26 जनवरी 2026 को आयोजित 77वां गणतंत्र दिवस परेड हाल के वर्षों की सबसे आधुनिक, तकनीक-आधारित और प्रभावशाली परेडों में से एक रही। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित लगभग 90 मिनट के इस भव्य समारोह में भारत की सैन्य शक्ति, स्वदेशी रक्षा तकनीक और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस वर्ष की परेड कई ऐतिहासिक ‘पहली बार’ प्रस्तुतियों के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों और रक्षा मामलों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
गणतंत्र दिवस परेड 2026 की प्रमुख ‘पहली बार’ उपलब्धियाँ
सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की पहली झलक
परेड का सबसे बड़ा आकर्षण रहा यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (URLS) ‘सूर्यास्त्र’ का पहली बार प्रदर्शन। यह स्वदेशी डीप-स्ट्राइक रॉकेट प्रणाली 300 किलोमीटर तक सतह-से-सतह लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। इसका प्रदर्शन भारत की लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है।
भैरव लाइट कमांडो बटालियन की परेड में एंट्री
नई गठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन ने भी पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में मार्च किया। यह बटालियन नियमित पैदल सेना और विशेष बलों के बीच की ऑपरेशनल कमी को पूरा करने के लिए बनाई गई है और कठिन इलाकों में तेज़, उच्च-गतिशील अभियानों के लिए तैयार की गई है। इससे पहले इसका सार्वजनिक पदार्पण जयपुर में सेना दिवस परेड में हुआ था।
पहली बार पशु दस्ता शामिल
एक अनोखे और प्रतीकात्मक कदम के तहत इस वर्ष पशु दस्ता भी परेड का हिस्सा बना। इसमें शामिल थे:
- ऊँचाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त जांस्कर पोनी
- रेगिस्तानी अभियानों में उपयोगी बैक्ट्रियन ऊँट
- रैप्टर्स (शिकार करने वाले पक्षी)
- भारतीय सेना के डॉग्स
ये सभी कठिन इलाकों में वाहनों के सीमित उपयोग के कारण सेना के लिए फोर्स मल्टीप्लायर माने जाते हैं।
नई ‘फेज़्ड बैटल एरे’ प्रस्तुति
इस बार परेड की प्रस्तुति शैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पारंपरिक मार्चिंग के बजाय ‘फेज़्ड बैटल एरे फॉर्मेशन’ अपनाया गया, जिसमें सेना की तैनाती वास्तविक युद्ध जैसी क्रमबद्ध दिखाई गई। इसमें पहले टोही इकाइयाँ, फिर भारी हथियार, लॉजिस्टिक्स और अंत में पूर्ण युद्ध साजो-सामान के साथ सैनिक शामिल थे। इससे परेड अधिक यथार्थवादी और ऑपरेशनल बन गई।
61 कैवेलरी रेजिमेंट पहली बार युद्धक वेश में
अपनी पारंपरिक शाही वर्दी और विशिष्ट पगड़ी के लिए प्रसिद्ध 61 कैवेलरी रेजिमेंट इस बार पहली बार कॉम्बैट बैटल गियर में नजर आई। यह बदलाव परंपरा के साथ-साथ सेना की बढ़ती ऑपरेशनल तत्परता को दर्शाता है।
शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट का पदार्पण
नई गठित शक्तिबाण रेजिमेंट ने भी पहली बार परेड में भाग लिया। यह रेजिमेंट आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुसज्जित है, जिसमें शामिल हैं:
- ड्रोन
- काउंटर-ड्रोन सिस्टम
- लोइटरिंग म्यूनिशन
यह भारत के मानवरहित और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है।
परेड में प्रदर्शित उन्नत हथियार प्रणालियाँ
परेड में भारत की अत्याधुनिक रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया, जिनमें शामिल हैं:
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
- आकाश सतह-से-वायु मिसाइल प्रणाली
- MRSAM (मीडियम रेंज सतह-से-वायु मिसाइल)
- ATAGS (एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम)
- धनुष तोप
- विभिन्न सैन्य ड्रोन का स्थैतिक प्रदर्शन
ये प्रणालियाँ भारत की वायु रक्षा, आर्टिलरी आधुनिकीकरण और स्वदेशी मिसाइल विकास में हुई प्रगति को दर्शाती हैं।
भव्य वायुसेना फ्लाई-पास्ट
भारतीय वायुसेना का फ्लाई-पास्ट दो चरणों में हुआ, जिसमें 29 विमान शामिल थे:
- राफेल लड़ाकू विमान
- सुखोई-30 एमकेआई
- मिग-29
- P-8I समुद्री निगरानी विमान
- अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर
- लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH)
- एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH)
- Mi-17 हेलीकॉप्टर
- C-130 और C-295 परिवहन विमान
इन विमानों ने युद्धक संरचनाओं में उड़ान भरकर हवाई प्रभुत्व और संयुक्त सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया।
मार्चिंग दस्ते और सैन्य बैंड
परेड में 18 मार्चिंग टुकड़ियाँ और 13 सैन्य बैंड शामिल हुए, जिन्होंने अनुशासन और ऊर्जा से भरा माहौल बनाया। इसके साथ ही भारी थर्मल वर्दी में मिक्स्ड स्काउट्स दस्ता भी पहली बार शामिल हुआ, जो युवाओं की भागीदारी और समावेशिता का प्रतीक था।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
राजनयिक दृष्टि से भी यह परेड खास रही। यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और एक छोटा EU सैन्य दस्ता भी परेड में शामिल हुआ। यह भारत की बढ़ती वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों को दर्शाता है।


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