जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत भारत के हर ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने इस मिशन की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है और इसके लिए वित्तीय प्रावधान भी बढ़ाया गया है। JJM 2.0 का मुख्य फोकस डिजिटल सुधार, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे का विकास, सामुदायिक भागीदारी और जल आपूर्ति प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने पर है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सभी घरों को सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
जल जीवन मिशन 2.0 पर महत्वपूर्ण बैठक
केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने Jal Jeevan Mission 2.0 के संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED), ग्रामीण जल आपूर्ति (RWS) और पंचायती राज विभाग के मंत्री शामिल हुए। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमन्ना भी उपस्थित रहे। बैठक में कैबिनेट द्वारा मिशन की अवधि बढ़ाने, बजट में वृद्धि और संरचनात्मक सुधारों की मंजूरी के बाद जल जीवन मिशन 2.0 के क्रियान्वयन की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की गई।
सुजल गांव आईडी का शुभारंभ: ग्रामीण जल योजनाओं की डिजिटल मैपिंग
सी. आर. पाटिल ने “सुजल गांव आईडी” की शुरुआत की, जो भारत की प्रत्येक ग्रामीण पेयजल योजना के लिए एक विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या है। यह अपनी तरह की पहली पहल है, जिसके माध्यम से देश की सभी ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों को एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है।
इस पहल के तहत:
- 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1.64 लाख सुजल गांव आईडी बनाई गई हैं।
- इन्हें लगभग 67,000 सुजलम भारत आईडी से जोड़ा गया है।
- इसमें योजना के बुनियादी ढांचे की आईडी और सेवा क्षेत्र की आईडी को एकीकृत किया गया है।
- इससे रीयल-टाइम निगरानी, पारदर्शिता और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
यह डिजिटल सुधार तकनीकी रूप से सशक्त “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समय पर कार्य पूर्ण करने और गुणवत्ता पर जोर
सी. आर. पाटिल ने राज्यों से अपील की कि वे जल योजनाओं को समय पर पूरा करें, जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत करें और किसी भी प्रकार की तकनीकी कमियों से बचें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी परियोजना में अनावश्यक खर्च या मानकों का उल्लंघन होता है, तो उसकी जिम्मेदारी राज्यों को ही उठानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी की गुणवत्ता जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही कार्य की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है, इसलिए राज्यों को स्वीकृत तकनीकी मानकों का पालन करते हुए ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करनी चाहिए।
पंचायती राज और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका
जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण, जल स्रोतों की स्थिरता और संचालन व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायती राज संस्थाओं को परिसंपत्ति प्रबंधन में सशक्त बनाना आवश्यक है।
Jal Jeevan Mission 2.0 के तहत जन भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जल अर्पण और जल उत्सव जैसे कार्यक्रम जारी रहेंगे। इन पहलों से कई सामाजिक-आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है, जैसे:
- महिलाओं के श्रम में कमी
- जन स्वास्थ्य में सुधार
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन
- वर्ष 2028 तक सभी घरों तक नल से जल की उपलब्धता
मिशन संचालन और डिजिटल सुधार
अशोक के. के. मीना, सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने मिशन के प्रशासनिक और डिजिटल सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है और इसमें ग्राम पंचायत आधारित शासन व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
मुख्य कदम:
- संचालन और रखरखाव (O&M) प्रणाली को मजबूत करना
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से क्रियान्वयन
- Sujalam Bharat डिजिटल आर्किटेक्चर के माध्यम से स्रोत से नल तक मैपिंग
- जल सेवा आंकलन के जरिए गांव स्तर पर सेवा का मूल्यांकन
- Meri Panchayat ऐप के माध्यम से नागरिक निगरानी को मजबूत करना
ग्राम पंचायतें तभी ‘हर घर जल’ का प्रमाणन करेंगी जब स्थायी संचालन और रखरखाव व्यवस्था सुनिश्चित हो जाएगी।
वित्तपोषण और वित्तीय सुधार
कमल किशोर सोन, अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) ने फंड जारी करने से जुड़ी जानकारी दी।
मुख्य तथ्य:
कुल बजट ₹3.60 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹8.69 लाख करोड़ किया गया है।
केंद्र सरकार से धन तभी जारी होगा जब चार शर्तें पूरी हों:
- MoU पर हस्ताक्षर
- सुजल गांव आईडी का निर्माण
- समय पर वित्तीय समन्वय
- राज्य O&M नीति की अधिसूचना
फंड जारी करने के तरीके
- Upfront Payment Mode – गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में छोटे और गैर-PWS सिस्टम के लिए
- Reimbursement Mode – चल रही मध्यम और बड़े जल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए
- VGF Mode – PPP आधारित बड़े जल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए
इसके अलावा, पुरानी योजनाओं के पुनर्निर्माण (retrofitting) के लिए केंद्रीय फंड उपलब्ध नहीं होगा।
JJM 2.0 के प्रमुख फोकस क्षेत्र
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हुए MoU में निम्न क्षेत्रों में सुधार और जिम्मेदारियों पर जोर दिया गया है:
- नीति, संस्थागत ढांचा और शासन सुधार
- परिसंपत्तियों का स्वामित्व, प्रबंधन और तकनीकी सहायता
- योजना निर्माण, वित्तपोषण और कार्यक्रम कार्यान्वयन
- डिजिटल सिस्टम, डेटा गवर्नेंस और निगरानी
- ग्रामीण जल कार्यबल का कौशल विकास और क्षमता निर्माण
- जल गुणवत्ता की निगरानी और सर्विलांस
- संचार, सामुदायिक भागीदारी और जनविश्वास
सामुदायिक भागीदारी और जल महोत्सव
राज्यों और जिलों को जल महोत्सव गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जैसे:
- जल अर्पण और जल उत्सव का आयोजन
- जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (DWSM) की बैठकें आयोजित करना और सेवा सुधार योजनाएँ तैयार करना
- डिस्ट्रिक्ट टेक्निकल यूनिट (DTU) का गठन
- राज्य जल उत्सव कैलेंडर तैयार करना
- ग्राम पंचायत स्तर पर लोक जल उत्सव आयोजित करना
जिला मजिस्ट्रेट (DM) या जिला परिषद के CEO द्वारा कम से कम दो जल अर्पण कार्यक्रमों में भाग लेना।


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