प्रसार भारती की स्‍थापना रजत जयंती मनाई गई

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प्रसार भारती ने 23 नवंबर, 2022 को अपनी स्थापना की रजत जयंती मनाई। 1997 में इसी दिन यह संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित एक वैधानिक स्वायत्त निकाय के रूप में अस्तित्व में आया था। इसमें दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो शामिल हैं। प्रसार भारती के सीईओ गौरव द्विवेदी ने कहा, प्रसार भारती देश और दुनिया के सामने आने वाली चुनौतियों के दौरान लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहा।

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कुछ दिन पहले हुआ एक सर्वे बताता है कि कोविड-19 लॉकडाउन के समय से लेकर अभी तक लोगों का विश्वास दूरदर्शन और आकाशवाणी पर बाकी सबसे कहीं ज्यादा बना हुआ है। इसी विश्वास के साथ आज प्रसार भारती अपना रजत जयंती समारोह मना रहा है। 1997 में प्रसार भारती की स्थापना की गई थी। वैसे प्रसार भारती की पिछले 25 वर्षों की यात्रा को दो दशकों के खोए हुए अवसरों की गाथा के रूप में वर्णित किया जा सकता है, जिसका पिछले पांच वर्षों में पुनरुद्धार हुआ है।

 

प्रसार भारती के बारे में

 

  • यह भारत में सबसे बड़ी वैधानिक स्वायत्त सार्वजनिक प्रसारण एजेंसी है जिसे 1997 में स्थापित किया गया था।
  • यह संसद के एक अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था और इसमें दूरदर्शन टेलीविजन नेटवर्क और ऑल इंडिया रेडियो शामिल हैं।
  • सितंबर 1990 में, संसद ने प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) अधिनियम पारित किया।
  • इस अधिनियम ने प्रसार भारती नामक भारतीय प्रसारण निगम की स्थापना का प्रावधान किया।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

 

  • प्रसार भारती मुख्यालय: नई दिल्ली;
  • प्रसार भारती सीईओ: गौरव द्विवेदी.

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आयुष बाजार 3 अरब अमरीकी डॉलर से बढ़कर 18 अरब अमरीकी डॉलर के स्तर पर पहुंचा

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केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 23 नवंबर, 2022 को नई दिल्ली में छठे भारतीय उद्योग परिसंघ-सीआईआई, आयुष कॉन्क्लेव 2022 को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष बाजार 3 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 18 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। उन्‍होंने कहा कि आयुष, नागरिकों को सम्‍पूर्ण स्वास्थ्य और चिकित्सा देखभाल प्रदान करके ‘न्यू इंडिया’ के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और स्वास्थ्य सेवाओं में आयुष प्रणालियों के मूल्य को व्यापक रूप से पहचाना जा रहा है।

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सोनोवाल ने बताया कि अनुसंधान रणनीतियों, अभ्यास की प्रकृति और शिक्षा में कई सुधार जारी हैं, जिससे इस क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने नई पीढ़ी से आयुष प्रणालियों का गहराई से अध्ययन करने का आग्रह किया। आयोजन के दौरान आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

 

वे नई दिल्ली में छठे भारतीय उद्योग परिसंघ, सीआईआई, आयुष कॉन्क्लेव 2022 में सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे आयुष अपने नागरिकों को समग्र स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा देखभाल प्रदान करके ‘न्यू इंडिया’ के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने नई पीढ़ी से आयुष प्रणालियों का गहराई से अध्ययन करने का आग्रह किया।

 

आयुष मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से आयुष प्रणाली के लिए बहुत सारे मानक स्थापित किए हैं। ये बेंचमार्क सभी हितधारकों, विशेष रूप से आयुष प्रणालियों से संबंधित उद्योग के लिए फायदेमंद होंगे।

 

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भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की

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भारत ने 23 नवंबर, 2022 को बांग्लादेश के ढाका में आयोजित हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) की मंत्रिपरिषद की 22वीं बैठक में भाग लिया। भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) को मजबूत करने के लिए अपनी मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार रंजन सिंह ने किया। उन्होंने आपदा जोखिम प्रबंधन (डीआरएम) के आईओआरए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के समन्वयक के रूप में भारत के योगदान और आईओआरए सचिवालय की क्षमता निर्माण और मजबूती के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर भी प्रकाश डाला।

 

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यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसमें हिंद महासागर की सीमा से लगे तटीय राज्य शामिल हैं। इसका गठन हिंद महासागर क्षेत्र के देशों में सहयोग बढ़ाने और सतत् विकास के लिए मिलकर प्रयास करने के उद्देश्‍य से किया गया है। इसमें भारत सहित हिंद महासागर के तटवर्ती 21 देश एवं 7 वार्ता साझेदार शामिल हैं। इन 21 देशों में भारत, ऑस्‍ट्रेलिया, ईरान, इंडो‍नेशिया, थाईलैंड, बांग्‍लादेश, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, मोजाम्बिक, केन्‍या, श्रीलंका, तंजानिया, सिंगापुर, मॉरीशस, मेडागास्कर, संयुक्‍त अरब अमीरात, यमन, सेशेल्‍स, सोमालिया, कोमरॉस और ओमान शामिल हैं। इसका गठन 1997 में हुआ था और इसका सचिवालय मॉरीशस में है।

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ग्लोबल एम्प्लॉयबिलिटी यूनिवर्सिटी रैंकिंग में IIT Delhi 29वें स्थान पर

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टाइम्स हायर एजुकेशन द्वारा जारी की गई इस साल की ग्लोबल एम्प्लॉयबिलिटी यूनिवर्सिटी रैंकिंग एंड सर्वे रिपोर्ट में कुल सात भारतीय संस्थानों को जगह मिली है। टॉप 100 में तीन भारतीय संस्थान शामिल थे। जारी की गई रैकिंग के अनुसार, आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) ने 29वां स्थान हासिल किया है, उसके बाद आईआईएससी बैंगलोर 58वें स्थान और आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) 72वें स्थान पर है।

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इनके अतिरिक्त, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेनेजमेंट (IIM), आईआईटी खड़गपुर, एमिटी यूनिवर्सिटी और बैंगलोर यूनिवर्सिटी ने भी टॉप 250 ग्लोबल एम्प्लॉयबिलिटी यूनिवर्सिटी रैंकिंग में स्थान हासिल किया है। विश्व स्तर पर, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) इस साल भी पिछले साल की तरह ग्लोबल एम्प्लॉयबिलिटी यूनिवर्सिटी रैंकिंग में टॉप पर रहा है।

 

वहीं, एमआईटी (MIT) के बाद कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (California Institute of Technology) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इन तीन संस्थानों ने लगातार दूसरी बार इसी क्रम में टॉप 3 रैंक हासिल की है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (University of Cambridge) और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) ने भी क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर अपना स्थान बरकरार रखा है। इस साल, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (University of Oxford) 8वें से छठे स्थान पर पहुंच गई है।

 

हालांकि, जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी (University of Tokyo) इस साल छठे से सातवें स्थान पर खिसक गई है। इसके अतिरिक्त सिंगापुर का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय 9वें से 8वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी (Princeton University) भी 10वें से 9वें स्थान पर पहुंच गई है। हालांकि, येल यूनिवर्सिटी (Yale University) ने साल 2021 में अपनी सातवीं रैंक से इस साल 10वीं रैंक तक की भारी गिरावट देखी है।

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पांच वर्ल्ड कप में स्कोर करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने रोनाल्डो

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पुर्तगाल के स्टार स्ट्राइकर और कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने इतिहास रच दिया है। वह फीफा वर्ल्ड कप के पांच संस्करण में गोल करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। यह एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे लियोनल मेसी, माराडोना और पेले जैसे दिग्गज भी हासिल नहीं कर सके। रोनाल्डो इससे पहले 2006, 2010, 2014, 2018 फीफा वर्ल्ड कप में भी गोल दाग चुके हैं। रोनाल्डो का यह फीफा वर्ल्ड कप में 18वां मैच रहा और उन्होंने सभी वर्ल्ड कप को मिलाकर आठवां गोल दागा।

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रोनाल्डो ने अपने देश के लिए फीफा वर्ल्ड कप में सबसे युवा और सबसे उम्रदराज गोल स्कोरर बन गए हैं। यानी वह पुर्तगाल के लिए फीफा वर्ल्ड कप में सबसे युवा गोल स्कोरर और अब घाना के खिलाफ गोल दागने के बाद सबसे उम्रदारज गोल स्कोरर बन गए हैं। ऐसा करने वाले दुनिया के वह तीसरे खिलाड़ी हैं। इससे पहले क्रोएशिया के इविसा ओलिच और डेनमार्क के माइकल लॉड्रुप ऐसा कर चुके हैं।

 

रोनाल्डो ने मेजर टूर्नामेंट्स यानी फीफा वर्ल्ड कप और यूरो कप मिलाकर 14 मैचों में 13 गोल दागे हैं। इसके अलावा वह तीन अलग-अलग वर्ल्ड कप में पेनल्टी पर गोल दागने वाले भी दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए। दरअसल, मैच के 65वें मिनट में रोनाल्डो को घाना के बॉक्स के अंदर सलिसू ने गिरा दिया और फाउल किया। इस पर रेफरी ने पुर्तगाल को पेनल्टी ऑफर किया। पुर्तगाल के कप्तान ने गोल दाग इतिहास रच दिया। यह उनका 118वां अंतरराष्ट्रीय गोल रहा। वह अंतरराष्ट्रीय गोल के मामले में नंबर वन हैं।

 

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देशभर के 39 स्कूलों को स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार से किया गया सम्मानित

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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि देश भर के 39 स्कूलों को 2021-22 शैक्षणिक सत्र के लिए स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि पुरस्कार के लिए 8.23 लाख प्रविष्टियां आईं थीं। चयन समिति की तरफ से इनमें से 39 स्कूल सम्मान हेतु चुने गए थे। इनमें 28 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल जबकि 11 निजी स्कूल हैं। इन सम्मानित स्कूलों में दो कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, एक नवोदय विद्यालय और तीन केंद्रीय विद्यालय भी शामिल हैं।

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स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार न केवल उन स्कूलों को सम्मानित करता है जिन्होंने पानी, स्वच्छता और स्वच्छता के क्षेत्र में अनुकरणीय काम किया है बल्कि स्कूलों को और सुधार करने के लिए एक बेंचमार्क और रोडमैप भी प्रदान करता है। पुरस्कार के लिए, स्कूलों को पानी, शौचालय, साबुन से हाथ धोना, संचालन और रखरखाव, व्यवहार परिवर्तन, क्षमता निर्माण और कोविड-19 तैयारी और प्रतिक्रिया के छह व्यापक मापदंडों पर रैंक दी जाती है।

 

पुरस्कार प्राप्त करने वाले स्कूलों में से समग्र श्रेणी के 34 स्कूलों 60 हजार रुपये और उप श्रेणी के स्कूलों को 20 हजार रुपये के नकद पुरस्कार दिए गए। पुरस्कार के तीसरे संस्करण में 9.59 लाख स्कूलों की भागीदारी देखी गई, जो स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2017-18 में भाग लेने वाले 6.15 लाख स्कूलों की संख्या से लगभग डेढ़ गुना अधिक है।

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भारत का संविधान दिवस: इतिहास और महत्व

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भारत के संविधान को अपनाने के उपलक्ष्य में भारत में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था, और यह 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। वहीं, केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 19 नवंबर 2015 को घोषणा की थी कि 26 नवंबर को हर साल संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। इसके बाद से हर साल संविधान दिवस को इस दिन मनाया जाता है।

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प्रमुख बिंदु

 

  • भारत के संविधान को ‘लोगों का, लोगों के लिए, और लोगों द्वारा’ कहा जाता है।
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना ने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणतंत्र और कल्याणकारी राज्य घोषित किया।
  • भारतीय संविधान हमें मौलिक कर्तव्यों के साथ मौलिक अधिकार प्रदान करता है।
  • भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
  • संविधान देश की सरकार को राष्ट्र की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए एक ढांचा प्रदान करता है।

 

संविधान दिवस का महत्व

 

संविधान दिवस (Constitution Day) सभी भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश में ब्रिटिश शासन के अंत का प्रतीक है। 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बावजूद जब तक कि 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू नहीं हुआ, यह अगले तीन वर्षों तक ब्रिटिश डोमिनियन बना रहा। यह दिन भारतीय संविधान के महत्व पर जोर देता है और यह बताता है कि देश के नागरिकों के लिए संविधान क्यों आवश्यक है।

 

क्यों मनाया जाता है संविधान दिवस

हालांकि देश में संविधान दिवस (Constitution Day) मनाने का सिलसिला काफी पुराना नहीं है। साल 2015 से भारत हर वर्ष 26 नवंबर को अपना संविधान दिवस मनाता है। इसके लिए सामाजिक न्याय मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) ने 19 नवंबर 2015 को फैसला किया था। 26 नवंबर को राष्ट्रीय कानून दिवस (National Law Day) के रूप में भी जाना जाता रहा है।

 

संविधान दिवस: इतिहास

 

हमारे देश के संविधान ( Indian Constitution) को बनने में 2 साल, 11 महीने और 8 दिन का समय लगा था। भारत के संविधान के आधार पर ही देश की संसद कानून बनाती है, जिससे इस देश की पूरी व्यवस्था चलती है। 26 नवंबर, 1949 में बनकर तैयार हुए हमारे संविधान को 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था। इस दिन को Republic Day के रूप में मनाया जाता है। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में हुई थी। संविधान सभा की पहली बैठक में कुल 207 सदस्य शामिल थे।

 

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राष्ट्रीय दुग्ध दिवस: 26 नवंबर

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भारत में हर साल 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस (National Milk Day) के रूप में मनाया जाता है। भारत की श्वेत क्रांति के जनक डॉ वर्गीस कुरियन (Dr Verghese Kurien) की जयंती के उपलक्ष्य में 2014 से यह दिवस मनाया जा रहा है। उन्हें “भारत का दूधवाला (Milkman of India)” के रूप में भी जाना जाता है।

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इस दिन का महत्व:

 

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मानव जीवन में दूध की आवश्यकता और महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। दूध वह पहला भोजन है जो बच्चा जन्म के बाद खाता है। यह शायद जीवन भर खाया जाने वाला भोजन है।

 

डॉ वर्गीस कुरियन कौन थे?

 

डॉ वर्गीस कुरियन को ‘भारत में श्वेत क्रांति के जनक’ के रूप में जाना जाता है। वे एक सामाजिक उद्यमी थे। उन्होंने ऑपरेशन फ्लड का नेतृत्व किया, जो दुनिया भर में सबसे बड़ा कृषि डेयरी विकास कार्यक्रम है। इस ऑपरेशन ने भारत को दूध की कमी वाले देश से दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बना दिया। इस आंदोलन ने लगभग 30 वर्षों में प्रति व्यक्ति उपलब्ध दूध को दोगुना कर दिया और साथ ही दूध उत्पादन को चार गुना बढ़ा दिया।

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वित्तवर्ष 23 में भारत का चालू खाता घाटा, GDP के 3-3.2% होने की उम्मीद

मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor (CEA)) डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार, मज़बूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों और तेल आयात में वृद्धि के चलते वित्त वर्ष 23 के लिए भारत का चालू खाता घाटा, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3-3.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

 

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इस विकास के बारे में और अधिक ज़ानकारी:

वर्ष 2020-21 में 0.9 प्रतिशत के अधिशेष के मुकाबले 2021-22 में भारत के चालू खाता घाटे को सकल घरेलू उत्पाद का 1.2 प्रतिशत दर्ज़ किया गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि चालू खाता घाटा पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2022) में मामूली रूप से बढ़ जाएगा, लेकिन दूसरी छमाही (अक्टूबर 2022-मार्च 2023) में कम हो जाएगा। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 23 के लिए चालू खाता घाटा, जीडीपी के 3 प्रतिशत से कम रहने की उम्मीद है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार का कहना:

मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने कहा कि भारत का वार्षिक आयात कवर काफी सहज है और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund (IMF)) भारत के बाहरी क्षेत्र को जोखिम वाले क्षेत्र में नहीं मानता है।

आरबीआई का आकलन:

आरबीआई के आकलन (अर्थव्यवस्था की स्थिति की रिपोर्ट में) के अनुसार, 4 नवंबर को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 530.0 बिलियन डॉलर था, जो 2022-23 के लिए अनुमानित 8.6 महीने के आयात को कवर करता है। विदेशी मुद्रा भंडार का आयात कवर (भुगतान संतुलन के आधार पर) जून 2022 के अंत में घटकर 10.4 महीने रह गया, जो मार्च 2022 के अंत में 11.8 महीने था।

वर्तमान आर्थिक स्थिति के बारे में:

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि, “2022-23 में 6.5-7.5% के बीच की वास्तविक जीडीपी विकास दर वर्तमान समय में उच्च तेल की कीमतों से उभरने वाली ताजा अनिश्चितताओं के बावजूद उचित (Reasonable) है।

नागेश्वरन ने कहा कि, “जब भारत को उच्च खुदरा मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ा, तो यह कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में मध्यम देखी गई, जो 2% की मुद्रास्फीति को लक्षित करती है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था 8-10% के करीब है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के कारण कमोडिटी की कीमतों को उलझाकर, इस वर्ष प्रमुख ब्याज दरों में भारी वृद्धि करके मुद्रास्फीति को भयानक रूप से लक्षित किया है, जिसमें RBI भी शामिल है। इससे उभरते बाजारों की मुद्राएं और व्यापार संतुलन बाधित हुआ है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का मानना ​​है कि देश की FY23 जीडीपी वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक के 7.2% के पूर्वानुमान और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के 7.4% के पूर्वानुमान के बीच होगी।

 

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने प्रदर्शनकारियों पर ईरान की कार्रवाई की निंदा की, और शुरू की जांच की प्रक्रिया

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ईरान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर हिंसात्मक कार्रवाई की निंदा की है। परिषद ने इस कार्रवाई और विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ किए गए कथित दुर्व्यवहारों की जांच के लिए एक स्वतंत्र तथ्य-खोज मिशन (Independent fact-finding mission ) बनाने की घोषणा की है।

 

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मुद्दे के बारे में अधिक जानकारी:

जिनेवा में संपन्न हुए सत्र में ईरान पर दबाव बनाने का नवीनतम अंतर्राष्ट्रीय प्रयास किया गया है, जो पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को झेल रहा है। जर्मनी और आइसलैंड द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को संयुक्त राज्य अमेरिका और कई यूरोपीय, लैटिन अमेरिकी, एशियाई और अफ्रीकी देशों सहित 25 देशों द्वारा समर्थित किया गया है। छह देशों अर्थात चीन, पाकिस्तान, क्यूबा, ​​इरिट्रिया, वेनेजुएला और आर्मेनिया ने इस कदम का विरोध किया, जबकि 16 देशों ने भाग नहीं लिया।

घटनाक्रम के बारे में:

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार अधिकारियों ने पहले ईरान की सरकार से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई रोकने की अपील की थी। लेकिन देश की “बिगड़ती” हालातों और मानव अधिकारों की स्थिति पर तेहरान के दूत उद्दंड और अडिग थे। उन्होंने इसे को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया।

यह विरोध प्रदर्शन दो महीने से पहले, 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुआ था, उसकी मौत सख्त इस्लामी ड्रेस कोड का उल्लंघन करने हेतु नैतिकता पुलिस की हिरासत में हुई थी।

 

पश्चिमी देशों का क्या कहना है:

जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने कहा कि स्थिति “हमारे साहस की परीक्षा (a test of our courage)” प्रस्तुत करती है।

आगे उन्होंने कहा कि, “संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हर राज्य की संप्रभुता की रक्षा के लिए की गई थी, लेकिन एक शासन जो इस शक्ति का उपयोग अपने ही लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए करता है, वह हमारे संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों का उल्लंघन कर रहा है।”

ईरान क्या कह रहा है:

ईरान के महिला और परिवार मामलों के विभाग के उपाध्यक्ष खादीजेह करीमी ने इस कार्रवाई की आलोचना की है और कहा कि यह “ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति को विकृत करने के लिए जर्मनी के राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम” है।

करीमी ने कहा, “इस्लामिक गणराज्य ईरान को इस बात का गहरा अफसोस है कि मानवाधिकार परिषद का एक बार फिर कुछ अहंकारी राष्ट्रों द्वारा एक संप्रभु संयुक्त राष्ट्र सदस्य राज्य को विरोध करने के लिए दुरुपयोग किया गया है, जो मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”

संयुक्त राष्ट्र का क्या कहना है:

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख, वोल्कर तुर्क ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है और कहा कि, “ईरान की सरकार विश्व समुदाय की बात नहीं सुन रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि “ईरान के लोग, जीवन के सभी क्षेत्रों से, सभी जातियों से, उम्र भर, बदलाव की मांग कर रहे हैं। इन विरोधों की जड़ें स्वतंत्रता के लंबे समय से चले आ रहे इनकार, क़ानूनी और संरचनात्मक असमानताओं, सूचना तक पहुंच के अभाव और इंटरनेट शटडाउन में निहित हैं।”

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बारे में (About The UN Human Rights Council):

यह संयुक्त राष्ट्र परिषद के भीतर एक अंतर सरकारी निकाय है।

इतिहास (History):

UNHRC ने पूर्व संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की जगह ली।
यह UNGA द्वारा 15 मार्च, 2006 को बनाया गया था, और निकाय का गठन जून, 2006 में अपने पहले सत्र में किया गया था।

 

कार्य (Functions):

  • यह दुनिया भर में मानवाधिकारों के प्रचार और संरक्षण को मजबूत करने के लिए जिम्मेदार है।
  • यह मानव अधिकारों के उल्लंघन की स्थितियों पर भी ध्यान देता है और सिफारिशें करता है।
  • यह सभी विषयगत मानवाधिकार मुद्दों और स्थितियों पर चर्चा कर सकता है।
  • परिषद मानवाधिकार पर पूर्व आयोग द्वारा स्थापित संयुक्त राष्ट्र विशेष प्रक्रियाओं के साथ भी काम करती है, जिसमें विशेष प्रतिवेदक, विशेष प्रतिनिधि, स्वतंत्र विशेषज्ञ और कार्यकारी समूह शामिल होते हैं।
  • उनका काम विशिष्ट देशों में विषयगत मुद्दों या मानवाधिकार स्थितियों की निगरानी, ​​जांच, सलाह और रिपोर्ट करना है।

 

परिषद की सदस्यता (Membership  of the Council):

  • परिषद 47 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से बनी है, जो UNGA में प्रत्यक्ष और गुप्त मतदान के माध्यम से बहुमत से चुने गए हैं।
  • परिषद की सदस्यता समान भौगोलिक वितरण पर आधारित है।
  • अफ्रीकी और एशिया-प्रशांत राज्यों में प्रत्येक में 13 सीटें हैं।
  • लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई राज्यों में 8 सीटें हैं।
  • पश्चिमी यूरोपीय और अन्य राज्यों में 7 सीटें हैं, और
  • पूर्वी यूरोपीय राज्यों में 6 सीटें हैं।

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