वरिष्ठ पत्रकार एचके दुआ का 04 मार्च 2026 को 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली के एक निजी अस्पताल में अंतिम साँस ली, जहाँ वे पिछले तीन सप्ताह से अस्वस्थता के कारण भर्ती थे। एचके दुआ के निधन के साथ ही भारतीय पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण युग का अंत हो गया। वे अपनी तीक्ष्ण राजनीतिक विश्लेषण क्षमता और संपादकीय स्वतंत्रता के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए व्यापक रूप से जाने जाते थे।
प्रारंभिक जीवन और सार्वजनिक सेवा
एचके दुआ का जन्म 1 जुलाई 1937 को हुआ था। उन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ सार्वजनिक सेवा और कूटनीति के क्षेत्र में भी एक प्रतिष्ठित और बहुआयामी करियर बनाया।
उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें शामिल हैं—
- 2009 से 2015 तक राज्य सभा के नामित सदस्य।
- 2001 से 2003 तक डेनमार्क में भारत के राजदूत।
- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य।
- पूर्व प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी और एच. डी. देवेगौड़ा के मीडिया सलाहकार
राज्यसभा में अपने कार्यकाल के दौरान एच. के. दुआ ने विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण बहसों में सक्रिय योगदान दिया और अपनी गहरी समझ तथा विश्लेषण के लिए सम्मान प्राप्त किया।
प्रमुख समाचार पत्रों में दुर्लभ संपादकीय विरासत
एचके दुआ को भारत के प्रमुख समाचार पत्रों में संपादकीय नेतृत्व करने का एक दुर्लभ गौरव प्राप्त था। उन्होंने देश के कई प्रभावशाली मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं, जिससे भारतीय पत्रकारिता में उनकी प्रतिष्ठा और प्रभाव स्पष्ट होता है।
मुख्य संपादकीय पद
- संपादक (1987–1994) –हिंदुस्तान टाइम्स
- एडिटर-इन-चीफ (1994–1996) – इंडियन एक्सप्रेस
- संपादकीय सलाहकार (1997–1998) – द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया
- एडिटर-इन-चीफ (2003–2009) – द ट्रिब्यून
विभिन्न प्रमुख मीडिया संस्थानों में उनका नेतृत्व भारतीय पत्रकारिता में उनकी विश्वसनीयता, अनुभव और प्रभाव को दर्शाता है।
पुरस्कार और सम्मान
- पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए एचके दुआ को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
- अपने पूरे करियर के दौरान उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता और जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए लगातार आवाज उठाई, जिसके कारण उन्हें राजनीतिक और पेशेवर दोनों ही क्षेत्रों में व्यापक सम्मान मिला।


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