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दिसंबर 2025 में किस वजह से भारत का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन दो साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा?

भारत के औद्योगिक क्षेत्र ने 2025 का समापन मजबूत प्रदर्शन के साथ किया। दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि बढ़कर 7.8% पर पहुँच गई, जो पिछले दो वर्षों का उच्चतम स्तर है। यह वृद्धि विनिर्माण, खनन और बिजली—तीनों क्षेत्रों में व्यापक सुधार को दर्शाती है। हालिया आँकड़े बताते हैं कि कुछ महीनों की असमान प्रगति के बाद वास्तविक अर्थव्यवस्था में मांग की स्थिति बेहतर हुई है और नई गति आई है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) क्या है?

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) एक प्रमुख आर्थिक संकेतक है, जो औद्योगिक उत्पादन की मात्रा में अल्पकालिक बदलाव को मापता है।
  • इसे सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा संकलित और जारी किया जाता है।
  • IIP के तहत विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों के प्रदर्शन को ट्रैक किया जाता है।
  • इसमें विनिर्माण का भार सबसे अधिक होता है, इसलिए इसकी स्थिति कुल IIP वृद्धि के लिए निर्णायक होती है। मजबूत IIP आँकड़े आम तौर पर बढ़ती मांग, बेहतर क्षमता उपयोग और रोजगार की संभावनाओं में सुधार का संकेत देते हैं।

औद्योगिक उछाल में विनिर्माण की अगुवाई

  • दिसंबर में विनिर्माण उत्पादन 8.1% बढ़ा, जो औद्योगिक वृद्धि का प्रमुख चालक रहा।
  • कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पाद, मोटर वाहन, ट्रेलर व सेमी-ट्रेलर तथा अन्य परिवहन उपकरण जैसे उद्योगों में तेज विस्तार देखा गया।
  • यह वृद्धि उपभोक्ता मांग में सुधार, कुछ क्षेत्रों में स्थिर निर्यात और आपूर्ति शृंखला की बेहतर स्थिति को दर्शाती है।
  • IIP में विनिर्माण की बड़ी हिस्सेदारी के कारण इसके मजबूत प्रदर्शन ने कुल औद्योगिक उत्पादन को उल्लेखनीय बढ़ावा दिया।

खनन गतिविधियों में तेजी

  • खनन उत्पादन में 6.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जो खनिजों और कच्चे माल के अधिक उत्खनन को दर्शाती है।
  • मजबूत खनन गतिविधि इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों को समर्थन देती है।
  • यह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और विनिर्माण इकाइयों से स्थिर मांग को भी प्रतिबिंबित करती है।
  • खनन में यह बढ़त औद्योगिक विश्वास में सुधार और बड़े पैमाने के निर्माण व पूंजीगत व्यय की निरंतरता का संकेत है।

बिजली उत्पादन में तेज सुधार

  • दिसंबर में बिजली उत्पादन 6.3% बढ़ा, जबकि नवंबर में इसमें 1.5% की गिरावट दर्ज हुई थी।
  • यह उछाल औद्योगिक और वाणिज्यिक बिजली मांग में वृद्धि को दर्शाता है।
  • बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी अक्सर कारखानों की गतिविधियों में तेजी और औद्योगिक क्षमता के बेहतर उपयोग को दर्शाती है, जिससे निकट भविष्य की आर्थिक गति के लिए सकारात्मक संकेत मिलते हैं।
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