विश्व स्तर पर 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इसका विषय है – “सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय के प्रति नव-प्रतिबद्धता।” यह अवसर दूसरे विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन और दोहा राजनीतिक घोषणा को अपनाए जाने के बाद एक महत्वपूर्ण समय पर आया है। यह दिवस सरकारों और नागरिकों को याद दिलाता है कि गरीबी उन्मूलन, पूर्ण रोजगार, सम्मानजनक कार्य और सामाजिक समावेशन सतत विकास के मूल स्तंभ हैं। साथ ही, यह इस बात पर भी जोर देता है कि वैश्विक स्तर पर किए गए वादों को वास्तविक नीतिगत कार्यों में परिवर्तित करना आवश्यक है, ताकि न्यायपूर्ण और समावेशी समाज का निर्माण किया जा सके।
विश्व सामाजिक न्याय दिवस 2026 का विषय: दोहा के बाद नव-प्रतिबद्धता
वर्ष 2026 का विषय “सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय के प्रति नव-प्रतिबद्धता” प्रगति और लगातार बनी हुई चुनौतियों—दोनों को दर्शाता है। यह विषय विशेष रूप से दोहा राजनीतिक घोषणा के बाद वैश्विक प्रतिबद्धताओं को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देता है।
प्रमुख फोकस क्षेत्र
- गरीबी उन्मूलन
- पूर्ण और उत्पादक रोजगार
- सभी के लिए सम्मानजनक कार्य
- सामाजिक समावेशन और समानता
दोहा राजनीतिक घोषणा ने 1995 की कोपेनहेगन घोषणा में किए गए वादों की पुनः पुष्टि की। हालांकि, श्रम बाजार में अनौपचारिकता, लैंगिक असमानता, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल परिवर्तन और संस्थागत विश्वास में गिरावट जैसी चुनौतियाँ नीतिगत समन्वय की नई आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
राजनीतिक प्रतिबद्धता से वास्तविक क्रियान्वयन तक
वर्ष 2026 का यह दिवस केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर मापनीय परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर देता है। सदस्य देशों ने निम्नलिखित कदमों की मांग की है:
- ऐसी व्यापक आर्थिक नीतियाँ जो सम्मानजनक रोजगार और जीविका योग्य वेतन उत्पन्न करें
- सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली
- कार्यबल में लैंगिक समानता
- युवाओं के रोजगार को बढ़ावा
- अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण
- समावेशी डिजिटल और हरित अर्थव्यवस्था की ओर परिवर्तन
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए बहुपक्षीय सहयोग और बहु-हितधारक साझेदारियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की भूमिका
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने 10 जून 2008 को सामाजिक न्याय के लिए निष्पक्ष वैश्वीकरण संबंधी ILO घोषणा को अपनाया।
इस घोषणा ने:
- ‘सम्मानजनक कार्य एजेंडा’ को मजबूत किया
- 1944 की फिलाडेल्फिया घोषणा पर आधारित ढांचा विकसित किया
- वैश्वीकरण के दौर में ILO के जनादेश का विस्तार किया
- सम्मानजनक कार्य को विकास का केंद्रीय उद्देश्य बनाया
2008 की यह घोषणा आज भी वैश्विक श्रम और सामाजिक न्याय नीति का आधारभूत ढांचा बनी हुई है।
सम्मानजनक कार्य (Decent Work) क्या है?
सम्मानजनक कार्य की अवधारणा में शामिल हैं:
- उचित आय
- कार्यस्थल पर सुरक्षा
- सामाजिक सुरक्षा
- समान अवसर
- अभिव्यक्ति और भागीदारी की स्वतंत्रता
सम्मानजनक कार्य सतत विकास लक्ष्य 8 (SDG 8) का मुख्य आधार है, जिसका उद्देश्य समावेशी और सतत आर्थिक विकास तथा सभी के लिए रोजगार को बढ़ावा देना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 26 नवंबर 2007 को घोषणा की थी कि 20 फरवरी को प्रतिवर्ष विश्व सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
वर्ष 2026 में सामाजिक न्याय की स्थिति
हालांकि गरीबी में कमी और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति हुई है, फिर भी वैश्विक असमानताएँ गंभीर बनी हुई हैं।
- प्रमुख चुनौतियाँ
- बढ़ती आय असमानता
- अनौपचारिक श्रम बाजार
- लैंगिक वेतन अंतर
- जलवायु जोखिम
- डिजिटल विभाजन
- युवा बेरोजगारी
वर्ष 2026 का यह अवसर सामाजिक न्याय को जलवायु, डिजिटल, श्रम और औद्योगिक नीतियों में समाहित करने पर जोर देता है।
शांति और सुरक्षा के लिए सामाजिक न्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
संयुक्त राष्ट्र मानता है कि सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय निम्नलिखित के लिए आवश्यक हैं:
- वैश्विक शांति और स्थिरता
- असमानता में कमी
- लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना
- समावेशी वैश्वीकरण सुनिश्चित करना
मानवाधिकारों और समान अवसर के बिना सतत विकास संभव नहीं है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि – समयरेखा
- 1919: ILO संविधान अपनाया गया
- 1944: फिलाडेल्फिया घोषणा
- 1998: कार्यस्थल पर मौलिक सिद्धांतों और अधिकारों की घोषणा
- 2008: ILO सामाजिक न्याय घोषणा
- 2007: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस घोषित किया
यह विकास क्रम दर्शाता है कि सामाजिक न्याय को अंतरराष्ट्रीय विकास के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है।


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