ईरान ने मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर चुना है। ईरानी स्टेट टीवी ने यह घोषणा की है। मोजतबा इजरायली हमले में मारे गए अपने पिता अली खामेनेई की जगह इस पद को संभालेगे। अली खामेनेई की 28 फरवरी को तेहरान में इजरायल के हमले में मौत हो गई थी। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने कई बैठकों के बाद आखिरकार मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाने का फैसला लिया है। इजरायल की नए सुप्रीम लीडर को भी मार देने की धमकियों के बीच उनके नाम का ऐलान हुआ है। यह फैसला 1989 के बाद इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जा रहा है। मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि वे ईरान की राजनीतिक दिशा, क्षेत्रीय रणनीति और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को आगे तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
मोजतबा खामेनेई कौन हैं?
मोजतबा खामेनेई, 56 वर्ष के हैं और वे ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। प्रभावशाली धार्मिक-राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद मोजतबा खामेनेई ने देश की राजनीति में लंबे समय तक लो-प्रोफाइल भूमिका बनाए रखी है।
ईरान के कई अन्य राजनीतिक नेताओं के विपरीत उन्होंने कभी कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला है और न ही वे सार्वजनिक भाषणों या साक्षात्कारों में अक्सर दिखाई देते हैं। इसी कारण उनकी सार्वजनिक उपस्थिति काफी सीमित रही है।
इसके बावजूद कई कूटनीतिक रिपोर्टों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पर्दे के पीछे वे ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण प्रभाव रखते रहे हैं और सत्ता तंत्र के कई निर्णयों में उनकी अनौपचारिक भूमिका मानी जाती रही है।
मोजतबा खामेनेई : प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
मोजतबा खामेनेई का जन्म 8 सितम्बर 1969 को मशहद में हुआ था, जो उत्तर-पूर्वी ईरान का एक प्रमुख धार्मिक शहर माना जाता है। वे ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अली खामेनेई के पुत्र हैं।
उनके प्रारंभिक जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं—
- उन्होंने तेहरान के प्रतिष्ठित अलवी स्कूल में पढ़ाई की, जो कई ईरानी अभिजात वर्ग और प्रभावशाली व्यक्तियों को शिक्षा देने के लिए जाना जाता है।
- किशोरावस्था के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए ईरान-इराक युद्ध में भी सेवा की।
- इसके बाद वे धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए Qom चले गए, जो शिया इस्लामी विद्वत्ता का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
- उन्होंने अपेक्षाकृत देर से धार्मिक सेमिनरी प्रणाली में प्रवेश किया और लगभग 30 वर्ष की आयु में उन्नत धर्मशास्त्रीय प्रशिक्षण शुरू किया।
धार्मिक स्थिति और धार्मिक पद
मोजतबा खामेनेई को सामान्यतः एक मध्यम-स्तर के शिया धर्मगुरु (क्लेरिक) के रूप में माना जाता है। हाल के समय में कुछ ईरानी मीडिया और अधिकारियों ने उन्हें “आयतोल्लाह” की उपाधि से संबोधित करना शुरू किया है, जो शिया धार्मिक पदक्रम में एक उच्च धार्मिक पद माना जाता है। माना जाता है कि यह बदलाव उनकी धार्मिक वैधता को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, खासकर यदि वे देश के सर्वोच्च नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं।
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सर्वोच्च नेता बनने के लिए व्यक्ति के पास उच्च धार्मिक अधिकार, मजबूत राजनीतिक नेतृत्व क्षमता और विशेषज्ञों की सभा की मान्यता होना आवश्यक माना जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता अली खामेनेई को भी 1989 में सर्वोच्च नेता बनने के बाद “आयतोल्लाह” की उपाधि तेजी से प्रदान की गई थी, जिससे उनके धार्मिक पद और अधिकार को मजबूत किया जा सके।
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की भूमिका
ईरान की शक्तिशाली धार्मिक संस्था विशेषज्ञों की सभा सर्वोच्च नेता के चयन के लिए जिम्मेदार होती है। इसी संस्था ने औपचारिक रूप से मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति को स्वीकृति दी।
यह संस्था—
- जनता द्वारा चुने गए इस्लामी विद्वानों (उलेमा) से मिलकर बनी होती है।
- ईरान के संविधान के अनुसार सर्वोच्च नेता की नियुक्ति और उनकी निगरानी करने का अधिकार रखती है।
- यह सुनिश्चित करती है कि सर्वोच्च नेता धार्मिक और राजनीतिक दोनों योग्यताओं को पूरा करता हो।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ रही है, इसलिए ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में नेतृत्व की निरंतरता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- मोजतबा खामेनेई – 2026 में ईरान के नए सर्वोच्च नेता
- वे अली खामेनेई के पुत्र हैं
- उनका चयन विशेषज्ञों की सभा द्वारा किया गया
- पहले वे अपेक्षाकृत लो-प्रोफाइल धार्मिक नेता माने जाते थे, लेकिन उनके राजनीतिक प्रभाव की चर्चा होती रही है
- यह नेतृत्व परिवर्तन पश्चिम एशिया में चल रहे बड़े भू-राजनीतिक तनाव के बीच हुआ है।


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