भारत का कृषि क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहाँ अब केवल पारंपरिक उर्वरक ही नहीं, बल्कि मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) और सतत कृषि इनपुट भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसी पृष्ठभूमि में फरवरी 2026 की शुरुआत में मुंबई एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की मेज़बानी करेगा। नेशनल क्रॉप न्यूट्रिशन समिट का उद्देश्य नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और शोधकर्ताओं को एक साझा मंच पर लाना है। इसका मुख्य फोकस यह है कि भारत बढ़ती फसल पोषण आवश्यकताओं को कैसे पूरा करे और साथ ही स्वयं को वैश्विक एग्री-इनपुट विनिर्माण केंद्र के रूप में कैसे स्थापित करे।
नेशनल क्रॉप न्यूट्रिशन समिट के बारे में
- यह दो दिवसीय शिखर सम्मेलन इंडियन माइक्रो-फर्टिलाइजर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IMMA) द्वारा आयोजित किया जाएगा।
- आयोजन स्थल होगा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) परिसर, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, मुंबई।
- यह इस सम्मेलन का छठा संस्करण है और इसकी थीम है – “Converge, Collaborate & Co-create” (एकजुट हों, सहयोग करें और सह-निर्माण करें)।
- सम्मेलन में नीति, विज्ञान, उद्योग और नवाचार के संगम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो भारतीय कृषि की बदलती जरूरतों को दर्शाता है।
सम्मेलन के प्रमुख फोकस क्षेत्र
- सम्मेलन में सूक्ष्म पोषक तत्वों, विशेष उर्वरकों (Specialty Fertilizers) और जैविक इनपुट्स पर चर्चा होगी, जिनकी मांग मृदा पोषक तत्वों की कमी और बदलती कृषि पद्धतियों के कारण तेजी से बढ़ रही है।
- विचार-विमर्श के विषयों में प्रिसिजन न्यूट्रिशन, सतत इनपुट उपयोग, नियामक सुधार और घरेलू विनिर्माण के विस्तार के अवसर शामिल होंगे।
- भारत को वैश्विक एग्री-इनपुट निर्यात में प्रतिस्पर्धी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों की उत्पादकता और मृदा स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो।
उद्घाटन और सरकारी भागीदारी
- सम्मेलन का उद्घाटन जयकुमार जितेंद्रसिंह रावल, विपणन एवं प्रोटोकॉल मंत्री, महाराष्ट्र सरकार द्वारा किया जाएगा।
- विशिष्ट अतिथि के रूप में पी. के. सिंह, भारत सरकार के कृषि आयुक्त, सरकार की एग्री-इनपुट सुधारों से जुड़ी दृष्टि प्रस्तुत करेंगे।
- उनका संबोधन विशेष उर्वरकों, जैविक इनपुट्स, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और एग्री-इनपुट्स के निर्यात में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित होगा।
फसल पोषण का महत्व क्यों बढ़ रहा है?
- भारत का फसल पोषण बाज़ार तेज़ी से बदल रहा है। पारंपरिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से कई क्षेत्रों में मृदा क्षरण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी देखने को मिली है।
- इसके परिणामस्वरूप किसान अब माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, बायो-फर्टिलाइज़र और पुनर्योजी (Regenerative) इनपुट्स को तेजी से अपना रहे हैं।
- ये इनपुट न केवल पैदावार बढ़ाते हैं, बल्कि दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाते हैं। यह सम्मेलन नीति और उद्योग के प्रयासों को इन्हीं बदलती ज़मीनी वास्तविकताओं के अनुरूप जोड़ने का प्रयास करेगा।


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