Wipro ने GIFT City में शुरू किया AI हब, BFSI सेवाओं को मिलेगा बड़ा बूस्ट

भारत की प्रमुख आईटी कंपनी Wipro ने गांधीनगर स्थित GIFT City में एक नया एआई (AI) हब लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य वैश्विक BFSI (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा) कंपनियों को उन्नत AI-आधारित सेवाएं प्रदान करना है। यह पहल भारत को वैश्विक फिनटेक और डिजिटल नवाचार केंद्र के रूप में मजबूत बनाती है और Wipro की AI-संचालित वित्तीय समाधान क्षमताओं को बढ़ाती है।

Wipro GIFT City हब की प्रमुख विशेषताएं

नया हब आधुनिक वित्तीय तकनीकी सेवाओं को समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है।

  • प्रारंभिक क्षमता: 150 कर्मचारी
  • मांग के अनुसार 500 सीटों तक विस्तार संभव
  • फोकस: वैश्विक BFSI क्लाइंट्स
  • स्थान: भारत का प्रमुख वित्तीय केंद्र GIFT City

AI आधारित BFSI सेवाएं

यह एआई हब कई उन्नत सेवाएं प्रदान करेगा:

  • डिजिटल बैंकिंग समाधान
  • कैपिटल मार्केट टेक्नोलॉजी
  • जोखिम और अनुपालन (Risk & Compliance) सिस्टम
  • रेगुलेटरी टेक्नोलॉजी (RegTech)
  • कोर प्लेटफॉर्म मॉडर्नाइजेशन

विप्रो इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म क्या है?

इस हब की खास बात विप्रो इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म (Wipro Intelligence Platform) का उपयोग है, जो एक एकीकृत AI प्लेटफॉर्म है।

  • वित्तीय प्रक्रियाओं में AI का एकीकरण
  • जिम्मेदार AI (Responsible AI) को बढ़ावा
  • तेज और बेहतर निर्णय लेने में सहायता
  • क्लाइंट सहयोग और नवाचार को मजबूत बनाना

GIFT City: उभरता वैश्विक हब

GIFT City भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र है, जो तेजी से फिनटेक हब के रूप में विकसित हो रहा है।

  • मजबूत वैश्विक वित्तीय इकोसिस्टम
  • प्रभावी नियामक ढांचा
  • कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर

Wipro AI हब का प्रभाव

इस पहल से नवाचार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा:

  • उच्च कौशल वाले तकनीकी रोजगार का सृजन
  • भारत के AI और फिनटेक इकोसिस्टम को मजबूती
  • वैश्विक ग्राहकों के साथ जुड़ाव में वृद्धि
  • डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार

महिला शक्ति का उदय: 2026 में 150 स्वयं निर्मित अरबपतियों का रिकॉर्ड

2026 में दुनिया भर में स्वयं के दम पर बनी (सेल्फ-मेड) महिला अरबपतियों की संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 150 हो गई है। Hurun Report के अनुसार, इनकी कुल संपत्ति बढ़कर 470 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से हो रही वृद्धि को दर्शाती है। इस सूची में चीन का दबदबा बना हुआ है, जबकि नए नाम उद्यमिता के बढ़ते दायरे को दिखाते हैं।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

यह 2026 की रिपोर्ट पिछले एक दशक में तेज वृद्धि को दर्शाती है। एक दशक पहले जहां यह संख्या 75 थी, वहीं अब यह दोगुनी होकर 150 हो गई है, जो संपत्ति निर्माण में मजबूत रुझान को दिखाती है।

मुख्य बिंदु:

  • कुल संपत्ति 470 अरब डॉलर, पिछले तीन वर्षों में 52% की वृद्धि
  • 2026 में 60 नए अरबपति शामिल
  • लगभग 15 अरबपति सूची से बाहर हुए
  • 80% से अधिक नाम एक दशक पहले सूची में नहीं थे

चीन का दबदबा

चीन 78 महिला अरबपतियों के साथ सूची में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, जो कुल संख्या का आधे से अधिक है। इसके बाद अमेरिका 40 अरबपतियों के साथ दूसरे स्थान पर है। Shenzhen, Shanghai और Beijing जैसे शहर महिला उद्यमिता के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।

AI और तकनीक से बढ़ती संपत्ति

इस रिपोर्ट में एक बड़ा ट्रेंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उभार है। AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से नए अरबपति बना रहे हैं। प्रमुख नामों में Daniela Amodei, Lucy Guo, Mira Murati और Lisa Su शामिल हैं।

सेक्टर आधारित रुझान

हेल्थकेयर सेक्टर 16 अरबपतियों के साथ सबसे आगे है, इसके बाद रिटेल और सॉफ्टवेयर सेक्टर आते हैं। सेमीकंडक्टर और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं, जो वैश्विक AI बूम को समर्थन दे रहे हैं।

भारत की स्थिति

भारत की उपस्थिति सीमित लेकिन महत्वपूर्ण है। इस सूची में Radha Vembu, Falguni Nayar और Kiran Mazumdar-Shaw शामिल हैं, जो क्रमशः एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर, रिटेल और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

शीर्ष अरबपति और बदलती तस्वीर

सूची में शीर्ष पर Diane Hendricks (24 अरब डॉलर) हैं, जिनके बाद Zhong Huijuan और Zhou Qunfei का स्थान है। औसत आयु 61 वर्ष है, लेकिन युवा अरबपतियों की संख्या भी बढ़ रही है। अब 40 वर्ष से कम उम्र की 10 महिलाएं भी इस सूची में शामिल हैं, जिनमें Kylie Jenner जैसे नाम शामिल हैं, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म और उपभोक्ता ब्रांड्स के जरिए नई राह दिखा रहे हैं।

Bill Gates को पछाड़ कर उनसे आमिर बने बाइनेंस के संस्थापक, कुछ महीने पहले जेल से आए थे बाहर

चीनी क्रिप्टोकरेंसी की दिग्गज कंपनी और बाइनेंस (Binance) के संस्थापक चैंगपेंग ज़ाओ की कुल संपत्ति 113 बिलियन डॉलर ( ₹125 लाख करोड़) तक पहुंच गई है, जिससे वे विश्व में 17वें स्थान पर हैं और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग को पीछे छोड़ चुके हैं।

बाइनेंस के फाउंडर चैंगपेंग ज़ाओ की संपत्ति 113 बिलियन डॉलर ( ₹125 लाख करोड़) तक पहुंचते ही वह बिल गेट्स से ज़्यादा अमीर बन गए हैं। बकौल फोर्ब्स 17 महीने पहले जेल से बाहर आए चैंगपेंग की संपत्ति पिछले एक साल में 47 बिलियन डॉलर से 110+ बिलियन डॉलर पहुंच गई। उनकी संपत्ति का बड़ा सोर्स Binance है जिसका लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा उनके पास है।

यह घटना उस समय से सिर्फ 17 महीने बाद की है जब Changpeng Zhao, जिन्हें आमतौर पर CZ के नाम से भी जाना जाता है, जेल से बाहर आए थे। Binance पर हुई व्यापक जांच में पाया गया था कि कंपनी मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी (Anti-Money Laundering) नियमों का पालन नहीं कर रही थी।

Bill Gates को पछाड़ कर उनसे आमिर बने

बाइनेंस (Binance) के संस्थापक और सीईओ चैंगपेंग ज़ाओ ने अपनी संपत्ति में जबरदस्त उछाल के साथ बिल गेट्स को पीछे छोड़ दिया है। 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, क्रिप्टो साम्राज्य के दम पर झाओ की कुल संपत्ति लगभग $110-$113 बिलियन के पार पहुँच गई है, जिससे वे दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में 17वें स्थान पर हैं, जबकि गेट्स पीछे रह गए हैं।

संपत्ति में उछाल: चैंगपेंग ज़ाओ की संपत्ति में यह इजाफा बाइनेंस के मूल्यांकन में भारी वृद्धि के कारण हुआ।

बिल गेट्स की स्थिति: बिल गेट्स की संपत्ति में कमी का मुख्य कारण उनके द्वारा की गई भारी चैरिटी और 2021 का तलाक बताया जा रहा है।

स्थिति: बता दें, मार्च 2026 तक, फोर्ब्स और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, चैंगपेंग ज़ाओ क्रिप्टो उद्योग में सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं और अब उन्होंने बिल गेट्स से आगे निकलकर अरबपतियों की सूची में अपनी जगह पक्की की है।

बाइनेंस की स्थापना

बाइनेंस की स्थापना उन्होंने साल 2017 में की थी और आज यह दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कंपनियों में से एक मानी जाती है। बताया जाता है कि चैंगपेंग ज़ाओ के पास बाइनेंस में लगभग 90% हिस्सेदारी है, जिसकी अनुमानित वैल्यू 100 बिलियन डॉलर से अधिक है।

 

तेल महंगा, रुपया कमजोर: 93.24 तक लुढ़की भारतीय मुद्रा

भारतीय रुपया 20 मार्च 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर 93.24 पर पहुंच गया। तेल के बढ़ते इम्पोर्ट बिल और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने के कारण रुपए में यह गिरावट आई है। मिडिल ईस्‍ट में जंग ने दुनिया को संकट में डाल दिया है।

एनर्जी संकट पैदा होने के अशंका से कच्‍चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिस कारण डॉलर के मुकाबले अन्‍य करेंसी दबाव में दिखाई दे रही हैं। भारतीय करेंसी पर भी डॉलर का असर हुआ है। 19 मार्च 2026 को ब्रेंट क्रूड ऑयल 119 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया था, जिसके बाद रुपया 93 का लेवल क्रॉस कर चुका है।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरा

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 0.65% गिरकर 93.24 पर आ गया, जो 18 मार्च 2026 को दर्ज किए गए रिकॉर्ड निचले स्‍तर 92.63 से भी नीचे है। भारतीय इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि रुपया डॉलर के मुकाबले 93 रुपये के पार पहुंचा हो। अमेरिका-ईरान वॉर शुरू होने के बाद से इंडियन करेंसी में लगभग 2 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।

रुपये में गिरावट से क्‍या चीजें हो जाएंगी सस्‍ती?

रुपये में गिरावट आने से निर्यात की जाने वाली चीजों की लागत कम हो जाती है। भारतीय IT सर्विस, दवाईंया, बासमती चावल और अन्‍य भारतीय सामान के दाम में कमी आ जाती है। इसके अलावा, विदेभ से भेजे जाने वाले पैसे की मूल्य भारत में बढ़ जाती है। साथ ही भारत विदेशी पर्यटकों के लिए सस्ता हो जाता है।

रुपये में गिरावट से क्‍या चीजें हो जाएंगी महंगी?

रुपया कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है, जिस वजह क्रूड ऑयल जैसी चीजों के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं। इसके अतिरिक्त, एलपीजी, एलएनजी के लिए भी ज्‍यादा पैसे देने पड़ जाते हैं। साथ ही इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स प्रोडक्‍ट्स जैसे मोबाइल, लैपटॉप भी महंगे हो जाते हैं। इम्‍पोर्ट की जाने वाली गाड़‍ियों की वैल्‍यू भी बढ़ जाती है। विदेश में पढ़ाई भी महंगी हो जाती है। सोने-चांदी की कीमत डॉलर पर निर्भर करती है, जिस कारण सोना-चांदी भी महंगी हो जाती है। विदेशी कंपनियों के प्रोडक्‍ट्स भी महंगे हो जाते हैं।

भारत पर रुपये के गिरने से क्‍या असर?

डॉलर में तेजी एवं रुपये के गिरावट होने से एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की ग्रोथ में कमी आ सकती है। देश भर में महंगाई बढ़ सकती है और लोगों के कर्ज के ब्‍याज में भी वृद्धि हो सकता है। रुपए की कमजोरी से भारत में आयात महंगे हो जाएंगे, खासकर तेल, सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम बढ़ सकते हैं।

Nuclear Bomb: किसी व्यक्ति को परमाणु बम से बचने के लिए कितना दूर होना चाहिए?

अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ जंग छेड़ दी है। कई दिन बीतने के बावजूद यह लड़ाई अभी अंजाम तक नहीं पहुंची है। परमाणु हथियारों को लेकर इन देशों में तनातनी चरम पर है। रूस-यूक्रेन के अलावा अफगानिस्तान-पाकिस्तान में भी युद्ध चल रहा है। अटलांटिक काउंसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार 2035 से पहले तीसरा विश्व युद्ध छिड़ने के आसार हैं। इसमें परमाणु हथियारों का भी उपयोग किया जा सकता है।

एक्सपर्ट भी दुनिया के कई देशों में चल रहे युद्ध के और खतरनाक स्थिति में पहुंचने की संभावना जता रहे हैं। डूम्सडे क्लॉक (प्रलय की घड़ी) की ओर से इसी साल जनवरी में परमाणु युद्ध के खतरे को दर्शाने वाली रिपोर्ट जारी की गई थी। इसमें बताया गया था कि रूस-यूक्रेन युद्ध के तीसरे साल में भी न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल का खतरा है। कई देश पहली बार न्यूक्लियर हथियार का इस्तेमाल कर सकते हैं।

परमाणु बम से बचने के लिए कितना दूर होना चाहिए?

रेडिएशन इमरजेंसी मेडिकल मैनेजमेंट (आरईएमएम) के अनुसार 10-20 किलोटन के परमाणु विस्फोट में ग्राउंड ज़ीरो से 0.8 किमी के भीतर अत्यधिक गर्मी और विकिरण के कारण बचना लगभग असंभव है। 1.6-3.2 किमी की दूरी पर तत्काल चिकित्सा सहायता से जीवन बच सकता है। वहीं 6.4 किमी से अधिक दूरी पर विकिरण का खतरा न्यूनतम होता है।

परमाणु बम से बचने के लिए विस्फोट के केंद्र (Ground Zero) से कम से कम 10-15 किलोमीटर या उससे अधिक दूर होना चाहिए, ताकि तत्काल विनाशकारी गर्मी और शॉकवेव से बचा जा सके। हालाँकि, सुरक्षा दूरी बम की ताकत (किलोटन/मेगाटन) पर निर्भर करती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विस्फोट के तुरंत बाद, मजबूत कंक्रीट की इमारत के अंदर या तहखाने में छिपें।

न्यूक्लियर अटैक में ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड सबसे सुरक्षित 

नेचर की रिपोर्ट के मुताबिक परमाणु हमला होने के बाद ऑस्ट्रेलिया के लोग फिर से जीवन की शुरुआत करने में सक्षम होंगे। यहां की भौगोलिक स्थिति उनकी काफी मदद करेगी। ऑस्ट्रेलिया में गेहूं की काफी पैदावार होती है। इसी तरह न्यूजीलैंड के लोग न्यूक्लियर अटैक के बाद भी वातावरण संबंधी चुनौतियों से आसानी से निपट सकेंगे। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में इन दोनों देशों के लोग जल्द ही नए जीवन की शुरुआत कर देंगे।

न्यूक्लियर हमले से बचाव हेतु भारत की क्या रणनीति

mea.gov.in के मुताबिक भारत ने साल 1998 में पोखरण में न्यूक्लियर टेस्ट किए थे। इसके बाद साल 2003 में अपनी न्यूक्लियर पॉलिसी बनाई। इसमें कहा गया कि भारत कभी भी पहले न्यूक्लियर हमला नहीं करेगा। इस पॉलिसी को नो फर्स्ट यूज (NFU) कहा जाता है। भारतीय न्यूक्लियर हथियार केवल अपनी सुरक्षा के लिए हैं। भारत के पास 3 तरह के न्यूक्लियर हथियार हैं। ये जमीन, समुद्र और हवा तीनों से हमला करने में सक्षम हैं।

परमाणु हमलों से निपटने के लिए BARC (Bhabha Atomic Research Centre) ने पूरे देश में एनवायर्नमेंटल रेडिएशन मॉनिटरिंग नेटवर्क (IERMON) बनाया है। इस नेटवर्क के देश भर में 25 स्टेशन हैं। ये इमरजेंसी कंट्रोल रूम को रेडिएशन लेवल के बारे में ऑनलाइन जानकारी देते हैं।

न्यूक्लियर मिसाइलों की निगरानी कौन करता है ?

न्यूक्लियर मिसाइलें हमेशा से ही इंटरनेशनल लेवल पर लोगों का ध्यान खींचती रहीं हैं। जब भी किन्हीं 2 देशों में जंग छिड़ती है तो परमाणु हमलों को लेकर फिर से बहस शुरू हो जाती है। जनरल असेंबली के प्रस्तावों के अनुसार यूनाइटेड नेशंस (संयुक्त राष्ट्र) में मिसाइलों के मुद्दे पर काम करने वाले सरकारी एक्सपर्ट्स के 3 पैनल बनाए गए हैं। वहीं न्यूजीलैंड के विदेश मंत्रालय के मुताबिक दुनियाभर में परमाणु हथियारों की निगरानी और उनके दुरुपयोग को रोकने हेतु अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) (International Atomic Energy Agency) काम करती है।

इसके अतिरिक्त और भी कई व्यवस्थाएं मौजूद हैं जो मिसाइलों एवं उनसे जुड़ी टेक्नोलॉजी के फैलाव को रोकने की कोशिश करती हैं। इनमें खास तौर पर हेग कोड ऑफ कंडक्ट (HCOC) और मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) शामिल हैं।

कावेह मदानी: स्टॉकहोम वाटर प्राइज जीतने वाले सबसे युवा वैज्ञानिक

प्रोफेसर कावेह मदानी (Kaveh Madani) को जल संसाधन प्रबंधन में उनके नवाचारपूर्ण शोध, नीतिगत योगदान और वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने हेतु स्टॉकहोम वॉटर प्राइज 2026 (Stockholm Water Prize 2026) से सम्मानित किया गया। उन्होंने कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी काम करते हुए गेम थ्योरी के जरिए जल संकट समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह घोषणा UNESCO मुख्यालय, पेरिस में World Water Day से पहले की गई। 44 वर्ष की आयु में वे इस पुरस्कार के सबसे युवा विजेता और इसे पाने वाले पहले संयुक्त राष्ट्र अधिकारी बने हैं। उन्हें जल विज्ञान को नीति, कूटनीति और जन-जागरूकता से जोड़ने के लिए सम्मानित किया गया है।

वैश्विक जल नेतृत्व में ऐतिहासिक उपलब्धि

उनकी यह उपलब्धि ऐतिहासिक है क्योंकि वे 35 वर्षों के इतिहास में सबसे युवा विजेता हैं। स्टॉकहोम वॉटर प्राइज को “जल का नोबेल पुरस्कार” भी कहा जाता है। यह पुरस्कार जल संरक्षण, प्रबंधन और अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

कावेह मदानी का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। 2017 में वे ईरान लौटे और जल प्रबंधन सुधार के लिए काम किया, लेकिन राजनीतिक विरोध के कारण उन्हें आरोपों और पूछताछ का सामना करना पड़ा। उन्हें “वॉटर टेररिस्ट” तक कहा गया और 2018 में उन्हें देश छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपना कार्य जारी रखा।

“Water Bankruptcy” की अवधारणा

  • उनका एक महत्वपूर्ण योगदान “Water Bankruptcy” (जल दिवालियापन) का विचार है।
  • इसका अर्थ है कि जल संकट अब अस्थायी नहीं बल्कि दीर्घकालिक और संरचनात्मक समस्या बन चुका है।
  • कई नदियां और भूजल स्रोत अब पुनः भर नहीं पा रहे हैं।
  • इस अवधारणा ने वैश्विक स्तर पर जल नीतियों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने की दिशा दी है।

विज्ञान और नीति के बीच सेतु

कावेह मदानी जल प्रबंधन में गेम थ्योरी और निर्णय विश्लेषण जैसे वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करते हैं। यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर वाटर, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ (UNU-INWEH) के प्रमुख के रूप में वे सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर वैज्ञानिक शोध को व्यावहारिक नीतियों में बदलते हैं।

स्टॉकहोम वॉटर प्राइज के बारे में

वर्ष 1991 में स्थापित यह पुरस्कार स्टॉकहोम वॉटर फाउंडेशन और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा दिया जाता है। यह उन व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित करता है, जिनका कार्य जल संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह जल क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है और इसे स्वीडन के राजा द्वारा प्रदान किया जाता है।

हिंदू नववर्ष 2026: इस बार 12 नहीं 13 महीनों का होगा Hindu Nav Varsh!

Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू पंचांग के मुताबिक नया साल यानी विक्रम संवत 2083, 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से शुरू हो गया है। यह दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि होती है, जिसे नव संवत्सर के रूप में मनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन को अलग नामों से जाना जाता है, उत्तर भारत में इसे नववर्ष, दक्षिण भारत में उगादी और महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं।

क्यों खास है यह साल

आमतौर पर हिंदू नववर्ष 12 महीनों का होता है, लेकिन इस बार एक विशेष खगोलीय कारण से साल में अधिकमास जुड़ रहा है।

  • साल 2083 में ज्येष्ठ माह दो बार आएगा
  • इस वजह से पूरे साल में 13 महीने होंगे
  • अधिकमास की अवधि 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगी

यह समय धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है और पूजा-पाठ, दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

इस अवसर पर कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। देवी-देवताओं की झांकियां, भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन के जरिए लोगों को सनातन परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया गया। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार विक्रम संवत 2083 कई दृष्टियों से खास रहने वाला है। यह वर्ष नई ऊर्जा, सकारात्मक बदलाव और उन्नति का संकेत दे रहा है। व्यापार, शिक्षा और सामाजिक जीवन में नए अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है।

विक्रम संवत 2083 के महीने

इस वर्ष के 13 महीनों में चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, अधिक ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन शामिल हैं।

नववर्ष के पहले दिन क्या करें

हिंदू नववर्ष के पहले दिन धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है। संवत्सर पूजा कर ब्रह्मा जी सहित सभी देवी-देवताओं की विधिपूर्वक आराधना करें। मां दुर्गा की पूजा के लिए कलश स्थापना करें। घर के मुख्य द्वार पर ध्वज लगाना शुभ माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। सूर्योदय से पहले तिल के तेल और उबटन से स्नान (तैलाभ्यंग) करें। नदी या तालाब के किनारे पूजा कर दान-दक्षिणा देने का भी विशेष महत्व है।

सूर्य देव और शिव पूजा का महत्व

इस दिन व्रत रखकर सूर्य देव की उपासना और भगवान शिव के दर्शन करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहता है। इन बातों का रखें विशेष ध्यान रखें। तामसिक भोजन से परहेज करें। किसी से विवाद या झगड़ा न करें। उधार लेने-देने से बचें। किसी का अपमान न करें। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। कुल मिलाकर, हिंदू नववर्ष का पहला दिन नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ क्यों?

पंचांग के अनुसार, संवत्सर का प्रारंभ हमेशा शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है. कृष्ण पक्ष के प्रारंभ में मलमास आने की संभावना रहती है, जबकि शुक्ल पक्ष में मलमास की संभावना नहीं होती है। इस वजह से संवत्सर यानि हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होना उत्तम रहता है।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि का प्रारंभ किया था। तब उस समय उन्होंने इसे तिथि को सर्वोत्तम तिथि घोषित किया था। इसके अतिरिक्त इस तिथि को ही भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था और सतयुग का आरंभ भी हुआ था। इन बातों को ध्यान में रखकर सम्राट विक्रमादित्य ने अपने संवत्सर या​नि विक्रम संवत्सर का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से किया था।

 

GSI का बड़ा फैसला: कालिंजर किले को मिला भू-धरोहर का दर्जा

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) द्वारा उत्तर प्रदेश के कालिंजर किला (Kalinjar Fort) को राष्ट्रीय भू-धरोहर (Geo-Heritage Site) का दर्जा दिया गया है। यह मान्यता भारत की एक अनोखी भूवैज्ञानिक संरचना को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल केवल विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास, पर्यटन और स्थानीय विकास को भी बढ़ावा देगी। यह स्थल पृथ्वी के अरबों वर्षों के विकास का रिकॉर्ड प्रस्तुत करता है, जिससे यह अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण बन जाता है।

कालिंजर किला क्यों बना राष्ट्रीय भू-धरोहर स्थल?

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा यह दर्जा देने का उद्देश्य दुर्लभ भूवैज्ञानिक स्थलों के संरक्षण के महत्व को उजागर करना है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित यह किला अब अपने वैज्ञानिक और प्राकृतिक महत्व के लिए आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त कर चुका है। यह कदम भारत की प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के प्रयासों को मजबूत करता है।

क्या है इसकी भूवैज्ञानिक विशेषता?

कालिंजर किला “Eparchaean Unconformity” नामक दुर्लभ भूवैज्ञानिक संरचना के लिए प्रसिद्ध है। यह पृथ्वी के इतिहास में बहुत बड़े समय अंतराल को दर्शाती है। यहां लगभग 2.5 अरब वर्ष पुरानी बुंदेलखंड ग्रेनाइट चट्टान के ऊपर 1.2 अरब वर्ष पुरानी कैमूर सैंडस्टोन परत मौजूद है। यह स्पष्ट परतें वैज्ञानिकों को पृथ्वी के विकास को समझने में मदद करती हैं।

ऐतिहासिक और सामरिक महत्व

भूविज्ञान के साथ-साथ यह स्थल ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक चट्टानी संरचनाओं ने प्राचीन शासकों को मजबूत रक्षा प्रदान की, जिससे यह किला लगभग अजेय माना जाता था। पहाड़ी पर स्थित यह किला कई राजवंशों और ऐतिहासिक युद्धों का साक्षी रहा है।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

Geo-Heritage Site का दर्जा मिलने के बाद यहां पर्यटन में वृद्धि की संभावना है। यह स्थल अब पर्यटकों, शोधकर्ताओं और छात्रों को आकर्षित करेगा। इसे खजुराहो और चित्रकूट जैसे प्रमुख स्थलों के साथ जोड़कर एक पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना है, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

भू-विरासत स्थल क्या होता है?

राष्ट्रीय भू-धरोहर स्थल वह स्थान होता है, जिसे उसकी विशेष भूवैज्ञानिक संरचना और वैज्ञानिक महत्व के लिए मान्यता दी जाती है। ऐसे स्थल पृथ्वी के इतिहास और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत में इन स्थलों की पहचान और संरक्षण का कार्य Geological Survey of India द्वारा किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस 2026: 20 मार्च को क्यों मनाया जाता है यह दिन?

अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस हर वर्ष 20 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिन United Nations द्वारा लोगों के जीवन में खुशहाली और कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मान्यता प्राप्त है। वर्ष 2026 में इस दिन World Happiness Report जारी किया गया, जिसमें डिजिटल युग में लोगों की खुशहाली पर विशेष ध्यान दिया गया। संयुक्त राष्ट्र यह भी जोर देता है कि खुशहाली प्राप्त करने के लिए समावेशी विकास और मानवाधिकारों का सम्मान आवश्यक है।

अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस क्या है?

यह दिवस इस विचार को सामने लाता है कि खुशहाली केवल व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि एक वैश्विक विकास लक्ष्य है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सामाजिक कल्याण और पर्यावरणीय संतुलन के साथ जोड़ा जाना चाहिए। यह दिन सरकारों को स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय जैसी नीतियों पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही यह भी बताता है कि खुशहाली का सीधा संबंध शांति, स्थिरता और सुशासन से है।

खुशहाली दिवस की उत्पत्ति

United Nations General Assembly ने वर्ष 2012 में प्रस्ताव 66/281 के माध्यम से 20 मार्च को अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस घोषित किया। इस प्रस्ताव में खुशहाली और कल्याण को पूरी दुनिया के लोगों की सार्वभौमिक आकांक्षा के रूप में स्वीकार किया गया और समावेशी व संतुलित आर्थिक विकास पर जोर दिया गया।

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026

World Happiness Report 2026 इस दिन जारी की गई, जो विभिन्न देशों में खुशहाली के स्तर और जीवन संतुष्टि के आधार पर रैंकिंग प्रदान करती है। इस वर्ष की रिपोर्ट में डिजिटल युग में सोशल मीडिया और तकनीक के प्रभाव पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसमें आय, सामाजिक सहयोग, संस्थाओं पर विश्वास और स्वतंत्रता जैसे कारकों का विश्लेषण किया जाता है।

भूटान और ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस

Bhutan ने इस अवधारणा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1970 के दशक से भूटान ने विकास को मापने के लिए GDP के बजाय “ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस (GNH)” को अपनाया। यह मॉडल सतत विकास, सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सुशासन पर आधारित है और इसने वैश्विक स्तर पर नई सोच को प्रेरित किया है।

सरकारों की भूमिका

सरकारें प्रभावी नीतियों और सुशासन के माध्यम से खुशहाली बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सेवाएं, कर प्रणाली और संस्थाओं पर विश्वास लोगों के जीवन स्तर को प्रभावित करते हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण में निवेश करके सरकारें नागरिकों के लिए बेहतर और संतुलित वातावरण तैयार कर सकती हैं।

कौन हैं भूमिका श्रेष्ठा? नेपाल की पहली ट्रांसजेंडर महिला सांसद बनकर रचा इतिहास

भूमिका श्रेष्ठा (Bhumika Shrestha) 37 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता, 16 मार्च 2026 को नेपाल की पहली ट्रांसजेंडर महिला सांसद बनीं। उनका संसद में चुना जाना दक्षिण एशिया में समावेशिता और प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वह Rastriya Swatantra Party का प्रतिनिधित्व करती हैं और नेपाल में हालिया राजनीतिक बदलावों की लहर के बाद राजनीति में सक्रिय हुईं।

भूमिका श्रेष्ठा कौन हैं?

Bhumika Shrestha एक जानी-मानी LGBTQ अधिकार कार्यकर्ता हैं, जो लंबे समय से नेपाल में लैंगिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। उनका सांसद बनना उनके वर्षों के सामाजिक आंदोलन और समान अधिकारों की लड़ाई का परिणाम है। उन्होंने अपनी नियुक्ति के बाद उत्साह के साथ-साथ जिम्मेदारी भी व्यक्त की और कहा कि संविधान में अधिकार मिलने के बावजूद प्रभावी कानून और नीतियों की अभी भी कमी है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

उनका उदय नेपाल में हाल के राजनीतिक बदलावों से जुड़ा है, जहां विरोध प्रदर्शनों के बाद नई राजनीतिक व्यवस्था उभरी। मार्च 2026 के आम चुनावों में नए राजनीतिक दलों को अवसर मिला, जिससे विविध प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिला। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने सुधारवादी नेतृत्व के तहत मजबूत प्रदर्शन किया और 182 सीटें जीतकर प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी।

नेपाल में LGBTQ अधिकारों की प्रगति

नेपाल को दक्षिण एशिया में LGBTQ अधिकारों के मामले में अपेक्षाकृत प्रगतिशील माना जाता है, जिसने भूमिका श्रेष्ठा के ऐतिहासिक चुनाव का मार्ग प्रशस्त किया।

  • 2007: लैंगिक पहचान और यौन अभिविन्यास के आधार पर भेदभाव पर प्रतिबंध
  • 2013: नागरिकता दस्तावेजों में तीसरे लिंग की पहचान
  • 2015: पासपोर्ट में “Others” श्रेणी जोड़ी गई
  • 2023: सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिक और ट्रांसजेंडर विवाह पंजीकरण की अनुमति

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