आकासा एयर IATA का हिस्सा बनने वाली भारत की 5वीं एयरलाइन बनी

भारत की सबसे नई एयरलाइन आकासा एयर, जिसकी स्थापना वर्ष 2020 में हुई थी, अब इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) की सदस्य बन गई है। IATA दुनिया भर की 360 से अधिक एयरलाइनों का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक हवाई यातायात के 80% से अधिक हिस्से को संभालता है। यह सदस्यता तेजी से बढ़ रही भारतीय एयरलाइन आकासा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

IATA में शामिल होने के लिए आकासा ने दिसंबर में IATA ऑपरेशनल सेफ्टी ऑडिट (IOSA) को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो IATA सदस्यता के लिए अनिवार्य है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आकासा एयर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती है।

आकासा एयर के बारे में

आकासा एयर की स्थापना विनय दुबे ने की थी। दिवंगत निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने इसमें लगभग 40% हिस्सेदारी के लिए 35 मिलियन डॉलर का निवेश किया था। एयरलाइन ने अपनी पहली वाणिज्यिक उड़ान 7 अगस्त 2022 को शुरू की। तब से अब तक आकासा एयर 2.3 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा दे चुकी है और वर्तमान में 26 घरेलू तथा 6 अंतरराष्ट्रीय शहरों को जोड़ती है।

IATA सदस्यता क्यों है महत्वपूर्ण?

IATA की सदस्यता के माध्यम से आकासा  एयर:

  • वैश्विक एयरलाइन चर्चाओं में भाग ले सकेगी
  • उद्योग की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं के विकास में योगदान देगी
  • सुरक्षा, डिजिटल विकास और सतत विमानन पर काम करेगी
  • अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि और विश्वसनीयता को मजबूत करेगी

IATA के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के उपाध्यक्ष शेल्डन ही ने कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र 77 लाख नौकरियों का समर्थन करता है और अर्थव्यवस्था में 53.6 अरब डॉलर का योगदान देता है। उन्होंने भविष्य के विमानन क्षेत्र को आकार देने में आकासा की भूमिका का स्वागत किया।

वहीं, आकासा एयर के संस्थापक और सीईओ विनय दुबे ने कहा कि IATA की सदस्यता से आकासा की वैश्विक साख मजबूत होगी और यह एयरलाइन भविष्य के लिए और अधिक तैयार बनेगी।

IATA में शामिल भारतीय एयरलाइंस

आकासा के शामिल होने के साथ अब भारत की पाँच एयरलाइंस IATA की सदस्य हैं:

  • एयर इंडिया
  • एयर इंडिया एक्सप्रेस
  • इंडिगो
  • आकासा एयर
  • स्पाइसजेट

आकासा की भविष्य की बड़ी योजनाएँ

आकासा एयर का लक्ष्य इस दशक के अंत तक दुनिया की शीर्ष 30 एयरलाइनों में शामिल होना है। एयरलाइन अगले 10 वर्षों में 226 बोइंग 737 MAX विमान संचालित करने की योजना बना रही है। वर्तमान में इसके बेड़े में 31 विमान हैं।

वित्त वर्ष 2026 (FY26) में आकासा को अपनी क्षमता में 30% से अधिक वृद्धि की उम्मीद है। इस वर्ष पांच और विमान जोड़े जाएंगे, जिससे कुल संख्या 35 विमान हो जाएगी। साल के अंत तक एयरलाइन के पास लगभग 770–775 पायलट होंगे।

मजबूत वित्तीय प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2025 (FY25) में अकासा एयर ने शानदार प्रदर्शन किया:

  • राजस्व में 49% की वृद्धि
  • EBITDA मार्जिन में 50% सुधार
  • लोड फैक्टर 87% से अधिक
  • क्षमता में 48% की वृद्धि
  • प्रति सीट लागत (ईंधन को छोड़कर) में 7% की कमी

ये आंकड़े दिखाते हैं कि अकासा तेज़ी से बढ़ते हुए लागत नियंत्रण में भी सफल रही है।

कार्गो और अतिरिक्त सेवाएँ

आकासा एयर ने यात्री टिकटों के अलावा भी मजबूत व्यवसाय खड़ा किया है। यह 25 से अधिक अतिरिक्त सेवाएँ प्रदान करती है, जैसे सीट चयन और अन्य ऐड-ऑन, जिससे अतिरिक्त आय होती है।

मार्च 2025 तक आकासा ने लगभग 1,00,000 टन कार्गो का परिवहन किया, जिससे यह भारत के एयर कार्गो क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गई है। साथ ही, यह 1,150 से अधिक कॉर्पोरेट भागीदारों के साथ काम कर रही है और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए नए निवेश भी सुरक्षित कर चुकी है।

स्काईडो को RBI से मिला PA‑CB लाइसेंस

भारत के फिनटेक इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण नियामकीय उपलब्धि के रूप में स्काईडो (Skydo) को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से पेमेंट एग्रीगेटर–क्रॉस बॉर्डर (PA-CB) के रूप में संचालन की अंतिम मंज़ूरी मिल गई है। यह स्वीकृति इसलिए खास है क्योंकि इसके जरिए बेंगलुरु स्थित यह प्लेटफॉर्म भारतीय निर्यातकों के लिए नियमित, सुरक्षित और तेज़ क्रॉस-बॉर्डर भुगतान सेवाओं का विस्तार कर सकेगा। विशेष रूप से यह पहल एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) तथा छोटे व्यवसायों के लिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान संग्रह को सरल, अनुपालन-अनुकूल और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी।

RBI लाइसेंस: इसका क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है

PA-CB (पेमेंट एग्रीगेटर–क्रॉस बॉर्डर) लाइसेंस RBI के विकसित होते पेमेंट सिस्टम नियामकीय ढांचे के तहत दिया जाता है। इस अंतिम मंज़ूरी के साथ Skydo भारत की उन शुरुआती फिनटेक कंपनियों में शामिल हो गई है जिन्हें इस श्रेणी में अधिकृत किया गया है। क्रॉस-बॉर्डर भुगतान में विदेशी मुद्रा लेनदेन, अनुपालन जाँच और दस्तावेज़ीकरण जैसे संवेदनशील पहलू शामिल होते हैं, इसलिए RBI की निगरानी विश्वास, पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।

निर्यातकों के लिए यह स्वीकृति विदेशी ग्राहकों और साझेदारों का भरोसा बढ़ाती है, क्योंकि अब भुगतान नियंत्रित और अनुपालन-अनुकूल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रोसेस होंगे। इससे भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम भी मजबूत होता है—बेहतर मॉनिटरिंग, कानूनी अनुपालन और पारदर्शिता के साथ।

निर्यातकों, फ्रीलांसर्स और MSMEs के लिए मजबूत समर्थन

Skydo वर्तमान में 50+ भारतीय शहरों में 30,000+ MSMEs, स्टार्टअप्स और फ्रीलांसर्स को सेवाएँ देता है। यह प्लेटफॉर्म 32+ विदेशी मुद्राओं में भुगतान स्वीकार करने की सुविधा देता है, जिससे विदेशी खरीदार स्थानीय तौर पर भुगतान कर सकते हैं और निर्यातकों को भारत में सहज रूप से राशि प्राप्त होती है।

Skydo का फ्लैट-फीस प्राइसिंग मॉडल और लाइव मिड-मार्केट फॉरेक्स रेट पर बिना मार्क-अप छोटे कारोबारियों को छिपे शुल्क से बचाता है। तेज़ सेटलमेंट साइकिल नकदी प्रवाह पर निर्भर व्यवसायों के लिए खास तौर पर उपयोगी है। साथ ही, पार्टनर बैंकों के साथ एकीकृत इंस्टेंट कम्प्लायंस डॉक्यूमेंटेशन अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को सरल और समय-बचत वाला बनाता है।

उत्पाद विस्तार और वैश्विक भुगतान कॉरिडोर

RBI की मंज़ूरी के बाद Skydo अधिक वैश्विक व्यापार मार्गों में विस्तार और सेवाओं को सुदृढ़ करने की योजना बना रहा है। कंपनी पहले ही अफ्रीका जैसे जटिल बाज़ारों में स्थानीय भुगतान स्वीकार्यता सक्षम कर चुकी है, जो उच्च-संभावना वाले कॉरिडोर पर उसके फोकस को दर्शाता है।

इसके अलावा, Skydo इनवॉइसिंग, पेमेंट रिमाइंडर्स, एनालिटिक्स डैशबोर्ड, लेजरिंग, और ERP/अकाउंटिंग इंटीग्रेशन जैसे टूल्स प्रदान करता है, जिससे निर्यातक कैश-फ्लो मैनेजमेंट और कलेक्शंस को बेहतर ढंग से ट्रैक कर सकें।

परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • PA-CB का अर्थ: Payment Aggregator – Cross Border
  • भुगतान प्रणालियों का नियमन: Payment and Settlement Systems Act, 2007
  • क्रॉस-बॉर्डर भुगतान अनुपालन: FEMA (Foreign Exchange Management Act)
  • MSMEs भारत की विदेशी व्यापार नीति और निर्यात वृद्धि का प्रमुख स्तंभ हैं

फंडिंग और विकास लक्ष्य

Skydo ने हाल ही में $10 मिलियन की Series A फंडिंग जुटाई है, जिसका नेतृत्व Susquehanna Asia Venture Capital ने किया, और Elevation Capital ने भागीदारी की। इसके साथ कंपनी की कुल फंडिंग $20 मिलियन हो गई है। Skydo ने 2027 तक $5 बिलियन के वार्षिकीकृत भुगतान वॉल्यूम का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है—जो नियंत्रित डिजिटल निर्यात भुगतान समाधानों की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

विश्व हिंदी दिवस 2026: तारीख, इतिहास, महत्व, थीम

विश्व हिंदी दिवस हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हिंदी भाषा की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति का उत्सव मनाना और उसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है। हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान, भावनाओं, परंपराओं और सामूहिक स्मृतियों को समेटे हुए है। यह दिवस याद दिलाता है कि हिंदी आज भी दुनिया के विभिन्न देशों में लाखों लोगों को जोड़ती है और शिक्षा, कूटनीति, प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल मीडिया के साथ निरंतर विकसित हो रही है।

विश्व हिंदी दिवस 2026 की तिथि

  • तिथि: 10 जनवरी 2026 (शनिवार)
  • यह दिवस हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार हेतु विश्वभर में मनाया जाता है।

विश्व हिंदी दिवस 2026 की थीम

  • फिलहाल आधिकारिक थीम घोषित नहीं की गई है।
  • सामान्यतः थीम हिंदी की वैश्विक भूमिका, सांस्कृतिक गौरव और अंतरराष्ट्रीय संवाद में उसके महत्व को दर्शाती है।

विश्व हिंदी दिवस का इतिहास

  • विश्व हिंदी दिवस पहली बार 10 जनवरी 2006 को मनाया गया, जब प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का कार्यकाल था।
  • यह तिथि 10 जनवरी 1949 से जुड़ी है, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पहली बार हिंदी का प्रयोग किया गया।
  • हिंदी के वैश्विक प्रचार के लिए भारत सरकार 1975 से विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित कर रही है, जिनका आयोजन यूके, मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, अमेरिका जैसे देशों में हुआ है।

विश्व हिंदी दिवस का महत्व

  • हिंदी विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है, जिसके 600 मिलियन से अधिक वक्ता हैं।

यह दिवस निम्न क्षेत्रों में हिंदी के उपयोग को प्रोत्साहित करता है:

  • अंतरराष्ट्रीय कूटनीति
  • शिक्षा एवं शोध
  • साहित्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
  • प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्लेटफॉर्म

साथ ही, यह भाषाई विविधता को सशक्त करता है और भारत की सांस्कृतिक विरासत को भविष्य की पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने में सहायक है।

 

ऑस्कर 2026: 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स में बेस्ट पिक्चर के लिए पांच भारतीय फिल्में क्वालीफाई

98वें अकादमी पुरस्कार, जिन्हें ऑस्कर 2026 के नाम से भी जाना जाता है, में पाँच भारतीय फ़िल्मों को प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म (Best Picture) श्रेणी के लिए पात्र माना गया है। एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज़ (AMPAS) ने सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के लिए योग्य 201 फीचर फ़िल्मों की सूची जारी की है, जबकि सभी श्रेणियों को मिलाकर कुल 317 फ़िल्में पात्र हैं। यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा की बढ़ती पहचान को दर्शाती है और फ़िल्म निर्माताओं व दर्शकों—दोनों के लिए गर्व का क्षण है।

ऑस्कर 2026: सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म श्रेणी में पात्र भारतीय फ़िल्में

सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के लिए विचाराधीन भारतीय फ़िल्में निम्नलिखित हैं:

  • कांतारा: अ लेजेंड – चैप्टर 1 (कन्नड़) – निर्देशक: ऋषभ शेट्टी
  • तन्वी द ग्रेट (हिंदी) – निर्देशक: अनुपम खेर
  • महावतार नरसिंह – बहुभाषी एनिमेटेड फ़ीचर फ़िल्म
  • टूरिस्ट फ़ैमिली (तमिल) – निर्देशक: अभिषान जीविन्थ (डेब्यू फ़िल्म)
  • सिस्टर मिडनाइट – हिंदी–यूके सह-निर्मित फ़िल्म, मुख्य भूमिका: राधिका आप्टे

अन्य श्रेणियों में पात्र भारतीय फ़िल्में

सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के अलावा, अन्य श्रेणियों में भी कई भारतीय फ़िल्में पात्र हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • होमबाउंड – निर्देशक: नीरज घायवान (भारत की आधिकारिक इंटरनेशनल फ़ीचर फ़िल्म प्रविष्टि)
  • दशावतार (मराठी)
  • गेवी (तमिल)
  • ह्यूमन्स इन द लूप
  • महामंत्र – द ग्रेट चैंट
  • पापा बुका (भारत–पापुआ न्यू गिनी सह-निर्माण)
  • पेपर फ़्लावर्स
  • पारो: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ ब्राइड स्लेवरी

ऑस्कर 2026 की पात्रता शर्तें 

सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म श्रेणी के लिए पात्र होने हेतु फ़िल्मों को निम्न शर्तें पूरी करनी होती हैं:

  • वर्ष 2025 के दौरान अमेरिका के कम-से-कम 10 सिनेमाघरों में 45 दिनों तक प्रदर्शन
  • RAISE (Representation and Inclusion Standards Entry) फ़ॉर्म जमा करना
  • AMPAS द्वारा तय चार में से कम-से-कम दो समावेशन मानकों को पूरा करना
  • इन नियमों का उद्देश्य विविधता, प्रतिनिधित्व और समावेशन को बढ़ावा देना है।

ऑस्कर 2026: महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • नामांकन मतदान: 12–16 जनवरी 2026
  • नामांकन घोषणा: 22 जनवरी 2026
  • पुरस्कार समारोह: 15 मार्च 2026
  • स्थान: डॉल्बी थिएटर, लॉस एंजिल्स, कैलिफ़ोर्निया (USA)

AMPAS के बारे में (स्थिर सामान्य ज्ञान)

  • पूरा नाम: एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज (AMPAS)
  • अध्यक्ष: लिनेट हॉवेल टेलर
  • मुख्यालय: बेवर्ली हिल्स, कैलिफ़ोर्निया, USA
  • स्थापना: 1927
  • AMPAS विश्व स्तर पर सिनेमा में उत्कृष्टता को मान्यता देने वाली संस्था है और ऑस्कर पुरस्कारों का आयोजन करती है।

मिशन सुदर्शन चक्र: भारत के ड्रोन डिफेंस को मज़बूत बनाना

भारत ने उभरते हवाई खतरों, विशेषकर शत्रुतापूर्ण ड्रोन से निपटने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र की शुरुआत की है। यह एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश के लिए समग्र, बहुस्तरीय वायु रक्षा कवच तैयार करना है। यह पहल आधुनिक युद्ध में मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) की बढ़ती भूमिका और पाकिस्तान से लगी संवेदनशील सीमाओं पर बढ़ते ड्रोन खतरों के मद्देनज़र भारत की रक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।

बढ़ता ड्रोन खतरा और रणनीतिक आवश्यकता

हाल के वर्षों में ड्रोन कम लागत लेकिन उच्च प्रभाव वाले असममित हथियार के रूप में उभरे हैं। इनका उपयोग—

  • निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने
  • हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी
  • सैन्य व नागरिक लक्ष्यों पर सटीक हमलों के लिए किया जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन तैनाती के प्रयासों और रूस–यूक्रेन संघर्ष में उनके व्यापक इस्तेमाल ने इनके विघटनकारी प्रभाव को उजागर किया है। भारत में भी सीमा पार ड्रोन घुसपैठ की घटनाओं में तेज़ वृद्धि हुई है, जिससे छोटे और नीची उड़ान भरने वाले लक्ष्यों के विरुद्ध पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों की सीमाएँ स्पष्ट हुईं। ऐसे में विशेष काउंटर-ड्रोन आर्किटेक्चर अब रणनीतिक आवश्यकता बन गया है।

मिशन सुदर्शन चक्र और वायु रक्षा आधुनिकीकरण

मिशन सुदर्शन चक्र का लक्ष्य एकीकृत वायु रक्षा ढांचा स्थापित करना है, जो—

  • लड़ाकू विमान
  • मिसाइल
  • मानवरहित हवाई प्रणालियाँ (ड्रोन) जैसे खतरों का सामना कर सके।

इस कार्यक्रम को 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य है और यह इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) जैसी मौजूदा व्यवस्थाओं का पूरक होगा। पहल का केंद्र लेयर्ड डिफेंस है—जिसमें लंबी दूरी की अवरोधन प्रणालियों के साथ अल्प दूरी और बिंदु-रक्षा समाधान शामिल होंगे। यह भारत के प्लेटफ़ॉर्म-केंद्रित दृष्टिकोण से नेटवर्क-केंद्रित व खतरा-विशिष्ट वायु रक्षा योजना की ओर संक्रमण को दर्शाता है।

संयुक्त काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (CUAS) ग्रिड

मिशन सुदर्शन चक्र के समानांतर, भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर एक संयुक्त CUAS ग्रिड विकसित कर रही हैं।

मुख्य विशेषताएँ

  • सेंसर, कमांड सेंटर और प्रतिक्रिया इकाइयों का एकीकरण
  • संयुक्त वायु रक्षा केंद्रों की स्थापना
  • तीनों सेनाओं के बीच रियल-टाइम डेटा साझा करना
  • तेज़ पहचान, आकलन और समन्वित प्रतिक्रिया

यह ग्रिड सीमाओं, तटरेखाओं और महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को मजबूत करेगा।

सॉफ्ट-किल और हार्ड-किल उपाय

मिशन सुदर्शन चक्र के तहत भारत की काउंटर-ड्रोन रणनीति दोहरी पद्धति पर आधारित है—

सॉफ्ट-किल उपाय (बिना भौतिक विनाश):

  • इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम
  • संचार संकेत बाधित करना
  • GNSS (सैटेलाइट नेविगेशन) जैमिंग

हार्ड-किल उपाय (भौतिक निष्क्रियता):

  • डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स
  • लेज़र आधारित प्रणालियाँ
  • पॉइंट-डिफेंस गन और काइनेटिक इंटरसेप्टर

सॉफ्ट-किल और हार्ड-किल का यह संयोजन लचीलापन, स्केलेबिलिटी और प्रभावशीलता सुनिश्चित करता है, जिससे विविध ड्रोन खतरों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया जा सके।

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिए ‘आशा वैन’ मोबाइल यूनिट लॉन्च की

गुजरात ने निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘आशा वैन’ नामक मोबाइल कैंसर स्क्रीनिंग यूनिट की शुरुआत की है। इस विशेष चिकित्सा वैन का उद्घाटन मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में किया। यह वैन विशेष रूप से गांवों और दूरदराज़ के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने के लिए तैयार की गई है, जहाँ उन्नत चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच सीमित होती है। इसका मुख्य उद्देश्य कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाना है, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके और जान बचाई जा सके।

कैंसर से लड़ाई में प्रारंभिक निदान बेहद अहम होता है। ‘आशा वैन’ के माध्यम से लोगों को अब बुनियादी जांच के लिए शहरों तक लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी—सेवा सीधे उनके द्वार तक पहुंचेगी।

‘आशा वैन’ क्या है?

‘आशा वैन’ एक पूरी तरह सुसज्जित मोबाइल मेडिकल यूनिट है, जो पहियों पर चलते-फिरते छोटे अस्पताल की तरह काम करती है। यह राज्य के किसी भी हिस्से में जाकर ग्रामीण, आदिवासी और वंचित समुदायों को सेवाएं प्रदान कर सकती है। यह यूनिट कई गंभीर बीमारियों, विशेषकर विभिन्न प्रकार के कैंसर के संकेतों की पहचान करने में सक्षम है। मौके पर ही जांच और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर यह निदान में देरी को कम करती है और उपचार की सफलता की संभावना बढ़ाती है।

पहियों पर उन्नत चिकित्सा तकनीक

‘आशा वैन’ में आधुनिक चिकित्सा उपकरण लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • EVA-Pro डायग्नोस्टिक तकनीक
  • डिजिटल मैमोग्राफी मशीन
  • टेली-कंसल्टेशन सुविधा (विशेषज्ञ सलाह के लिए)

इन उपकरणों की मदद से फेफड़े, मुख, रक्त, गर्भाशय ग्रीवा, अग्न्याशय, यकृत, स्तन और प्रोस्टेट सहित कई जानलेवा कैंसरों की जांच संभव है। मरीजों को तुरंत प्रारंभिक रिपोर्ट और चिकित्सकीय सलाह मिल जाती है, जो शुरुआती देखभाल के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ा सहारा

‘आशा वैन’ का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह शहरों से दूर बसे क्षेत्रों तक पहुंच बनाती है। दूरी, खर्च और जागरूकता की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर जांच टाल देते हैं—यह पहल उन बाधाओं को दूर करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समय पर पहचान जीवन बचा सकती है और मरीजों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद कर सकती है। यह परियोजना “स्वास्थ्य और कल्याण सबके लिए” के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।

भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी की भूमिका

उद्घाटन के बाद ‘आशा वैन’ को भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी की भावनगर शाखा को सौंपा गया, जो इसे जनसेवा के लिए संचालित करेगी। यह वैन दस तक प्रकार के कैंसर की जांच कर सकती है और अधिकतम कवरेज सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में भेजी जाएगी। लॉन्च के दौरान स्वास्थ्य भागीदारों और रेड क्रॉस अधिकारियों की उपस्थिति ने इस पहल की सहयोगात्मक भावना को दर्शाया।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव

मुख्यमंत्री ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कैंसर की शुरुआती पहचान अब अधिक प्रभावी हो गई है। ‘आशा वैन’ जैसी मोबाइल यूनिट्स उन क्षेत्रों में स्क्रीनिंग का विस्तार करेंगी जहाँ अस्पताल आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। गांवों तक उन्नत जांच सुविधाएं पहुंचाकर यह पहल जागरूकता बढ़ाएगी, नियमित स्वास्थ्य जांच को प्रोत्साहित करेगी और देर से पकड़े जाने वाले कैंसर मामलों का बोझ कम करेगी। दीर्घकाल में, ‘आशा वैन’ गुजरात को अधिक स्वस्थ और सुदृढ़ बनाने में एक सशक्त साधन सिद्ध होगी।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भारतीय भाषाओं पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित भारतीय भाषाओं पर तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में विद्वानों, भाषा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण, अध्ययन और वैश्विक प्रचार पर विचार-विमर्श किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, लोकतंत्र और ज्ञान की आधारशिला है।

भाषा — मानव सभ्यता की आत्मा

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने भाषा को “सभ्यता की अंतरात्मा” बताया। उन्होंने कहा कि भाषाएँ इतिहास, विचार, मूल्य और परंपराएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाती हैं। प्राचीन शिलालेखों और ताड़पत्र पांडुलिपियों से लेकर आधुनिक डिजिटल लेखन तक, भाषाओं ने विज्ञान, दर्शन, साहित्य और नैतिक शिक्षाओं को संरक्षित रखा है। उन्होंने चेन्नई में सिद्धा दिवस के अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि ताड़पत्र पांडुलिपियों के माध्यम से भारत की ज्ञान परंपराएँ सदियों से जीवित हैं।

भाषाई विविधता में निहित है भारत की शक्ति

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की बहुभाषिकता ने देश को कमजोर नहीं, बल्कि और अधिक एकजुट बनाया है। भारतीय भाषाओं ने चिकित्सा, विज्ञान, प्रशासन, अध्यात्म और दर्शन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्होंने यह भी देखा कि अब अधिक सांसद अपनी मातृभाषा में बोलते हैं, जो भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है।

संविधान और सभी भाषाओं का सम्मान

उन्होंने स्मरण कराया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में संविधान का संथाली भाषा में अनुवादित संस्करण जारी किया—यह भाषाई समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उपराष्ट्रपति ने बताया कि संविधान की आठवीं अनुसूची कई भारतीय भाषाओं को मान्यता और संरक्षण देती है। सच्ची राष्ट्रीय एकता समानता थोपने से नहीं, बल्कि विविधताओं के सम्मान से बनती है।

भाषाओं के संरक्षण में शिक्षा और तकनीक की भूमिका

उपराष्ट्रपति ने विश्वभर में कई स्वदेशी भाषाओं पर मंडरा रहे संकट की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शोध, प्रलेखन और पांडुलिपियों के संरक्षण में सहयोग को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और ज्ञान भारतम् मिशन जैसे सरकारी प्रयासों का उल्लेख किया, जो बहुभाषी शिक्षा और भाषाई धरोहर के संरक्षण को प्रोत्साहित करते हैं। साथ ही, डिजिटल अभिलेखागार, एआई आधारित अनुवाद उपकरण और बहुभाषी ऑनलाइन मंचों के उपयोग का समर्थन किया।

परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • आठवीं अनुसूची भारत की भाषाई विविधता को मान्यता देती है।
  • संथाली आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से एक है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देती है।
  • ताड़पत्र पांडुलिपियाँ प्राचीन भारतीय ज्ञान का संरक्षण करती हैं।
  • डिजिटल तकनीक और एआई भाषाओं के संरक्षण व प्रचार में सहायक हैं।

भारत की वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान: UN

संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UN-DESA) ने जनवरी 2026 में अपनी प्रमुख रिपोर्ट “वर्ल्ड इकोनॉमिक सिचुएशन एंड प्रॉस्पेक्ट्स (WESP) 2026” जारी की। इस रिपोर्ट में कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान लगाया गया है, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। हालांकि यह अनुमान वर्ष 2025 की अनुमानित 7.4% वृद्धि से थोड़ा कम है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार 2027 में वृद्धि दर के 6.7% तक मामूली सुधार की संभावना जताई गई है।

रिपोर्ट विवरण (परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु)

  • क्या? UN-DESA ने वर्ष 2026 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.6% और 2027 में 6.7% रहने का अनुमान लगाया है।
  • रिपोर्ट का नाम: World Economic Situation and Prospects (WESP) 2026
  • भारत की स्थिति: वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की उम्मीद।

भारत की वृद्धि क्यों बनी रहेगी मज़बूत?

रिपोर्ट के अनुसार भारत की आर्थिक मजबूती को निम्नलिखित कारक सहारा देंगे:

  • घरेलू उपभोग की मजबूत और लचीली स्थिति
  • सार्वजनिक निवेश में निरंतर मजबूती
  • कर सुधारों और मौद्रिक सहजता (Monetary Easing) से मिलने वाला समर्थन
  • ये तत्व भारत को वैश्विक व्यापार तनावों और नीतिगत अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगे।

वैश्विक वृद्धि परिदृश्य (2026)

  • 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि: 2.7%
  • 2025 का अनुमान: 2.8%
  • 2027 का अनुमान: 2.9%

इससे पता चलता है कि दुनिया की इकॉनमी अभी भी बढ़ रही है, लेकिन ग्लोबल अस्थिरता और ट्रेड से जुड़ी चिंताओं की वजह से धीमी गति से।

वैश्विक व्यापार अनुमान 

रिपोर्ट में वैश्विक व्यापार की गति कमजोर पड़ने की चेतावनी दी गई है:

  • 2026 में वैश्विक व्यापार वृद्धि: 2.2%
  • 2025 में वैश्विक व्यापार वृद्धि: 3.8%

धीमी वैश्विक व्यापार वृद्धि से निर्यात, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

भारत के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 

  • भारत में मुद्रास्फीति (2025): 4.1%

यह संकेत देता है कि महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रहने की संभावना है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए सकारात्मक है।

IMF से तुलना 

UN-DESA के अनुमान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के दृष्टिकोण से मेल खाते हैं:

  • 2025–26 के दौरान भारत 6% से अधिक की वृद्धि दर्ज करने वाली एकमात्र प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है।

UN-DESA के बारे में 

  • पूरा नाम: संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक कार्य विभाग (UN-DESA)
  • अवर महासचिव (Under-Secretary-General): ली जुनहुआ (Li Junhua)
  • मुख्यालय: न्यूयॉर्क, अमेरिका
  • स्थापना वर्ष: 1948

 

वित्त वर्ष 2025-26 में 7.5% रह सकती है भारत की आर्थिक वृद्धि दर: SBI Report

भारत की आर्थिक वृद्धि संभावनाओं को एक सकारात्मक संकेत मिला है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025–26 (FY26) में भारत की GDP वृद्धि दर 7.5% रह सकती है, जिसमें ऊर्ध्वगामी रुझान (upward bias) की संभावना भी जताई गई है। यह अनुमान 7 जनवरी 2026 को जारी की गई SBI की प्रसिद्ध ‘इकोरैप (Ecowrap)’ रिपोर्ट में प्रकाशित किया गया।

विशेष रूप से, SBI का यह अनुमान राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी प्रथम अग्रिम अनुमान (7.4%) से थोड़ा अधिक है और साथ ही भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 7.3% के अनुमान से भी ऊपर है। इस कारण यह रिपोर्ट UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण समसामयिक विषय बन गई है।

परीक्षा उपयोगी संकेत (त्वरित पुनरावृत्ति)

क्या? SBI ने FY 2025–26 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 7.5% रहने का अनुमान लगाया है।

किसके द्वारा? स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) – आर्थिक अनुसंधान विभाग

रिपोर्ट का नाम: इकोरैप (Ecowrap) रिपोर्ट

NSO का अनुमान: 7.4% (प्रथम अग्रिम अनुमान)

RBI का अनुमान: 7.3%

SBI का अनुमान क्यों महत्वपूर्ण है?

SBI की रिपोर्ट में एक अहम विश्लेषण सामने रखा गया है कि आमतौर पर RBI के अनुमान और NSO के अग्रिम अनुमान के बीच का अंतर 20–30 बेसिस प्वाइंट (bps) के भीतर ही रहता है।

मुख्य निष्कर्ष:

SBI के अनुसार, FY26 के लिए NSO का 7.4% अनुमान अपेक्षित और तार्किक है, और इसी कारण SBI का 7.5% पूर्वानुमान सामान्य विचलन सीमा के भीतर पूरी तरह फिट बैठता है।

यह विश्लेषण GDP वृद्धि अनुमान की विश्वसनीयता को मज़बूत करता है और भारत की अर्थव्यवस्था में लगातार गति (economic momentum) बने रहने का संकेत देता है।

भारत GDP अवलोकन (FY 2025–26)

वास्तविक GDP (Real GDP) अनुमान – NSO के अनुसार

  • वास्तविक GDP: ₹201.90 लाख करोड़
  • वृद्धि दर: 7.4% (FY26)

यह आंकड़ा महंगाई के प्रभाव को हटाकर अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों में मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है।

नाममात्र GDP (Nominal GDP) का अनुमान

(महंगाई के प्रभाव सहित)

  • नाममात्र GDP वृद्धि दर: 8.0%
  • नाममात्र GDP मूल्य: ₹357.13 – ₹357.14 लाख करोड़

नाममात्र GDP क्यों महत्वपूर्ण है?

नाममात्र GDP का सीधा उपयोग सरकार द्वारा किया जाता है:

  • बजट निर्माण में
  • कर राजस्व के अनुमान में
  • राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) की गणना में
  • आर्थिक नीतियों और योजना निर्माण में

इसलिए FY26 में नाममात्र GDP में अपेक्षाकृत तेज़ वृद्धि सरकारी वित्तीय प्रबंधन के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

तुलना: एसबीआई बनाम एनएसओ बनाम आरबीआई

संस्था FY26 जीडीपी विकास अनुमान
एसबीआई (इकोव्रैप रिपोर्ट) 7.5%
एनएसओ (पहला अग्रिम अनुमान) 7.4%
आरबीआई 7.3%

यह तुलना एग्जाम MCQs और इंटरव्यू डिस्कशन के लिए बहुत उपयोगी है।

पीआईबी ने अरुणाचल प्रदेश में कमला हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी

भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अरुणाचल प्रदेश की कमला जलविद्युत परियोजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हाल ही में सार्वजनिक निवेश बोर्ड (Public Investment Board) द्वारा स्वीकृत यह बड़ी जलविद्युत परियोजना न केवल नवीकरणीय बिजली उत्पादन में सहायक होगी, बल्कि बाढ़ नियंत्रण, रोज़गार सृजन और भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने में भी योगदान देगी।

परियोजना का स्थान और संक्षिप्त विवरण

कमला जलविद्युत परियोजना, जिसे पहले सुबनसिरी मिडिल जलविद्युत परियोजना के नाम से जाना जाता था, अरुणाचल प्रदेश की कमला नदी पर स्थित है। यह परियोजना कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिलों में विकसित की जा रही है।

यह एक भंडारण आधारित (स्टोरेज-बेस्ड) जलविद्युत योजना है, जिसमें बाढ़ शमन (Flood Moderation) की एकीकृत व्यवस्था भी शामिल है। परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 6,870 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड को मजबूती मिलेगी।

तकनीकी विशेषताएँ और निर्माण

कमला जलविद्युत परियोजना में 216 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रैविटी बाँध तथा एक भूमिगत पावरहाउस का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना को 96 महीनों (लगभग 8 वर्ष) में पूरा करने की योजना है। बिजली उत्पादन के साथ-साथ इसकी भंडारण प्रणाली नदी के प्रवाह को नियंत्रित करेगी और विशेष रूप से ब्रह्मपुत्र घाटी के निचले क्षेत्रों को मौसमी बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करेगी, जहाँ हर वर्ष बाढ़ की गंभीर समस्या रहती है।

निवेश और वित्तीय संरचना

कमला परियोजना को बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इसमें NHPC की 74% इक्विटी हिस्सेदारी होगी, जबकि अरुणाचल प्रदेश सरकार 26% हिस्सेदारी रखेगी। परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹26,070 करोड़ है, जिसमें 70:30 का ऋण-इक्विटी अनुपात अपनाया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से ₹1,340 करोड़ अवसंरचना सहायता तथा ₹4,744 करोड़ बाढ़ शमन के लिए दिए जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा GST की प्रतिपूर्ति की जाएगी। परियोजना की स्तरीकृत (लेवलाइज़्ड) टैरिफ ₹5.97 प्रति यूनिट अनुमानित है।

रोज़गार और क्षेत्रीय लाभ

परियोजना के निर्माण चरण के दौरान लगभग 300 प्रत्यक्ष रोज़गार और 2,500 संविदा आधारित रोज़गार सृजित होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना दूरस्थ जिलों में आधारभूत संरचना के विकास, पूर्वोत्तर क्षेत्र में विद्युत ग्रिड की स्थिरता और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी।

भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान

परियोजना के पूर्ण होने के बाद कमला जलविद्युत परियोजना स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और बाढ़ प्रबंधन के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाएगी और भारत को 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाएगी।

परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य (Key Facts for Exams)

  • स्थापित क्षमता: 1,720 मेगावाट
  • प्रकार: भंडारण आधारित जलविद्युत परियोजना (बाढ़ नियंत्रण सहित)
  • स्थान: कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिले, अरुणाचल प्रदेश
  • हिस्सेदारी: NHPC – 74%, अरुणाचल प्रदेश सरकार – 26%

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