राजेश कुमार अग्रवाल ने पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) में निदेशक का पदभार ग्रहण कर लिया है। उन्हें बिजली और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। अपने करियर के एक महत्वपूर्ण हिस्से के दौरान वे पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से जुड़े रहे हैं, जहाँ उन्होंने प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग, क्रेडिट मूल्यांकन और ऋण पोर्टफोलियो प्रबंधन जैसे विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है।
ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्रों में व्यापक अनुभव
राजेश कुमार अग्रवाल के पास 30 वर्षों से अधिक का पेशेवर अनुभव है, जिसका अधिकांश समय उन्होंने PFC में बिताया है।
उनकी विशेषज्ञता के मुख्य क्षेत्रों में शामिल हैं:
- बड़े पैमाने की बिजली परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग।
- साथ ही, क्रेडिट मूल्यांकन और जोखिम आकलन।
- लोन पोर्टफोलियो प्रबंधन का हिस्सा होना।
- उत्पादन, पारेषण और वितरण से जुड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन।
उनकी नई भूमिका में मुख्य ज़िम्मेदारियाँ
PFC में डायरेक्टर के तौर पर, अग्रवाल संगठन की वित्तीय और परिचालन रणनीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाएँगे।
मुख्य ज़िम्मेदारियाँ
- वित्तपोषण से जुड़े फ़ैसलों और उधार देने की रणनीति की देखरेख करना।
- जोखिम का आकलन और परियोजनाओं का मूल्यांकन करना।
- साथ ही, वित्तपोषित परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर नज़र रखना।
- PFC के निवेश पोर्टफ़ोलियो के दीर्घकालिक विकास में सहयोग देना।
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन के बारे में
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन भारत की एक अग्रणी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है, जो बिजली क्षेत्र पर केंद्रित है।
PFC के मुख्य कार्य
- यह बिजली उत्पादन परियोजनाओं के वित्तपोषण में सहायता करता है।
- यह पारेषण और वितरण बुनियादी ढांचे को भी सहयोग प्रदान करता है।
- यह तापीय और नवीकरणीय ऊर्जा, दोनों प्रकार की परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण करता है।
अवलोकन
- PFC भारत सरकार का एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम (NBFC) है।
- इसकी स्थापना वर्ष 1986 में विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी।
- यह भारतीय विद्युत क्षेत्र को बुनियादी ढाँचे के वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करता है।
- इसे 12 अक्टूबर 2021 को ‘महारत्न’ का दर्जा प्रदान किया गया।
- PFC BSE और NSE पर भी सूचीबद्ध है।


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