भारत में 16 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस मनाया जा रहा है, जो स्टार्टअप इंडिया पहल के 10 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है। वर्ष 2016 में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई यह नीति-आधारित पहल आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बन चुकी है। वर्तमान समय में स्टार्टअप्स भारत के आर्थिक रूपांतरण, नवाचार क्षमता और समावेशी क्षेत्रीय विकास में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।
क्यों चर्चा में है?
राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस 2026 के अवसर पर स्टार्टअप इंडिया पहल के 10 वर्ष पूरे होने का स्मरण किया जा रहा है। यह अवसर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार, विविधता और वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है, साथ ही विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्टार्टअप्स की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर करता है।
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम: आकार और विस्तार
पिछले एक दशक में स्टार्टअप्स भारत की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं। दिसंबर 2025 तक भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जिससे भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम वाले देशों में शामिल हो गया है।
हालाँकि बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े केंद्र अब भी अग्रणी हैं, लेकिन अब लगभग 50% स्टार्टअप्स टियर-II और टियर-III शहरों से उभर रहे हैं। यह उद्यमिता के लोकतंत्रीकरण और संतुलित क्षेत्रीय विकास को दर्शाता है।
आर्थिक वृद्धि में स्टार्टअप्स का महत्व
स्टार्टअप्स भारत के विकास में परिवर्तनकारी भूमिका निभाते हैं। ये:
- तकनीकी नवाचार और उत्पादकता को बढ़ावा देते हैं
- बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजित करते हैं
- वित्तीय समावेशन और डिजिटल पहुँच को सशक्त बनाते हैं
- जमीनी स्तर की उद्यमिता को प्रोत्साहित करते हैं
एग्री-टेक, टेलीमेडिसिन, माइक्रोफाइनेंस, पर्यटन और एड-टेक जैसे क्षेत्रों में समाधान प्रदान करके स्टार्टअप्स लगातार ग्रामीण-शहरी अंतर को कम कर रहे हैं और लंबे समय से चली आ रही विकासात्मक चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं।
महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स और समावेशी विकास
पिछले एक दशक की एक बड़ी उपलब्धि महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता का तेज़ी से उभरना है। दिसंबर 2025 तक, मान्यता प्राप्त 45% से अधिक स्टार्टअप्स में कम-से-कम एक महिला निदेशक या भागीदार शामिल हैं। यह दर्शाता है कि नवाचार केवल आर्थिक मूल्य ही नहीं सृजित कर रहा, बल्कि सामाजिक समानता, लैंगिक समावेशन और क्षेत्रीय संतुलित विकास को भी आगे बढ़ा रहा है।
स्टार्टअप इंडिया पहल
- स्टार्टअप इंडिया पहल, जिसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा संचालित किया जाता है, आज एक समग्र समर्थन ढाँचे के रूप में विकसित हो चुकी है।
- भारत का यूनिकॉर्न इकोसिस्टम 2014 में केवल 4 अरब-डॉलर मूल्यांकन वाली कंपनियों से बढ़कर आज 120 से अधिक तक पहुँच गया है, जिनका संयुक्त मूल्यांकन 350 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
- यह भारत की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था में वैश्विक स्तर पर बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है।
स्टार्टअप इंडिया के अंतर्गत प्रमुख फ्लैगशिप योजनाएँ
- नवाचार-आधारित उद्यमिता को तेज़ी से बढ़ावा देने के लिए DPIIT ने कई योजनाएँ और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म शुरू किए हैं।
- स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (Fund of Funds for Startups – FFS), जिसे स्मॉल इंडस्ट्रीज़ डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) द्वारा प्रबंधित किया जाता है, का कुल कोष ₹10,000 करोड़ है। इसके तहत 140+ AIFs को प्रतिबद्धता दी गई है, जिन्होंने 1,370+ स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से अधिक का निवेश किया है।
- स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS), ₹945 करोड़ के प्रावधान के साथ, शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोटोटाइपिंग और बाज़ार में प्रवेश के लिए सहायता प्रदान करती है।
- स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS) के तहत बिना जमानत ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं; अब तक ₹800 करोड़ मूल्य के 330+ ऋणों की गारंटी दी जा चुकी है।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और मेंटरशिप समर्थन
- स्टार्टअप इंडिया हब स्टार्टअप्स को निवेशकों, मेंटर्स, इनक्यूबेटर्स और सरकारी निकायों से जोड़ता है।
- स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग फ़्रेमवर्क (SRF) स्टार्टअप-अनुकूल नीतियों के आधार पर राज्यों की रैंकिंग कर प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देता है।
- MAARG मेंटरशिप पोर्टल देशभर में अनुभवी मेंटर्स तक पहुँच प्रदान करता है।
- स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल, जिसे SIDBI के साथ विकसित किया गया है, शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को एकल डिजिटल विंडो के माध्यम से कई निवेशकों तक पहुँचने में मदद करता है।
स्टार्टअप इंडिया से आगे: राष्ट्रव्यापी नवाचार समर्थन
- भारत की स्टार्टअप गति को क्षेत्र-विशिष्ट पहलों से भी मजबूती मिली है।
- अटल इनोवेशन मिशन (नीति आयोग) के तहत 733 जिलों में 10,000+ अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित की गई हैं, जिनसे 1.1 करोड़ से अधिक छात्र जुड़े हैं।
- GENESIS और MeitY स्टार्टअप हब जैसे कार्यक्रम डीप-टेक स्टार्टअप्स को समर्थन देते हैं।
- NIDHI (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग) के अंतर्गत 12,000+ स्टार्टअप्स को सहायता मिली है और 1.3 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।
ग्रामीण और जमीनी स्तर की उद्यमिता
- DAY-NRLM के अंतर्गत स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) तथा MSME मंत्रालय की ASPIRE योजना ग्रामीण उद्यमों और आजीविका सृजन पर केंद्रित हैं।
- SVEP ने अकेले जून 2025 तक 3.74 लाख ग्रामीण उद्यमों को समर्थन दिया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाएँ और स्वरोज़गार सशक्त हुए हैं।
यह दशक क्यों महत्वपूर्ण है?
- स्टार्टअप इंडिया के दस वर्ष भारत में संरचनात्मक परिवर्तन का प्रतीक हैं—जो जनसांख्यिकीय लाभ, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और निरंतर सुधारों पर आधारित है। आज स्टार्टअप्स प्राथमिक क्षेत्रों में गहराई से समाहित हैं और रोज़गार, नवाचार, निर्यात तथा वैश्विक एकीकरण को गति दे रहे हैं।
- जैसे-जैसे भारत 2030 तक $7.3 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, स्टार्टअप्स विकास और क्रियान्वयन के केंद्र में बने रहेंगे।


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