2025 में भारत–चीन व्यापार संबंधों में मिले-जुले संकेत देखने को मिले। एक ओर, वर्षों की सुस्ती के बाद भारत के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। चीनी सीमा शुल्क (कस्टम्स) द्वारा जारी ताज़ा आँकड़ों के अनुसार द्विपक्षीय व्यापार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर रहा, लेकिन चीन पर भारत की आयात निर्भरता एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनी हुई है।
क्यों चर्चा में?
जनवरी 2026 में जारी आधिकारिक चीनी सीमा शुल्क आँकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 116.12 अरब डॉलर हो गया, जबकि इसी अवधि में भारत के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई।
चीन को भारत के निर्यात का प्रदर्शन
- जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारत का चीन को निर्यात 19.75 अरब डॉलर रहा।
- यह 9.7% की वृद्धि को दर्शाता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5.5 अरब डॉलर अधिक है।
- यह बढ़ोतरी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कई वर्षों से भारत का चीन को निर्यात बाजार पहुंच की बाधाओं और कमजोर मांग के कारण प्रभावित रहा था।
- विश्लेषकों का मानना है कि यह वृद्धि भारत के निर्यात विविधीकरण और चीनी बाजार में धीरे-धीरे प्रवेश का प्रारंभिक संकेत है।
निर्यात बढ़ने के बावजूद रिकॉर्ड व्यापार घाटा
- निर्यात में सुधार के बावजूद, भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 2025 में बढ़कर 116.12 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया।
- चीन का भारत को निर्यात 12.8% बढ़कर 135.87 अरब डॉलर हो गया, जो भारत के निर्यात की वृद्धि दर से कहीं अधिक है।
- यह घाटा 2023 के बाद दूसरी बार 100 अरब डॉलर से ऊपर चला गया।
- इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन और मध्यवर्ती वस्तुओं जैसे क्षेत्रों में चीन पर अत्यधिक निर्भरता नीति-निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
द्विपक्षीय व्यापार ऐतिहासिक स्तर पर
- 2025 में भारत–चीन कुल द्विपक्षीय व्यापार 155.62 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।
- यह वृद्धि वैश्विक व्यापार बाधाओं और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बावजूद हुई।
- दोनों देशों ने बाहरी दबावों के बीच आपूर्ति शृंखला समायोजन और चीन के मजबूत विनिर्माण उत्पादन के कारण व्यापार विस्तार दर्ज किया।
- ये आँकड़े राजनीतिक और रणनीतिक तनावों के बावजूद दोनों एशियाई देशों की आर्थिक पारस्परिक निर्भरता को दर्शाते हैं।
भारत के निर्यात में वृद्धि करने वाले प्रमुख क्षेत्र
पर्यवेक्षकों के अनुसार, भारतीय निर्यात में हुई वृद्धि का प्रमुख कारण तेल-खली (ऑयल मील्स), समुद्री उत्पाद, दूरसंचार उपकरण और मसाले रहे। इन क्षेत्रों को चीनी बाजार में सीमित लेकिन महत्वपूर्ण पहुँच प्राप्त हुई, जबकि चीन स्वयं घरेलू उपभोग को बढ़ाने में चुनौतियों का सामना कर रहा है।
भारत लंबे समय से आईटी सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुँच की मांग करता रहा है, जहाँ उसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत है। हालाँकि, इन क्षेत्रों में अब तक प्रगति सीमित ही बनी हुई है।
चीन के वैश्विक व्यापार का परिप्रेक्ष्य
चीन का कुल वैश्विक व्यापार वर्ष 2025 में लगातार विस्तार करता रहा। सीमा शुल्क (कस्टम्स) के आँकड़ों के अनुसार, चीन का व्यापार अधिशेष लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें निर्यात 3.77 ट्रिलियन डॉलर और आयात 2.58 ट्रिलियन डॉलर रहा।
चीनी अधिकारियों ने निर्यात में मजबूती का श्रेय विविधीकृत व्यापारिक साझेदारों और मजबूत औद्योगिक क्षमता को दिया।
हालाँकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक मांग में कमजोरी और दुनिया भर में मौद्रिक नीति के सीमित विकल्पों के कारण 2026 में निर्यात वृद्धि की गति कुछ धीमी पड़ सकती है।


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