इसरो का सबसे छोटा रॉकेट SSLV-D2 लॉन्च, जानें क्या है इसकी खासियत

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ISRO ने नया रॉकेट SSLV-D2 सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया। इसरो ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 10 फरवरी 2023 को सुबह तीन उपग्रह EOS-07, Janus-1 और AzaadiSAT-2 उपग्रहों को 450 किमी की गोलाकार कक्षा में स्थापित करने के लिए स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV-D2) लॉन्च किया।

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लॉन्चिंग इसलिए है खास

  • इसरो ने एसएसएलवी को 550 किलोग्राम की पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) तक ले जाने की क्षमता के साथ विकसित किया है। यह छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के बाजार पर आधारित है।
  • SSLV-D2 का कुल वजन 175.2 किलोग्राम होगा, जिसमें 156.3 किलोग्राम EOS, 10.2 किग्रा Janus-1 और 8.7 किग्रा AzaadiSat-2 का होगा।
  • एसएसएलवी रॉकेट अंतरिक्ष के लिए कम लागत वाली पहुंच प्रदान करता है, जो कई उपग्रहों को समायोजित करने में कम समय और लचीलापन प्रदान करता है और न्यूनतम लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर में अपना काम पूरा करता है।
  • इसरो के अनुसार एसएसएलवी रॉकेट की लगभग 56 करोड़ रुपये है और यह 34 मीटर लंबा है। रॉकेट का भार 120 टन है। अपनी उड़ान के लगभग 13 मिनट में, SSLV रॉकेट EOS-07 और उसके तुरंत बाद अन्य दो उपग्रहों Janus को बाहर निकाल देगा। इसरो ने बताया कि तीनों उपग्रहों को 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर छोड़ा जाएगा।

 

बता दें कि यह रॉकेट लॉन्चिंग इसलिए भी खास है क्योंकि एसएसएलवी की पहली उड़ान एसएसएलवी-डी1 पिछले साल 7 अगस्त को विफल रही थी। इसरो ने जब विफलता का पता लगाने की कोशिश की तो पता चला कि दूसरे चरण के पृथक्करण के दौरान कंपन के कारण लाॉन्चिंग प्रभावित हुई थी।

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भारतीय गोल्फर अदिति अशोक ने केन्या लेडीज ओपन खिताब 2023 जीता

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भारतीय गोल्फ खिलाड़ी अदिति अशोक ने मैजिकल कीनिया लेडीज ओपन का खिताब अपने नाम कर लिया हैं। अदिति ने लेडीज यूरोपियन टूर (एलईटी) गोल्फ में शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए नौ शॉट की बढ़त के साथ यह खिताब हासिल किया हैं। खास बात है कि यह अदिति का चौथा एलईटी खिताब हैं।

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पिछला खिताब नवंबर 2007 में आबूधाबी में जीतने के बाद अदिति ने अपने लगभग 5 साल के इंतजार को खत्म किया। उन्होंने चार दौर में क्रमश: 67-70-69-74 का स्कोर बनाया, जिसके बाद उनका कुल स्कोर 12 अंडर 280 का रहा। बता दें टोक्यो ओलंपिक में अदिति मामूली अंतर से पदक जीतने से चूक गई थी। अदिति के अलावा अन्य भारतीय खिलाड़ियों में शीर्ष एमेच्योर खिलाड़ी अवनी प्रशांत ने एक अंडर 72 का स्कोर किया और संयुक्त नौवें स्थान पर रही।

 

अदिति अशोक का गोल्फ का सफर

 

अदिति अशोक (Aditi Ashok) मात्र 12 साल की आयु में ही राष्ट्रीय टीम का हिस्‍सा बन गईं थीं। उसने साल 2013 में कर्नाटक जूनियर, साउथ इंडियन जूनियर चैंपियनशिप और नेशनल एमेच्योर टाइटल जीते। वो साल 2012, 2013 और 2014 में नेशनल जूनियर चैंपियनशिप जीत चुकी हैं। अदिति अशोक एशियन यूथ गेम्स खेलने वाली पहली भारतीय हैं। उसने साल 2015 में लेडीज ब्रिटिश एमेच्योर स्ट्रोक प्ले चैंपियनशिप जीती।

 

अदिति रियो ओलंपिक 2016 (Riyo Olympic 2016) में हिस्सा लेने वाली पहली गोल्फर बनीं, लेकिन कोई मेडल नहीं जीत सकीं। उस समय वो केवल 18 साल की थी और ओलंपिक में भाग लेने वाली सबसे छोटी गोल्फर थीं। अदिति अशोक ने साल 2017 के लिए एलपीजीए टूर कार्ड हासिल किया और 2017 में भारत की पहली एलपीजीए खिलाड़ी बनीं। अदिति अशोक को साल 2020 में अर्जुन अवॉर्ड (Arjun Award) से सम्मानित किया गया था। अदिति का जन्म 29 मार्च, 1998 को बैंगलोर में हुआ था।

 

विश्व दलहन दिवस: 10 फरवरी

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हर साल विश्व दलहन दिवस यानी दालों का दिन 10 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत वैश्विक स्तर पर दालों के महत्व और उसकी माध्यम से प्राप्त होने वाले पोषिक तत्वों को ध्यान में रखते हुए की गई थी। दालों का प्रयोग न केवल पोषण प्राप्त करने के लिए किया जाता है बल्कि इसके माध्यम से भूख मरी और गरीबी को मिटाने में भी सहायता मिल रही है। दालें सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खानपान का जरूरी हिस्सा हैं। वेजिटेरियनस के लिए तो दालें ही प्रोटीन का सबसे बड़ा स्त्रोत हैं।

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विश्व दलहन दिवस 2023 की थीम

वर्ष 2016 में जब दलहन के लिए अंतर्राष्ट्रीय वर्ष मनाया गया था, तब इसके लिए एक थीम का चुनाव किया गया था और तभी से इस दिन को हर साल एक नई थीम के साथ मनाया जा रहा है। वर्ष 2023 में विश्व दलहन दिवस मनाने के लिए “सतत भविष्य के लिए दालें” इस थीम को चुना गया है।

 

विश्व दलहन दिवस मानने का उद्देश्य

सयुक्त राष्ट्र संघ दालों का उत्पादन बढ़ाकर दुनिया में गरीब कुपोषित देशों को पोषक तत्वों से भरपूर खाना उपलब्ध करवाना चाहता है। क्योंकि दालों में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते है।

 

विश्व दलहन दिवस का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा 20 दिसंबर 2013 में प्रस्ताव से अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस मानने का निर्णय लिया गया। ‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस’ पहली बार साल 2016 में मनाया गया था। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी 2019 को विश्व दाल दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। जिसके बाद से 10 फरवरी को दाल दिवस मनाते है।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टेकअवे:

 

  • खाद्य और कृषि संगठन प्रमुख: क्यू डोंगयु;
  • खाद्य और कृषि संगठन का मुख्यालय: रोम, इटली;
  • खाद्य और कृषि संगठन की स्थापना: 16 अक्टूबर 1945।

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ICC T-20 महिला विश्व कप दक्षिण अफ्रीका में शुरू

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साउथ अफ्रीका में हुए पहली बार हुए महिला अंडर-19 टी20 वर्ल्ड कप को जीत भारतीय अंडर19 महिला टीम ने इतिहास रच दिया। अब बारी सीनियर महिला खिलाड़ियों की है। साउथ अफ्रीका में ही इसी महीने में आईसीसी महिला टी20 विश्व कप शुरु होगा जो 26 फरवरी तक चलेगा। भारतीय टीम हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में टी20 के इतिहास में पहली बार विश्व कप जीतकर स्वर्णिम अक्षरों में अपना नाम दर्ज करवाने को देखेगी।

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इतिहास में पहली बार दक्षिण अफ्रीका, 2023 में महिला टी20 विश्व कप की मेजबानी करेगा। यह आयोजन 10 फरवरी से शुरू होगा और 26 फरवरी को इसका फाइनल खेला जाएगा। केप टाउन, गेकेबेरा और पार्ल स्टेडियम मैचों की मेजबानी करेंगे। न्यूलैंड्स स्टेडियम फाइनल की मेजबानी करेगा। भारतीय महिला टीम टी20 विश्व कप में चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ टूर्नामेंट का आगाज करेगी।

 

पाकिस्तान के खिलाफ टूर्नामेंट का आगाज करेगी भारतीय टीम

 

टूर्नामेंट की 10 टीमों को पांच-पांच के दो ग्रुप में बांटा गया है। भारत को ग्रुप बी में इंग्लैंड, आयरलैंड, पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के साथ रखा गया है। द वीमेन इन ब्लू अपने अभियान की शुरुआत चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ 12 फरवरी को केपटाउन में करेगी।

टी20 विश्व कप के लिए भारतीय महिला टीम:

हरमनप्रीत कौर(कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, यस्तिका भाटिया, ऋचा घोष, जेमिमा रोड्रिग्स, हरलीन देओल, दीप्ति शर्मा, देविका वैद्य, राधा यादव, रेणुका ठाकुर, अंजलि सरवानी, पूजा वस्त्राकर, राजेश्वरी गायकवाड़, शिखा पांडे।

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भारत में ड्रोन के लिए पहला अनमेंड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम शुरू

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केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्काई यूटीएम लॉन्च किया। इसे दुनिया की अत्याधुनिक मानव रहित यातायात प्रबंधन प्रणाली बताया जा रहा है, जो प्रति घंटे 4,000 उड़ानें और प्रति दिन 96,000 उड़ानें संभालने में सक्षम है। इस सॉफ्टवेयर में यूटीएम टनल सहित कई नए और इनोवेटिव ऑटोमेटेड एयर ट्रैफिक कंट्रोल फीचर्स दिए गए हैं।

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स्काई यूटीएम लॉन्च के मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने निर्माण, इन्फ्रा और राजमार्ग क्षेत्र में नई तकनीकों को लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि यह भारतीय ड्रोन स्टार्ट-अप्स के लिए सॉफ्टवेयर जैसी इंडस्ट्री का नेतृत्व करने का समय है। ड्रोन फ्यूचर टेक्नॉलजी है और इसकी क्षमता कल्पना से परे है। ड्रोन गतिविधियों को बेहद कुशल और लागत प्रभावी बनाते हैं। निर्माण, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, रक्षा, बुनियादी ढांचा, सर्वेक्षण, रियल एस्टेट और परिवहन से लेकर सभी क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है।

 

यूटीएम क्या है?

 

  • भारत का अपनी तरह का पहला और एकमात्र ड्रोन एरियल ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म स्काई यूटीएम एक क्लाउड-बेस्ड एरियल ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम है, ये मानवयुक्त (मैन्ड) एविशन एयरस्पेस के साथ अनमैन्ड एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ता है।
  • स्काई यूटीएम को एयरस्पेस में सभी ड्रोन और अन्य एरियल मोबिलिटी ऑपरेटर्स को ऑटोनोमस नेविगेशन, रिस्क एसेसमेंट, कनेक्टिविटी और ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रदान करने के लिए बनाया गया है। स्काई यूटीएम में स्काई टनल नामक एक नया फीचर भी है, जिसे अभी तक दुनिया में किसी और ने पूरा नहीं किया है।
  • स्काई टनल, दो जगहों के बीच एक एयर कोरिडोर और एक इनविजिबल कनेक्ट स्थापित करती है। इस फ्लाइट प्लान को लागू करने के लिए फिजिकल उपकरणों का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि कोई ब्लैंक स्पॉट्स नहीं हैं और टनल पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। ड्रोन और आने वाली फ्लाइंग टैक्सियां, जो एक साल में उपलब्ध होंगी, इसके दायरे में आ जाएंगी।

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यूनेस्को प्रसिद्ध विश्वविद्यालय को विश्व धरोहर घोषित करेगा

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विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना 1921 में रवींद्रनाथ द्वारा की गई थी। इसे जल्द ही यूनेस्को ‘विरासत’ टैग प्राप्त होगा। यह इसे जीवित विरासत का पहला विश्वविद्यालय बनने की अनुमति देगा। विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती ने कहा कि विश्वविद्यालय को एक विरासत विश्वविद्यालय नामित किया जाएगा।

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यूनेस्को के अनुसार, 1922 में, विश्व-भारती का उद्घाटन कला, भाषा, मानविकी, संगीत में अन्वेषण के साथ एक संस्कृति केंद्र के रूप में किया गया था। सामान्यतः विरासत का टैग अमूर्त स्मारक को दिया जाता है। दुनिया में पहली बार किसी मूर्त विश्वविद्यालय को यूनेस्को से विरासत का टैग मिलने जा रहा है।

 

प्रमुख बिंदु:

 

  • यह भारत में पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में स्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 1921 में की गई थी तथा मई 1922 में जब तक विश्वभारती सोसाइटी को एक संगठन के रूप में पंजीकृत नहीं किया गया था, इसका नाम नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर के नाम पर रखा गया था।
  • रबींद्रनाथ खुली शिक्षा में विश्वास करते थे और उन्होंने विश्वविद्यालय में उस प्रणाली को पेश किया, जो आज तक प्रचलित है।
  • यूनेस्को (UNESCO) के अनुसार, वर्ष 1922 में विश्व-भारती का उद्घाटन कला, भाषा, मानविकी, संगीत में अन्वेषण के साथ एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में किया गया था और ये आज उन विभिन्न संस्थानों में परिलक्षित होता हैं जो अपने शैक्षिक कार्यक्रमों में हिंदी का अध्ययन सहित, चीन-एशियाई अध्ययन, मानविकी, ललित कला और संगीत का अध्ययन जारी रखे हैं।
  • यह संस्कृति और संस्कृति अध्ययन में उत्कृष्टता के संस्थापक सिद्धांतों पर आधारित है।
  • आज़ादी से पूर्व यह एक महाविद्यालय था और संस्थान को वर्ष 1951 में केंद्रीय अधिनियम के माध्यम से केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया था।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टेकअवे:

 

  • यूनेस्को मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस;
  • यूनेस्को की स्थापना: 16 नवंबर 1945, लंदन, यूनाइटेड किंगडम।
  • यूनेस्को महानिदेशक: ऑड्रे अज़ोले।

 

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MobiKwik UPI पर क्रेडिट कार्ड को सपोर्ट करने वाला भारत का पहला ऐप बन गया

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भारत का अग्रणी फिनटेक, MobiKwik UPI पर RuPay क्रेडिट कार्ड को सपोर्ट करने वाला पहला फिनटेक ऐप बन गया है। यह विकास उन लाखों भारतीयों के लिए एक नए स्तर की सुविधा लेकर आया है जो अपने दैनिक लेनदेन के लिए यूपीआई का उपयोग करते हैं। लगभग 50 मिलियन उपयोगकर्ताओं के पास एक या अधिक क्रेडिट कार्ड हैं, यह कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर भारत की ड्राइव में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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RuPay क्रेडिट कार्ड अब सीधे UPI आईडी से जुड़ गए हैं, MobiKwik ग्राहक UPI QR कोड को स्कैन करके और भुगतान प्रमाणीकरण के लिए UPI पिन का उपयोग करके व्यापारियों को आसानी से भुगतान कर सकते हैं।

 

विशेषताएँ

  • यह सुविधा न केवल MobiKwik के ग्राहकों के लिए एक आसान और सुरक्षित भुगतान अनुभव प्रदान करती है, बल्कि भारतीय व्यापारियों के लिए क्रेडिट इकोसिस्टम का हिस्सा बनने के नए अवसर भी खोलती है, जिसमें पॉइंट-ऑफ़-की आवश्यकता के बिना एसेट-लाइट क्यूआर कोड का उपयोग करके क्रेडिट कार्ड की स्वीकृति होती है।
  • एकीकरण मौजूदा यूपीआई रेल पर नए क्रेडिट उत्पादों के विकास में भी मदद करेगा जो छोटे शहरों में क्रेडिट पैठ को बढ़ावा देगा जो बड़े पैमाने पर कम हैं।
  • RuPay क्रेडिट कार्ड सभी प्रमुख बैंकों द्वारा वाणिज्यिक और खुदरा दोनों क्षेत्रों के लिए वृद्धिशील कार्ड के लिए जारी किए जाते हैं।
  • UPI के साथ RuPay क्रेडिट कार्ड का एकीकरण भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम और RBI के दृष्टिकोण के अनुरूप है जो उन व्यापारियों के लिए क्रेडिट कार्ड स्वीकृति को बढ़ावा देता है जो क्रेडिट इकोसिस्टम का हिस्सा नहीं हैं।
  • नई सुविधा मौजूदा यूपीआई मानक लेनदेन सीमाओं का पालन करेगी।

 

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एलन मस्क ने किया घोषणा, अगले महीने SpaceX लॉन्च करेगी करेगी रॉकेट ‘स्टारशिप’

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एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अगले माह यानी मार्च के महीने में स्टारशिप रॉकेट लॉन्च कर सकती है। स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने घोषणा की है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला तो इसकी विशाल स्टारशिप रॉकेट प्रणाली अगले महीने पहली बार कक्षा में जा सकती है। पिछले साल से, स्पेसएक्स अपनी अगली पीढ़ी के डीप-स्पेस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम की निर्णायक प्रदर्शन उड़ान शुरू करना चाह रहा है, क्योंकि इसका उद्देश्य नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर ले जाना है।

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इससे पहले, जनवरी में भी मस्क ने स्टारशिप को जल्द लॉन्च करने की संभावना जताई थी। उन्होंने तब कहा था कि इसे फरवरी अंत तक लॉन्च किया जा सकता है। इससे पहले, स्पेस एक्स इस प्रोजेक्ट को पिछले साल ही लॉन्च करना चाह रहा था। स्टारशिप की सफल लॉचिंग के बाद कंपनी मंगल और चंद्रमा तक पहुंचने का लक्ष्य को पाना चाहती है। स्पेसएक्स अंतरिक्ष यात्रियों और कार्गो को चंद्रमा और मंगल तक ले जाने के लिए स्टारशिप विकसित कर रहा है। मार्च में ऐसा पहली बार होगा जब स्पेसएक्स एक बार पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाएगा और फिर हवाई द्वीप से दूर प्रशांत महासागर के ऊपर उड़ान भरेगा।

 

प्रोटोटाइप ने की थी सफल लैंडिंग

 

मार्च 2021 में स्टारशिप के एक प्रोटोटाइप ने धरती पर सफल लैंडिंग की थी। हालांकि, कुछ देर बाद इसमें जबरदस्त धमाका हो गया था। प्रोटोटाइप आग के गोले में तब्दील हो गया था।

 

जानिए कितनी है स्पेसएक्स की क्षमता

 

स्पेसशिप एक शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल है। यह 100 टन कार्गो को उठाने में सक्षम है। इसमें एक सुपर हेवी रॉकेट भी लगा है जो चालक दल और कार्गो दोनों को साथ ले जाने की क्षमता रखता है। यह रॉकेट स्टारशिप के लॉन्च होने के बाद उसे 65 किमी ऊंचाई तक ऊपर उठाएगा।

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Operation Dost: भूकंप प्रभावित तुर्की और सीरिया की मदद से लिए आगे आया भारत

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तुर्किये और सीरिया में भूकंप के चलते जान गंवाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। नए आंकड़ों के अनुसार, अब तक 15 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। घायलों की संख्या 80 हजार से भी अधिक हो गई है। अभी बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। ऐसे में मृतकों और घायलों की संख्या में कई गुना ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है।

 

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इस बीच, तुर्किये के अलग-अलग शहरों में बार-बार भूकंप के झटके भी महसूस किए जा रहे हैं। उधर, भारत ने तुर्किये में भूकंप प्रभावित लोगों की मदद के लिए ‘ऑपरेशन दोस्त’ चलाया है। इसके जरिए भारत ने तुर्किये के लोगों की मदद तेज कर दी है। सेना, एयरफोर्स के जवान, एनडीआरएफ ऑर डॉक्टर्स की टीम तुर्किये भेजी गई है। बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भी भेजी गई है। भारत में तुर्कीये के राजदूत फिरत सुनेल ने कहा है कि ‘ऑपरेशन दोस्त’ एक “बहुत महत्वपूर्ण ऑपरेशन” है और दोनों देशों के बीच दोस्ती को प्रदर्शित करता है।

 

ऑपरेशन दोस्त को बताया ‘मददगार’

ऑपरेशन दोस्त को “मददगार” बताते हुए भारत में तुर्कीये के राजदूत फिरत सुनेल ने कहा, हमें तुर्कीये में, विशेष रूप से पहले 72 घंटों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता के साथ-साथ खोज और बचाव कार्यों की आवश्यकता होगी। ‘ऑपरेशन दोस्त’ में खोज, बचाव दल और आपातकालीन चिकित्सा सहायता शामिल है इसलिए यह बहुत मददगार है। फिरत सुनेल ने कहा, 15,000 से अधिक तुर्कीये सैनिक, डॉक्टर और विदेशी दल तुर्कीये में जमीन पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मरने वालों की संख्या लगभग 10,000 है, हालांकि, बचाव अभियान जारी है।

 

FATF Blacklists Myanmar, Calls for Due Diligence To Transactions in Nation_70.1

रक्षा मंत्रालय ने 41 स्वदेशी मॉड्यूलर पुलों की खरीद के लिए एलएंडटी के साथ अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

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रक्षा मंत्रालय पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के तहत रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। हाल ही में मंत्रालय ने भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के लिए मॉड्यूलर पुलों के 41 सेट के स्वदेशी निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान दी है।

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इन मॉड्यूलर ब्रिज को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। मॉड्यूलर पुलों को लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा DRDO-नामित उत्पादन एजेंसी के रूप में तैयार किया जाएगा। मॉड्यूलर ब्रिज की खरीद के लिए 08 फरवरी, 2023 को एलएंडटी के साथ 2,585 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत पर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।

 

मुख्य बिंदु

 

  • मॉड्यूलर ब्रिज के प्रत्येक सेट में 8×8 हैवी मोबिलिटी व्हीकल पर आधारित सात कैरियर व्हीकल और 10×10 हेवी मोबिलिटी व्हीकल पर लगने वाले दो लॉन्चर व्हीकल शामिल होंगे।
  • प्रत्येक सेट यांत्रिक रूप से एकल मेहराब में पूरी तरह से 46-मीटर असॉल्ट ब्रिज को स्थाई आकार प्रदान करने में सक्षम होगा।
  • पुल को त्वरित लॉन्चिंग और पुनर्प्राप्ति क्षमताओं के साथ नहरों एवं खाइयों जैसी विभिन्न प्रकार की बाधाओं पर काबू पाने के लिए स्थापित किया जा सकता है।
  • यह अत्यधिक सचल है, बहुमुखी है और पहिएदार और किसी भी तरह की परिस्थितियों में इस्तेमाल करने में सक्षम है। मॉड्यूलर ब्रिज ट्रैक किए गए यंत्रीकृत वाहनों के साथ तालमेल रखने में सक्षम है।
  • मॉड्यूलर ब्रिज मैन्युअल रूप से लॉन्च किए गए मध्यम गर्डर ब्रिज (एमजीबी) का स्थान लेंगे, जो वर्तमान में भारतीय सेना में उपयोग किए जा रहे हैं।
  • एमजीबी की तुलना में स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित मॉड्यूलर ब्रिज के कई फायदे होंगे जैसे कि इनके बढ़े हुए मेहराब, निर्माण के लिए कम समय और रिट्रीवल क्षमता के साथ मैकेनिकल लॉन्चिंग।
  • इन पुलों की खरीद से पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की ब्रिजिंग क्षमता को काफी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना विश्व स्तरीय सैन्य उपकरणों के डिजाइन एवं विकास में भारत की प्रगति को प्रदर्शित करेगी और मित्र देशों को रक्षा निर्यात बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

 

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