केरल ने विज्ञान आधारित एक अनोखा कदम उठाते हुए पहली बार किसी सूक्ष्मजीव को अपनी राज्य पहचान का हिस्सा बनाया है। यह पहल मानव स्वास्थ्य से लेकर कृषि और पर्यावरणीय स्थिरता तक, दैनिक जीवन में सूक्ष्मजीवों की भूमिका को रेखांकित करती है। इस तरह का निर्णय भारत में पहली बार लिया गया है, जो ज्ञान और अनुसंधान के प्रति केरल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
क्यों चर्चा में है?
केरल ने आधिकारिक रूप से बैसिलस सब्टिलिस (Bacillus subtilis) को अपना राज्य सूक्ष्मजीव (State Microbe) घोषित किया है। ऐसा करने वाला केरल भारत का पहला राज्य बन गया है।
Bacillus subtilis क्या है?
- Bacillus subtilis एक लाभकारी प्रोबायोटिक जीवाणु है, जो मिट्टी, किण्वित (fermented) खाद्य पदार्थों और मानव आंत में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
- यह आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने और पौधों की बीमारियों को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है।
- अपनी उच्च सहनशीलता और बीजाणु (spore) बनाने की क्षमता के कारण इसका उपयोग औषधि उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और सतत कृषि में व्यापक रूप से किया जाता है।
- इसे राज्य सूक्ष्मजीव के रूप में मान्यता देना मानव कल्याण और पारिस्थितिक संतुलन में सूक्ष्मजीवों के मूक लेकिन महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करता है।
आधिकारिक घोषणा और ऐतिहासिक पहल
- यह घोषणा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में की।
- इस निर्णय के साथ केरल ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई मिसाल कायम की है, जहाँ पहली बार किसी सूक्ष्मजीव को औपचारिक मान्यता दी गई है।
- यह पहल पारंपरिक प्रतीकों (जैसे पशु या पक्षी) से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और ज्ञान-आधारित पहचान को अपनाने का संकेत देती है, जो केरल की शिक्षा और अनुसंधान परंपरा के अनुरूप है।
माइक्रोबायोम में उत्कृष्टता केंद्र
- इस घोषणा के साथ ही माइक्रोबायोम में उत्कृष्टता केंद्र (CoEM) की भी शुरुआत की गई।
- यह केंद्र मानव स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन और पर्यावरण संरक्षण पर सूक्ष्मजीवों के प्रभावों का अध्ययन करेगा।
- राज्य सरकार के अनुसार, Bacillus subtilis रोग नियंत्रण और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और इससे विकसित उत्पाद केरल के लिए उच्च मूल्य वाली आर्थिक संपत्ति बन सकते हैं।
संस्थागत ढांचा
- CoEM, केरल राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के अंतर्गत कार्य करेगा और केरल विकास एवं नवाचार रणनीतिक परिषद के सहयोग से संचालित होगा।
- यह भारत का पहला संस्थान है, जो विभिन्न क्षेत्रों में माइक्रोबायोम आधारित अनुप्रयुक्त अनुसंधान को एक ही मंच पर एकीकृत करता है।
- इससे प्रयोगशाला आधारित शोध और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच की दूरी कम होने की उम्मीद है।
माइक्रोबायोम अनुसंधान का महत्व
- माइक्रोबायोम अनुसंधान सूक्ष्मजीवों और उनके परिवेश, विशेषकर मानव शरीर, के बीच संबंधों को समझने पर केंद्रित होता है।
- इसका वैश्विक महत्व एंटीबायोटिक प्रतिरोध, जीवनशैली जनित रोगों, मिट्टी के क्षरण और जलवायु तनाव जैसी चुनौतियों से निपटने में है।
- Bacillus subtilis को चुनकर केरल ने ऐसे सूक्ष्मजीव को सामने रखा है, जिसकी वैज्ञानिक मान्यता और व्यावहारिक उपयोग पहले से स्थापित हैं, जिससे यह पहल प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ उपयोगी भी बन जाती है।


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