विश्व के एक कोने में उठता तूफान कभी-कभी हजारों किलोमीटर दूर बैठे देशों की चिंता बढ़ा देता है। ‘मैला’ चक्रवात भी ऐसा ही एक नाम बनकर सामने आया है, जिसकी रफ्तार और ताकत ने लोगों को चौंका दिया है। 195 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं किसी भी सिस्टम को खतरनाक बना देती हैं। फिलहाल राहत की बात यह है कि खतरा सीधे तौर पर नहीं है लेकिन मौसम के बदलते मिजाज ने यह जरूर दिखा दिया है कि प्रकृति कब करवट ले ले, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं।
दुनिया के एक कोने में उठता तूफान कभी-कभी हजारों किलोमीटर दूर बैठे देशों की चिंता बढ़ा देता है। बता दें, ‘मैला’ चक्रवात भी ऐसा ही एक नाम बनकर सामने आया है, जिसकी रफ्तार और ताकत ने लोगों को चौंका दिया है। 195 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं किसी भी सिस्टम को खतरनाक बना देती हैं। फिलहाल राहत की बात यह है कि खतरा सीधे तौर पर नहीं है लेकिन मौसम के बदलते रुख ने यह जरूर दिखा दिया है कि प्रकृति कब करवट ले ले, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं।
भारत के मौसम पर इसका असर
चक्रवात ‘मैला’ इस समय प्रशांत महासागर के सोलोमन सागर क्षेत्र में सक्रिय है। यह ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी के बीच बना हुआ एक शक्तिशाली सिस्टम है, जिसे श्रेणी 3 या 4 का चक्रवात माना जा रहा है। इसके आसपास हवाओं की रफ्तार लगभग 195 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। हालांकि यह भारत से हजारों किलोमीटर दूर है, इसलिए इसका सीधा असर भारतीय तटों पर पड़ने की संभावना नहीं है।
भारत के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि IMD के ताजा बुलेटिन के अनुसार बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर में अगले कुछ दिनों तक किसी चक्रवात के बनने की संभावना नहीं है। इसका मतलब यह है कि भारत के समुद्री क्षेत्रों में फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं मंडरा रहा है। लेकिन मौसम पूरी तरह शांत भी नहीं है, क्योंकि अन्य स्थानीय सिस्टम सक्रिय हैं।
बता दें, 9 अप्रैल को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मौसम बदलने वाला है। यहां गरज के साथ बारिश, बिजली गिरने और 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। सबसे खास बात यह है कि इन सबके बीच लू की स्थिति भी बनी रह सकती है। हैदराबाद समेत कई जिलों में तापमान 41 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो लोगों के लिए चिंता का मुद्दा है।


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