

वैश्विक विजेता और मूल्यांकन मानदंड

जहाँ वसई कैथेड्रल को Award of Merit मिला, वहीं सर्वोच्च Award of Distinction जापान और चीन की परियोजनाओं को प्रदान किया गया—

  • इवामी गिंज़ान लाइब्रेरी (जापान)
  • सिहांग वेयरहाउस (चीन)

निर्णायक मंडल ने परियोजनाओं का मूल्यांकन निम्न आधारों पर किया—

  • स्थान की समझ
  • तकनीकी उत्कृष्टता
  • सतत विकास
  • दीर्घकालिक सामुदायिक प्रभाव

यूनेस्को एशिया-प्रशांत विरासत संरक्षण पुरस्कार: पृष्ठभूमि

सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए यूनेस्को एशिया-प्रशांत पुरस्कार की स्थापना एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निर्मित विरासत के संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों को सम्मानित करने के लिए की गई थी।

इन पुरस्कारों का उद्देश्य है—

  • सतत संरक्षण प्रथाओं को प्रोत्साहन
  • पारंपरिक शिल्प कौशल का संवर्धन
  • सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा
  • सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाना

वसई कैथेड्रल को मिला यह सम्मान महाराष्ट्र को वैश्विक विरासत पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करता है।

UGC ने पूरे भारत में 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की पहचान की, यह राज्य लिस्ट में सबसे ऊपर

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने एक बार फिर देश में चल रही फर्जी यूनिवर्सिटीज की लिस्ट जारी की है। 12 राज्यों में 32 ऐसे यूनिवर्सिटीज की पहचान की गई है, जिससे स्टूडेंट के भविष्य की सुरक्षा और हायर एजुकेशन के भरोसे को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं। UGC ने स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को सावधान रहने और इन इंस्टीट्यूशन में एडमिशन लेने से बचने की सलाह दी है, जिन्हें UGC एक्ट के तहत मान्यता नहीं मिली है और जिनके पास वैलिड डिग्री देने का अधिकार नहीं है।

ताज़ा नोटिस के अनुसार, दिल्ली में सबसे अधिक 12 फर्जी विश्वविद्यालय पाए गए हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों का स्थान है। छात्रों को प्रवेश लेने से पहले मान्यता की स्थिति अवश्य जांचने की सलाह दी गई है।

यूजीसी फर्जी विश्वविद्यालय 2026: कानून क्या कहता है?

यूजीसी ने स्पष्ट किया कि ये संस्थान न तो केंद्र सरकार और न ही किसी राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। नोटिस में निम्न प्रावधानों का उल्लेख किया गया है—

  • यूजीसी अधिनियम की धारा 2(फ) – मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय की परिभाषा
  • यूजीसी अधिनियम की धारा 3 – “डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी” संस्थानों से संबंधित प्रावधान

इन मानकों को पूरा न करने वाला कोई भी संस्थान कानूनी रूप से डिग्री प्रदान नहीं कर सकता। ऐसे फर्जी विश्वविद्यालयों की डिग्रियों की कोई वैधानिक मान्यता नहीं होती।

राज्यवार फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या

नीचे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के अनुसार फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या दी गई है—

राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या
दिल्ली 12
उत्तर प्रदेश 4
आंध्र प्रदेश 2
कर्नाटक 2
केरल 2
महाराष्ट्र 2
पुडुचेरी 2
पश्चिम बंगाल 2
अरुणाचल प्रदेश 1
हरियाणा 1
झारखंड 1
राजस्थान 1

यह आंकड़े यूजीसी फर्जी विश्वविद्यालय 2026 को लेकर जागरूकता की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

दिल्ली में चिन्हित 12 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची

दिल्ली में यूजीसी द्वारा चिन्हित फर्जी विश्वविद्यालयों के नाम इस प्रकार हैं—

  1. वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी (WPUNU)
  2. इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग
  3. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंसेज
  4. कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड
  5. यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी
  6. वोकेशनल यूनिवर्सिटी
  7. एडीआर-सेंट्रिक ज्युडिशियल यूनिवर्सिटी
  8. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग
  9. विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट
  10. आध्यात्मिक विश्वविद्यालय
  11. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट सॉल्यूशन
  12. माउंटेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी

दिल्ली के छात्रों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि वे किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता स्थिति आधिकारिक यूजीसी वेबसाइट पर अवश्य जांच लें।

अन्य प्रमुख राज्यों में फर्जी विश्वविद्यालय 

UGC द्वारा जारी सूची के अनुसार, दिल्ली के अलावा कई अन्य राज्यों में भी फर्जी विश्वविद्यालय चिन्हित किए गए हैं। इन संस्थानों की डिग्रियां कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं।

हरियाणा

  • हरियाणा मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी – फरीदाबाद

झारखंड

  • दक्ष यूनिवर्सिटी (वोकेशनल एंड लाइफ स्किल एजुकेशन) – रांची

कर्नाटक

  • सर्व भारतीय शिक्षा पीठ – तुमकुर
  • ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी – बेंगलुरु

केरल

  • इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ प्रोफेटिक मेडिसिन (IIUPM) – कोझिकोड
  • सेंट जॉन्स यूनिवर्सिटी – (केरल)

महाराष्ट्र

  • राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी – नागपुर
  • नेशनल बैकवर्ड कृषी विद्यापीठ – सोलापुर

पुडुचेरी

  • उषा लच्छुमनन कॉलेज ऑफ एजुकेशन
  • श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन

राजस्थान

  • राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट – भिवाड़ी

उत्तर प्रदेश

  • गांधी हिंदी विद्यापीठ – प्रयागराज
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी) – अलीगढ़
  • भारतीय शिक्षा परिषद – लखनऊ
  • महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी – नोएडा

पश्चिम बंगाल

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन – कोलकाता
  • इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च – कोलकाता

इसके अतिरिक्त कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, झारखंड, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी फर्जी संस्थानों को लेकर सतर्कता की आवश्यकता बताई गई है।

छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता स्थिति आधिकारिक यूजीसी वेबसाइट पर अवश्य सत्यापित करें, ताकि भविष्य में डिग्री की वैधता से संबंधित किसी भी समस्या से बचा जा सके।

यूजीसी फर्जी विश्वविद्यालय 2026 की चेतावनी क्यों महत्वपूर्ण है?

UGC द्वारा जारी फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों का मुद्दा सीधे तौर पर छात्रों के करियर, समय और आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करता है।

प्रमुख जोखिम

  • सरकारी नौकरियों के लिए डिग्री अमान्य
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में अयोग्यता
  • उच्च शिक्षा (PG, PhD आदि) में प्रवेश न मिलना
  • फर्जी प्रवेश के कारण आर्थिक नुकसान
  • समय और करियर का नुकसान

फर्जी संस्थानों से प्राप्त डिग्रियों की कोई कानूनी मान्यता नहीं होती, जिससे छात्रों का भविष्य संकट में पड़ सकता है।

इसलिए यूजीसी फर्जी विश्वविद्यालय 2026 की सूची एक निवारक (Preventive) कदम के रूप में कार्य करती है, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक पारदर्शिता और गुणवत्ता को बनाए रखना तथा छात्रों को धोखाधड़ी से बचाना है।

राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की जगह लगाई गई राजाजी की प्रतिमा

राष्ट्रपति भवन में 23 फरवरी 2026 को पहले भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के जीवन और विरासत को दर्शाने वाले ‘राजाजी उत्सव’ का आरंभ हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस खास मौके पर उन्होंने सी. राजगोपालाचारी की मूर्ति का अनावरण किया। राजगोपालाचारी भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल थे।

राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, यह मूर्ति अशोक मंडप के पास बनी बड़ी सीढ़ियों पर लगाई गई है। यह मूर्ति वहां पहले से लगी एडविन लुटियंस की मूर्ति की जगह ली है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह बदलाव गुलामी की सोच को पीछे छोड़ने की एक कोशिश है। यह भारत की संस्कृति, विरासत और परंपराओं को गर्व के साथ अपनाने का तरीका है।

राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की प्रतिमा क्यों बदली जा रही है?

प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद भी राष्ट्रपति भवन परिसर में ब्रिटिश अधिकारियों की प्रतिमाएँ बनी रहीं, जबकि कई भारतीय नेताओं को समुचित सम्मान नहीं मिला।

इस निर्णय के प्रमुख कारण:

  • औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने का प्रयास
  • भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं को सम्मान
  • ‘पंच-प्राण’ दृष्टि के तहत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति

राजाजी की प्रतिमा को केंद्रीय प्रांगण (Central Courtyard) में राजाजी उत्सव के दौरान अनावरण किया जाएगा।

एडविन लुटियंस कौन थे?

एडविन लुटियंस एक प्रमुख ब्रिटिश वास्तुकार थे, जिन्हें 1912 में ब्रिटिश भारत की नई राजधानी दिल्ली के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

लुटियंस द्वारा डिज़ाइन किए गए प्रमुख स्थल:

  • राष्ट्रपति भवन
  • नॉर्थ ब्लॉक
  • साउथ ब्लॉक
  • इंडिया गेट
  • हैदराबाद हाउस
  • कॉनॉट प्लेस

नई दिल्ली का केंद्रीय क्षेत्र आज भी “लुटियंस दिल्ली” के नाम से जाना जाता है।

सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) कौन थे?

सी. राजगोपालाचारी, जिन्हें राजाजी के नाम से जाना जाता है, एक प्रसिद्ध वकील, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे।

प्रमुख तथ्य:

  • भारत के एकमात्र और अंतिम गवर्नर-जनरल (1948–1950)
  • महात्मा गांधी के निकट सहयोगी
  • गांधीजी की जेल अवधि के दौरान ‘Young India’ का संपादन
  • जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में गृह मंत्री
  • 1957 में स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक

वे अपने स्वतंत्र विचार, अनुशासन और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं।

कार्यक्रम की मुख्य बातें

  • राष्ट्रपति भवन में प्रतिमा अनावरण
  • 24 फरवरी से 1 मार्च तक राजगोपालाचारी पर प्रदर्शनी
  • भारतीय लोकतंत्र में उनके योगदान को श्रद्धांजलि
  • औपनिवेशिक प्रतीकों से नई पहचान की ओर

राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की प्रतिमा को बदलने का निर्णय एक व्यापक सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक परिवर्तन का हिस्सा बताया जा रहा है।

सरकार ने निम्न बिंदुओं पर बल दिया है:

  • ऐतिहासिक स्थलों का पुनः भारतीयकरण
  • भारतीय नेतृत्व और विरासत का सम्मान
  • राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ करना

यह कदम भारत की उत्तर-औपनिवेशिक (Post-Colonial) परिवर्तन यात्रा के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

स्टैटिक जीके

  • घोषणा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • कार्यक्रम: मन की बात
  • स्थान: राष्ट्रपति भवन
  • नई प्रतिमा: सी. राजगोपालाचारी
  • उत्सव: 23 फरवरी – राजाजी उत्सव
  • प्रदर्शनी: 24 फरवरी – 1 मार्च

पंजाब सरकार ‘मेरी रसोई योजना’ के तहत 40 लाख परिवारों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराएगी

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ‘मेरी रसोई’ योजना शुरु करने की 23 फरवरी 2026 को घोषणा की, जिसके तहत राज्य सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत 40 लाख परिवारों को आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराएगी। मान ने यहां मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि इस पहल का उद्देश्य गरीब परिवारों के बच्चों का पर्याप्त पोषण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पहले से ही इन लाभार्थियों को रियायती दरों पर गेहूं उपलब्ध करा रही है और वह राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

मेरी रसोई योजना: लाभार्थियों को क्या मिलेगा?

‘मेरी रसोई’ योजना के तहत पात्र परिवारों को हर तीन महीने के लिए मुफ्त राशन किट दी जाएगी।

प्रथम चरण (अप्रैल, मई, जून) में प्रत्येक परिवार को मिलेगा:

  • 2 किलोग्राम चना दाल
  • 2 किलोग्राम चीनी
  • 1 किलोग्राम आयोडीन युक्त नमक
  • 200 ग्राम हल्दी पाउडर
  • 1 लीटर सरसों का तेल

ये सभी वस्तुएँ निःशुल्क वितरित की जाएंगी।

योजना का उद्देश्य: पोषण पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य निम्न आय वर्ग के परिवारों, विशेषकर बच्चों में पोषण की कमी को दूर करना है।

प्रमुख लक्ष्य:

  • संतुलित और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करना
  • बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को बढ़ावा देना
  • कुपोषण में कमी लाना
  • कमजोर वर्गों के लिए खाद्य सुरक्षा मजबूत करना

सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि खाद्य सामग्री की नियमित गुणवत्ता जांच (Quality Check) की जाएगी, ताकि लाभार्थियों को मानक गुणवत्ता का राशन मिले।

इस स्कीम के तहत किसे फ़ायदा होगा?

यह स्कीम ब्लू कार्ड होल्डर परिवारों को टारगेट करती है, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार हैं और राज्य के वेलफ़ेयर प्रोग्राम के तहत एलिजिबल हैं।

पहलू (Aspect) विवरण (Details)
लाभार्थी 40 लाख परिवार
पात्रता ब्लू कार्ड धारक परिवार
वितरण अवधि एक बार में तीन माह
प्रथम चरण अप्रैल–जून 2026

सरकार का कल्याणकारी दृष्टिकोण

भगवंत मान ने कहा कि पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए यह सुनिश्चित करना भी राज्य की जिम्मेदारी है कि उसके अपने नागरिकों को पर्याप्त पोषण सुरक्षा (Nutrition Security) मिले।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल अनाज वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक परिवार को संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है।

सरकार का व्यापक फोकस

  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार
  • जनकल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी प्रणाली को मजबूत करना
  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की चुनौतियों का समाधान
  • यह सुनिश्चित करना कि कोई भी परिवार बुनियादी खाद्य आवश्यकताओं से वंचित न रहे

शशि थरूर को सेंट जेवियर विश्वविद्यालय, कोलकाता ने मानद डीलिट की उपाधि दी

लोकसभा MP शशि थरूर को 21 फरवरी 2026 को कोलकाता स्थित सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षा समारोह में मानद डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डीलिट) की उपाधि से सम्मानित किया गया, जिसे उन्होंने भारत में अपनी पहली मानद डॉक्टरेट बताया। यह समारोह न्यू टाउन स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया, जहां 1,052 स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं। 25 पीएचडी शोधार्थियों को सम्मानित किया गया और 17 छात्रों को स्वर्ण पदक प्राप्त हुए। थरूर ने समाज की सेवा के रूप में शिक्षा के अंतिम उद्देश्य को रेखांकित करते हुए छात्रों से नागरिक उत्तरदायित्व को अपनाने का आग्रह किया।

शशि थरूर को मानद डीलिट से सम्मानित

  • दीक्षांत समारोह में शशि थरूर को डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (Honoris Causa) से सम्मानित किया गया।
  • उन्होंने इसे भारत में प्राप्त अपना पहला मानद डॉक्टरेट बताया और कहा कि एक पूर्व ज़ेवेरियन होने के कारण यह सम्मान उनके लिए बेहद विशेष और भावनात्मक है।
  • उन्होंने कहा कि वे “अत्यंत सम्मानित और विनम्र” महसूस कर रहे हैं। सात वर्ष पहले वे इसी विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत वक्ता (Convocation Speaker) भी रह चुके हैं।
  • हालाँकि उन्होंने एक डॉक्टरेट शैक्षणिक रूप से अर्जित की है और विदेशों में मानद उपाधियाँ प्राप्त की हैं, लेकिन भारत में यह उनका पहला मानद डॉक्टरेट है।

दीक्षांत समारोह की मुख्य विशेषताएँ

  • 1,052 स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई
  • 25 पीएचडी शोधार्थियों को सम्मानित किया गया
  • 17 स्वर्ण पदक विजेताओं को सम्मान मिला
  • अधिकांश स्वर्ण पदक विजेता महिलाएँ थीं
  • थरूर ने शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति की सराहना की।

छात्रों के लिए शशि थरूर का संदेश

थिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि— शिक्षा केवल जानकारी (Information) तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण (Formation) और नैतिक चेतना (Conscience) से जुड़ी होनी चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे—

  • कौशल (Skill) के साथ संवेदनशीलता (Sensitivity)
  • सफलता (Success) के साथ सेवा भाव (Service) को जोड़ें।

अपनी जेसुइट शिक्षा को याद करते हुए उन्होंने निम्न मूल्यों पर बल दिया:

  • बौद्धिक जिज्ञासा (Intellectual Curiosity)
  • मानसिक कठोरता (Mental Rigour)
  • परिश्रम का सम्मान
  • आत्म-अनुशासन
  • नैतिक ढांचे के भीतर प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति

उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य नारों से नहीं, बल्कि जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों से तय होगा।

यह सम्मान विशेष क्यों है?

  • शशि थरूर ने 1969 से 1971 के बीच कोलकाता के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेजिएट स्कूल में अध्ययन किया था।
  • इसी कारण उसी परंपरा से जुड़े विश्वविद्यालय से मानद डी.लिट प्राप्त करना उनके लिए भावनात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • वे 2009 से लगातार चार बार लोकसभा सांसद चुने गए हैं। वे संयुक्त राष्ट्र में अपने कूटनीतिक करियर, साहित्यिक लेखन और भारत में सार्वजनिक विमर्श में योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।

स्टैटिक जीके (Static GK)

  • पुरस्कार: डॉक्टर ऑफ लेटर्स (D.Litt – Honoris Causa)
  • प्राप्तकर्ता: शशि थरूर
  • संस्थान: सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी, कोलकाता
  • कार्यक्रम: 7वाँ दीक्षांत समारोह
  • तिथि: 21 फरवरी 2026
  • स्थान: बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर, न्यू टाउन
  • लोकसभा क्षेत्र: तिरुवनंतपुरम

भारत-अमेरिका वज्र प्रहार 2026: हिमाचल में 16वें संयुक्त अभ्यास के लिए विशेष बल तैयार

भारत और अमेरिका 23 फरवरी से 15 मार्च 2026 तक हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ का 16वां संस्करण आयोजित करेंगे। इस वार्षिक अभ्यास का उद्देश्य भारत–अमेरिका रक्षा सहयोग को मजबूत करना, आपसी सामरिक तालमेल (Interoperability) बढ़ाना और संयुक्त परिचालन तैयारी को सुदृढ़ करना है। यह अभ्यास दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और आतंकवाद-रोधी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

वज्र प्रहार 2026: उद्देश्य और रणनीतिक महत्व

वज्र प्रहार एक संयुक्त विशेष बल अभ्यास है, जो बारी-बारी से भारत और अमेरिका में आयोजित होता है। इसका मुख्य उद्देश्य उन्नत सैन्य सहयोग और संयुक्त अभियान क्षमता को बढ़ाना है।

अभ्यास के प्रमुख फोकस क्षेत्र:

  • विशेष अभियानों की उन्नत रणनीतियों और तकनीकों का आदान-प्रदान
  • परिचालन समन्वय (Operational Synergy) को मजबूत करना
  • यथार्थवादी युद्ध परिदृश्य में प्रशिक्षण
  • रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों में संयुक्त क्षमता बढ़ाना

भारतीय सेना के अनुसार, यह प्रशिक्षण आपसी विश्वास को गहरा करेगा और संयुक्त ऑपरेशनल तत्परता को बेहतर बनाएगा।

पिछले संस्करणों की झलक

  • 2024 में 15वां संस्करण अमेरिका के इडाहो में आयोजित हुआ, जिसमें दोनों देशों के 45-45 सैनिकों ने भाग लिया।
  • 2023 का संस्करण मेघालय के उमरोई में आयोजित किया गया था।
  • इसमें भारतीय विशेष बलों और अमेरिकी ग्रीन बेरेट्स ने हेलोकास्टिंग, एयरबोर्न ऑपरेशन और काउंटर-टेरर अभ्यास किए।

बारी-बारी से अलग-अलग स्थानों पर आयोजन से विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन की समझ बढ़ती है।

भाग लेने वाली सेनाएं

भारतीय दल का प्रतिनिधित्व Indian Army की स्पेशल फोर्सेस इकाइयाँ करेंगी, जबकि अमेरिकी पक्ष से United States Army के विशिष्ट Green Berets भाग लेंगे।

अभ्यास में शामिल प्रमुख गतिविधियाँ:

  • क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) ड्रिल
  • आतंकवाद-रोधी अभियान
  • शहरी युद्ध सिमुलेशन
  • उच्च ऊंचाई और अर्ध-रेगिस्तानी प्रशिक्षण

इस प्रकार के संयुक्त अभ्यास सटीकता, पेशेवर दक्षता और सामरिक तालमेल को उच्च स्तर पर बनाए रखने में सहायक होते हैं।

व्यापक भारत–अमेरिका रक्षा सहयोग

पिछले दशक में भारत–अमेरिका रक्षा संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वज्र प्रहार जैसे अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच भरोसा और संचालन क्षमता को मजबूत करते हैं।

भारत और अमेरिका निम्न प्रमुख संयुक्त सैन्य अभ्यास भी करते हैं—

  • युद्ध अभ्यास (थल सेना)
  • मालाबार (नौसेना)
  • कोप इंडिया (वायु सेना)

यह बढ़ता रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और आतंकवाद-रोधी प्रयासों में साझा हितों को दर्शाता है।

वायुशक्ति-26: भारतीय वायुसेना का शक्ति प्रदर्शन

वज्र प्रहार 2026 के अलावा, Indian Air Force 27 फरवरी 2026 को जैसलमेर के पोखरण एयर-टू-ग्राउंड रेंज में Exercise Vayushakti (वायुशक्ति-26) का आयोजन करेगी।

इस अभ्यास में प्रदर्शित होंगे:

  • लड़ाकू विमानों की संचालन क्षमता
  • परिवहन और हेलीकॉप्टर मिशन
  • रात और सांध्यकालीन युद्धाभ्यास
  • मानवीय सहायता और आपदा राहत क्षमता

संभावित भाग लेने वाले विमान:

  • तेजस
  • राफेल
  • सुखोई-30 एमकेआई
  • मिराज-2000
  • जगुआर
  • मिग-29
  • C-130J और C-17 परिवहन विमान
  • अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर

ये दोनों सैन्य अभ्यास भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता और वैश्विक साझेदारी को प्रदर्शित करते हैं।

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