बिहार के मिथिला मखाना को मिला जीआई टैग

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केंद्र सरकार ने मिथिला मखाना को जीआई टैग प्रदान किया है। इससे उत्‍पादकों को मखाना उत्‍पाद का अधिकतम मूल्य मिलेगा। इस फैसले से बिहार के मिथिला क्षेत्र के पांच लाख से अधिक किसानों को फायदा होगा। इस बारे में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट में कहा है कि मिथिला मखाना के जीआई टैग के साथ पंजीकृत होने से किसानों को लाभ मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ जाएगी। 

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बता दें कि किसी उत्पाद को जीआई टैग मिलने पर कोई भी व्यक्ति या कंपनी इसी तरह की सामग्री को उसी नाम से नहीं बेच सकती। इस टैग की मान्‍यता दस वर्षों के लिए है और बाद में इसका नवीनीकरण किया जा सकता है।बिहार मखाना का प्रमुख उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत हिस्सा है। बिहार का मखाना पूरे भारत के अलावा चीन, जापान और थाईलैंड में बहुत लोकप्रिय है।

 जीआई टैग क्या होता है?

 

जीआई टैग यानि जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (Geographic Indication tag) ये एक प्रकार का लेबल होता है, जिसमें किसी उत्पाद को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है। ऐसा उत्पाद जिसकी विशेषता या फिर प्रतिष्ठा मुख्य रूप से प्रकृति और मानवीय कारकों पर निर्भर करती है।

जीआई टैग कौन देता है?

वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्री प्रमोशन एंड इंटरनल ट्रेड की ओर से जीआई टैग दिया जाता है। किसी उत्पाद के लिए के लिए जीआई टैग हासिल करने के लिए चेन्नई स्थित जीआई डेटाबेस में अप्लाई करना पड़ता है। ये इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट के अधीन है, जो पूरे देश में सिर्फ चेन्नई में ही होता है।

जीआई टैग का महत्व

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जीआई टैग को एक ट्रेडमार्क के रूप में देखा जाता है। इससे टूरिज्म एवं निर्यात को बढ़ावा मिलता है, साथ ही स्थानीय आमदनी भी बढ़ती है। इसके अतिरिक्त भारत में अधिकता वाले उत्पादों को पहचान कर उनका भारत के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात और प्रचार प्रसार करने में आसानी होती है।

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नासा आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की तैयारी

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नासा 2024 में आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की तैयारी कर रही है। चंद्रमा पर वैज्ञानिकों को उतारने के लिए नासा का मिशन अब आखिरी चरण में है और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर 13 संभावित लैंडिंग साइटों की पहचान की है, जहां पर नासा अपने वैज्ञानिकों को उतारने की योजना बना रहा है। इन क्षेत्रों का चयन वैज्ञानिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया है।

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नासा की रिपोर्ट के मुताबिक, नासा ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास 13 संभावित क्षेत्र की पहचान की है और इस प्रत्येक क्षेत्र में आर्टेमिस III के लिए कई संभावित लैंडिंग साइट हैं, जो कि चंद्रमा की सतह पर चालक दल को लाने के लिए आर्टेमिस मिशनों में से पहला होगा। नासा के इस मिशन में पहली बार महिला स्पेस यात्री भी शामिल हैं। इससे पहले साल 1969 से 1972 के बीच नासा ने कई अपोलो मिशन चांद पर भेजे थे।

नासा ने जिन लैंडिंग क्षेत्र के नामों की घोषणा की है, उनके नाम फॉस्टिनी रिम ए, शेकलटन के पास चोटी, कनेक्टिंग रिज, कनेक्टिंग रिज एक्सटेंशन, डे गेर्लाचे रिम 1, डे गेर्लाचे रिम 2, डे गेर्लाचे-कोचर मासिफ, हॉवर्थ, मालापर्ट मासिफ, लाइबनिट्ज बीटा पठार, नोबेल रिम 1, नोबेल रिम 2 और अमुंडसेन रिमो हैं। 

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भारत में भूजल की मुख्य समस्या क्या है?

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जल मानव की रोजमर्रा की आवश्यकताओं में से एक है इसीलिए यह जरूरी है कि समाज अपने जल संसाधनों का उचित प्रबंधन एवं उसका समान वितरण सुनिश्चित करे। जल की विभिन्न कार्यों में उपयोगिता सर्वविदित है, जो कि चर्चा का विषय नहीं है, असली मुद्दा इसकी उपलब्धता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाल की प्रगति के बावजूद, भारत के भूजल संकट के कारण लगभग 50% ग्रामीण परिवारों के पास अभी भी नल का पानी नहीं है।

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अभी तक देश की सरकारें जल संरक्षण तथा उसके दुरुपयोग को रोकने के लिये कोई गंभीर प्रयास नहीं कर सकी हैं। ऐसा माना जा रहा है कि स्थिति में यदि सुधार नहीं किया जाता तो आने वाले कुछ वर्षों में भारत को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ते जनसंख्या और शहरीकरण के विस्फोट की वजह से सबसे ज्यादा असर भूजल पर पड़ा है। इसके अंधाधुंध दोहन से आज भूजल संकट में है।

भारत कृषि प्रधान देश

भारत कृषि प्रधान देश है। कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन जल संरक्षण के क्षेत्र में भारत काफी ज्यादा पिछड़ा हुआ है। खेती के लिए अपनी पानी की जरूरतों को पूरा करने के भारत भूजल पर ही निर्भर है।

भारत में जल की स्थिति

भारत में जल उपलब्धता व उपयोग के कुछ तथ्यों पर विचार करें तो भारत में वैश्विक ताज़े जल स्रोत का मात्र 4 प्रतिशत मौजूद है जिससे वैश्विक जनसंख्या के 18 प्रतिशत (भारतीय आबादी) हिस्से को जल उपलब्ध कराना होता है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, वर्ष 2010 में देश में मौजूद कुल ताज़े जल स्रोतों में से 78 प्रतिशत का उपयोग सिंचाई के लिये किया जा रहा था जो वर्ष 2050 तक भी लगभग 68 प्रतिशत के स्तर पर बना रहेगा। 

भारत में सिंचित क्षेत्र

भारत के लगभग 198 मिलियन हेक्टेयर फसल क्षेत्र का लगभग आधा हिस्सा ही सिंचित हैं। सिंचाई के लिये सर्वप्रमुख स्रोत के रूप में भूमिगत जल (63 प्रतिशत) का उपयोग किया किया जाता है, जबकि नहर (24 प्रतिशत), जलकुंड/टैंक (2 प्रतिशत) एवं अन्य स्रोत (11 प्रतिशत) भी इसमें अंशदान करते हैं। इस प्रकार, भारतीय कृषि में सिंचाई का वास्तविक बोझ भूमिगत जल पर है जो किसानों के निजी निवेश से संचालित है।

भारत में भूजल की मुख्य समस्या

 

भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण नदियों के प्रवाह में कमी, भूजल संसाधनों के स्तर में कमी एवं तटीय क्षेत्रों के जलभृतों में लवण जल का अवांछित प्रवेश हो रहा है। कुछ आवाह क्षेत्रों में नहरों से अत्यधिक सिंचाई के परिणामस्वरूप जल ग्रसनता एवं लवणता की समस्या पैदा हो चुकी है।

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सरकार ने रक्षा बलों को मेक इन इंडिया के माध्यम से आपातकालीन हथियार खरीदने की अनुमति दी

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सरकार ने डिफेंस फोर्सेज को एक बड़ा बढ़ावा देने के लिए उन्हें आपातकालीन खरीद मार्ग के माध्यम से अपनी परिचालन आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हथियार प्रणाली खरीदने की अनुमति दी है। रक्षा मंत्रालय की एक बैठक में इसे मंजूरी दी गई है और जिसके अनुसार हथियार प्रणालियों की खरीद केवल मेक इन इंडिया रूट के माध्यम से ही की जा सकती है।

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इस बैठक की अध्यक्षता खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। डिफेंस फोर्सेज अब इन शक्तियों का उपयोग फास्ट-ट्रैक रूट के तहत महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों को खरीदने के लिए करने जा रहे हैं, जिसका अर्थ है कि डिलीवरी तीन महीने से एक साल के भीतर की जाएगी।डिफेंस फोर्सेज ने अतीत में इन अधिग्रहणों के माध्यम से अपनी तैयारियों को मजबूत किया है जब उन्हें आपातकालीन शक्तियां प्रदान की गई थीं।

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एस जयशंकर ने पराग्वे में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पराग्वे में महात्मा गांधी की एक आवक्ष प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने ऐतिहासिक ‘कासा डी ला इंडिपेंडेंशिया’ की यात्रा की, जहां से दो सदी से भी अधिक समय पहले दक्षिण अमेरिकी देश की आजादी का आंदोलन शुरू हुआ था। जयशंकर दक्षिण अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के मकसद से अपनी छह दिवसीय यात्रा के पहले चरण पर ब्राजील पहुंचे। 

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दक्षिण अमेरिका की पहली आधिकारिक यात्रा पर आए जयशंकर पराग्वे और अर्जेंटीना की यात्रा भी कर रहे हैं। इससे पहले, जयशंकर ने नयी दिल्ली में लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के राजदूतों से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया था। विदेश मंत्रालय ने बताया कि जयशंकर की यात्रा का उद्देश्य महामारी के बाद सहयोग के नए क्षेत्रों को तलाशना है। 

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पंजाब और हरियाणा ने भगत सिंह के नाम पर चंडीगढ़ हवाई अड्डे का नाम रखने पर सहमति व्यक्त की

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चंडीगढ़ के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम शहीद-ए-आजम भगत सिंह के नाम पर रखे जाने पर पंजाब और हरियाणा सहमत हो गए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के साथ इस विषय पर बैठक की। इसमें दोनों राज्यों के बीच नाम को लेकर सहमति बन गई।

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गौरतलब है कि इस हवाई अड्डे के नाम को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ था, क्योंकि इसके निर्माण में केंद्र सरकार के अतिरिक्त पंजाब और हरियाणा की भी हिस्सेदारी है। केंद्र सरकार इस हवाई अड्डे का नाम चंडीगढ़ एयरपोर्ट ही प्रचारित करती रही है, जबकि पंजाब सरकार इसे मोहाली इंटरनेशनल एयरपोर्ट बताती रही।

मुख्य बिंदु

  • साल 2007 में भगत सिंह के जन्म शताब्दी समारोह पर पंजाब सरकार की ओर से चंडीगढ़ हवाई अड्डे का नामकरण शहीद-ए-आजम भगत सिंह करने की घोषणा की गई थी। 
  • वहीं, हरियाणा सरकार इस हवाई अड्डे का नाम मंगलसेन पर रखना चाहती थी। इस नाम पर पंजाब और हरियाणा के बीच कभी सहमति नहीं बन सकी। 
  • अब दोनों राज्यों के बीच शहीद भगत सिंह के नाम पर सहमति बन जाने के बाद यह प्रस्ताव जल्दी ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। 
  • केंद्र सरकार देश के 13 हवाई अड्डों का नामकरण करने का एलान कर चुकी है, जिनमें कुछ राज्यों ने अपने क्षेत्र के हवाई अड्डों के लिए नाम भी प्रस्तावित कर केंद्र सरकार को भेजे हैं। 
  • अब पंजाब और हरियाणा की तरफ से भी चंडीगढ़ के हवाई अड्डे का नाम शहीद भगत सिंह पर रखने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

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Border dispute agreement struck between Arunachal Pradesh and Assam_80.1

मंकीपॉक्स टेस्ट के लिए देश का पहला स्वदेशी किट लांच

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मंकीपॉक्स की जांच करने के लिए पहला स्वदेशी निर्मित आरटी पीसीआर किट आंध्र प्रदेश के मेडटेक जोन में पेश किया गया। इस किट को ट्रांस एशिया बायो मेडिकल्स की तरफ से विकसित इस किट को केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने लॉन्च किया। ट्रांस एशिया एरबा मंकीपॉक्स आरटी पीसीआर किट बेहद संवेदनशील लेकिन इस्तेमाल करने में आसान है। 

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मुख्य बिंदु

  • इस साल मंकीपॉक्स के कारण दुनिया में सबसे अधिक मौतें अफ्रीका महाद्वीप में हुई हैं। अफ्रीका में कुल 3,232 मामले दर्ज किए गए हैं और 105 लोगों की मौत हुई है। हालांकि केवल एक हिस्से की ही पुष्टि की गई है क्योंकि महाद्वीप में पर्याप्त नैदानिक ​​​​संसाधनों का अभाव है। 
  • भारत में अब तक मंकीपॉक्स के 10 मामले सामने आ चुके हैं। ट्रांस एशिया बायो मेडिकल्स की ओर से विकसित इस किट को केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने लॉन्च किया।
  • भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) मंकीपॉक्स रोगियों के संपर्क में आए लोगों में एंटीबॉडी की उपस्थिति की जांच करने के लिए एक सीरो-सर्वेक्षण कर सकती है। 
  • इसके साथ ही आईसीएमआर यह भी पता लगा सकती है कि उनमें से कितनों में संक्रमण के लक्षण नहीं थे। अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि ऐसे लोगों का अनुपात कितना है जिनमें वायरल संक्रमण के लक्षण नहीं दिखे हैं।
  • देश में मंकीपॉक्स के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके चलते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीमारी से बचने के लिए क्या करें और क्या न करें की लिस्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि संक्रमित व्यक्ति के साथ देर तक संपर्क में रहने से या उसके साथ बार-बार संपर्क में आने से बीमारी लगने का खतरा होता है। 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

  • ट्रांसएशिया बायो-मेडिकल्स मुख्यालय स्थान: मुंबई;
  • ट्रांसएशिया बायो-मेडिकल्स की स्थापना: 1979।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ‘विद्या रथ – स्कूल ऑन व्हील्स’ परियोजना शुरू की

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असम में हाल के एक विकास में, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने को एक परियोजना ‘विद्या रथ- स्कूल ऑन व्हील्स’ शुरू की, जिसका उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से अक्षम बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करना है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “विद्या रथ- स्कूल ऑन व्हील्स परियोजना आर्थिक रूप से विकलांग बच्चों को अकादमिक रूप से सशक्त बनाने में सहायक होगी।”

 

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भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आगे कहा, “हमारे सपनों का भारत सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के उत्थान के बिना हासिल नहीं किया जा सकता है। इसलिए, प्रोजेक्ट विद्या रथ: स्कूल ऑन व्हील्स लॉन्च किया गया, आर्थिक रूप से अक्षम बच्चों को शिक्षा प्रदान करने और उन्हें अकादमिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करने के लिए एक लंबा सफर तय करेगा।

विद्या रथ-स्कूल ऑन व्हील्स परियोजना

विद्या रथ-स्कूल ऑन व्हील्स कथित तौर पर 10 महीने के लिए वंचित बच्चों को प्राथमिक शिक्षा तक पहुंच प्रदान करेगा। 10 महीने बाद बच्चों को पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा। परियोजना के तहत बच्चों को यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकें और मुफ्त मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

  • असम राजधानी: दिसपुर;
  • असम के मुख्यमंत्री: हिमंत बिस्वा सरमा;
  • असम राज्यपाल: प्रो जगदीश मुखी।

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सेबी बना ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ ढांचे का हिस्सा

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पूंजी बाजार नियामक सेबी ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ ढांचे का हिस्सा बन गया जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमन वाले वित्तीय आंकड़ों को साझा करने वाली प्रणाली को मजबूती मिलेगी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के खाता एग्रीगेटर ढांचे में शामिल होने से उपभोक्ताओं को अपने म्यूचुअल फंड एवं स्टॉक होल्डिंग के बारे में जानकारी वित्तीय सेवा प्रदाताओं के साथ साझा करने में सहूलियत होगी।

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मुख्य बिंदु

  • खाता एग्रीगेटर (एए) आरबीआई से विनियमित एक गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी है जो एक उपभोक्ता से उसकी सहमति के आधार पर वित्तीय सूचना प्रदाताओं से जानकारियां जुटाने को मुमकिन बनाता है।
  • इस ढांचे के तहत प्रतिभूति बाजार के वित्तीय सेवाप्रदाता (एफआईपी) मसलन डिपॉजिटरी एवं परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) अपने रजिस्ट्रार एवं अंतरण एजेंट (आरटीए) के जरिये उपभोक्ताओं को प्रतिभूति बाजार से जुड़ी वित्तीय जानकारियां दे पाएंगे।
  • जानकारों का कहना है कि इस कदम से प्रतिभूति कारोबार, डिपॉजिटरी और म्यूचुअल फंड की समूची प्रणाली खाता मंच पारिस्थितिकी पर ‘लाइव’ हो सकेगी।
  • नए निर्देशों के तहत प्रतिभूति बाजार में सक्रिय एफआईपी को खाता एग्रीगेटरों के साथ एक अनुबंध करना होगा जिसमें दोनों पक्षों के अधिकारों एवं विवाद निपटान व्यवस्था का भी जिक्र होगा। 
  • बता दें उपभोक्ता से सहमति लेने के बाद ही खाता एग्रीगेटर के जरिये हासिल वित्तीय सूचना को एफआईपी साझा कर पाएंगे।

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विश्व जल सप्ताह 2022: 23 अगस्त से 1 सितंबर

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विश्व जल सप्ताह 2022 का आयोजन 23 अगस्त से 1 सितंबर तक किया गया है। विश्व जल सप्ताह (World Water Week) वैश्विक जल मुद्दों और अंतर्राष्ट्रीय विकास से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए 1991 से स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय जल संस्थान (Stockholm International Water Institute – SIWI) द्वारा आयोजित एक वार्षिक कार्यक्रम है। विश्व जल सप्ताह 2022 की थीम “Seeing the unseen: The value of water” है।

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इस व्यापक विषय को तीन मुख्य दृष्टिकोणों से लिया गया है:

लोगों के लिए पानी का मूल्य और विकास।
प्रकृति और जलवायु परिवर्तन के लिए पानी का मूल्य।
पानी का वित्तीय और आर्थिक मूल्य।

विश्व जल सप्ताह 2022: महत्व

विश्व जल सप्ताह परिवर्तन करने वालों का एक समुदाय है जो दुनिया की सबसे बड़ी जल संबंधी चुनौतियों के समाधान पर सहयोग करता है। यहां आप अपने विचारों का परीक्षण कर सकते हैं, दूसरे देशों के साथियों से सीख सकते हैं और अपना ज्ञान साझा कर सकते हैं। सप्ताह सतत विकास लक्ष्यों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं की दिशा में प्रगति में तेजी लाने के लिए एक बैठक स्थल भी है। 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

  • SIWI के कार्यकारी निदेशक: टॉर्गनी होल्मग्रेन;
  • SIWI मुख्यालय: स्टॉकहोम, स्वीडन;
  • SIWI की स्थापना: 1991।

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